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वर्ष में 125 दिन रोजगार: 1 जुलाई से मनरेगा की जगह ‘VB-G RAM G’ एक्ट, जानें सरकार ने संसदीय समिति को क्या बताया


ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था और रोजगार के मोर्चे पर एक बड़ा ढांचागत बदलाव होने जा रहा है। केंद्र सरकार आगामी 1 जुलाई, 2026 से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को पूरी तरह से निरस्त कर उसकी जगह नया ‘विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ यानी ‘VB-G RAM G’ एक्ट लागू करने के लिए तैयार है। यह नई योजना न केवल रोजगार के दिन बढ़ाएगी, बल्कि सिस्टम की खामियों को दूर कर ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को अधिक पारदर्शी और आधुनिक भी बनाएगी।

बजट और राज्यों की भागीदारी

ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव रोहित कंसल ने हाल ही में संसदीय समिति को जानकारी दी है कि इस नई व्यवस्था के लिए 25 राज्यों ने पहले ही अपने हिस्से का फंड आवंटित कर दिया है। इस पूरी योजना का कुल अनुमानित वार्षिक बजट 1,51,282 करोड़ रुपये तय किया गया है, जिसमें केंद्र सरकार अपनी तरफ से 95,692.31 करोड़ रुपये की हिस्सेदारी वहन करेगी। इस योजना को अब ‘केंद्रीय क्षेत्र की योजना’ से बदलकर ‘केंद्र प्रायोजित ढांचे’ में तब्दील कर दिया गया है, ताकि ग्रामीण परिसंपत्ति निर्माण में राज्यों की जिम्मेदारी भी तय हो सके। 

नई फंडिंग संरचना को राज्यों की क्षमता के अनुसार डिजाइन किया गया है:


  • सामान्य राज्यों और केंद्र के बीच लागत का बंटवारा 60:40 के मानक अनुपात में होगा।

  • पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों के लिए यह अनुपात 90:10 निर्धारित किया गया है।

  • बिना विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेशों में इस योजना का 100 प्रतिशत खर्च केंद्र सरकार उठाएगी।

मजदूरों को क्या नए फायदे मिलेंगे?


  • ज्यादा रोजगार: पुराने 100 दिनों के प्रावधान के बजाय, अब हर ग्रामीण परिवार के वयस्क सदस्यों को एक वित्त वर्ष में 125 दिनों के मजदूरी रोजगार की गारंटी मिलेगी, जिससे उनकी आय सुरक्षा पहले से अधिक मजबूत होगी।

  • स्मार्ट कार्ड और तकनीक: पुराने मनरेगा जॉब कार्ड की जगह अब नए ‘ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड’ (स्मार्ट कार्ड) जारी किए जाएंगे। इन कार्ड्स में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए ‘फेस रिकग्निशन’ (चेहरा पहचानने वाली तकनीक) की विशेष सुविधा होगी।

ग्रामीण आधारभूत ढांचे पर फोकस

इस नए कानून के तहत ग्रामीण विकास को चार मुख्य श्रेणियों में लक्षित किया गया है- जल सुरक्षा परियोजनाएं, प्रमुख ग्रामीण आधारभूत ढांचा (कोर इंफ्रास्ट्रक्चर), आजीविका से जुड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर और चरम मौसम से बचाव के कार्य। अब सभी कार्य ‘विकसित ग्राम पंचायत योजनाओं’ के आधार पर तय होंगे, जो ग्राम पंचायतों द्वारा तैयार किए जाएंगे और जिन्हें सीधे ग्राम सभाओं से मंजूरी मिलेगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि ग्रामीण विकास पूरी तरह से जरूरत-आधारित हो।



सरकार ने साफ किया है कि मनरेगा से इस नई व्यवस्था में बदलाव पूरी तरह से निर्बाध होगा। जो पुराने कार्य अभी चल रहे हैं या अधूरे हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के लिए नई योजना में माइग्रेट (शामिल) कर लिया जाएगा। इसके अलावा, जिन मजदूरों का ई-केवाईसी पूरा हो चुका है, उनके मौजूदा कार्ड नए कार्ड जारी होने तक मान्य रहेंगे। कुल मिलाकर, वीबी-जी राम जी योजना ग्रामीण रोजगार को अधिक जवाबदेह बनाने के साथ-साथ राजकोषीय स्थिरता लाने की दिशा में एक अहम कदम है।



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