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चंद्र ग्रहण आज, देशभर में मंदिरों के कपाट बंद: शाम 7 बजे बाद खोले जाएंगे, उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भस्मारती के दौरान होली उत्सव मनाया गया


नई दिल्ली16 मिनट पहले

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उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर में मंगलवार सुबह भस्मारती के दौरान होली उत्सव मनाया गया।

साल 2026 के पहले चंद्र ग्रहण से पहले ‘सूतक काल’ शुरू हो गया है। देशभर के मंदिरों के पट मंगलवार सुबह मंगल आरती के बाद बंद कर दिए गए हैं। ग्रहण समाप्त होने के बाद शाम 7 बजे दरवाजे खोले जाएंगे, भगवान को स्नान कराया जाएगा और श्रृंगार होगा। भोग आरती के बाद मंदिर रात तक खुले रहेंगे। उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में मंगलवार सुबह भस्म आरती के दौरान होली उत्सव मनाया गया।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, मंगलवार (3 मार्च 2026) को पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा। आज का चंद्रग्रहण भारत में भी दिखाई देगा। ग्रहण दोपहर 3.21 बजे शुरू होगा और शाम 6.47 मिनट तक रहेगा।

उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में सुबह भस्मारती के बाद मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए।

उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में सुबह भस्मारती के बाद मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए।

बंद मंदिरों की 5 तस्वीरें :

तिरुमाला में तिरुपति मंदिर बंद कर दिया गया है।

तिरुमाला में तिरुपति मंदिर बंद कर दिया गया है।

अयोध्या में रामलला मंदिर को जाने वाले रास्ते बंद कर दिया गया।

अयोध्या में रामलला मंदिर को जाने वाले रास्ते बंद कर दिया गया।

मदुरै (तमिलनाडु) का मीनाक्षी मंदिर बंद है।

मदुरै (तमिलनाडु) का मीनाक्षी मंदिर बंद है।

दिल्ली का लक्ष्मीनारायण मंदिर मंगला मंदिर के बाद बंद कर दिया गया।

दिल्ली का लक्ष्मीनारायण मंदिर मंगला मंदिर के बाद बंद कर दिया गया।

मथुरा में बांके बिहारी मंदिर के कपाट को पूजा के बाद बंद किया गया।

मथुरा में बांके बिहारी मंदिर के कपाट को पूजा के बाद बंद किया गया।

ग्रहण के बाद मंदिरों का शुद्धिकरण होता है

हिंदू संस्कृति में चंद्र ग्रहण को धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है, इसलिए इसके दौरान और बाद में विशेष नियम और पूजा-पाठ किए जाते हैं।

हिंदू परंपरा के अनुसार, सूतक काल को अशुभ समय माना जाता है, जो चंद्र या सूर्य ग्रहण से कुछ घंटे पहले शुरू होता है। इस दौरान मंदिरों के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं, धार्मिक गतिविधियां रोक दी जाती हैं और श्रद्धालुओं को भोजन करने या कोई शुभ कार्य करने से बचने की सलाह दी जाती है।

ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिरों में शुद्धिकरण की प्रक्रिया की जाती है, जिसमें भगवान को स्नान कराना और विशेष पूजा करना शामिल है। इसके बाद मंदिर श्रद्धालुओं के लिए फिर से खोल दिए जाते हैं

चंद्र ग्रहण क्या होता है?

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गुरुत्वाकर्षण बल यानी ग्रेविटेशनल फोर्स की वजह से पृथ्वी और सभी दूसरे ग्रह सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाते हैं। पृथ्वी, 365 दिनों में सूर्य का एक चक्कर लगाती है।

जबकि चंद्रमा एक प्राकृतिक उपग्रह है, जो पृथ्वी के चारों ओर चक्कर लगाता है। उसे पृथ्वी के एक चक्कर लगाने में 27 दिन लगते हैं।

सूर्य के चक्कर लगाने के दौरान कई बार ऐसी स्थिति बनती है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच में आ जाती है। इस दौरान सूर्य का प्रकाश चंद्रमा तक नहीं पहुंच पाता है और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ने से चंद्र ग्रहण होता है।

चंद्र ग्रहण की घटना तभी होती है जब सूर्य, पृथ्‍वी और चंद्रमा एक सीध में हों, खगोलीय विज्ञान के अनुसार ये केवल पूर्णिमा के दिन ही संभव होता है। इसी वजह से ज्यादातर चंद्र ग्रहण केवल पूर्णिमा के दिन होते हैं।

चंद्र ग्रहण मुख्य रूप से 3 प्रकार के होते हैं

1.पूर्ण चंद्र ग्रहण (Total lunar eclipse): पूर्ण चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी, सूर्य तथा चंद्रमा एक सीधी रेखा में होते हैं। इसके कारण पृथ्वी की छाया पूरी तरह से चंद्रमा को ढंक लेती है, जिससे पूरी तरह से चंद्रमा पर अंधेरा छा जाता है।

2.आंशिक चंद्र ग्रहण (Partial lunar Eclipse): जब पृथ्वी की परछाई चंद्रमा के पूरे भाग को ढंकने की बजाय किसी एक हिस्से को ही ढंके तब आंशिक चंद्र ग्रहण होता है। इस दौरान चंद्रमा के केवल एक छोटे हिस्से पर ही अंधेरा होता है।

3. उपछाया चंद्र ग्रहण (Penumbral lunar Eclipse): उपछाया चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी की छाया चंद्रमा के बाहरी भाग पर पड़ती है। इस तरह के चंद्र ग्रहण को देखना मुश्किल होता है।

पहली बार चंद्र ग्रहण के बारे में कब पता लगा

280 ईस्वी यानी 1742 साल पहले चीन के ‘झोऊ राजवंश’ से जुड़े मकबरे में एक किताब मिली थी। चीनी भाषा में लिखी गई इस किताब का नाम ‘झोऊ शू’ था। इस किताब में सैकड़ों साल पहले चंद्र ग्रहण लगने की बात लिखी गई थी। रिसर्चर प्रोफेसर एस. एम. रसेल ने इस किताब के हवाले से इंसान के पहली बार चंद्र ग्रहण की घटना पर गौर करने की तारीख बताई है। उनके मुताबिक 3158 साल पहले यानी 1137 ईसापूर्व में 29 जनवरी को पहली बार इंसानों ने चंद्र ग्रहण को नोटिस किया था। चंद्र ग्रहण के दिन चंद्रमा लाल क्यों दिखाई देता है?

जब चंद्रमा पृथ्वी की प्रच्छाया में होता है, सिर्फ तभी चंद्र ग्रहण के दिन चंद्रमा देखने पर लाल दिखाई देता है। इसकी वजह यह है कि सूर्य का प्रकाश जैसे ही पृथ्वी के वायुमंडल में आता है वो अपने सात रंगों में बंट जाता हैं। इस दौरान सबसे ज्यादा वेवलेंथ गहरे लाल रंग की होती है और सबसे कम वेवलेंथ बैगनी रंग की होती है। ऐसे में कम वेवलेंथ वाले रंग तो पृथ्वी के वायुमंडल में फैल जाते हैं, लेकिन गहरे लाल रंग वाली रोशनी चंद्रमा से टकराती है और वापस लौटकर हम तक पहुंचती है। इसीलिए चंद्र ग्रहण के समय चंद्रमा लाल रंग का दिखाई देता है और इसे हम ब्लड मून भी कहते हैं।

एक साल में कितनी बार चंद्र ग्रहण लग सकता है?

NASA के मुताबिक एक साल में ज्यादातर 2 बार चंद्र ग्रहण होता है। किसी साल चंद्र ग्रहण लगने की संख्या 3 भी हो सकती है। सैकड़ों साल में लगने वाले कुल चंद्र ग्रहणों में से लगभग 29% चंद्र ग्रहण पूर्ण होते हैं। औसतन, किसी एक स्थान से हर 2.5 साल में पूर्ण चंद्र ग्रहण देखा जा सकता है। चंद्र ग्रहण 30 मिनट से लेकर एक घंटे के लिए लगता है।

चंद्र ग्रहण के दौरान पता चली पृथ्वी से चंद्रमा की दूरी

1. 150 ईसा पूर्व यानी आज से करीब 2100 साल पहले चंद्र ग्रहण के दौरान ग्रीस के वैज्ञानिकों ने पृथ्वी का व्यास यानी डायमिटर पता किया था। इससे पता चला कि पृथ्वी कितनी बड़ी है। 2. 400 ईसा पूर्व ग्रीस के वैज्ञानिक अरिस्तर्खुस ने चंद्र ग्रहण की मदद से ही पृथ्वी से चंद्रमा की दूरी पता की थी। 3. आगे चलकर ग्रीस के एस्ट्रोलॉजर क्लाडियस टॉलमी ने दूसरी सदी यानी 1800 साल पहले इसी के आधार पर दुनिया के सबसे पुराने वर्ल्ड मैप में से एक बनाया था, जिसका नाम टॉलमी वर्ल्ड मैप था।

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आज (3 मार्च) भी फाल्गुन पूर्णिमा है। कल 2 तारीख की रात होलिका दहन हुआ, लेकिन आज चंद्रग्रहण की वजह से अधिकतर क्षेत्रों में धुलंडी नहीं मनाई जा रही है, इन क्षेत्रों में कल यानी 4 मार्च को होली खेली जाएगी। पढ़ें पूरी खबर…

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