भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को लगातार गिरावट जारी रही। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान में खुले। पश्चिम एशिया में संघर्ष बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतें 92 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गईं। इस वैश्विक घटनाक्रम का असर घरेलू बाजार पर साफ दिखा।
शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 362.47 अंक गिरकर 77,107.64 पर पहुंच गया। वहीं, निफ्टी 90.96 अंक की गिरावट के साथ 24,096.75 पर आ गया। इंडिगो और सन फार्मा के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों की धारणा पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों और कच्चे तेल की कीमतों की दिशा से करीब से जुड़ी रहेगी। 22 जुलाई 2026 को सुबह 09:37 बजे बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 599.28 अंकों की गिरावट के साथ 76,870.83 पर कारोबार कर रहा था। यह 0.77 फीसदी की कमी दर्शाता है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 163.61 अंक नीचे आया। निफ्टी 24,024.10 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। इसमें 0.68 फीसदी की गिरावट देखी गई। ऐसे में शुरुआती कारोबार में निवेशकों के बीच बिकवाली का दबाव दिखा।
बाजार क्यों गिरा?
बाजार में गिरावट का मुख्य कारण पश्चिम एशिया में बढ़ता संघर्ष है। इस संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतें 92 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं। विश्लेषकों का मानना है कि भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। कमजोर रुपया भी बाजार पर दबाव डाल रहा है। विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार बिकवाली भी एक बड़ा कारण है।
आगे बाजार कैसा रहेगा?
विश्लेषकों को उम्मीद है कि बाजार सीमित दायरे में रहेगा। पश्चिम एशिया में लगातार भू-राजनीतिक तनाव बना हुआ है। ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल के करीब मंडरा रही हैं। कमजोर रुपया और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार बिकवाली जारी है। वैश्विक स्तर पर मिले-जुले संकेत भी बाजार को प्रभावित कर रहे हैं।
वैश्विक बाजारों का क्या हाल है?
टोक्यो समय के अनुसार सुबह 11:50 बजे तक एसएंडपी 500 वायदा में थोड़ा बदलाव देखा गया। जापान का टॉपिक्स सूचकांक 1.3 फीसदी बढ़ा। ऑस्ट्रेलिया का एसएंडपी/एएसएक्स 200 सूचकांक 0.2 फीसदी ऊपर रहा। हांगकांग का हेंगसेंग सूचकांक 0.7 फीसदी गिर गया। शंघाई कंपोजिट सूचकांक में 0.3 फीसदी की वृद्धि हुई। यूरो स्टॉक्स 50 वायदा 0.2 फीसदी बढ़ा।



