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DGCA: दावा- डीजीसीए को हितों के टकराव और परिवार के लोगों को नौकरी दिलाने के मामलों पर फटकार, जानें क्या अपडेट


भारत सरकार ने अपने विमानन सुरक्षा नियामक, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) को कड़ी फटकार लगाई है। यह फटकार अधिकारियों द्वारा परिवार के सदस्यों को विमानन क्षेत्र में नौकरी दिलाने के लिए अपने प्रभाव का उपयोग करने और ऐसी नियुक्तियों का खुलासा करने में देरी के कारण लगाई गई है। रॉयटर्स ने सरकारी दस्तावेजों के हवाले से एक रिपोर्ट में यह दावा किया है।

नागरिक उड्डयन मंत्रालय 2025 के मध्य से ही डीजीसीए के हितों के टकराव से निपटने पर सवाल उठा रहा है। इसमें एयर इंडिया से जुड़ा एक मामला भी शामिल है। डीजीसीए के लिए यह एक महत्वपूर्ण समय है, क्योंकि यह दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते विमानन बाजारों में से एक की निगरानी करता है। एयर इंडिया ड्रीमलाइनर दुर्घटना, सुरक्षा चूक और इंडिगो में व्यवधान के बाद डीजीसीए कड़ी जांच के दायरे में है। 

डीजीसीए कर्मचारियों की कमी से भी जूझ रहा है। एक जनवरी 2026 के डीजीसीए दस्तावेज में मंत्रालय ने अपनी चिंताएं जाहिर की थीं। डीजीसीए अपने अधिकारियों द्वारा रिश्तेदारों की भर्ती या नियुक्ति में डाले गए संभावित प्रभाव को रोकने में विफल रहा है। इस साल 31 जनवरी तक 51 डीजीसीए अधिकारियों ने विमानन क्षेत्र में काम कर रहे अपने 59 रिश्तेदारों का खुलासा किया है। एक साल पहले यह संख्या 33 अधिकारियों के 41 रिश्तेदारों की थी। ये रिश्तेदार इंडिगो, एयर इंडिया, अकासा एयर, एयरबस इंडिया और फ्लाइंग स्कूल व एयरपोर्ट ऑपरेटरों में कार्यरत हैं।

क्या डीजीसीए अधिकारियों ने अपने प्रभाव का दुरुपयोग किया?

मंत्रालय चिंतित है कि डीजीसीए अधिकारी रिश्तेदारों की नौकरियों का खुलासा करना रोक सकते हैं। इससे वे उन एयरलाइंस की नियामक जांच नरम कर सकते हैं जिनकी वे निगरानी करते हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि एक डीजीसीए अधिकारी के करीब 12 रिश्तेदार विमानन क्षेत्र में कार्यरत पाए गए थे। मंत्रालय को इस बारे में अधिकारी की सेवानिवृत्ति के बाद ही पता चला। भारतीय नियम संघीय कर्मचारियों को परिवार के सदस्यों के लिए पद का उपयोग कर नौकरी सुरक्षित करने से रोकते हैं।

क्या मंत्रालय ने डीजीसीए के प्रस्तावों को खारिज किया और पारदर्शिता की कमी है?

तत्कालीन डीजीसीए प्रमुख फैज अहमद किदवई ने जुलाई 2025 में हितों के टकराव के मामलों को आंतरिक रूप से संभालने हेतु अधिक शक्तियों की मांग की थी। उन्होंने तर्क दिया था कि मंत्रालय की मंजूरी प्रक्रिया से प्रशासनिक देरी होती है। हालांकि, मंत्रालय ने इस अनुरोध को अस्वीकार कर दिया। मंत्रालय ने कहा कि देरी या मंजूरी की कमी की जिम्मेदारी तय करने में डीजीसीए की अक्षमता चिंताजनक है। एक डीजीसीए सहायक निदेशक (इंजीनियरिंग) से उनकी बहन की एयर इंडिया में नौकरी को लेकर सवाल किया गया था।



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