सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के सचिव वी उमाशंकर ने 29 मई 2026 को बताया कि भारत इस वर्ष डीजल में आइसोब्यूटेन का मिश्रण अनिवार्य कर सकता है। इसका उद्देश्य देश की ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाना और सड़क क्षेत्र से कार्बन उत्सर्जन कम करना है। उन्होंने सीआईआई मल्टीमॉडल परिवहन और लॉजिस्टिक्स शिखर सम्मेलन में यह जानकारी दी।
उमाशंकर ने कहा कि भारत पेट्रोलियम पहले से ही डीजल में आइसोब्यूटेन मिश्रण पर शोध कर रहा है। इसके परिणाम बहुत उत्साहजनक हैं। डीजल की खपत पेट्रोल से लगभग दोगुनी है। इसलिए डीजल मिश्रण का ऊर्जा सुरक्षा पर बड़ा प्रभाव पड़ेगा। मंत्रालय ने ई85 और ई100 वाहनों के निर्माण के लिए मसौदा अधिसूचना जारी की है। ई85 में 85 फीसदी इथेनॉल होता है, जबकि ई100 लगभग शुद्ध इथेनॉल पर चलने वाले वाहन हैं। इन वाहनों के लिए पेट्रोल पंपों पर अलग डिस्पेंसर होंगे। भारत पहले ही पेट्रोल में 20 फीसदी इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य हासिल कर चुका है।
इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा
मंत्रालय जल्द ही ट्रक-ट्रेलर अदला-बदली पर मसौदा अधिसूचना ला सकता है। यह इलेक्ट्रिक भारी वाणिज्यिक वाहनों के लिए बैटरी अदला-बदली और चार्जिंग की जरूरत को पूरा करेगा। बैटरी अदला-बदली के लिए कई स्थानों पर बुनियादी ढांचा चाहिए। चार्जिंग में काफी समय लगता है, जिससे ट्रक निष्क्रिय रह सकता है। ट्रैक्टर-ट्रेलर अदला-बदली से इस समस्या का समाधान होगा।
हाइड्रोजन ईंधन और टोल प्रणाली में सुधार
सरकार के हाइड्रोजन लॉजिस्टिक्स प्रयोगों के परिणाम बहुत अच्छे हैं। इसकी लागत अन्य परिवहन माध्यमों के बराबर है। हाइड्रोजन रिफ्यूलिंग स्टेशन ही एकमात्र महंगा तत्व है। प्रायोगिक परियोजनाओं में सरकार सहायता दे रही है। हाल ही में दिल्ली, दिल्ली-फरीदाबाद और दिल्ली-नोएडा के बीच हाइड्रोजन बसें शुरू की गई हैं। एक बार ईंधन भरने पर ये बसें 450 किलोमीटर चलती हैं। दिल्ली-मुंबई गलियारे पर लगभग तीन रिफ्यूलिंग स्टेशनों की आवश्यकता होगी।
टोल और यातायात प्रबंधन में नवाचार
मल्टी-लेन फ्री फ्लो (एमएलएफएफ) टोल प्रणाली 2027 में शुरू होने की संभावना है, जो वाहनों को बिना रुके टोल प्लाजा पार करने देगी। यह प्रणाली पहले ही दो टोल प्लाजा पर सफल रही है, और तीसरा जून 2026 के पहले सप्ताह में शुरू होगा। मंत्रालय 2027 तक इसे देश भर के सभी चार-लेन से अधिक टोल प्लाजा पर लागू करेगा। दिल्ली एनसीआर के लिए उन्नत यातायात प्रबंधन प्रणाली का प्रस्ताव स्वीकृत हुआ है, जिसका कार्यान्वयन जल्द होगा। मंत्रालय एक्सप्रेसवे पर धीमी और तेज गति वाले यातायात को अलग कर वाहनों की औसत गति बढ़ाएगा।



