भारत के निजी डेट फंड सौदों की पहचान, डेटा विश्लेषण और ऋण मूल्यांकन के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को तेजी से अपना रहे हैं। ईवाई की एक रिपोर्ट के अनुसार, अधिकांश खिलाड़ी चुनिंदा रूप से इस तकनीक का उपयोग कर रहे हैं। वहीं, एक छोटा समूह इसे अपनी निवेश प्रक्रियाओं में गहराई से एकीकृत कर रहा है।
ईवाई की ‘प्राइवेट क्रेडिट पल्स सर्वे’ रिपोर्ट, जो वर्ष 2026 की पहली छमाही के अपडेट का हिस्सा है, में यह जानकारी सामने आई है। सर्वेक्षण में शामिल 67 फीसदी उत्तरदाता डेटा विश्लेषण और निगरानी के लिए मध्यम रूप से एआई का उपयोग करते हैं। जबकि 11 फीसदी ने बताया कि एआई उपकरण उनकी उत्पत्ति और ऋण विश्लेषण प्रक्रियाओं का मुख्य हिस्सा बन चुके हैं। अन्य 22 फीसदी अभी शुरुआती चरण में हैं और एआई उपकरणों का परीक्षण कर रहे हैं। यह निष्कर्ष निजी ऋण कोषों द्वारा संभावित सौदों का आकलन करने और उधारकर्ताओं की निगरानी के तरीके में क्रमिक बदलाव का संकेत देते हैं।
एआई का उपयोग किस तरह हो रहा है?
रिपोर्ट के अनुसार, अधिकांश कोषों ने चुनिंदा रूप से एआई का उपयोग शुरू कर दिया है। यह विशेष रूप से डेटा विश्लेषण, निगरानी और हामीदारी समर्थन के लिए है। वहीं, कुछ प्रतिभागी उत्पत्ति और ऋण मूल्यांकन प्रक्रियाओं में एआई को गहराई से एकीकृत कर रहे हैं। एआई को अपनाने की सीमा बाजार के प्रतिभागियों में भिन्न है। भविष्य में उत्पत्ति, हामीदारी और चल रही पोर्टफोलियो निगरानी में एआई का उपयोग गहरा होने की संभावना है।
बाजार में क्या रुझान दिख रहे हैं?
ईवाई के आकलन के अनुसार, वर्ष 2026 की पहली छमाही में भारत का निजी ऋण बाजार विस्तारित हुआ है। यह वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और कमोडिटी मूल्य दबावों के बावजूद हुआ है। निजी ऋण कोष तनाव-संबंधी स्थितियों, पूंजीगत व्यय की आवश्यकताओं और विलय तथा अधिग्रहण वित्तपोषण से भी मांग देख रहे हैं। व्यापक बाजार सकारात्मक बना हुआ है। सर्वेक्षण में शामिल 60 फीसदी उत्तरदाता अगले एक से दो वर्षों में इस परिसंपत्ति वर्ग को लेकर आशावादी हैं। वहीं, 27 फीसदी सतर्क और 13 फीसदी बहुत आशावादी हैं।
निवेशकों की क्या प्राथमिकताएं हैं?
रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि 67 फीसदी उत्तरदाताओं ने 18 फीसदी से अधिक प्रतिफल वाले सौदों को प्राथमिकता दी। इन्हें उच्च-प्रतिफल श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है। वहीं, करीब 33 फीसदी ने 12 फीसदी और 18 फीसदी के बीच प्रतिफल वाले सौदों को लक्ष्य किया। इन्हें प्रदर्शनकारी ऋण के रूप में वर्गीकृत किया गया है। ईवाई ने बताया कि सर्वेक्षण में भू-राजनीतिक तनावों के परिनियोजन गतिविधि पर प्रभाव का भी आकलन किया गया। 40 फीसदी उत्तरदाताओं ने परिनियोजन गति में कोई बदलाव नहीं बताया। जबकि अन्य 40 फीसदी ने क्षेत्रों और भौगोलिक क्षेत्रों पर अधिक सावधानी के कारण परिनियोजन धीमा करने की बात कही।



