ऋण बाजार की सूरत बदलने के लिए सेबी एक बड़ा तकनीकी सुधार करने जा रहा है। सेबी ने कॉरपोरेट बॉन्ड्स के कारोबार और उसके सेटलमेंट को तेज व सुरक्षित बनाने के लिए डिजिटल लेजर टेक्नोलॉजी (डीएलटी) पर आधारित टोकनाइजेशन का पायलट प्रोजेक्ट लॉन्च करने का फैसला किया है। सेबी प्रमुख तुहिन कांत पांडेय के अनुसार, इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को जमीन पर उतारने में 6 से 9 महीने का समय लगेगा। उन्होंने निवेशकों को इसके जोखिम के प्रति भी आगाह किया। भारत में बॉन्ड्स की खरीद बिक्री बहुत कम होती है। तरलता कम होने के कारण निवेशकों के लिए समय से पहले बाजार से सुरक्षित बाहर निकलना काफी कठिन हो जाता है।
क्या होता है टोकनाइजेशन?
इसका मतलब वित्तीय प्रतिभूतियों को ब्लॉकचेन या डिजिटल लेजर इंफ्रास्ट्रक्चर पर डिजिटल टोकन के रूप में बदलना है। जब किसी बॉन्ड को टोकन का रूप दिया जाता है, तो उसका सेटलमेंट तुरंत और पूरी तरह स्वचालित हो जाता है। इसके जरिये बॉन्ड्स के छोटे हिस्से बेचे जा सकते हैं।



