भारत को एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग और आपूर्ति शृंखला का एक प्रमुख वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में सरकार ने कदम तेज कर दिए हैं। बुधवार को केंद्रीय वाणिज्य व उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने एयरबस इंडिया और दक्षिण एशिया के अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक जुर्गन वेस्टरमीयर के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस चर्चा का मुख्य फोकस भारत में विमानन से जुड़ी क्षमताओं और एमआरओ (रखरखाव, मरम्मत और संचालन) का विस्तार कर देश को एक ग्लोबल एविएशन हब के रूप में स्थापित करना है।
बैठक के प्रमुख बिंदु और लक्ष्य
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने इसे एक बेहद उत्पादक बैठक करार दिया। इस उच्च स्तरीय चर्चा के मुख्य एजेंडे में निम्नलिखित बिंदु शामिल रहे:
- सोर्सिंग और सप्लाई चेन: भारत से विमानन उपकरणों की सोर्सिंग को मजबूत करना और आपूर्ति शृंखलाओं को बड़े पैमाने पर बढ़ाना।
- मैन्युफैक्चरिंग और एमआरओ: देश में एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग को आगे बढ़ाना और एमआरओ क्षमताओं को बेहतर करना।
- कौशल विकास: विमानन क्षेत्र की जरूरतों के अनुसार स्किल डेवलपमेंट (कौशल विकास) की पहलों को और गहरा करना।
विदेशी कंपनियों के लिए आकर्षक गंतव्य बना भारत
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत एयरोस्पेस क्षेत्र में अधिक स्थानीयकरण पर जोर दे रहा है और खुद को विमान तथा उसके कलपुर्जों के उत्पादन के लिए एक प्रमुख वैश्विक हब के रूप में उभारने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। इसके साथ ही, दुनिया भर की एयरोस्पेस कंपनियां भू-राजनीतिक कारणों से अपनी आपूर्ति शृंखलाओं का विविधीकरण कर रही हैं और एक स्थिर सोर्सिंग व मैन्युफैक्चरिंग डेस्टिनेशन के रूप में भारत की ओर देख रही हैं।
भारतीय सप्लायर्स के लिए वैश्विक स्तर पर रनवे
एयरबस इंडिया के प्रमुख वेस्टरमीयर इससे पहले भी भारतीय आपूर्ति शृंखला को लेकर अपना सकारात्मक रुख स्पष्ट कर चुके हैं। इस साल की शुरुआत में, उन्होंने भारत और अमेरिका के बीच एक अंतरिम द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) के प्रस्तावित ढांचे का स्वागत किया था।
वेस्टरमीयर ने कहा था कि यह समझौता केवल टैरिफ कम करने के बारे में नहीं है, बल्कि यह “भारतीय आपूर्तिकर्ताओं के लिए वैश्विक स्तर पर विस्तार करने के लिए एक रनवे साफ करने जैसा है”। उनके अनुसार, इस तरह के ढांचे से विदेशी मूल उपकरण निर्माताओं (ओईएम) को अपनी सोर्सिंग रणनीतियों में विविधता लाने में मदद मिलेगी। इससे भारतीय सप्लायर्स वैश्विक एयरोस्पेस इकोसिस्टम के साथ बेहतर तरीके से जुड़ सकेंगे।
एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग एक पूंजी-प्रधान क्षेत्र है, जहां निरंतर विकास के लिए टैरिफ में निश्चितता और नीतियों में स्थिरता बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। पीयूष गोयल और एयरबस नेतृत्व के बीच हुई यह सकारात्मक वार्ता इस बात का स्पष्ट संकेत है कि भारत वैश्विक विमानन आपूर्ति श्रृंखला में अधिक निर्बाध रूप से एकीकृत होने और वैश्विक उत्पादन हब के रूप में अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए पूरी तरह से तैयार है।



