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हिरासत में मौत के मामले में 9 पुलिसकर्मियों को उम्रकैद: 15 साल पुराने मामले में महाराष्ट्र की कोर्ट ने सुनाई सजा, CID ने की थी जांच


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मुंबई2 घंटे पहले

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महाराष्ट्र के वाशिम जिले की एक अदालत ने 2011 के हिरासत में मौत के मामले में नौ पुलिसकर्मियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जे. पी. झापटे ने तत्कालीन रिसोड पुलिस थाने के प्रभारी माधव धांडे समेत 9 पुलिसकर्मियों को विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया।

यह मामला भेग्या पवार नाम के एक युवक की मौत से जुड़ा है। पवार को चोरी से जुड़े एक मामले में पूछताछ के लिए रिसोड पुलिस ने हिरासत में लिया था। हिरासत में ही उसकी मौत हो गई थी। मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया था कि पुलिस ने हिरासत में उनके साथ यातनाएं दी थीं। इसके बाद मामले की जांच राज्य की अपराध जांच विभाग (CID) को सौंप दी गई थी।

अदालत ने तत्कालीन थाना प्रभारी माधव धांडे के अलावा मदन पवार, शिवाजी खिल्लारी, पंजाब पाटकर, रमेश पवार, प्रकाश तराम, नागोराव खांडके, अशोक वैद्य और वसंत जाधव को दोषी करार दिया। सभी को भारतीय दंड संहिता (IPC) और दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की विभिन्न धाराओं के तहत सजा सुनाई गई।

बेग्या पवार, जिसकी पुलिस हिरासत में मौत हो गई थी।

बेग्या पवार, जिसकी पुलिस हिरासत में मौत हो गई थी।

जांच एजेंसी ने 34 दिनों में की जांच पूरी

इस मामले की जांच सीआईडी ने की थी. जांच एजेंसी ने महज 34 दिनों में जांच पूरी कर पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या और एससी एसटी कानून के तहत भी मामला दर्ज किया था. अदालत में सरकारी पक्ष ने सबूतों और गवाहों के आधार पर यह साबित करने की कोशिश की कि हिरासत में हुई मौत कोई सामान्य घटना नहीं थी, बल्कि कथित तौर पर पुलिस की हिंसा का परिणाम थी।

मृतक का नहीं था कोई आपराध‍िक र‍िकॉर्ड

सरकारी वकील श्रीराम नारायणराव ने कोर्ट को बताया क‍ि बेग्या पवार का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था और किसी व्यक्ति का अपराध साबित होने से पहले पुलिस को उसे प्रताड़ित करने या कानून अपने हाथ में लेने का कोई अधिकार नहीं था। अदालत ने भी माना कि पुलिस हिरासत में किसी नागरिक के साथ अमानवीय व्यवहार और हिंसा लोकतांत्रिक व्यवस्था पर गंभीर चोट है। इसी आधार पर सभी आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई गई।

मृतक युवक का माता-पिता, जिन्हें इंसाफ के लिए 15 साल का लंबा इंतजार करना पड़ा।

मृतक युवक का माता-पिता, जिन्हें इंसाफ के लिए 15 साल का लंबा इंतजार करना पड़ा।

मेडिकल रिपोर्ट में शरीर की कई हड्डियां टूटी निकली थीं

माता-पिता ने दर्ज शिकायत में बताया था कि पुलिस का कहना था कि वो उसे सिर्फ पूछताछ के लिए ले जा रहे हैं। लेकिन स्टेशन ले जाने के बाद पुलिसकर्मियों ने बेग्या पवार की बेरहमी से पिटाई की, जिसके कारण कस्टडी में ही उसकी मौत हो गई।

बाद में जब भेग्या की मेडिकल जांच हुई, तो रिपोर्ट में उसके शरीर की कई हड्डियां टूटने की बात सामने आई थी। युवक का ताल्लुक पारधी समाज से था और इसके विरोध में भारी प्रदर्शन और मार्च निकाले गए थे।

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