देश में महंगाई का जिन्न एक बार फिर बाहर निकल आया है, जिससे आम आदमी की कमर टूटना तय माना जा रहा है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग ने भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। लगातार कमजोर होते रुपये और ईंधन की बढ़ती कीमतों की वजह से थोक महंगाई अब अपने 42 महीने के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है। रसोई गैस से लेकर बिजली और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में हुए इस अप्रत्याशित उछाल ने आने वाले दिनों में बड़े आर्थिक झटकों के संकेत दे दिए हैं।
ईंधन और पेट्रोलियम की कीमतों में कितनी भारी बढ़ोतरी हुई है?
वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी हालिया आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल महीने में ईंधन और बिजली की महंगाई दर उछलकर 24.71 फीसदी पर पहुंच गई है। यह पिछले साढ़े तीन साल का सबसे ऊंचा स्तर है। कच्चे पेट्रोलियम की बात करें तो इसकी महंगाई दर 88.06 फीसदी तक जा पहुंची है, जो साढ़े चार साल में सबसे ज्यादा है। सबसे चौंकाने वाला उछाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में दिखा है। पेट्रोल की महंगाई दर मार्च के 2.50 फीसदी से बढ़कर सीधे 32.40 फीसदी पर पहुंच गई है, जबकि डीजल की दर भी 3.26 फीसदी से बढ़कर 25.19 फीसदी हो गई है। रसोई गैस (एलपीजी) भी मार्च के मुकाबले काफी महंगी हुई है।
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क्या पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी होने वाली है?
कच्चे तेल की कीमतों में वैशि्वक स्तर पर 50 फीसदी तक की वृद्धि होने के बावजूद सरकार ने फिलहाल पेट्रोल और घरेलू रसोई गैस के दाम स्थिर रखे हैं। सरकार की कोशिश थी कि जनता को इस बोझ से बचाया जाए, लेकिन पेट्रोलियम कंपनियों को हो रहे भारी घाटे को देखते हुए यह राहत ज्यादा दिन तक चलना मुमकिन नहीं लग रहा है। कंपनियों के बढ़ते नुकसान की भरपाई के लिए सरकार जल्द ही पेट्रोल-डीजल की कीमतों में इजाफा कर सकती है। इसके अलावा अल-नीनो के प्रभाव और अनाज की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच महंगाई को काबू करना अब मोदी सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।
आम आदमी की थाली पर इस महंगाई का क्या असर पड़ा है?
महंगाई के इस दौर में राहत की बात केवल सब्जियों के मोर्चे पर दिखी है। आंकड़ों के मुताबिक आलू, प्याज और अन्य सब्जियों की महंगाई दर में गिरावट आई है। प्याज की कीमतों में सालाना आधार पर करीब 26 फीसदी और आलू में 30 फीसदी की कमी दर्ज की गई है। दालों की कीमतें भी नियंत्रण में रही हैं। हालांकि, दूध, फल, अंडे और मांस-मछली की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। खाने-पीने की चीजों के अलावा रसायनों और विनिर्मित उत्पादों (कारखानों में बनने वाला सामान) की महंगाई दर भी बढ़ी है, जिसका मतलब है कि आने वाले समय में रोजमर्रा की अन्य वस्तुएं भी महंगी हो सकती हैं।
आरबीआई और आपके बैंक लोन पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा?
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने इस पूरे साल के लिए महंगाई का औसत अनुमान 4.6 फीसदी लगाया था, लेकिन थोक महंगाई के 8.3 फीसदी पर पहुंचने से आरबीआई का गणित बिगड़ गया है। जब कंपनियों की लागत (थोक भाव) बढ़ती है, तो वे इसका बोझ आम ग्राहकों पर डालती हैं। जानकारों का मानना है कि यदि महंगाई इसी तरह बढ़ती रही, तो आरबीआई को ब्याज दरों (रेपो रेट) में बढ़ोतरी करनी पड़ेगी। वर्तमान में रेपो रेट 5.25 फीसदी है। यदि इसमें बढ़ोतरी होती है, तो आपके होम लोन और पर्सनल लोन की किस्तें (EMI) महंगी हो जाएंगी, जिससे मध्यम वर्ग पर दोहरी मार पड़ेगी।
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