भारतीय शेयर बाजार के लिए बुधवार का दिन काफी अच्छा रहा। बीएसई में सूचीबद्ध सभी कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण यानी मार्केट कैप 5 ट्रिलियन डॉलर के स्तर को पार कर गया। लगभग छह सप्ताह के बाद बाजार इस ऊंचे स्तर पर पहुंचा है। भू राजनीतिक तनाव में कमी और कच्चे तेल के दामों में गिरावट के चलते बाजार में तेजी देखने को मिली है।
पिछले कुछ दिनों से बाजार में मजबूती की स्थिति बनी हुई है। अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते को लेकर चल रही पहल और तेल की कीमतों में कमी से निवेशकों का भरोसा लौटा है। विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में अस्थिरता कम होने से अब लोग निवेश करने में जोखिम उठा रहे हैं। इसके अलावा, पिछले चार कारोबारी सत्रों में बीएसई-लिस्टेड कंपनियों के मार्केट वैल्यू में 6 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है।
बड़ी कंपनियों से ज्यादा छोटे शेयरों में तेजी
बाजार के मुख्य सूचकांकों की तुलना में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया है। अप्रैल महीने से अब तक सेंसेक्स में सीमित बढ़त रही है लेकिन छोटे और मझोले शेयरों ने निवेशकों को मजबूत रिटर्न दिया है। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने से भारतीय अर्थव्यवस्था को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
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विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली के बाद भी घरेलू निवेशकों के दम पर बाजार टिका हुआ है। यदि आगे विदेशी निवेश बढ़ता है तो बाजार और भी नई ऊंचाइयों को छू सकता है। भारत की मजबूत विकास दर और कंपनियों की बेहतर आर्थिक स्थिति भी बाजार को सहारा दे रही है। पिछले कुछ समय में कंपनियों का कर्ज कम हुआ है और उनके पास नकदी का प्रवाह बढ़ा है।
बुधवार को सेंसेक्स और निफ्टी का हाल
बुधवार को कारोबार के दौरान सेंसेक्स और निफ्टी दोनों हरे निशान पर थे। 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 0.53 प्रतिशत की बढ़त के साथ 77,219 के स्तर पर पहुंच गया। इसी तरह निफ्टी भी 100 अंकों से अधिक चढ़कर 24,108 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। पिछले तीन दिनों में सेंसेक्स में 2 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई है। विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में बैंकिंग, आईटी और टेलीकाम सेक्टर बाजार को और ऊपर ले जा सकते हैं।



