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Kerala Murder Mystery: देश और दुनिया में अपराध से जुड़ी कई ऐसी घटनाएं हैं, जिसने जांच एजेंसियों को नाको चने चबवा दिए. भारत के केरल में ऐसा ही मामला सामने आया है, जो तकरीबन 42 साल बाद फिर से सुर्खियों में आ गया है.
केरल में 42 साल पुरानी हत्या की घटना एक बार फिर से चर्चा में आ गई है. (सांकेतिक तस्वीर)
केरल के सबसे चर्चित और रहस्यमय फरार आरोपियों में शामिल सुकुमार कुरुप को लेकर 42 साल बाद एक बार फिर नया दावा सामने आया है. एक रिटायर्ड पुलिस अधिकारी ने दावा किया है कि कुरुप की मौत नहीं हुई है और वह फर्जी पहचान के साथ ब्रुनेई में रह रहा है. इसके बाद केरल क्राइम ब्रांच ने मामले की जांच करने का फैसला किया है और इंटरपोल से भी जानकारी जुटाने की तैयारी की जा रही है. जांच टीम का हिस्सा रह चुके रिटायर्ड पुलिस अधिकारी अली अकबर ने दावा किया कि सुकुमार कुरुप ब्रुनेई में इंडो-मलेशियाई मूल के व्यक्ति की पहचान के साथ रह रहा है. उन्होंने यह भी दावा किया कि कुरुप विदेश में रह रहे अपनी पत्नी और अन्य रिश्तेदारों के संपर्क में है. अकबर के मुताबिक, फरार आरोपी के प्रभावशाली राजनीतिक नेताओं से भी संबंध बने रहे, जिनकी मदद से वह इतने लंबे समय तक गिरफ्तारी से बचता रहा.
इस घटना की गुत्थी को समझने के लिए फ्लैशबैक में चलते हैं. दरअसल, सुकुमार कुरुप पर अलाप्पुझा के कुट्टीचिरा के रहने वाले चाको की हत्या का मुख्य संदिग्ध होने का आरोप है. 22 जनवरी 1984 को चाको की हत्या कर दी गई थी. जांच के अनुसार, हत्या कथित तौर पर 8 लाख रुपये की जीवन बीमा राशि हड़पने की साजिश का हिस्सा थी. बताया जाता है कि चाको के शव को एक कार में रखकर आग लगा दी गई, ताकि ऐसा लगे कि हादसे में खुद सुकुमार कुरुप की भी मौत हो गई है. बाद में जांचकर्ताओं ने शव की पहचान चाको के रूप में की और कथित बीमा धोखाधड़ी की साजिश का खुलासा हुआ. इसके बाद कुरुप फरार हो गया और आज तक उसका पता नहीं चल पाया. क्राइम ब्रांच ने देश के कई राज्यों में उसकी तलाश की. समय-समय पर अलग-अलग स्थानों पर उसके देखे जाने की खबरें भी सामने आती रहीं, लेकिन कोई भी सुराग उसके वास्तविक ठिकाने तक नहीं पहुंच सका. अब अली अकबर ने अपने दावे के सपोर्ट में मीडिया को एक तस्वीर भी सौंपी है, जिसके बारे में उनका कहना है कि वह सुकुमार कुरुप की है. हालांकि, पुलिस ने अभी इस तस्वीर और अन्य दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है.
ताजा दावे के बाद केरल क्राइम ब्रांच ने मामले की नए सिरे से पड़ताल करने का निर्णय लिया है. क्राइम ब्रांच के प्रमुख एडीजीपी एच. वेंकटेश ने कहा है कि कथित पासपोर्ट, तस्वीर और मोबाइल फोन कनेक्शन से जुड़ी जानकारी हासिल करने के लिए इंटरपोल से संपर्क किया जाएगा. उन्होंने कहा कि अगर नई जानकारी से कोई विश्वसनीय सुराग मिलता है तो विस्तृत जांच शुरू की जाएगी. केरल के गृह मंत्री रमेश चन्निथला ने भी 28 अगस्त को एडीजीपी वेंकटेश को इस दावे की जांच के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि सुकुमार कुरुप के विदेश में छिपे होने से जुड़ी नई जानकारी की जांच की जाएगी, क्योंकि यह मामला वर्षों से क्राइम ब्रांच की जांच के दायरे में है.
दिलचस्प बात यह है कि करीब तीन महीने पहले लंबित मामलों को निपटाने के लिए क्राइम ब्रांच ने इस केस को फिर से खोला था. जांच के दौरान अधिकारियों ने यह संभावना जताई कि कुरुप शायद अब जीवित नहीं है. इसके पीछे उसकी कथित हृदय संबंधी बीमारी को भी एक कारण माना गया. जांच में रत्नम्मा नाम की एक महिला का बयान भी सामने आया था. चेंगन्नूर की रहने वाली रत्नम्मा ने दावा किया था कि उसने 1989 में झारखंड के बोकारो स्थित एक अस्पताल में कुरुप को देखा था. उनके मुताबिक, सीने में दर्द की शिकायत के बाद कुरुप को अस्पताल की आईसीयू में भर्ती कराया गया था. उस समय वह वहां नर्सिंग की छात्रा थीं और उन्होंने उससे बातचीत भी की थी.
इस बयान के आधार पर पुलिस ने संभावना जताई थी कि कुरुप की 1989 के बाद किसी समय मौत हो गई होगी. अगर वह आज भी जीवित है तो उसकी उम्र करीब 83 वर्ष होगी. एजेंसी को अब तक ऐसा कोई ठोस सबूत भी नहीं मिला था, जिससे यह साबित हो कि वह अपनी पत्नी या अन्य रिश्तेदारों के संपर्क में रहा है. ऐसे में अली अकबर का नया दावा 42 साल पुराने इस रहस्य को फिर से सुर्खियों में ले आया है.
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बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…
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