भारत में खेल क्षेत्र से जुड़े नवाचार और विनिर्माण को नई रफ्तार देने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को घोषणा की है कि खेल क्षेत्र से जुड़े बौद्धिक संपदा अधिकारों (आईपीआर) जैसे पेटेंट, ट्रेडमार्क और डिजाइन के लिए आवेदन शुल्क को तीन साल के लिए पूरी तरह से माफ कर दिया जाएगा। सरकार का यह फैसला खेल उद्योग में व्यवसायीकरण और बौद्धिक संपदा के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है।
फैसले के मायने और वर्तमान शुल्क व्यवस्था
पेटेंट, डिजाइन और ट्रेडमार्क महानियंत्रक कार्यालय द्वारा इस संबंध में जल्द ही एक आधिकारिक अधिसूचना जारी की जाएगी। वाणिज्य मंत्री के अनुसार, अब खेल से जुड़े किसी भी ट्रेडमार्क, कॉपीराइट, पेटेंट, डिजाइन, पारंपरिक ज्ञान या जीआई उत्पाद के पंजीकरण पर अगले तीन वर्षों तक कोई आवेदन शुल्क नहीं लगेगा। वर्तमान में यह शुल्क आवेदक की श्रेणी (जैसे- व्यक्ति, स्टार्टअप, छोटी या बड़ी कंपनी) के आधार पर 500 रुपये से लेकर 60,000 रुपये तक होता है। हालांकि, सरकार पहले से ही स्टार्टअप्स और व्यक्तियों को इसमें छूट प्रदान करती है, लेकिन खेल क्षेत्र के लिए की गई यह विशेष 100 प्रतिशत छूट उद्योग-व्यापी निवेश को प्रोत्साहित करेगी। यह घोषणा वाणिज्य मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले डीपीआईआईटी और उद्योग निकाय फिक्की द्वारा आयोजित ‘वर्ल्ड आईपी डे 2026’ कार्यक्रम के दौरान की गई।
लीग की ब्रांडिंग और स्थानीय विनिर्माण पर फोकस
वाणिज्य मंत्री ने खेल लीगों को अपने ट्रेडमार्क पंजीकृत कराने का विशेष सुझाव दिया है, जिससे उन्हें भविष्य में बेहतर मीडिया अधिकार प्राप्त करने और अपने उत्पादों की फ्रेंचाइजी देने में आसानी होगी। इसके साथ ही सरकार का मुख्य ध्यान देश में हॉकी स्टिक, गेंद और जिम उपकरण जैसे खेल सामानों के स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा देने पर है। आयात को कम करने और खेल उत्पाद निर्माण के स्थानीय क्लस्टर्स को बड़े पैमाने पर विकसित करने के लिए सरकार विशेष समर्थन उपाय तैयार करने पर भी विचार कर रही है। इसमें डीपीआईआईटी की वह योजना भी मददगार साबित होगी जिसके तहत आवेदकों को आईपी इकोसिस्टम का हिस्सा बनने और पंजीकरण के लिए पूरी सहायता प्रदान की जाती है।
कश्मीर को विशेष प्रोत्साहन और आगे की राह
स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा देने की इस मुहिम में सरकार ने जम्मू-कश्मीर को भी विशेष रूप से खेल उत्पादों के निर्माण पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रोत्साहित किया है। गौरतलब है कि कश्मीर के मशहूर ‘विलो बैट’ को पहले ही भौगोलिक संकेत (जीआई) प्रमाणन प्राप्त हो चुका है। इस कार्यक्रम के दौरान मंत्री गोयल ने छह दशकों से अधिक समय में पहली बार रणजी ट्रॉफी जीतने वाली जम्मू-कश्मीर क्रिकेट टीम को भी सम्मानित किया, जिसने पारस डोगरा के नेतृत्व में शानदार प्रदर्शन करते हुए यह खिताबी जीत हासिल की थी। कुल मिलाकर, तीन साल के लिए आवेदन शुल्क माफी का यह कदम खेल उपकरण निर्माताओं और नवोन्मेषकों के लिए एक नए और आत्मनिर्भर इकोसिस्टम का निर्माण करेगा, जिसके परिणामों की तीन साल बाद मंत्रालय द्वारा विस्तृत समीक्षा की जाएगी।



