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होर्मुज से भारत के लिए अच्छी खबर: उर्वरक से लदे 15 जहाज सुरक्षित निकले, भारत ने कैसे संभाली सप्लाई चेन?


पश्चिम एशिया में तनाव के बीच भारत के लिए बड़ी राहत की खबर है। उर्वरक और उसके कच्चे माल से लदे 15 जहाज सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं। सरकार का कहना है कि इससे देश में उर्वरक का भंडार मजबूत होगा। साथ ही सभी यूरिया संयंत्र अब 100 प्रतिशत क्षमता के साथ काम कर रहे हैं, जिससे घरेलू उत्पादन भी बढ़ा है। इन 15 जहाजों में से आठ जहाजों में 3.32 लाख मीट्रिक टन (LMT) यूरिया, चार जहाजों में 2.57 LMT DAP और तीन जहाजों में 1.11 LMT सल्फर लदा हुआ है।

भारत कब पहुंचेंगे बाकी पांच जहाज?

इसके अलावा, पांच और जहाज भारत आने वाले हैं। इनमें एक जहाज में 0.25 LMT अमोनिया और दूसरे में 0.45 LMT यूरिया है। दो अन्य जहाजों में यूरिया की लोडिंग जारी है, जबकि एक जहाज में सल्फर लादा जा रहा है। सरकार को उम्मीद है कि ये सभी जहाज भी तय समय पर भारत पहुंचेंगे। इनके आने से देश का उर्वरक भंडार और अधिक मजबूत होगा।

क्या सभी यूरिया संयंत्र अब पूरी क्षमता से काम कर रहे हैं?

बयान में कहा गया है कि देश के उर्वरक संयंत्रों को मिलने वाली प्राकृतिक गैस की आपूर्ति, जो कुछ समय के लिए घटकर लगभग 65 प्रतिशत रह गई थी, अब पूरी तरह बहाल होकर 100 प्रतिशत हो गई है। इसके परिणामस्वरूप देशभर के सभी यूरिया संयंत्र अपनी पूर्ण क्षमता के साथ उत्पादन कर रहे हैं, जिससे घरेलू उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

संकट के बीच सरकार ने कैसे संभाली सप्लाई चेन?

पश्चिम एशिया में हालिया संघर्ष के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात प्रभावित होने के बावजूद सरकार ने समय रहते योजना, बेहतर समन्वय और लगातार निगरानी के जरिये उर्वरकों की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित की। सरकार ने कूटनीतिक और रणनीतिक प्रयासों के माध्यम से कई नए देशों से भी उर्वरकों की आपूर्ति सुनिश्चित की, जिससे भारत की सप्लाई चेन और मजबूत हुई।

28 भारतीय मिशनों ने क्या भूमिका निभाई?

बयान के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया में विदेशों में स्थित 28 भारतीय मिशनों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन मिशनों ने संभावित उत्पादकों और आपूर्तिकर्ताओं से संपर्क स्थापित करने में मदद की और उर्वरक विभाग को समय पर आपूर्ति सुनिश्चित कराने में सक्रिय सहयोग दिया।

किन देशों से हो रही है उर्वरक की आपूर्ति?

यूरिया की आपूर्ति के लिए ओमान, मलेशिया, वियतनाम, जॉर्जिया, नाइजीरिया, रूस, फिनलैंड, मिस्र, अल्जीरिया, तुर्किये और नीदरलैंड से सफलतापूर्वक व्यवस्था की गई है। वहीं DAP और NPK उर्वरकों की आपूर्ति रूस, मोरक्को, मिस्र, अमेरिका, जॉर्डन, दक्षिण कोरिया, ट्यूनीशिया और सऊदी अरब से लाल सागर समुद्री मार्ग के जरिये सुनिश्चित की गई है।

वैश्विक संकट पर जेपी नड्डा ने क्या कहा?

केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा ने कहा, ‘पश्चिम एशिया में शुरू हुए संघर्ष ने वैश्विक सप्लाई चेन को गंभीर रूप से प्रभावित किया। उर्वरकों की कीमतों में तेज बढोतरी हुई और शिपमेंट में लगने वाला समय भी काफी बढ गया। भारत भी इस वैश्विक संकट से अछूता नहीं रहा, जिससे उर्वरक के कच्चे माल और तैयार उर्वरकों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण हो गया। हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में भारत सरकार शुरू से ही सतर्क और पूरी तरह तैयार रही।’ 

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किसानों को लेकर सरकार का क्या दावा है?

जेपी नड्डा ने कहा, ‘भारतीय किसानों को समय पर, पर्याप्त मात्रा में और किफायती दरों पर उर्वरक उपलब्ध कराए जा रहे हैं। वैश्विक स्तर पर बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद हमारी सरकार ने किसानों के हितों की पूरी तरह रक्षा की है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरकों की कीमतों में भारी बढोतरी के बावजूद भारत सरकार ने किसानों के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।’ 



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