भारतीय शेयर बाजार तीन दिन की तेजी के बाद आज गिरावट के साथ बंद हुआ। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का सूचकांक- सेंसेक्स 756.84 अंक गिरकर 78,516.49 पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह 831.03 अंक तक गिरा था। 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 198.50 अंक की गिरावट के साथ 24,378.10 पर बंद हुआ। जानकारों के मुताबिक विदेशी फंडों की निकासी और पश्चिम एशिया में अस्थिरता के कारण निवेशकों में डर का माहौल देखा गया।
एचसीएल टेक के शेयरों में सबसे ज्यादा 10.85 फीसदी की गिरावट आई। मार्च तिमाही के नतीजों से निवेशकों को खुशी नहीं मिली। कंपनी का शुद्ध लाभ 4,488 करोड़ रुपये रहा। इंफोसिस, महिंद्रा एंड महिंद्रा, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), टेक महिंद्रा और आईसीआईसीआई बैंक भी प्रमुख नुकसान में रहे। बुधवार को लाभ यानी हरे निशान पर रहने वाले शेयरों में हिंदुस्तान यूनिलीवर, एनटीपीसी, इटरनल और ट्रेंट प्रमुख रहे।
रुपया लगातार तीसरे दिन कमजोर, 39 पैसे गिरकर 93.83 पर बंद
बुधवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया भी कमजोर हुआ। कारोबार खत्म होने के समय रुपया 39 पैसे गिरकर 93.83 (अनंतिम) पर बंद हुआ। विदेशी मुद्रा व्यापारियों ने बताया कि घरेलू इक्विटी बाजारों में तीव्र बिकवाली भी हुई। विदेशी पूंजी निकासी के कारण भी भारतीय मुद्रा कमजोर हुई। दिन के कारोबार के दौरान रुपया 93.87 के निचले स्तर तक भी पहुंचा। 23 मार्च को पहली बार रुपया 94 के स्तर तक भी पहुंचा था। मंगलवार को रुपया 28 पैसे गिरकर 93.44 पर बंद हुआ था। सोमवार को भी रुपया 25 पैसे फिसला था।
मीराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक अनुज चौधरी के मुताबिक कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि और अमेरिका-ईरान वार्ता पर मंडरा रहे अनिश्चितता के बादल रुपये की गिरावट के प्रमुख कारण रहे। विश्लेषकों के मुताबिक बुधवार को होर्मुज में दो जहाजों पर हमले से चिंता और गहराने लगी है।
रुपये का भविष्य और वैश्विक बाजार
अनुज चौधरी ने कहा कि विदेशी संस्थागत निवेशक लगातार भारतीय शेयर बाजार से पैसे निकाल रहे हैं। दबाव के बीच रुपये में नकारात्मक रुझान बने रहने की उम्मीद है। हालांकि, अमेरिकी डॉलर के नरम होने से रुपये में तेज गिरावट रुक सकती है। बुधवार को वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 1.29 फीसदी बढ़कर 99.75 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।
कच्चे तेल की कीमतें और भू-राजनीतिक तनाव
एनरिच मनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पोनमुडी आर के मुताबिक पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के कारण शेयर बाजार पर गहरा असर दिख रहा है। गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने के कारण ऊर्जा बाजार में कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। लाइवलॉन्ग वेल्थ के शोध विश्लेषक हरिप्रसाद के ने भू-राजनीतिक अनिश्चितता को कमजोरी का मुख्य कारण बताया। अमेरिका-ईरान शांति वार्ता से जुड़े संशयों के बीच अस्थिरता गहराने की आशंका है।
विदेशी निवेश और वैश्विक बाजार
विदेशी संस्थागत निवेशकों ने मंगलवार 21 अप्रैल 2026 को 1,918.99 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कोस्पी, जापान का निक्केई 225 और शंघाई का एसएसई कंपोजिट सूचकांक तेजी के साथ बंद हुए। हालांकि, हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक गिरावट के साथ समाप्त हुआ। यूरोप के बाजार मिश्रित रुख के साथ कारोबार कर रहे थे। अमेरिका के बाजार मंगलवार 21 अप्रैल 2026 को गिरावट के साथ बंद हुए थे।



