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The Bonus Market Update: लाल निशान पर बंद हुआ बाजार; सेंसेक्स 583 अंक टूटा, 24000 के नीचे निफ्टी


वैश्विक दबाव और पश्चिम एशिया में गहराते भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार पर देखने को मिला। कच्चे तेल की कीमतों में बेतहाशा उछाल के कारण घरेलू बाजार में भारी बिकवाली हुई, जिससे बीएसई सेंसेक्स 582.86 अंक गिरकर 76,913.50 पर बंद हुआ। निफ्टी 180.10 अंक गिरकर 23,997.55 पर आ गया।

सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट

बाजार में शुरुआती कारोबार से ही भारी दबाव देखा गया। 


  • सेंसेक्स: गुरुवार को सेंसेक्स 914.12 अंकों की भारी गिरावट के साथ 76,582.24 पर खुला और दिन भर के उतार-चढ़ाव के बाद अंततः 582.86 अंक (0.75 प्रतिशत) टूटकर 76,913.50 पर बंद हुआ।

  • निफ्टी: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 50 भी 278.45 अंक गिरकर 23,899.20 पर खुला था। कारोबार के अंत में यह 180.10 अंक (0.74 प्रतिशत) का गोता लगाकर 23,997.55 पर आ गया।

कच्चे तेल में आग और भू-राजनीतिक संकट


बाजार में इस भारी बिकवाली का मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आया जबरदस्त उछाल है। शुरुआती कारोबार में ब्रेंट क्रूड 121 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गया था, जो पिछले चार वर्षों का उच्चतम स्तर है। हालांकि, बाद में यह 1.22 प्रतिशत गिरकर 116.59 डॉलर पर कारोबार कर रहा था। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड भी 108 डॉलर के करीब पहुंच गया। 

यह ऊर्जा संकट अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का परिणाम है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि जब तक ईरान के साथ नया परमाणु और सुरक्षा समझौता नहीं हो जाता, तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य की नौसैनिक नाकेबंदी जारी रहेगी। अमेरिका द्वारा जलडमरूमध्य खोलने के ईरान के प्रस्ताव को खारिज करने से तेल आपूर्ति लंबे समय तक बाधित होने की आशंकाएं और गहरी हो गई हैं।

विशेषज्ञों की राय और आर्थिक प्रभाव

बैंकिंग और बाजार विशेषज्ञ अजय बग्गा के अनुसार, भारत एक प्रमुख तेल आयातक देश है, इसलिए कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर घरेलू अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। 

रुपये में कमजोरी: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया कमजोर होकर 95 रुपये के करीब पहुंच गया है और बॉन्ड यील्ड में भी तेजी दर्ज की जा रही है।

बाजार पर दोहरा दबाव: विदेशी निवेशकों (एफआईआई) की निकासी और गुरुवार को बीएसई अनुबंधों की मासिक एक्सपायरी ने बाजार की गिरावट और अस्थिरता को और तेज कर दिया।

वैश्विक बाजारों का सुस्त रुख

केवल भारतीय बाजार ही नहीं, बल्कि एशियाई बाजारों में भी निराशाजनक रुख देखा गया। जकार्ता कंपोजिट में 2.08 प्रतिशत, हैंग सेंग में 1.39 प्रतिशत और निक्केई 225 में 1.29 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई। वहीं, अमेरिकी बाजारों में भी मिला-जुला लेकिन नकारात्मक रुख रहा; डाउ जोंस 0.18 प्रतिशत और एसएंडपी500 0.04 प्रतिशत लाल निशान में रहे, जबकि नैस्डैक में 0.04 प्रतिशत की मामूली बढ़त देखी गई।



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