ट्रैवल के दौरान आप अपने लिए एक अच्छे से 3 या 5 स्टार होटल में कमरा बुक करते हैं. बुक करने के बाद आप होटल सुबह पहुंच जाते हैं, लेकिन वहां जाकर पता चलता है कि आपको कमरा तो 12 बजे मिलेगा. इतनी देर आपको इंतजार करना पड़ जाता है. आखिर ऐसा होटल वाले क्यों करते हैं? आखिर क्यों चेक-इन का समय 12 बजे और चेक आउट का समय सुबह 10 बजे होता है? जानिए इसके पीछे की ये बड़ी वजह…
दोपहर 12 बजे ही होटल में चेक-इन का समय क्यों होता है?
चाहे 3 स्टार होटल हो या 5 स्टार या कोई सामान्य सा होटल, सभी के अपने नियम-कानून होते हैं. आपने गौर किया होगा कि जब भी आप होटल में ठहरने के लिए जाते हैं तो आपको चेक-इन का समय दोपहर 12 से 2 बजे दिन में बताया जाता है. काफी लोगों को लगता है कि ये भी कोई रूल है, लेकिन इसके पीछे कुछ और भी कारण हैं.
काफी लोग तो 8-9 बजे सुबह ही अपनी यात्रा समाप्त कर होटल पहुंचते हैं, लेकिन वहां जाकर पता चलता है कि चेक-इन तो आप 12 बजे के बाद ही कर सकते हैं. इससे काफी लोगों की होटल स्टाफ से बहस भी हो जाती है. लेकिन, ऐसा कस्टमर को असुविधा या परेशान करने के लिए नहीं किया जाता है, बल्कि ग्राहकों की भलाई के लिए ही है.
दरअसल, होटल में चेक-इन का समय 12 बजे इसलिए निर्धारित किया गया है, ताकि टाइम मैनेजमेंट हो सके. दरअसल, जिस कमरे को आपने बुक किया है, उसमें ठहरे कस्टमर भी सुबह के समय कमरा खाली करके जाते हैं यानी चेक-आउट करते हैं. उस दौरान वो कमरा अस्त-व्यस्त, गंदा रहता है. इसके लिए होटल स्टाफ को रूम की सफाई करने के लिए समय चाहिए होता है.
कमरों की सफाई और तैयारी के लिए चाहिए समय
नए कस्टमर के लिए होटल के कमरे को साफ-सुथरा, सुंदर, सुव्यवस्थित बनाने की जरूरत होती है. इस काम के लिए कम से कम 3-4 घंटे का समय चाहिए. इस चेक-आउट और चेक-इन के बीच के सीमित समय में ही कमरे की सफाई की जानी होती है. बेड शीट, पिलो कवर बदलना, क्लीनिंग, डस्टिंग करना, बाथरूम, टॉयलेट को साफ करके कीटाणुरहित बनाना आदि कार्य किए जाने होते हैं.
जैसे ही कस्टमर कमरा खाली करके जाता है, होटल के कर्मचारी सफाई कार्य में जुट जाते हैं. वहां दोबारा से सबकुछ फ्रेश, नई चीजें रख देते हैं. ये फिक्स समय होटल स्टाफ के लिए मैनेजमेंट को आसान बना देती है.
एक होटल में कई कमरे होते हैं. हर समय नए कस्टमर आते हैं और जाते हैं. प्रत्येक अतिथि अलग-अलग समय पर आते-जाते हैं. ऐसे में हाउसकीपिंग और फ्रंट डेस्क कर्मचारियों को यह समझने में परेशानी हो सकती है कि कौन से कमरे खाली हैं और किन कमरों की सफाई करनी है. ऐसे में एक ही समय निर्धारित करके, कर्मचारी पहले से योजना बना सकते हैं कि किन कमरों को कब तैयार करना है. इससे बिना किसी तनाव और कंफ्यूजन के वे अपनी जिम्मेदारियों को पूरा कर सकते हैं.
इन सभी मैनेजमेंट नियमों को ध्यान में रखते हुए, इंटरनेशनल हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री ने दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक चेक-इन समय को उद्योग मानक (Industry standard) बना दिया है. ऐसा नहीं कि ये नियम सिर्फ भारत में ही लागू है, ये आपको लंदन, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया आदि देशों में भी देखने को मिल जाएगा. यह अंतरराष्ट्रीय मानक सभी पर्यटकों को यह जानकारी देता है कि होटल पहुंचने पर किस समय कमरा मिलेगा.
बुकिंग सिस्टम को आसान बनाता है यह नियम
होटल इंडस्ट्री में एक रात की बुकिंग को आमतौर पर दोपहर से अगले दिन दोपहर तक माना जाता है. इससे कमरों की उपलब्धता का रिकॉर्ड रखना आसान हो जाता है. इस तरह डबल बुकिंग जैसी समस्याएं कम होती हैं.
आप यदि जल्दी पहुंच रहे हों तो आप होटल बुक करते समय ही होटल मैनेजमेंट को बता दें कि आप जल्दी पहुंचेंगे. इसके लिए आप अर्ली चेक-इन के लिए रिक्वेस्ट कर सकते हैं. कुछ होटल कमरा खाली होने पर कस्टमर को अर्ली चेक-इन (Early Check-in) करने देते हैं. हालांकि, इसके लिए वे एक्स्ट्रा चार्ज भी कर सकते हैं. अगर कमरा उपलब्ध नहीं होगा तो फिर होटल कर्मचारी प्रवेश देने से मना कर सकते हैं.
क्या हर होटल का समय एक जैसा होता है?
सभी होटल के नियम अलग-अलग हो सकते हैं.
बिजनेस होटल: यहां दोपहर 12 बजे या 2 बजे चेक-इन का समय होता है.
रिसॉर्ट्स: इसमें आप दोपहर 2 बजे से 3 बजे के बीच चेक-इन कर सकते हैं.
सुबह पहुंच जाएं तो क्या करें?
-यदि आप जल्दी पहुंचने वाले हों तो आप होटल को पहले से ही अर्ली चेक-इन के लिए रिक्वेस्ट कर सकते हैं.
-यदि आप जल्दी होटल पहुंच जाएं तो लॉबी एरिया में रुक सकते हैं. बैगेज स्टोरेज सुविधा का उपयोग कर सकते हैं.
-कमरे उपलब्ध न होने पर आप आसपास ही कुछ देर के लिए बाहर घूम आ सकते हैं. इससे समय भी बर्बाद नहीं होगा.
– कुछ होटल बिना अतिरिक्त शुल्क के भी जल्दी चेक-इन दे देते हैं.



