भारत के रिफाइन पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात मई में घटकर लगभग 930,000 बैरल प्रतिदिन रह गया। यह अक्तूबर 2022 के बाद का सबसे निचला स्तर है। रिफाइनरियों के रखरखाव, बदलती उत्पादन प्राथमिकताएं और मजबूत घरेलू मांग इसके मुख्य कारण हैं। डेटा विश्लेषण फर्म केप्लर के अनुसार, अक्तूबर 2022 में यह आंकड़ा 926,000 बैरल प्रतिदिन था।
केप्लर के मॉडल और रिफाइनिंग प्रबंधक सुमित रितोलिया ने बताया कि यह तेज गिरावट कम रिफाइनरी उत्पादन और घरेलू बाजार पर बढ़ते ध्यान के कारण हुई। रिलायंस इंडस्ट्रीज के जामनगर रिफाइनिंग परिसर में नियोजित रखरखाव भी एक प्रमुख कारण रहा। इस रखरखाव कार्यक्रम से कच्चे तेल के प्रसंस्करण की दरें कम हो गईं। इससे महीने के दौरान निर्यात के लिए उपलब्ध मात्रा सीमित हो गई।
घरेलू मांग को प्राथमिकता
रिफाइनरों ने घरेलू बाजार के लिए तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) का उत्पादन बढ़ाया। इसके कारण पेट्रोल और डीजल का उत्पादन अनुमानित 80,000 बैरल प्रतिदिन कम हो गया। यह बदलाव स्थानीय एलपीजी आपूर्ति की जरूरतों को पूरा करने के प्रयासों को दर्शाता है। यह निर्यात-उन्मुख उत्पादों, विशेषकर गैसोलीन और डीजल की कीमत पर हुआ। सरकारी रिफाइनरों ने भी घरेलू बाजार में अधिक उत्पादन भेजा। उन्होंने ऊर्जा सुरक्षा और पर्याप्त स्थानीय ईंधन आपूर्ति बनाए रखने की आवश्यकता को प्राथमिकता दी। यह घरेलू मांग को निर्यात बाजारों से ऊपर रखने का एक व्यापक रुझान है।
निर्यात का गणित भी बदला
रितोलिया के अनुसार, निर्यात अर्थशास्त्र भी कम अनुकूल हो गया है। परिष्कृत उत्पाद निर्यात पर लगने वाले करों ने विदेशी बिक्री के आकर्षण को कम किया है। इससे घरेलू आपूर्ति की तुलना में निर्यात कम आकर्षक हो गया है। यह रिफाइनरों के लिए विदेशों में शिपमेंट बढ़ाने के प्रोत्साहन को सीमित करता है। निर्यात में यह तेज गिरावट दर्शाती है कि रिफाइनरी रखरखाव, बदलती ईंधन मांग और नीतिगत विचार भारत के परिष्कृत उत्पाद व्यापार प्रवाह को नया आकार दे रहे हैं। भारत अभी भी एशिया के सबसे बड़े ईंधन निर्यातकों में से एक है।



