बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच ने चुनाव आयोग (ECI) को वोटर लिस्ट से हटाए गए एक परिवार के पांच सदस्यों के नाम दोबारा जोड़ने का आदेश दिया है। कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि एड्रेस की पुष्टि करने के बाद 10 दिन में इन सभी के नाम वोटर लिस्ट में शामिल किए जाएं। कोर्ट ने ECI की आदेश पर रोक लगाने की मांग भी खारिज कर दी। यह मामला गोवा के सालगांवकर परिवार से जुड़ा है। परिवार के सदस्यों ने पता बदलने के लिए फॉर्म 8 भरा था, लेकिन इसके बावजूद स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान उनके नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटा दिए गए। इसके बाद परिवार ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर नाम हटाने और फॉर्म 8 के आवेदन खारिज करने को चुनौती दी थी। फॉर्म 8 के बजाय फॉर्म 6 भरने को कहा सुनवाई के दौरान ECI ने दलील दी कि SIR के नियमों के तहत मतदाताओं को फॉर्म 8 के साथ पहले से भरा हुआ एन्यूमरेशन फॉर्म भी जमा करना जरूरी था। परिवार ने यह फॉर्म जमा नहीं किया था, इसलिए उन्हें नए मतदाता के रूप में नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म 6 भरने को कहा गया। इस पर हाईकोर्ट ने सवाल उठाया कि जब कोई व्यक्ति सिर्फ अपना पता बदलना चाहता है, तो उसे नए मतदाता के रूप में आवेदन करने के लिए क्यों मजबूर किया जा रहा है। कोर्ट ने कहा कि एन्यूमरेशन फॉर्म में पुराने पते पर रहने की घोषणा करनी होती है। ऐसे में घर बदल चुके व्यक्ति से इस पर हस्ताक्षर कराना गलत घोषणा करने के लिए मजबूर करने जैसा है। नाम हटाने से पहले सुनवाई का मौका देना जरूरी जस्टिस वाल्मीकि मेनेजेस और जस्टिस अमित जामसांडेकर की बेंच ने कहा कि किसी मतदाता का नाम सूची से हटाने से पहले उसे अपना पक्ष रखने का मौका देना जरूरी है। सिर्फ तकनीकी कारणों से आवेदन खारिज करना उचित नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा कि जिन लोगों ने वास्तव में अपना निवास बदल लिया है, उनके फॉर्म 8 के आवेदनों को सीधे खारिज करने के बजाय लंबित रखा जा सकता है। इससे वास्तविक मतदाताओं को मतदान के अधिकार से वंचित होने से बचाया जा सकेगा। सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित होने की दलील खारिज ECI ने हाईकोर्ट से सुनवाई टालने की मांग की थी। आयोग का कहना था कि SIR से जुड़े मामले सुप्रीम कोर्ट में भी लंबित हैं। हालांकि, हाईकोर्ट ने कहा कि गोवा का यह मामला अलग है, क्योंकि यहां मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। कोर्ट ने ECI की इस दलील को भी स्वीकार नहीं किया कि ड्राफ्ट सूची में नाम नहीं होना, नाम हटाने के बराबर नहीं है। बेंच ने साफ कहा कि योग्य नागरिकों को मतदाता सूची से बाहर होने से बचाना निर्वाचन आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी है।
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बॉम्बे हाईकोर्ट बोला-नाम हटाने से पहले सुनवाई का मौका दें: गोवा के परिवार के 5 लोगों का नाम वोटर लिस्ट में जोड़ने का आदेश
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