Homeटेक्नोलॉजीसुप्रीम कोर्ट बोला- केवल विदेशी होना जमानत रोकने काफी नहीं: कहा-...

सुप्रीम कोर्ट बोला- केवल विदेशी होना जमानत रोकने काफी नहीं: कहा- एंट्री वैध हो तो UAPA के तहत विदेशी को भी बेल मिल सकती है


  • Hindi News
  • National
  • Supreme Court On UAPA Bail: Foreign Nationals Entitled To Relief | India

40 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वैध और अधिकृत तरीके से भारत आए विदेशी नागरिक को UAPA में जमानत दी जा सकती है। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने मद्रास हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रखा।

हाईकोर्ट ने आतंक से जुड़े मामले में एक श्रीलंकाई नागरिक की जमानत रद्द करने का ट्रायल कोर्ट का आदेश खारिज किया था।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि NIA यह साबित नहीं कर सकी कि आरोपी मोहम्मद रिफास उर्फ मोहम्मद रिगबास भारत में अवैध या बिना अनुमति के दाखिल हुआ था। रिकॉर्ड के मुताबिक, वह वैध वीजा पर भारत आया था और वीजा खत्म होने के बाद उसका रहना अवैध हुआ।

बेंच ने कहा कि विदेशी नागरिक को UAPA की धारा 43D(7) के तहत जमानत देने की शर्तें सख्त हैं। फिर भी, अभियोजन पक्ष आरोपी की भारत में शुरुआती एंट्री को अवैध साबित नहीं कर सका।

कोर्ट ने कहा कि NIA ने ऐसा कोई प्रथमदृष्टया सबूत रिकॉर्ड पर नहीं रखा, जिससे आरोपी की एंट्री अनधिकृत या अवैध साबित हो। बाद की FIR में भी कहा गया है कि रिफास वैध वीजा के जरिए भारत आया था।

वीजा की अवधि खत्म होने के बाद उसका भारत में रहना अवैध हो गया था। इस मामले में विदेशी नागरिकों से जुड़े कानून के तहत जरूरी कार्रवाई शुरू की जा चुकी है।

बेंच ने कहा, “उपरोक्त चर्चा के आधार पर हमारा मानना है कि यह अपील मेरिट से रहित है। इसलिए इसे खारिज किया जाता है।”

कोर्ट ने 12 दिसंबर 2023 को मद्रास हाईकोर्ट के क्रिमिनल अपील में दिए आदेश को बरकरार रखा।

UAPA की धारा 43D(7) में तीन शर्तें

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि UAPA की धारा 43D(7) के तहत विदेशी नागरिक को जमानत देने से रोकने के लिए अभियोजन पक्ष को तीन बातें साबित करनी होंगी।

पहली, आरोपी पर UAPA के तहत सजा वाले अपराध का आरोप हो। दूसरी, आरोपी भारतीय नागरिक न हो। तीसरी, उसने भारत में अनधिकृत या अवैध तरीके से प्रवेश किया हो।

कोर्ट ने कहा कि दूसरी और तीसरी शर्तें एक-दूसरे से जुड़ी हैं। इनके बीच ‘और’ शब्द का इस्तेमाल हुआ है। इसलिए, विदेशी नागरिक को जमानत से वंचित करने के लिए दोनों शर्तों का पूरा होना जरूरी है।

कोर्ट ने साफ किया कि केवल आरोपी का विदेशी नागरिक होना जमानत रोकने के लिए पर्याप्त नहीं है। यह भी साबित करना होगा कि उसने भारत में शुरुआत में अवैध या बिना अनुमति के प्रवेश किया था।

रिफास पर क्या आरोप थे

रिफास को धार्मिक समुदायों के बीच तनाव पैदा करने और सरकार के खिलाफ साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

NIA ने आरोप लगाया था कि वह श्रीलंकाई नागरिक है। वह 2009 में भारत आया था और वीजा खत्म होने के बाद भी यहां रहा।

जांच एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया था कि उसने भारतीय पहचान से जुड़े दस्तावेज हासिल किए। इनमें वोटर ID कार्ड, आधार कार्ड और राशन कार्ड शामिल थे। उसने शादी भी कर ली थी।

ट्रायल कोर्ट ने जांच एजेंसी की ओर से तय समय में चार्जशीट दाखिल नहीं करने पर जुलाई 2018 में उसे डिफॉल्ट जमानत दी थी।

इसके बाद केंद्र सरकार ने ट्रायल कोर्ट में जमानत रद्द करने की मांग की। सरकार का आरोप था कि आरोपी ने अपनी श्रीलंकाई नागरिकता छिपाई थी। ट्रायल कोर्ट ने उसकी जमानत रद्द कर दी।

हालांकि, दिसंबर 2023 में मद्रास हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द कर दिया। इसके बाद केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

जमानत से जुड़े अपवाद पर भी टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि UAPA के तहत विदेशी नागरिक को जमानत दी जा सकती है। हालांकि, यह तभी संभव नहीं होगा, जब “बहुत असाधारण परिस्थितियां” हों और उनके कारण लिखित रूप में दर्ज किए जाएं।

कोर्ट ने कहा कि इस प्रावधान से साफ है कि ऊपर बताई गई तीनों शर्तें पूरी होने पर भी जमानत का अपवाद बनाया जा सकता है। लेकिन इसके लिए बहुत ऊंची कसौटी तय की गई है।

इस कसौटी में “बहुत असाधारण परिस्थितियां” और “लिखित रूप में दर्ज किए गए कारण” शामिल हैं।

जमानत रद्द करने की अदालत की शक्ति

ट्रायल कोर्ट की ओर से जमानत रद्द करने के अधिकार पर बेंच ने कहा कि अदालतों के पास जमानत रद्द करने की अंतर्निहित शक्ति होती है।

कोर्ट ने कहा कि पहले वह यह स्पष्ट कर चुका है कि नई परिस्थितियां सामने न आने पर भी अदालतें कुछ मामलों में जमानत पर विचार कर सकती हैं।

हालांकि, ऐसी शक्ति का इस्तेमाल ठोस तर्क के आधार पर होना चाहिए। इसे मनमाने ढंग से नहीं, बल्कि सावधानी से इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

बेंच ने कहा कि मामला व्यक्ति की आजादी से जुड़ा है। अभियोजन पक्ष इस आजादी के साथ तब तक खिलवाड़ नहीं कर सकता, जब तक निष्पक्ष सुनवाई को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचने की आशंका न हो।



Source link

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -spot_img

Most Popular

Recent Comments