भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के नवीनतम बुलेटिन के अनुसार, भारत वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बावजूद सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक बना हुआ है। देश ने जून 2026 तक अपनी आर्थिक गतिविधियों की गति को सफलतापूर्वक बनाए रखा है। औद्योगिक और सेवा क्षेत्र के संकेतक लगातार मजबूत बने हुए हैं। यह वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत की दृढ़ता को दर्शाता है।
आरबीआई ने बुलेटिन में बताया कि वैश्विक अर्थव्यवस्था अनिश्चित आर्थिक माहौल, आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं और खंडित व्यापारिक संबंधों से जूझ रही है। इन चुनौतियों के बावजूद, भारत ने अपनी आर्थिक गतिविधियों की गति को बनाए रखा है। बुलेटिन के अनुसार, कृषि क्षेत्र में दक्षिण-पश्चिम मानसून में असमानता देखी जा रही है। हालांकि, पर्याप्त खाद्यान्न भंडार से खाद्य मुद्रास्फीति पर पड़ने वाले प्रभाव को कम किया जा सकता है।
केंद्रीय बैंक ने यह भी बताया कि 2026-27 की पहली तिमाही के दौरान बाह्य व्यापार में गति मजबूत बनी रही। यह निर्यात और आयात दोनों में उच्च वृद्धि से परिलक्षित होता है। हाल ही में भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते के संचालन से इस गति को और मजबूती मिलने की संभावना है। अन्य द्विपक्षीय व्यापार समझौतों में प्रगति भी सहायक होगी। बुलेटिन में कहा गया है कि भारत के लिए बाह्य संकेतक मजबूत बने हुए हैं। हाल के महीनों में विदेशी निवेश में सुधार देश की अर्थव्यवस्था में विश्वास की बहाली का संकेत देता है।
क्या वैश्विक अर्थव्यवस्था चुनौतियों से घिरी है?
आरबीआई ने वैश्विक मोर्चे पर कहा कि विश्व अर्थव्यवस्था उच्च अनिश्चितता के एक अशांत दौर से गुजर रही है। पश्चिम एशिया में संघर्ष विराम वार्ता के टूटने से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला नेटवर्क एक बार फिर बाधित हुआ है। इससे नाजुक सुधारों को झटका लगा है। हालांकि, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और तकनीकी परिवर्तन से जुड़े निवेश वैश्विक अर्थव्यवस्था को समर्थन देना जारी रखे हुए हैं। जून तक पश्चिम एशिया में तनाव कम होने से वित्तीय बाजारों और कारोबारी भावना को स्थिर करने में मदद मिली थी। लेकिन यह शांति अल्पकालिक साबित हुई। जुलाई की शुरुआत में शांति व्यवस्था के पतन ने वैश्विक व्यापार और मुद्रास्फीति के जोखिमों के दृष्टिकोण को फिर से अनिश्चितता के क्षेत्र में धकेल दिया है।
भारत ने कैसे दिखाई है अपनी मजबूती?
भारतीय रिजर्व बैंक ने आगे कहा कि वैश्विक स्तर पर, वृद्धि के दृष्टिकोण के लिए जोखिम नकारात्मक पक्ष की ओर झुका हुआ है। यह पश्चिम एशिया में नए सिरे से तनाव की संभावना के कारण है। वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में व्यवधान और लगातार मुद्रास्फीति का दबाव भी इसमें शामिल है। इन वैश्विक प्रतिकूलताओं के बावजूद, बुलेटिन में कहा गया है कि भारत ने लचीलापन दिखाना जारी रखा है। यह स्थिर आर्थिक गतिविधि, मजबूत औद्योगिक और सेवा क्षेत्र के प्रदर्शन से समर्थित है। स्वस्थ बाह्य क्षेत्र के संकेतक और विदेशी निवेश प्रवाह में सुधार भी इसमें योगदान दे रहे हैं। भारत अपनी आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में सफल रहा है।
क्या भारत की आर्थिक वृद्धि जारी रहेगी?
भारत की अर्थव्यवस्था ने वैश्विक चुनौतियों के बावजूद अपनी वृद्धि की गति को बनाए रखा है। औद्योगिक और सेवा क्षेत्रों में लगातार मजबूती देखी जा रही है। बाह्य व्यापार में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। विदेशी निवेश में सुधार से देश की आर्थिक संभावनाओं पर विश्वास बढ़ा है। हालांकि, कृषि क्षेत्र में मानसून की असमानता पर नजर रखनी होगी। खाद्यान्न भंडार से खाद्य मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौता और अन्य द्विपक्षीय समझौते व्यापार को और बढ़ावा देंगे।



