एक तरफ अमेरिका में मंगलवार को मिड टर्म के वोट पड़ने वाले हैं तो दूसरी ओर भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को लगातार चौथे कारोबारी सत्र में जोरदार रिकवरी और बढ़त के साथ बंद हुआ। कच्चे तेल की कीमतों में हालिया उच्च स्तर से आई गिरावट, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में कमी और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की नई खरीदारी के चलते भारतीय बाजार के प्रमुख बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी करीब दो प्रतिशत की मजबूती के साथ बंद हुए। मंगलवार (3 नवंबर 2026) को अमेरिका में हो रहे मिड टर्म इलेक्शन की वोटिंग पर भी भारतीय और वैश्विक बाजारों की नजरें टिकी हुई हैं, जिससे आने वाले दिनों में बाजार की भावी दिशा तय होने की उम्मीद है।
मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में क्या रहे आंकड़े और कौन-से शेयर चमके?
मंगलवार को कारोबार के अंत में 30 शेयरों वाला बीएसई (बीएसई) सेंसेक्स 1,225.07 अंक यानी 1.62 प्रतिशत की छलांग लगाकर दिन के उच्चतम स्तर 76,917.85 पर बंद हुआ। इसी तरह 50 शेयरों वाला एनएसई (एनएसई) निफ्टी 370.05 अंक यानी 1.58 प्रतिशत बढ़कर 23,810.85 के दिन के शिखर पर पहुंचा।
पिछले चार कारोबारी दिनों में सेंसेक्स में कुल 3,671.82 अंक (5 प्रतिशत) की भारी बढ़त दर्ज की गई है, जबकि निफ्टी 1,112 अंक (4.89 प्रतिशत) चढ़ा है।
- बाजार के प्रमुख गेनर्स: हिंदुस्तान यूनिलीवर, भारती एयरटेल, एचडीएफसी बैंक, एशियन पेंट्स, अल्ट्राटेक सीमेंट और आईसीआईसीआई बैंक में सबसे ज्यादा खरीदारी दर्ज की गई।
- पिछड़ने वाले शेयर: पावर ग्रिड, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, एनटीपीसी, टाटा स्टील और ट्रेंट के शेयरों में गिरावट देखी गई।
- विदेशी पूंजी का प्रवाह: एक्सचेंज डेटा के मुताबिक सोमवार को एफआईआई ने 3,114.68 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे, जिसने बाजार में नकदी और निवेशकों का भरोसा बढ़ाया।
शेयर बाजार में लगातार चार दिनों की इस बड़ी रैली के मुख्य कारण क्या हैं?
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के रिसर्च हेड विनोद नायर के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी और एफआईआई की वापसी ने हालिया व्यापक आर्थिक दबावों को कम किया है।
कंपनियों के दूसरी तिमाही (Q2) के मजबूत नतीजों ने भी देश के आर्थिक आउटलुक को मजबूती दी है। लंबे समय तक बिकवाली के बाद विदेशी निवेशकों की दोबारा लिवाली से फाइनेंशियल और कंजप्शन से जुड़े क्षेत्रों में व्यापक भागीदारी देखी गई। इस दौरान ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 0.72 प्रतिशत बढ़कर 105.6 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था।
अमेरिकी चुनावों का भारतीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर क्या असर पड़ सकता है?
3 नवंबर 2026 को अमेरिका में लाखों मतदाता प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों और सेनेट की 35 सीटों के लिए मतदान कर रहे हैं। इसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के लिए पहला राष्ट्रव्यापी जनादेश माना जा रहा है। चुनाव में महंगाई, रहन-सहन की लागत, टैरिफ, आव्रजन और ईरान के साथ युद्ध जैसे मुद्दे हावी हैं।
- संसद का नियंत्रण और नीतियां: यदि रिपब्लिकन या डेमोक्रेट्स में से किसी का नियंत्रण बदलता है, तो ट्रंप की आर्थिक नीतियों, वैश्विक व्यापार, टैरिफ और सरकारी खर्चों पर सीधा असर पड़ेगा।
- कमोडिटी और ब्याज दरों पर प्रभाव: चुनाव नतीजों को लेकर निवेशकों की सतर्कता के चलते मंगलवार को एमसीएक्स पर चांदी वायदा कीमतों में 3 प्रतिशत से ज्यादा (6,168 रुपये) की गिरावट आई और यह 1,77,611 रुपये प्रति किग्रा पर आ गई।
- ब्याज दरों का आउटलुक: कोटक नियो की कमोडिटी रिसर्च हेड कायनात चैनवाला और लेमन के रिसर्च हेड गौरव गर्ग के अनुसार, अमेरिकी चुनाव के नतीजे, ब्याज दरों का परिदृश्य और तकनीकी शेयरों में बिकवाली वैश्विक बाजारों और कीमती धातुओं में अस्थिरता बढ़ा रहे हैं।
भारतीय शेयर बाजार में घरेलू आर्थिक बुनियाद और एफआईआई की वापसी से अल्पकालिक मजबूती आई है। हालांकि, अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के नतीजे वाशिंगटन में सत्ता संतुलन और डोनाल्ड ट्रंप के विधायी एजेंडे को प्रभावित करेंगे, जिसका असर आने वाले सत्रों में वैश्विक लिक्विडिटी, डॉलर, कच्चे तेल और भारतीय इक्विटी बाजारों की चाल पर स्पष्ट रूप से देखने को मिलेगा।