विदेश घूमने का मन है, लेकिन ऐसी जगह जाना चाहते हैं जहां पहुंचने में पूरा दिन न लग जाए? तो उज्बेकिस्तान आपके लिए एक शानदार विकल्प हो सकता है. मध्य एशिया का यह देश अपनी खूबसूरत इस्लामिक वास्तुकला, ऐतिहासिक शहरों, सिल्क रोड की विरासत और रंग-बिरंगे बाजारों के लिए मशहूर है. खास बात यह है कि भारत से उज्बेकिस्तान की दूरी बहुत ज्यादा नहीं है. दिल्ली से ताशकंद की हवाई दूरी करीब 1,600 किलोमीटर है, और नॉन-स्टॉप फ्लाइट से सफर लगभग 3 घंटे में पूरा हो सकता है.
दिल्ली से ताशकंद की दूरी कितनी है?
नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद तक की सीधी हवाई दूरी करीब 1,580 किलोमीटर के आसपास है. फ्लाइट रूट के हिसाब से इसमें थोड़ा अंतर हो सकता है. सबसे खास बात यह है कि दोनों शहरों के बीच नॉन-स्टॉप उड़ानों का विकल्प मिलता है, इसलिए छोटी छुट्टी में भी इस देश को एक्सप्लोर किया जा सकता है. यात्रा से पहले फ्लाइट का शेड्यूल जरूर चेक करें, क्योंकि एयरलाइन और तारीख के हिसाब से उड़ानों की उपलब्धता बदल सकती है.
ताशकंद से शुरू करें सफर
उज्बेकिस्तान पहुंचने के बाद ताशकंद से ट्रिप शुरू करना आसान रहता है. यह देश की राजधानी होने के साथ आधुनिक इमारतों, बाजारों, म्यूजियम और शानदार मेट्रो स्टेशनों के लिए जानी जाती है. यहां आपको एक तरफ आधुनिक शहर दिखेगा, तो दूसरी तरफ मध्य एशिया की पुरानी संस्कृति की झलक भी मिलेगी. अगर आपके पास समय है, तो सिर्फ ताशकंद तक सीमित न रहें. देश के दूसरे ऐतिहासिक शहर इस यात्रा को और खास बना सकते हैं.
समरकंद है सबसे खास
उज्बेकिस्तान की बात हो और समरकंद का जिक्र न हो, ऐसा संभव नहीं. यह सिल्क रोड का प्रमुख ऐतिहासिक शहर रहा है और यहां की वास्तुकला दुनियाभर के पर्यटकों को आकर्षित करती है.
रेगिस्तान स्क्वायर, गुर-ए-अमीर, बीबी-खानम मस्जिद और शाह-ए-जिंदा यहां के प्रमुख आकर्षण हैं. समरकंद का ऐतिहासिक क्षेत्र यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट में शामिल है.
बुखारा में मिलेगा पुराने जमाने का एहसास
अगर आपको पुरानी गलियों, बाजारों और ऐतिहासिक इमारतों में घूमना पसंद है, तो बुखारा जरूर जाएं. शहर का ऐतिहासिक केंद्र प्राचीन मदरसों, मस्जिदों, किलों और पुराने व्यापारिक केंद्रों के लिए जाना जाता है. यहां घूमते हुए आपको सिल्क रोड के पुराने दौर की झलक मिल सकती है.
खीवा का इचन-कला न छोड़ें
उज्बेकिस्तान की यात्रा में खीवा भी खास जगह रखता है. यहां का इचन-कला प्राचीन दीवारों से घिरा ऐतिहासिक इलाका है, जहां मीनारें, मदरसे, मस्जिदें और पारंपरिक इमारतें देखने को मिलती हैं. पुरानी वास्तुकला और फोटो खींचने के शौकीन लोगों के लिए यह जगह खास है.
भारत से जाने वालों को वीजा चाहिए?
भारतीय यात्रियों को उज्बेकिस्तान जाने से पहले वीजा नियमों की जानकारी जरूर लेनी चाहिए. ई-वीजा की सुविधा उपलब्ध है, लेकिन आवेदन करने से पहले पासपोर्ट की वैधता और यात्रा की तारीख के अनुसार मौजूदा नियम आधिकारिक पोर्टल पर जांचना जरूरी है.
कितने दिन की ट्रिप रखें?
अगर पहली बार उज्बेकिस्तान जा रहे हैं, तो 5 से 7 दिन की यात्रा में ताशकंद के साथ समरकंद और बुखारा को शामिल किया जा सकता है. ज्यादा समय हो तो खीवा भी जोड़ा जा सकता है. यानी अगर आप सोचते थे कि उज्बेकिस्तान भारत से बहुत दूर है, तो ऐसा नहीं है. दिल्ली से करीब 1,600 किलोमीटर और लगभग 3 घंटे की सीधी उड़ान इसे भारतीय यात्रियों के लिए एक आकर्षक इंटरनेशनल ट्रैवल डेस्टिनेशन बनाती है.



