केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 22 जून 2026, सोमवार को बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने अनिल अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (आरसीएफएल) और रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (आरएचएफएल) के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी सार्वजनिक क्षेत्र के कई बैंकों में कथित 7,623 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी से जुड़े अलग-अलग मामलों में हुई है। इस मामले ने वित्तीय क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है।
सीबीआई ने आरसीएफएल के पूर्व निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी देबांग मोदी को हिरासत में लिया है। इसके साथ ही आरएचएफएल के पूर्व कार्यकारी निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी रविंद्र सुधाकर को भी गिरफ्तार किया गया है। सीबीआई के एक प्रवक्ता ने बताया कि आरसीएफएल मामले में 13 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को 4,097 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
वहीं, आरएचएफएल मामले में 10 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को 3,526 करोड़ रुपये की हानि हुई है। जांच में सामने आया है कि मोदी अप्रैल 2017 से दिसंबर 2018 तक आरसीएफएल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी थे। सुधाकर 1 अक्तूबर 2016 से 31 मार्च 2022 तक आरएचएफएल के कार्यकारी निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी के पद पर रहे। एजेंसी का आरोप है कि इन अधिकारियों ने उधार लिए गए धन को रिलायंस एडीए समूह की कंपनियों में मोड़ा। इससे बैंकों को कुल 7,623 करोड़ रुपये का गलत नुकसान हुआ।
क्या है पूरा मामला और आरोप?
सीबीआई की जांच से पता चला है कि देबांग मोदी आरसीएफएल के संचालन के लिए एक प्रमुख निर्णय लेने वाले अधिकारी थे। उन्होंने बिचौलिया और माध्यम कंपनियों को ऋण स्वीकृत किए। उन्हें पता था कि यह भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के दिशानिर्देशों और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से उधार लेने की शर्तों के विपरीत था। रविंद्र सुधाकर पर भी इसी तरह के आरोप हैं। उन्होंने भी बिचौलिया और माध्यम कंपनियों को ऋण दिए। यह कंपनी की ऋण नीतियों, राष्ट्रीय आवास बैंक (एनएचबी) और आरबीआई के दिशानिर्देशों के खिलाफ था।
धन का हेरफेर कैसे किया गया?
एजेंसी का आरोप है कि गिरफ्तार अधिकारियों ने आरसीएफएल और आरएचएफएल द्वारा उधार लिए गए धन को रिलायंस एडीए समूह की कंपनियों में मोड़ दिया। इन कंपनियों में रिलायंस कैपिटल लिमिटेड, रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और रिलायंस पावर लिमिटेड शामिल हैं। इस तरह उन्होंने ऋण देने वाले बैंकों को भारी नुकसान पहुंचाया। साथ ही, स्वयं और संबंधित संस्थाओं को गलत लाभ पहुंचाया। यह वित्तीय अनियमितता का एक गंभीर मामला है।
अब तक की कार्रवाई क्या है?
सीबीआई ने इस मामले में रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (आरकॉम), आरएचएफएल, आरसीएफएल और रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड (आरटीएल) के खिलाफ सात प्राथमिकियां दर्ज की हैं। ये प्राथमिकियां विभिन्न सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) से मिली शिकायतों पर आधारित हैं। एजेंसी ने रिलायंस एडीए समूह से जुड़े मामलों में कुल पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। सीबीआई ने 29 मई 2026 को आरकॉम मामले में अपना पहला आरोपपत्र दाखिल किया था। इसमें कंपनी, आरकॉम के पांच वरिष्ठ अधिकारी और 10 बैंक अधिकारी सहित 16 आरोपी शामिल थे।



