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पुराने भारत का सबसे मॉर्डन शहर कोलकाता आज भी अपने टाइमलेस आर्किटेक्चर के लिए दुनिया भर में जाना जाता है. यहां हम आपको ऐसी 8 इमारतों के बारे में यहां बता रहे हैं, जो कोलकाता को सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि इतिहास, संस्कृति और विरासत का जीवंत संग्रह बनाते हैं.
राइटर्स बिल्डिंग (1777)- मूल रूप से ईस्ट इंडिया कंपनी के छोटे क्लर्कों (राइटर्स) के कामकाज के लिए बनाई गई थी. इसकी वास्तुकला ग्रीको-रोमन शैली में है, जो इसे बहुत भव्य और अलग बनाती है. इसकी लंबी लाल गलियारों ने ब्रिटिश शासन से लेकर आधुनिक सरकारी व्यवस्था तक कई बदलाव देखे हैं. यह इमारत प्रशासनिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है.

ओल्ड मिशन चर्च (1770)- कोलकाता का सबसे पुराना प्रोटेस्टेंट चर्च है. इसे स्वीडिश मिशनरी जोहान ज़कारिया कीर्नांडर ने बनवाया था. यह चर्च आज भी ब्रिटिश काल की शुरुआती धार्मिक वास्तुकला सुंदर उदाहरण माना जाता है. इसकी सादगी और पुरानी बनावट इसे खास बनाती है.

राज भवन (1803)- आज पश्चिम बंगाल के राज्यपाल का आधिकारिक निवास है. यह नवशैली (Neo-classical) में बनी भव्य इमारत है. इसमें बड़े आयोनिक स्तंभ और सुंदर बगीचे हैं. यह इमारत कोलकाता की शाही और औपनिवेशिक विरासत को दर्शाती है.
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टाउन हॉल (1813)- रोमन-डोरिक शैली में बनी एक शानदार इमारत है. यहां कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक बैठकें हुई हैं. आज यह एक संग्रहालय के रूप में उपयोग होती है, जहां कोलकाता के राजनीतिक और सांस्कृतिक इतिहास को संजोकर रखा गया है.

संस्कृत कॉलेज (1824)-भारत की पारंपरिक शिक्षा का एक महत्वपूर्ण संस्थान है. इसकी इमारत औपनिवेशिक शैली में बनी है. ईश्वर चंद्र विद्यासागर के समय में यह आधुनिक भाषा और शिक्षा का प्रमुख केंद्र बन गया था. यहां भारतीय विद्या और भाषाओं को बढ़ावा दिया गया.

भारतीय संग्रहालय (1814)- एशिया का सबसे पुराना और सबसे बड़ा संग्रहालय माना जाता है. इसे एशियाटिक सोसाइटी ने शुरू किया था. यहां पुरानी मूर्तियां, मुगल चित्रकला, कंकाल और कई दुर्लभ वस्तुएं रखी गई हैं. यह ज्ञान और शोध का एक बड़ा केंद्र है.

सेंट जॉन्स चर्च (1787)- कोलकाता का पहला एंग्लिकन चर्च है. इसे लंदन के सेंट मार्टिन-इन-द-फील्ड्स चर्च की शैली में बनाया गया था. कहा जाता है कि इसकी जमीन महाराजा नवकृष्ण देव ने दान की थी. यहां जॉब चार्नॉक की कब्र और प्रसिद्ध “लास्ट सपर” पेंटिंग भी मौजूद है, जो इसे और भी ऐतिहासिक बनाती है.

मेटकाफ हॉल (1844)- हुगली नदी के पास स्थित एक सुंदर इमारत है. इसमें 30 बड़े कोरिंथियन स्तंभ हैं, जो इसकी भव्यता बढ़ाते हैं. इसे पहले पब्लिक लाइब्रेरी के रूप में बनाया गया था. यह इमारत प्रेस की स्वतंत्रता और ज्ञान के प्रसार का प्रतीक मानी जाती है.



