Homeटेक्नोलॉजीमंत्री दीपक प्रकाश के लिए BJP MLC का इस्तीफा: पीछे के...

मंत्री दीपक प्रकाश के लिए BJP MLC का इस्तीफा: पीछे के दरवाजे से विधान परिषद पहुंचे देवेश कुमार; SC ने पूछा था- बिना MLA-MLC दीपक मंत्री कैसे? – Patna News




BJP MLC देवेश कुमार ने शुक्रवार को अपना इस्तीफा दे दिया। माना जा रहा है कि दीपक प्रकाश के मंत्री बने रहने के लिए पार्टी ने उनका इस्तीफा दिलवाया है। अब इस सीट पर चुनाव होगा, जिसपर दीपक प्रकाश कैंडिडेट होंगे। देवेश कुमार के इस्तीफ के लिए बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी, सभापति अवधेश नारायण सिंह और अन्य बीजेपी नेता विधान परिषद पहुंचे। इसके बाद संजय सरावगी ने देवेश कुमार का इस्तीफा सभापति को सौंपा। इस दौरान देवेश कुमार उनके साथ मौजूद थे। हालांकि वो पीछे के दरवाजे से गए और उधर से ही निकल गए। इधर, देवेश कुमार के इस्तीफे के बाद दीपक प्रकाश के पिता उपेंद्र कुशवाहा मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मिलने उनके आवास पहुंचे। वहीं, दरभंगा में दीपक प्रकाश ने मीडिया से बातचीत में कहा कि MLC देवेश कुमार के इस्तीफे की जानकारी नहीं है। मैं पूरे दिन दरभंगा के कार्यक्रमों में व्यस्त हूं। उन्होंने किस उद्देश्य से इस्तीफा दिया है, इसकी भी जानकारी नहीं है। बिना जानकारी के इस पर टिप्पणी करना ठीक नहीं होगा। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने दीपक प्रकाश से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा था- मंत्री दीपक प्रकाश न तो विधानसभा के सदस्य हैं और ना ही विधान परिषद के, लेकिन वो मंत्री के पद पर हैं। देवेश कुमार 17 मार्च 2021 को राज्यपाल मनोनीत कोटे से MLC बने थे। अगले साल मार्च तक उनका कार्यकाल भी पूरा हो रहा है। नियम के अनुसार, मंत्री बने रहने के लिए शपथ लेने के 6 महीने के अंदर विधानमंडल या विधानपरिषद की सदस्यता लेना जरूरी होता है। दीपक प्रकाश अभी तक किसी भी सदन के सदस्य नहीं थे। अगले साल मार्च में खत्म होता देवेश कुमार का कार्यकाल 15 अप्रैल को दीपक प्रकाश का मंत्री पद खत्म हुआ 15 अप्रैल 2026 को नीतीश कुमार के इस्तीफा देने के साथ सरकार समाप्त हो गई। दीपक का मंत्री पद भी खत्म हो गया। इसके बाद करीब 22 दिनों तक वह मंत्री नहीं रहे। 7 मई 2026 को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में नई सरकार बनने पर दीपक प्रकाश को दोबारा मंत्री पद की शपथ दिलाई गई, जबकि तब भी वे विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य नहीं थे। इसी को लेकर विवाद चल रहा है। सुप्रीम कोर्ट का पुराना फैसला इस मामले में याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2001 के एक फैसले का हवाला दिया है। यह मामला एस.आर. चौधरी बनाम पंजाब राज्य से जुड़ा था। उस मामले में पंजाब में एक गैर-विधायक मंत्री छह महीने के भीतर चुनाव नहीं जीत सका था। बाद में सरकार में बदलाव होने पर उसे फिर से मंत्री बना दिया गया। तब सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि संविधान के अनुच्छेद 164(4) के तहत मिलने वाली छह महीने की छूट केवल अस्थायी व्यवस्था है और इसका बार-बार इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया था कि कोई भी सरकार मुख्यमंत्री बदलकर, मंत्रिमंडल का पुनर्गठन करके या इस्तीफा दिलवाकर किसी गैर-विधायक को बार-बार मंत्री नहीं बना सकती। ऐसा करना संविधान की भावना के विपरीत होगा। रोहिणी बोलीं- कुर्सी बचाओ, गठबंधन चलाओ देवेश कुमार के इस्तीफे को लेकर लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्या ने X पर लिखा- न्यायालय की तल्ख टिप्पणी से साख पर बट्टा लगा, तो आनन – फानन में ‘कुर्बानी का बकरा’ ढूंढ निकाला गया। सुप्रीम कोर्ट से ‘कानूनी फटकार’ का प्रसाद मिलते ही भाजपा- एनडीए के बीच जो नैतिकता अचानक जागृत हुई है, वह वाकई काबिले-तारीफ है। उपेंद्र कुशवाहा जी के सुपुत्र को मंत्रिमंडल की मलाईदार सीट पर बरकरार रखने के लिए बीजेपी के एमएलसी देवेश कुमार का इस्तीफा लेना ‘कुर्सी बचाओ, गठबंधन चलाओ’ की नीति का एक नायाब उदाहरण है।



Source link

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -spot_img

Most Popular

Recent Comments