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बॉम्बे हाईकोर्ट जज बोले-सरकार का विरोध करने पर केस क्यों: लोगों को सरकार का गुलाम बनाया जा रहा; पुलिस PM-CM की नौकर नहीं


मुंबई14 मिनट पहले

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बॉम्बे हाई कोर्ट के जज जस्टिस माधव जामदार ने गुरुवार को कहा कि पुलिस सिर्फ इसलिए लोगों को शहर-इलाके से नहीं निकाल सकती क्योंकि उन्होंने सरकार के फैसलों का विरोध किया है या सरकार के खिलाफ नारे लगाए हैं। उन्होंने कहा-

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विरोध करना नागरिकों का अधिकार है। पिटीशनर ने अभी ‘भाजपा सरकार मुर्दाबाद’, ‘अमित शाह मुर्दाबाद’ जैसे नारे लगाए हैं। नागरिक ऐसे नारे क्यों नहीं लगा सकते? ऐसे नारों के लिए देश निकाला ऑर्डर क्यों?

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सोशलिस्ट डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) के महासचिव सईद अहमद के मामले में जस्टिस जामदार ने कहा- सभी नागरिकों को भारत सरकार का गुलाम बनाया जा रहा है। वे विरोध नहीं कर सकते, वे आंदोलन नहीं कर सकते, यह सब क्या है? अब इतने सारे पेपर लीक हो गए हैं। अगर लोग विरोध करेंगे, तो क्या आप केस कर देंगे?

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सईद अहमद पर सरकार के विरोध से जुड़े केस

मामला SDPI के महासचिव सईद अहमद से जुड़ा है। मुंबई पुलिस ने उनके खिलाफ एक साल का देश निकाला आदेश जारी किया था। इसके खिलाफ सईद ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। सईद नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और ज्ञानवापी मस्जिद विवाद समेत कई मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन आयोजित कर रहे थे।

जस्टिस जामदार ने पूछा कि सईद के खिलाफ दर्ज पांच एफआईआर के आधार पर उन्हें एक साल के लिए शहर से बाहर करने का आदेश क्यों दिया गया? इनमें ज्यादातर मामले केंद्र सरकार के फैसलों के खिलाफ प्रदर्शन और धरना-प्रदर्शन से जुड़े थे।

अहमद के खिलाफ देश निकाला का आदेश रद्द

जस्टिस माधव जामदार ने कहा कि सरकार के फैसलों के खिलाफ धरना-प्रदर्शन करना किसी व्यक्ति को देश निकाला देने का आधार नहीं हो सकता। संविधान नागरिकों को अपनी बात कहने और सम्मान के साथ जीने का अधिकार देता है।

इसी आधार पर हाईकोर्ट ने सईद अहमद के खिलाफ जारी एक साल के देश निकाला आदेश को रद्द कर दिया और पुलिस व प्रशासन के दोनों आदेश निरस्त कर दिए।

जस्टिस बोले- पूरे महाराष्ट्र में हॉर्स ट्रेडिंग चल रही

जस्टिस जामदार ने कहा- दो दिन पहले मुंबई में स्कूल बस पर पेड़ गिरने से एक बच्चे विहान श्रीवास्तव की मौत हो गई थी और स्टेट असेंबली में इस पर चर्चा हो रही थी।

एक प्रेसाइडिंग ऑफिसर कैसे चुना जाता है और वह कैसे एक पार्टी से दूसरी पार्टी में चला गया, यह क्या है? सईद को भी साइड बदल लेनी चाहिए। वैसे भी पूरे महाराष्ट्र में हॉर्स ट्रेडिंग चल रही है। तुम्हारे (सईद) पास कुछ FIR हैं। केस बदलने के बारे में सोचो, वॉशिंग मशीन है।

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सुप्रीम कोर्ट बोला- फैसलों में AI के फर्जी उदाहरण खतरनाक, ये मिथाइल आइसोसाइनेट जैसे

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से बनाए गए नकली कानूनी उदाहरणों का इस्तेमाल खतरनाक है। कोर्ट ने इसकी गंभीरता समझाने के लिए कहा कि यह खतरा उतना ही बड़ा है, जितना भोपाल गैस त्रासदी में जहरीली (AI) गैस का रिसाव था। पूरी खबर पढ़ें…

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