भारत में बीते कुछ वर्षों में हीरे की बिक्री को बढ़ाने के लिए जोर दिया जाता रहा है, लेकिन क्रिसिल द्वारा जारी एक रिपोर्ट से पता चला है कि, भारत में नेचुरल (प्राकृतिक हीरे) उद्योग चालू वित्त वर्ष में उद्योग का राजस्व 14.8-15.2 अरब डॉलर रहने का अनुमान है, जो पिछले साल के स्तर के लगभग बराबर ही है। यह वैश्विक मांग में असमान सुधार को दर्शाता है, हालांकि पिछले 3 वित्त वर्षों में देखी गई गिरावट के रुझान की तुलना में अब स्थिति स्थिर होती दिख रही है।
क्रिसिल रेटिंग्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, इस वित्त वर्ष में भारत का प्राकृतिक हीरा उद्योग व्यापक सुधार के बजाय राजस्व में स्थिरता रहने की उम्मीद है। घरेलू स्तर पर मजबूत मांग निर्यात में आई कमजोरी की भरपाई करने में मदद करेगी। वहीं, लैब में तैयार हीरे (LGDs) शुरुआती स्तर की मांग में बदलाव ला रहे हैं, जबकि प्राकृतिक हीरे अपना आकर्षण बनाए हुए हैं। हालांकि मुनाफे पर दबाव बना रहेगा और कार्यशील पूंजी (वर्किंग कैपिटल) की जरूरतें अधिक रहेंगी, लेकिन आपूर्ति में अनुशासन और समझदारी भरे वित्तीय प्रबंधन से क्रेडिट प्रोफाइल को स्थिर बनाए रखने में मदद मिलने की संभावना है।
इस वित्त वर्ष में घरेलू रेवेन्यू में कितनी वृृद्धि का अनुमान?
वित्त वर्ष 2024 में, घरेलू बाजार का हिस्सा उद्योग के कुल राजस्व में 15 प्रतिशत से भी कम था, लेकिन अब यह कुल बिक्री का लगभग एक-चौथाई हो गया है। इससे कुछ चुनिंदा एक्सपोर्ट बाजारों पर इंडस्ट्री की निर्भरता कम हुई है। संगठित रिटेल के विस्तार, ग्राहकों की बढ़ती मांग और कुछ प्रीमियम उत्पादों की मांग के चलते, इस वित्त वर्ष में घरेलू रेवेन्यू में 12-15 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने का अनुमान है। इसके विपरीत, अमेरिका और चीन जैसे प्रमुख बाजारों में आभूषणों की मांग कम रहने के की वजह से आयात में 5-7 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है और यह लगभग 11.5 अरब डॉलर तक रह सकता है।
लैब-ग्रोन डायमंड्स की अमेरिकी आभूषण बाजार में कितनी मांग?
लैब-ग्रोन डायमंड्स ने अमेरिकी आभूषण बाजार में, खासकर छोटे और शुरुआती स्तर के सेगमेंट में, अपनी मजबूत जगह बना ली है। इसकी वजह इनकी किफायती कीमत और ग्राहकों के बीच बढ़ती स्वीकार्यता है। वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में, निर्यात की मात्रा (वॉल्यूम) में लैब ग्रोन की हिस्सेदारी लगभग 55 प्रतिशत थी, लेकिन निर्यात मूल्य में यह केवल 10.5 प्रतिशत रही। यह आंकड़ा वॉल्यूम-आधारित और मूल्य-आधारित सेगमेंट के बीच के बड़े अंतर को दर्शाता है।
रिपोर्ट कहती है, दूसरी ओर चीन भी चिंता का विषय बना हुआ है, क्योंकि कमजोर कंज्यूमर सेंटिमेंट और सोने की बढ़ती मांग ने हीरे पर असर डाला है। हालांकि प्राकृति हीरे अभी भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। क्रिसिल रेटिंग्स के वरिष्ठ निदेशक राहुल गुहा कहते हैं कि उद्योग की मजबूती वॉल्यूम से अधिक वैल्यू से बढ़ रही है। लैब ग्रोन एंट्री लेवल आभूषणों में जगह बना रहा है, वहीं प्राकृति हीरे प्रीमियम कैटेगरी में मजबूत मांग बनाए हुए हैं। यह अंतर प्राइसिंग ट्रेड्स में साफ तौर पर दिखता है।
मांग में इन बदलावों के बीच बाजार का संतुलन कैसा?
रिपोर्ट कहती है, मांग में इन बदलावों के साथ सप्लाई पर नियंत्रण रखने से बाजार में संतुलन वापस लाने में मदद मिल रही है। कच्चे हीरों की खरीद को नियंत्रित रखने, पूरी वैल्यू चेन में इन्वेंट्री (स्टॉक) को कम रखने और खदान कंपनियों द्वारा उत्पादन को सीमित रखने से, बाजार में मांग कमजोर होने के बावजूद अतिरिक्त सप्लाई पर लगाम लगी है और कीमतों में स्थिरता बनी हुई है।
राजस्व के स्थिर होने कैश फ्लो पर क्या असर?
हालांकि, केवल सप्लाई को नियंत्रित रखने से ही मुनाफे पर पड़ने वाले उन नकारात्मक प्रभावों की पूरी भरपाई नहीं हो पाएगी, जो कम क्षमता के इस्तेमाल (कैपेसिटी यूटिलाइजेशन), बढ़ती प्रतिस्पर्धा और निर्यात की कमजोर मांग के कारण आ रहे हैं। इस वित्त वर्ष में ऑपरेटिंग मार्जिन 40-60 बेसिस पॉइंट घटकर 3.8-4.0 प्रतिशत तक आने की उम्मीद है। वर्किंग कैपिटल की जरूरत भी अधिक बनी रहने की संभावना है, जिसमें ‘डेटर डेज’ (भुगतान मिलने में लगने वाला समय) बढ़कर 90-95 दिन और ‘इन्वेंट्री डेज’ (स्टॉक बिकने में लगने वाला समय) बढ़कर 165-170 दिन होने का अनुमान है।
क्रिसिल रेटिंग्स के एसोसिएट डायरेक्टर, ऋषभ बोरकर कहते हैं, सिर्फ रेवेन्यू (राजस्व) के स्थिर होने से कैश-फ्लो का दबाव कम नहीं होगा। मार्जिन कम होने और वर्किंग कैपिटल के फंसे रहने की स्थिति में, कर्ज चुकाने (डेट सर्विसिंग) को बनाए रखने के लिए लिक्विडिटी मैनेजमेंट और इन्वेंट्री अनुशासन बहुत अहम होंगे। जो कंपनियां इस तरह की वित्तीय समझदारी के साथ-साथ वैल्यू-एडेड बिजनेस पर ज्यादा ध्यान देंगी, वे उभरते हुए विकास के मौकों का फायदा उठाने के लिए बेहतर स्थिति में होंगी।
हीरा उद्योग की स्थिरता के बारे में क्या अनुमान?
इन दबावों के बावजूद, क्रेडिट मेट्रिक्स के स्थिर रहने की उम्मीद है। इस वित्त वर्ष में इंटरेस्ट कवरेज 2.3-2.4 गुना रहने का अनुमान है, जो मोटे तौर पर पिछले वित्त वर्ष के स्तर के बराबर ही है। इसलिए, निकट भविष्य के लिए दृष्टिकोण एक व्यापक उछाल के बजाय स्थिरता का है। बेहतर इन्वेंट्री अनुशासन, सामान्य होती सप्लाई चेन और घरेलू खपत में वृद्धि से यह इंडस्ट्री और अधिक मजबूत स्थिति में आ जाएगी। अगर अमेरिका और चीन से मांग में सुधार होता है, तो इससे राजस्व और मुनाफे में और भी बढ़ोतरी हो सकती है।