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भागने की फिराक में था सुवेंदु अधिकारी के PA का हत्यारोपी, हरिद्वार से दिल्ली के बीच CBI और यूपी पुलिस ने फिल्मी अंदाज में की गिरफ्तारी


Subhendu PA Murder News: पश्चिम बंगाल के बेहद चर्चित और हाई-प्रोफाइल चंद्रनाथ रथ हत्याकांड में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को कैसे और कितनी मशक्कत के बाद बड़ी कामयाबी मिली, इसकी कहानी किसी फिल्मी थ्रिलर से कम नहीं है. दरअसल, बंगाल में नेता प्रतिपक्ष (और वर्तमान मुख्यमंत्री) सुवेंदु अधिकारी के पीए चंद्रनाथ रथ की हत्या का आरोपी राजकुमार सिंह लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा था. लेकिन मुजफ्फरनगर के छपार टोल प्लाजा पर सीबीआई और उत्तर प्रदेश पुलिस के संयुक्त जाल ने उसके फरारी के सफर का अंत कर दिया. फिलहाल, सीबीआई ने आरोपी राजकुमार को मुजफ्फरनगर की सीजेएम कोर्ट में पेश कर ट्रांजिट रिमांड हासिल कर ली है और उसे लेकर कोलकाता रवाना हो गई है. आइए जानते हैं कि आखिर देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी ने इस शातिर शूटर को कैसे घुटने टेकने पर मजबूर किया.

यूपी के बड़े क्रिमिनल नेक्सस का इनपुट और दिल्ली में रेड
इस ऑपरेशन की शुरुआत तब हुई जब सीबीआई के खुफिया सूत्रों से जानकारी मिली कि चंद्रनाथ रथ की हत्या के पीछे उत्तर प्रदेश और बिहार के शूटरों का एक बड़ा गिरोह काम कर रहा है. जांच आगे बढ़ी तो बलिया के रसड़ा निवासी राजकुमार सिंह का नाम सामने आया. सीबीआई को पुख्ता खबर मिली थी कि राजकुमार सिंह दिल्ली के स्वरूपनगर इलाके में एक घर में छिपा हुआ है. इसके बाद रविवार को सीबीआई और यूपी पुलिस की एक स्पेशल टीम ने उस घर पर अचानक छापेमारी (रेड) कर दी. लेकिन राजकुमार बेहद चालाक निकला, पुलिस के पहुंचने की भनक लगते ही वह ऐन वक्त पर वहां से भाग निकलने में कामयाब रहा.

हरिद्वार में छिपना और मोबाइल टावर लोकेशन का खेल
दिल्ली से भागने के बाद राजकुमार सिंह ने उत्तराखंड का रुख किया और हरिद्वार में जाकर छिप गया. वह जानता था कि दिल्ली में पुलिस उसके पीछे है, इसलिए उसने कुछ समय हरिद्वार में बिताया. लेकिन वह ज्यादा दिन वहां नहीं रुक सकता था. उसने दोबारा दिल्ली के किसी बेहद सुरक्षित और खुफिया ठिकाने पर पनाह लेने की योजना बनाई. यहीं पर राजकुमार सिंह से एक बड़ी चूक हो गई. सीबीआई की टेक्निकल सर्विलांस टीम लगातार उसके मोबाइल फोन और उससे जुड़े नेटवर्क पर नजर रखे हुए थी. जैसे ही राजकुमार ने हरिद्वार से दिल्ली के लिए सफर शुरू किया, उसके मोबाइल का टावर लोकेशन हाईवे पर ट्रेस हो गया. सीबीआई को पता चल गया कि आरोपी हरिद्वार-दिल्ली नेशनल हाईवे के रास्ते गाड़ी से आगे बढ़ रहा है.

छपार टोल प्लाजा पर बिछाया गया ‘डेथ ट्रैप’
आरोपी की पल-पल की लोकेशन मिलने के बाद सीबीआई ने मुजफ्फरनगर पुलिस से संपर्क साधा. मुजफ्फरनगर से करीब 30 किलोमीटर दूर छपार थाना क्षेत्र का टोल प्लाजा इसके लिए सबसे मुफीद जगह चुनी गई. सोमवार तड़के, जब पूरा देश सो रहा था, तब सीबीआई की टीम और छपार थाने की पुलिस सादे कपड़ों में टोल प्लाजा पर डेरा डाले बैठी थी. जैसे ही राजकुमार सिंह की गाड़ी टोल प्लाजा के बैरियर के पास आकर रुकी, पहले से तैयार खड़ी संयुक्त टीम ने उसकी गाड़ी को चारों तरफ से घेर लिया. राजकुमार को संभलने या भागने का मौका तक नहीं मिला और पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया.

जेल का वो कनेक्शन, जिसने राजकुमार को बनाया ‘शार्प शूटर’
सीबीआई की जांच में यह बात भी साफ हो गई है कि आखिर बलिया का यह 21 साल का लड़का बंगाल के इतने बड़े हत्याकांड में शामिल कैसे हुआ. दरअसल, राजकुमार सिंह करीब 3 साल पहले बलिया में ‘हरिजन एक्ट’ (SC/ST Act) के तहत जेल गया था. जेल की सलाखों के पीछे ही उसकी मुलाकात मयंक मिश्रा, राज सिंह और मौर्या विक्की नाम के अपराधियों से हुई. जेल के अंदर ही इन सबने मिलकर एक गैंग बना लिया. इसी पहचान के जरिए राजकुमार का संबंध शार्प शूटर राज सिंह से हुआ (जिसे सीबीआई ने 10 मई को अयोध्या से गिरफ्तार किया था). जेल से छूटने के बाद इसी सिंडिकेट को बंगाल में हत्या की सुपारी दी गई थी.

क्या था पूरा मामला?
यह पूरी वारदात 6 मई की रात को पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना के मध्यमग्राम में हुई थी. विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के महज दो दिन बाद, मोटरसाइकिल पर आए शूटरों ने सुवेंदु अधिकारी के पीए चंद्रनाथ रथ की कार को घेरकर अंधाधुंध फायरिंग कर दी थी. ड्राइवर के बगल वाली सीट पर बैठे चंद्रनाथ को सीने और पेट में तीन गोलियां लगी थीं और मौके पर ही उनकी मौत हो गई थी, जबकि ड्राइवर गंभीर रूप से घायल हुआ था. राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामला होने के कारण इसकी जांच सीबीआई को दी गई थी. हाल ही में हुए चंद्रनाथ के श्राद्ध कर्म में खुद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी शामिल हुए थे और उन्होंने परिवार को आश्वासन दिया था कि सीबीआई जल्द ही सभी हत्यारों को सलाखों के पीछे पहुंचाएगी, जिसकी शुरुआत राजकुमार की गिरफ्तारी से हो चुकी है.

बेटे की करतूतों से बेखबर पिता, कैरेक्टर सर्टिफिकेट भी हो चुका था रिजेक्ट
उधर, बलिया के रतोपुर गांव में राजकुमार के घर पर सन्नाटा पसरा है. उसके पिता त्रिभुवन नारायण सिंह ने बताया कि रविवार दोपहर को दो गाड़ियों से कुछ लोग सादे वेश में आए थे और राजकुमार के बारे में पूछ रहे थे. फिर सोमवार सुबह पौने सात बजे सीबीआई दफ्तर से फोन आया कि आपके बेटे को गिरफ्तार कर लिया गया है. पिता के मुताबिक, राजकुमार इन दिनों अपना ‘कैरेक्टर सर्टिफिकेट’ (चरित्र प्रमाण पत्र) बनवाने के लिए थाने के चक्कर काट रहा था, लेकिन उसके पुराने मुकदमों के कारण पुलिस ने उसे रिजेक्ट कर दिया था.

राजकुमार पर साल 2020 में एक चुनावी रंजिश में प्रधान प्रत्याशी अरविंद खरवार पर जानलेवा हमला करने और गोली चलाने का आरोप है. इसके अलावा 2023 में भी नाली विवाद में मारपीट का एक मामला दर्ज है. फिलहाल, स्थानीय रसड़ा पुलिस का कहना है कि उन्हें इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी की आधिकारिक जानकारी बाद में मिली. सीबीआई अब राजकुमार से यह उगलवाने की कोशिश कर रही है कि इस पूरी हत्या की साजिश का मास्टरमाइंड कौन था.



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