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Kota Student Rape Case : कोटा के ग्रामीण इलाके में 12 साल की छात्रा से गैंगरेप का मामला सामने आया है. मामला इतना गंभीर और संगीन है कि इसमें महिला टीचर और कोचिंग संचालिका पर भी कई तरह के आरोप हैं. परिजन पुलिस की धीमी कार्रवाई से नाराज काफी नाराज है. पुलिस की टीम पूरे मामले की जांच कर रही है. बताया जा रहा है कि छात्रा को कोचिंग संस्थान के बाहर से बहला-फुसलाकर ले जाया गया. इसके बाद उसका अपहरण किया गया और फिर सुनसान जगह पर दो युवकों ने इस वारदात को अंजाम दिया.
कोटा में 12 साल की छात्रा से गैंगरेप, महिला टीचर पर भी आरोप
कोटा. शहर की कोचिंग पहचान के बीच एक बेहद परेशान करने वाली घटना सामने आई है. यहां ग्रामीण इलाके में 12 साल की एक स्कूली छात्रा के साथ गैंगरेप का मामला सामने आया है. घटना ने पूरे इलाके में बेचैनी फैला दी है. परिजनों की हालत खराब है और वे लगातार इंसाफ की मांग कर रहे हैं. मामला जितना सामने आया है, उसमें कई परतें नजर आ रही हैं, जिनकी जांच अभी बाकी है.
बताया जा रहा है कि छात्रा को कोचिंग संस्थान के बाहर से बहला-फुसलाकर ले जाया गया. इसके बाद उसका अपहरण किया गया और फिर सुनसान जगह पर दो युवकों ने इस वारदात को अंजाम दिया. पुलिस ने पीड़िता का मेडिकल करवाया है और अब जांच आगे बढ़ाई जा रही है. लेकिन परिवार का कहना है कि पुलिस की कार्रवाई अब तक संतोषजनक नहीं है.
महिला टीचर और कोचिंग से जुड़ा नाम, सवाल बढ़े
इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि पीड़िता ने एक महिला टीचर पर गंभीर आरोप लगाए हैं. आरोप है कि वह लड़कियों को फंसाने और फिर उन्हें लड़कों के हवाले करने में शामिल हो सकती है. यह आरोप अभी जांच के दायरे में है, लेकिन इससे मामला और ज्यादा गंभीर हो गया है.
सिर्फ यही नहीं, जिस कोचिंग संस्थान के बाहर से छात्रा को उठाया गया, उसकी संचालिका महिला की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं. पुलिस इस एंगल को भी जांच में शामिल कर रही है. फिलहाल साफ तौर पर कुछ कहना जल्दबाजी होगा, लेकिन जिस तरह के आरोप सामने आए हैं, उसने पूरे मामले को और उलझा दिया है.
परिजनों का गुस्सा, पुलिस पर सवाल
पीड़िता के परिजनों का कहना है कि शुरुआत में पुलिस ने उतनी तेजी नहीं दिखाई, जितनी ऐसे मामले में होनी चाहिए थी. उनका आरोप है कि कार्रवाई में ढिलाई बरती गई. अब जब मामला सामने आया और चर्चा बढ़ी, तब जाकर जांच में तेजी आई है. रामगंजमंडी थाना पुलिस इस पूरे मामले की जांच कर रही है. पुलिस का कहना है कि हर एंगल से जांच की जा रही है और जो भी दोषी होगा, उसे छोड़ा नहीं जाएगा. लेकिन परिवार को अभी भी इंतजार है कि उन्हें साफ और सख्त कार्रवाई दिखे.
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर व्यवस्था कितनी मजबूत है. खासकर ऐसे शहर में, जहां रोजाना हजारों छात्र पढ़ने आते हैं, वहां इस तरह की घटना लोगों को अंदर तक हिला देती है.
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नाम है आनंद पाण्डेय. सिद्धार्थनगर की मिट्टी में पले-बढ़े. पढ़ाई-लिखाई की नींव जवाहर नवोदय विद्यालय में रखी, फिर लखनऊ में आकर हिंदी और पॉलीटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया. लेकिन ज्ञान की भूख यहीं शांत नहीं हुई. कल…और पढ़ें



