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Bageshwar News : राजस्थान के रहने वाले देव कुंतल एक अलग सोच के साथ उत्तराखंड की यात्रा कर रहे हैं. वह पिछले तीन महीनों से उत्तराखंड के अलग-अलग जिलों और पर्यटन स्थलों में घूम रहे हैं. 32 साल के देव फिलहाल हल्द्वानी में रुके हुए हैं. वह बाइक से उत्तराखंड के कई पहाड़ी इलाकों में यात्रा कर चुके हैं. लोकल 18 से देव कहते हैं कि यात्रा इंसान को बहुत कुछ सिखाती है. ट्रैवल का मतलब महंगे होटल, बड़ी गाड़ियां और लग्जरी लाइफ दिखाना नहीं होता है. देव साधारण लॉज, होम स्टे या धर्मशालाओं में रुकते हैं. सीमित संसाधनों और कम बजट में नई जगहों को समझने निकले हैं.
बागेश्वर. आजकल जहां ज्यादातर लोग घूमने-फिरने को सिर्फ शौक और सोशल मीडिया से जोड़कर देखते हैं, राजस्थान स्थित भरतपुर जिले के रहने वाले देव कुंतल अलग सोच के साथ उत्तराखंड की यात्रा कर रहे हैं. पिछले तीन महीनों से वह उत्तराखंड के अलग-अलग जिलों और पर्यटन स्थलों में घूम रहे हैं. उनका मकसद सिर्फ घूमना नहीं, बल्कि लोगों को पहाड़ बचाने और जिम्मेदारी के साथ यात्रा करने का संदेश देना भी है. 32 वर्षीय देव फिलहाल हल्द्वानी में रह रहे हैं. वह बाइक से उत्तराखंड के कई पहाड़ी इलाकों में यात्रा कर चुके हैं. लोकल 18 से देव कहते हैं कि यात्रा इंसान को बहुत कुछ सिखाती है. ट्रैवल का मतलब महंगे होटल, बड़ी गाड़ियां और लग्जरी लाइफ दिखाना नहीं होता है, बल्कि सीमित संसाधनों और कम बजट में नई जगहों को समझना और वहां की संस्कृति को जानना भी यात्रा का हिस्सा है.
देव ने बताया कि वह अपनी यात्रा के दौरान बहुत कम खर्च में काम चला रहे हैं. जरूरत पड़ने पर साधारण लॉज, होम स्टे या धर्मशालाओं में रुकते हैं. कई बार स्थानीय लोगों के साथ रहकर पहाड़ी जीवन को करीब से समझने का प्रयास करते हैं. खाने-पीने में भी वह स्थानीय चीजों को प्राथमिकता देते हैं. इससे खर्च कम होता है और स्थानीय लोगों को भी सहयोग मिलता है.
यात्रा के साथ पढ़ाई
यात्रा के साथ-साथ देव राजस्थान की प्रशासनिक परीक्षाओं की तैयारी भी कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि वह जहां भी रुकते हैं, वहां पढ़ाई के लिए समय जरूर निकालते हैं. उनका मानना है कि अगर इंसान में इच्छा शक्ति हो, तो वह यात्रा और पढ़ाई दोनों को साथ लेकर चल सकता है. देव कुंतल पहाड़ों में बढ़ते कूड़े और प्लास्टिक प्रदूषण को लेकर भी चिंतित हैं. उन्होंने पर्यटकों से अपील की कि वे पहाड़ों में घूमने जाएं तो वहां गंदगी न फैलाएं. प्लास्टिक और कचरे को खुले में फेंकने के बजाय सही जगह पर डालें. उनका कहना है कि उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता को बचाना सभी की जिम्मेदारी है.
कई गुना खूबसूरत
देव का कहना है कि भारत की संस्कृति और प्रकृति को जानने के लिए यात्रा बेहद जरूरी है. उन्होंने वाहन चालकों से पहाड़ी सड़कों पर सावधानी और नियंत्रित गति से वाहन चलाने की अपील की. पहाड़ों में छोटी सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है. फिलहाल उत्तराखंड के कुमाऊं के अलग-अलग जिलों में घूम कर वहां के संस्कृति को करीब से समझ रहे हैं. देव कहते हैं कि वह नैनीताल, अल्मोड़ा, बागेश्वर घूम चुके हैं. अब जुलाई के बाद चंपावत और पिथौरागढ़ घूमने का प्लान बना रहे हैं. देव के मुताबिक, मैंने जितना ऑनलाइन कुमाऊं को देखा है, वह उससे कई गुना ज्यादा खूबसूरत है.
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प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें



