अमेरिकी टेक कंपनी एपल और भारत की निगरानी संस्था सीसीआई (भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग) के बीच टकराव अब और तेज हो गया है। यह मामला अब अदालत की चौखट तक पहुंच गया है। एपल ने साफ आरोप लगाया है कि सीसीआई एंटीट्रस्ट (प्रतिस्पर्धा) मामले में उसकी वित्तीय (पैसों से जुड़ी) जानकारी मांगकर अपने अधिकारों की सीमा पार कर रही है।
कंपनी ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की है। इस याचिका में कहा गया है कि सीसीआई का इस तरह से मामले की सुनवाई करना न्यायालय के अधिकारों का सीधा अतिक्रमण (उल्लंघन) है। कंपनी ने अदालत से गुहार लगाई है कि वह इस मामले में हस्तक्षेप करे और सीसीआई की कार्यवाही पर रोक लगाए। एपल ने इस मामले में 15 मई को जल्द सुनवाई करने की मांग भी की है।
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सीसीआई ने एपल से कौन सी अहम जानकारी मांगी है?
- सीसीआई ने साल 2024 से एपल कंपनी से उसके वित्तीय विवरण (पैसों का हिसाब-किताब) मांगे हैं।
- यह जानकारी इसलिए मांगी गई है ताकि सीसीआई संभावित जुर्माने की सही गणना (हिसाब) कर सके।
- एपल पर आरोप है कि वह आईफोन के ऐप बाजार में अपने दबदबे और ताकत का गलत इस्तेमाल कर रही है।
जुर्माने को लेकर एपल की अदालत में क्या दलील है?
एपल का स्पष्ट कहना है कि उसने जुर्माना तय करने वाले कानून को ही अदालत में चुनौती दे रखी है। कंपनी की दलील है कि जब तक अदालत का फैसला नहीं आ जाता, तब तक नियामक (सीसीआई) को फैसले का इंतजार करना चाहिए। भारत में चल रहा यह विवाद एपल के खिलाफ दुनियाभर (वैश्विक स्तर) में चल रहे कई एंटीट्रस्ट मामलों में से ही एक है।
भारत का बाजार एपल के लिए क्यों अहम?
भारत अब अमेरिकी कंपनी एपल के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण बाजार बनता जा रहा है। देश में आईफोन की बाजार हिस्सेदारी में काफी तेजी से उछाल आया है। दो साल पहले भारत में आईफोन की बाजार हिस्सेदारी सिर्फ 4 फीसदी थी। अब यह हिस्सेदारी बढ़कर करीब 9 फीसदी तक पहुंच गई है।
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