रात के करीब 11 बजे का वक्त था. कारोबारी शिवा शंकर अपनी कार में बैठे थे. डिक्की में 74 लाख रुपये नकद रखे थे. उनके बगल वाली सीट पर बैठा था उनका भरोसेमंद ड्राइवर चेतन. सब कुछ सामान्य लग रहा था. लेकिन शिवा शंकर को जरा भी अंदाजा नहीं था कि जिस शख्स पर उन्होंने दो साल तक सबसे ज्यादा भरोसा किया, वही उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी लूट की स्क्रिप्ट लिख चुका है.
कुछ ही मिनट बाद सड़क पर बाइक से टक्कर होती है. कार रुकती है. दूसरी गाड़ी आकर रास्ता रोक लेती है. पांच लोग निकलते हैं, हथियार दिखाते हैं और कारोबारी व ड्राइवर दोनों को अगवा कर लेते हैं. पूरी घटना किसी फिल्मी सीन जैसी लगती है. लेकिन असली ट्विस्ट तो तब आया, जब पुलिस ने जांच शुरू की. पता चला कि जिस ड्राइवर को खुद पीड़ित माना जा रहा था, वही पूरे ऑपरेशन का मास्टरमाइंड निकला.
करोड़ों के कारोबार से शुरू हुई कहानी
शिवा शंकर उत्तर बेंगलुरु में एक सिक्योरिटी एजेंसी चलाते हैं. पिछले करीब दस साल से उनकी आंध्र प्रदेश के तीन कारोबारियों मोहम्मद परवेज, अलीम और जिप्सन के साथ पार्टनरशिप थी. सभी मिलकर अमेरिकन न्यूक्लियर रिसोर्स सेंटर नाम की कंपनी के जरिए एक नया कारोबार शुरू करने की तैयारी कर रहे थे.
इसी सिलसिले में तीनों साझेदार बेंगलुरु आए और येलहंका के एक होटल में ठहरे. 13 और 15 जून को उन्होंने कुल 1.09 करोड़ रुपये नकद शिवा शंकर को सुरक्षित रखने के लिए सौंपे. इतनी बड़ी रकम की जानकारी बेहद सीमित लोगों को थी. शिवा शंकर, उनके तीन साझेदार और उनका ड्राइवर चेतन. यहीं से पूरे खेल की शुरुआत हुई.
रास्ते में हुआ हमला
15 जून की रात करीब 11 बजकर 5 मिनट पर शिवा शंकर और चेतन होटल से लौट रहे थे. कार जैसे ही कुडुरेगेरे कॉलोनी के गणेश मंदिर के पास पहुंची, एक बाइक सवार ने जानबूझकर कार से टक्कर मार दी. ड्राइवर ने कार रोकी ही थी कि दूसरी गाड़ी सामने आकर खड़ी हो गई. पांच लोग बाहर निकले. हथियार दिखाए और दोनों को जबरन अपनी कार में बैठा लिया.
इसके बाद उन्हें नेलमंगला के सुनसान इलाके में ले जाया गया. आरोपियों ने मोटी फिरौती की मांग की. शिवा शंकर समझ चुके थे कि अगर उन्होंने डिक्की में रखे 74 लाख रुपये का जिक्र किया तो जान पर बन सकती है. उन्होंने खुद को बचाने के लिए एक झूठ बोला. कहा कि घर में 35 लाख रुपये और रखे हैं.
यही झूठ उनके लिए नई मुसीबत बन गया. पत्नी से भी ले लिए 35 लाख रुपये गिरोह के कुछ सदस्य ड्राइवर चेतन को लेकर सीधे शिवा शंकर के घर पहुंचे. हथियारों के साए में कारोबारी की पत्नी से 35 लाख रुपये भी ले लिए गए. सुबह करीब पांच बजे बदमाश शिवा शंकर और चेतन को एक सुनसान जगह छोड़कर फरार हो गए. दोनों जब अपनी कार तक पहुंचे तो डिक्की में रखे 74 लाख रुपये भी गायब थे. यानी कुल 1.09 करोड़ रुपये लूटे जा चुके थे.
पुलिस को पहले कारोबारी पर ही हुआ शक
इतनी बड़ी नकदी और पूरी घटना सुनकर पुलिस को कहानी कुछ हजम नहीं हुई. मदनायकनहल्ली थाने में मामला दर्ज हुआ, लेकिन जांच अधिकारियों का पहला शक खुद शिवा शंकर पर गया. दरअसल, शिवा शंकर पहले से एक कथित प्राचीन बर्तन ठगी मामले में आरोपी रह चुके थे. इसलिए पुलिस को लगा कि कहीं पूरी कहानी बनावटी तो नहीं. अधिकारियों ने उनसे कई दौर की पूछताछ की. लेकिन हर बार उनका बयान एक जैसा रहा.फिर पुलिस ने ड्राइवर चेतन से अलग पूछताछ की. उसने भी बिल्कुल वही कहानी दोहरा दी.
एक सवाल जिसने पूरा राज खोल दिया
पुलिस ने खुद से एक सवाल पूछा. इतने पैसे की जानकारी आखिर किन-किन लोगों को थी? तब उनका जवाब था कि सिर्फ पांच लोगों को थी. शिवा शंकर, उनके तीन कारोबारी साझेदार और ड्राइवर चेतन.आंध्र प्रदेश से आए तीनों साझेदारों की जांच की गई. उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला. अब शक का दायरा सिर्फ एक आदमी पर आकर टिक गया और वह था चेतन.
कॉल डिटेल ने खोल दी पोल
जांच टीम ने चेतन की कॉल डिटेल निकलवाई. यहीं सबसे बड़ा सुराग मिला. चेतन लगातार सोमा नाम के एक हिस्ट्रीशीटर से संपर्क में था. सोमा पहले से पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज बदमाश था. पुलिस ने सोमा पर नजर रखनी शुरू की. जांच के दौरान अधिकारियों ने देखा कि वह अचानक जरूरत से ज्यादा पैसा खर्च करने लगा है. यहीं पुलिस को यकीन हो गया कि मामला यहीं कहीं जुड़ा है. जब सोमा को हिरासत में लेकर पूछताछ हुई तो पूरी कहानी सामने आ गई.
दो साल की नौकरी, फिर मालिक को ही लूट लिया
पुलिस के मुताबिक चेतन पिछले दो साल से शिवा शंकर के यहां ड्राइवर था. उसे अपने मालिक की आर्थिक स्थिति, लेन-देन और नकदी के मूवमेंट की पूरी जानकारी रहती थी. 15 जून को जैसे ही उसे पता चला कि कार में एक करोड़ रुपये से ज्यादा नकदी जा रही है, उसने अपने साथियों को सूचना दे दी. गिरोह पहले से किसी बड़ी वारदात की फिराक में था. चेतन ने सिर्फ सही मौके का इंतजार किया और पूरी योजना बना डाली.
चेतन को क्यों लगा कि वह बच जाएगा?
पुलिस का कहना है कि चेतन ने एक बड़ा दांव खेला था. उसे लगा कि इतनी बड़ी नकदी का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं होगा. साथ ही उसे यह भी पता था कि उसके मालिक पहले भी एक आपराधिक मामले में फंस चुके हैं. उसे भरोसा था कि शिवा शंकर पुलिस तक जाने की हिम्मत नहीं करेंगे. यही उसकी सबसे बड़ी भूल साबित हुई. कारोबारी सीधे थाने पहुंचे और शिकायत दर्ज करा दी.
पांच आरोपी गिरफ्तार, 85 लाख रुपये बरामद
लगातार जांच के बाद पुलिस ने चेतन समेत पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तार आरोपियों की पहचान ड्राइवर एम. चेतन, सोमा, सूर्या, सिविल इंजीनियर बसवना गौड़ा और ऑटो चालक एम. विनय के रूप में हुई है. पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 85 लाख रुपये नकद भी बरामद कर लिए हैं. बाकी रकम की तलाश जारी है.
इस पूरी कहानी का सबसे बड़ा सबक
इस वारदात में सबसे चौंकाने वाली बात यह नहीं कि 1.09 करोड़ रुपये लूट लिए गए. सबसे बड़ा झटका यह है कि पूरा खेल किसी बाहरी गैंग ने नहीं, बल्कि उस शख्स ने रचा, जो हर दिन कारोबारी के साथ रहता था. जिस ड्राइवर पर मालिक आंख बंद करके भरोसा करता था, उसी ने पैसों की खबर बाहर पहुंचाई, रास्ता बताया और खुद भी किडनैपिंग का शिकार बनकर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की. लेकिन एक छोटी-सी चूक मोबाइल फोन की कॉल डिटेल ने पूरी साजिश की परतें खोल दीं. आखिरकार फिल्मी अंदाज में रची गई यह करोड़ों की लूट पुलिस की जांच के सामने ज्यादा दिन टिक नहीं सकी.



