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सेना के अफसरों पर नजर, पाक भेजे 8 सिम कार्ड; स्लीपर सेल की मदद; ISI के जासूस कपल के और क्या कांड, Ncr Hindi News


दिल्ली से पकड़े गए आईएसआई का जासूस वर्ष 2024 से सोशल मीडिया के जरिये पाक की खुफिया एजेंसी के संपर्क में थे। दोनों ही युवाओं की भर्ती करते थे साहिल की साल 2022 में रिश्तेदार के घर पर समीरा से मुलाकात हुई थी।

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए जासूसी और युवाओं की भर्ती करने के आरोप में एक दंपती को गिरफ्तार किया है। दोनों को सराय काले खां इलाके से पकड़ा गया है। पुलिस ने इनके कब्जे से दो मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं। इनमें पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी से संपर्क के पुख्ता सुबूत मिले हैं।

स्पेशल सेल के डीसीपी नरा चैतन्य ने शुक्रवार को बताया कि दिल्ली पुलिस आतंकी संगठनों के स्लीपर सेल और सक्रिय रूप से काम कर रहे सदस्यों की तलाश में जुटी थी। पुलिस इन्हें मदद मुहैया कराने वालों के बारे में भी जानकारी जुटा रही थी। इसी दौरान स्पेशल सेल को दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय आईएसआई समर्थित पाकिस्तानी खुफिया अधिकारियों के नेटवर्क की जानकारी मिली। जब इस सूचना के आधार पर जानकारी जुटाई गई, तो मालूम हुआ कि आईएसआई ने स्थानीय लोगों को आतंकी संगठनों को सहायता मुहैया करने के लिए भर्ती किया है। ये लोग भारतीय सिम कार्ड पाकिस्तान भेजते हैं। इन नंबरों से वॉट्सऐप सक्रिय कर भारत की खुफिया जानकारियां जुटाई जाती हैं।

डीसीपी ने बताया कि इस जानकारी के आधार पर जुलाई में सराय काले खां से 26 वर्षीय साहिल और उसकी पत्नी समीरा को गिरफ्तार किया गया। इनके कब्जे से मिले दो मोबाइल फोन से पुलिस को काफी सबूत मिले हैं। पुलिस अब पकड़े गए आरोपियों से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है। पुलिस दंपति के मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच करा कर डिलीट किए गए चैट और वीडियो-फोटो को रिकवर करने का प्रयास कर रही है। जल्द कुछ और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।

आठ सिम कार्ड दुबई के रास्ते पाकिस्तान भेजे

पूछताछ में साहिल ने बताया कि वह 2022 में समीरा से मिला था। इसके बाद दोनों ने शादी कर ली थी। समीरा के माध्यम से इंस्टाग्राम पर 2024 में उसकी मुलाकात पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के अधिकारियों से हुई थी। पाकिस्तानी अधिकारियों ने दंपती से भारतीय सिमकार्ड मुहैया कराने को कहा था। इन्होंने आठ सिम कार्ड दुबई के रास्ते पाकिस्तान भेजे थे।

भारतीय सिमकार्ड के जरिये वॉट्सऐप ग्रुप से जुड़ते थे

दंपती ने पूछताछ के दौरान बताया कि उनके द्वारा भेजे गए सिम कार्ड पर वॉट्सऐप सक्रिय कर पाकिस्तान में बैठे आतंकी भारतीय वॉट्सऐप ग्रुप से जुड़ जाते थे। फिर जासूसी के लिए युवाओं की भर्ती करते और गोपनीय सूचनाएं जुटाते थे। युवाओं को बरगलाने के लिए कई फर्जी वीडियो और संदेश भी इन ग्रुपों में जुड़े लोगों को भेजे जाते थे।

सैन्य छावनियों के साथ अधिकारियों पर थी नजर

साहिल और समीरा पर आईएसआई के लिए सूचना मुहैया कराने वालों की भर्ती करने की जिम्मेदारी थी। इसके अलावा दंपती को सैन्य छावनियों की जानकारी भेजने के लिए कहा गया था। इसके अलावा जिन अधिकारियों का कोर्ट मार्शल लंबित था, उनकी जानकारी भी जुटानी थी। इसके अलावा दंपती स्लीपर सेल की मदद करते थे।

यूपी के बदायूं-फिरोजाबाद रहने वाले हैं दोनों

साहिल मूलरूप से बदायूं का रहने वाला है। उसके पिता 1982 में दिल्ली में आकर सराय काले खां में रहने लगे थे। यहीं पर वर्ष 2000 में साहिल का जन्म हुआ था। वर्ष 2022 में उसकी मुलाकात रिश्तेदार के घर पर समीरा से हुई थी। समीरा का परिवार यूपी के फिरोजाबाद से आकर शकूरपुर में रहता है। समीरा कॉल सेंटर में काम करने लगी थी।



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