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Gold Silver Price: वैश्विक तनाव के बीच चांदी की चमक बढ़ी, भाव 2.76 लाख रुपये प्रति किलो के पार; सोना सुस्त


पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक रुझानों के बीच गुरुवार को दिल्ली के सर्राफा बाजार में चांदी की कीमतों में भारी उछाल दर्ज किया गया। वहीं, दूसरी ओर सोने की कीमतों में पिछले तीन दिनों से जारी तेजी पर ब्रेक लग गया है। बाजार विशेषज्ञ इस विपरीत चाल को डॉलर की मजबूती और वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से जोड़कर देख रहे हैं।

चांदी और सोने के ताजा भाव क्या हैं?

ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, सफेद धातु (चांदी) की कीमत 1,500 रुपये या 0.54 प्रतिशत उछलकर 2,76,500 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी करों सहित) हो गई है। गौरतलब है कि इससे पहले बुधवार को चांदी 4,275 रुपये की भारी गिरावट के साथ 2,75,000 रुपये पर बंद हुई थी। इसके विपरीत, 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत 400 रुपये गिरकर 1,65,200 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी करों सहित) पर आ गई। पिछले कारोबारी सत्र में यह 1,65,600 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था, जिसके साथ ही सोने की तीन दिवसीय रैली समाप्त हो गई।

सोने और चांदी की कीमतों में उल्टी चाल का क्या कारण है?

बाजार विश्लेषकों का मानना है कि निवेशक मौजूदा भू-राजनीतिक घटनाक्रमों और अमेरिकी मैक्रोइकोनॉमिक संकेतों का बारीकी से आकलन कर रहे हैं। लेमन मार्केट्स डेस्क के रिसर्च एनालिस्ट गौरव गर्ग के अनुसार, “मजबूत डॉलर और महंगाई की चिंताओं के कारण सोने में मामूली गिरावट आई है। दूसरी ओर, अमेरिका-ईरान तनाव के बीच ट्रेडर्स को चांदी में खरीदारी के बेहतरीन अवसर दिख रहे हैं, जिससे इसमें मजबूती बनी हुई है।” अंतरराष्ट्रीय बाजार की बात करें तो, हाजिर चांदी 1.25 डॉलर (1.47%) की शानदार बढ़त के साथ 86.99 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। वहीं, हाजिर सोना मामूली बढ़त के साथ 5,178.45 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखा।

बाजार को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारण क्या हैं?


  • कच्चे तेल से सीधा कनेक्शन: मिराए एसेट शेयरखान के रिसर्च एनालिस्ट प्रवीण सिंह ने बताया कि हाजिर सोना कच्चे तेल की कीमतों के विपरीत 5,100-5,250 डॉलर प्रति औंस के संकीर्ण दायरे में कारोबार कर रहा है। ईरान ने चेतावनी दी है कि फारस की खाड़ी में व्यापारिक जहाजों पर हमलों और बढ़ते तनाव के कारण कच्चा तेल 200 डॉलर प्रति बैरल के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकता है।

  • महंगाई और मजबूत डॉलर: एचडीएफसी सिक्योरिटीज के सीनियर एनालिस्ट (कमोडिटीज) सौमिल गांधी के मुताबिक, अमेरिका के हालिया उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) में मध्य पूर्व संकट के बाद ईंधन की बढ़ती लागत का पूरा असर अभी तक प्रतिबिंबित नहीं हुआ है। ऊर्जा की बढ़ती कीमतों और मजबूत आर्थिक आंकड़ों ने अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और डॉलर को समर्थन दिया है, जिससे कीमती धातुओं पर दबाव बना है।

सर्राफा बाजार में आगे क्या हो सकता है?

बढ़ती कीमतों के दबाव के कारण प्रमुख केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती को लेकर सतर्क रुख अपना सकते हैं। एलकेपी सिक्योरिटीज के वीपी रिसर्च एनालिस्ट जतिन त्रिवेदी के अनुसार, अब निवेशकों की नजर शुक्रवार को जारी होने वाले अमेरिकी ‘कोर पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर’ (पीसीई) प्राइस इंडेक्स और जीडीपी के आंकड़ों पर टिकी है। ये आंकड़े अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों की भविष्य की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।





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