भारत में नेचुरल डायमंड यानी प्राकृतिक हीरो के आभूषणों का बाजार में मजबूत वृद्धि हो रही है और भारत अमेरिका के बाद विश्व का दूसरा सबसे बड़ा हीरा आभूषण का बाजार बन गया है। भारत में हीरा आभूषण की मांग सालाना आधार पर 12 प्रतिशत देखने को मिल रही है, जो कि 2019 में 10 प्रतिशत थी। हीरो के आभूषणों की मांग विशेषकर महिलाओं और युवा वर्ग में देखी जा रही है। अनुमान है कि यह बाजार 2030 तक 12 प्रतिशत की मजबूत सीएजीआर से बढ़कर 1,520 बिलियन रुपये तक पहुंच जाएगा।
महिलाओं, मिलेनियल्स और जेन जेड में हीरों के आभूषण मांग बढ़ी
डी बीयर्स इंडिया की कंट्री हेड कैटेगरी मार्केटिंग तोरंज मेहता ने अमर उजाला डॉटकॉम से बातचीत में बताया, पिछले कुछ वर्षों में भारतीय बाजारों में हीरों के आभूषणों की मांग बढ़ी है, और भारत ने अमेरिका, चीन और जापान जैसे देशों को पीछे छोड़ते हुए वैश्विक हीरे के आभूषणों की मांग 12 प्रतिशत का योगदान दे रहा है।उनका कहना है कि भारतीय महिलाओं में नेचुरल डायमंड के आभूषण की मांग बढ़ी है। 100 महिलाओं में 15 प्रतिशत हीरे के आभूषणों की खरीदारी करती हैं। जबकि अमेरिका में 100 में 70 प्रतिशत लोग हीरों के आभूषण की खरीदारी करते हैं। हमारा मानना है, पिछले कुछ वर्षों में भारत में हीरों के प्रति आकर्षण बढ़ा है। जिसमें महिलाओं के साथ युवा उपभोक्ताओं और इनमें भी मिलेनियल्स और जेन जेड अब भारत के नेचुरल हीरा बाजार मूल्य का 86 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं।
भारतीय बाजार में बड़ी संभावना
हम इन्ही संभावनाओं को देखते हुए भारतीय बाजार में फोकस कर रहे हैं। जिसके लिए हमने बड़े ब्रांड के साथ करार कर भारत में हीरे के आभूषणों की बिक्री को बढ़ावा दिया है। दूसरा हम जेम्स एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के साथ मिलकर भारतीय बाजार में छोटे ज्वेलर्स तक पहुंच बना रहे है। जिसमें उनका हीरे के आभूषणों की बिक्री बढ़ाने के साथ ही हीरे के आभूषणों को बनाने, नई तनकनीकों से जोड़ने का काम कर रहे हैं। डीबीयर्स इंडिया डायमंड की एक रिपोर्ट बताती है कि, यह युवा वर्ग हीरों को व्यक्तिव, प्रमाणिकता और भावनात्मक रूप से देखता हैं और उपभोक्ता प्रति हीरा औसतन 198,000 रुपये खर्च करते हैं। रिपोर्ट का अनुमान है कि यह बाजार 2030 तक 12 प्रतिशत की मजबूत सीएजीआर से बढ़कर 1,520 बिलियन रुपये तक पहुंच जाएगा।
ब्रांडेड आभूषण विक्रेताओं की हीरों की कैटेगरी ने किया अच्छा प्रदर्शन
हाल ही में कई ब्रांडेड आभूषण विक्रेताओं ने अपनी अक्षय तृतिया की बिक्री में हीरों के आभूषणों की कैटेगरी में अच्छी वृद्धि देखी। पीनए गाडगिल ने बताया कि था उसने हीरे के सेगमेंट में साल दर साल 61 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वहीं मालाबार गोल्ड एंड डायमंड ने अक्षय तृतिया 2026 में बिक्री में उछाल देखा है। जिसमें जड़े हुए आभूषण में 45 प्रतिशत की वृद्धि रही।
सोने की बढ़ती कीमतों ने भी बढ़ाई फैशनेबल हल्के हीरों के आभूषणों की मांग
मुंबई के शृंगार हाउस ऑफ मंगलसूत्र लिमिटेड के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर, चेतन थडेश्वर बताते हैं, पिछले दो वर्षों में सोने की कीमतों में तेज बढ़ोतरी ने अलग-अलग कस्टमर सेगमेंट में ज्वेलरी खरीदने के तरीके पर बहुत असर डाला है। हालांकि सोने का पारंपरिक महत्व बना हुआ है, लेकिन उपभोक्ता अब बजट पर अधिक ध्यान दे रहे हैं और ऐसे डिजाइन ढूंढ रहे हैं जो लुक या क्वालिटी से समझौता किए बिना अधिक वैल्यू दें सके। इस वजह से, हल्के आभूषण की मांग में वृद्धि देख रहे हैं। विशेषकर मंगलसूत्र, चेन और प्रतिदिन पहनने वाले प्रोडक्ट जैसी कैटेगरी में, जहां उपभोक्ता अधिक कीमतों के बावजूद सोना खरीदना जारी रख सकते हैं। खरीदारी को पूरी तरह टालने के बजाय, कई खरीदार कम वजन वाले, डिजाइन वाले पीस चुन रहे हैं जो उनकी खर्च करने की क्षमता के हिसाब से हों। हम कम कैरेट की सोने की ज्वेलरी की बढ़ती डिमांड भी देख रहे हैं, खासकर युवा कस्टमर के बीच जो किफ़ायती, स्टाइल और रोज़ाना पहनने लायक चीज़ों के बीच बैलेंस चाहते हैं।
हीरे की आपूर्ति में कमी ने हीरों की कीमतों में वृद्धि की
उद्योग जगत के जानकारों का कहना है कि तीन साल तक कीमतों में ठहराव के बाद नेचुरल अथवा प्राकृतिक हीरों की चमक फिर से लौट आई है । प्रमुख खननकर्ताओं द्वारा आपूर्ति में कमी और निवेशकों की बढ़ती रुचि के कारण प्राकृतिक हीरों की कीमतों में सालाना आधार पर 5 से 8 प्रतिशत का उछाल आया है। उन्होंने बताया कि सॉलिटेयर हीरों की कीमतें सालाना आधार पर 5-8 प्रतिशत बढ़ी हैं और एक कैरेट का प्राकृतिक हीरा लगभग 1.85 लाख रुपये में बिक रहा है, जबकि छोटे आकार के हीरों पर कृत्रिम हीरों के मुकाबले कीमतों को लेकर भारी दबाव बना हुआ है।
कामा ज्वैलरी के प्रबंध निदेशक कॉलिन शाह ने कहा कि निवेशक सॉलिटेयर हीरे अब एक मूल्यवान संपत्ति के रूप में देखे जा रहे हैं, और युवा पीढ़ी, जैसे कि जेनरेशन जेड और मिलेनियल्स, इनकी मांग में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। इनकी दुर्लभता के कारण इन्हें आकांक्षात्मक मूल्य और निवेश क्षमता दोनों के लिए देखा जा रहा है। भारत इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, जो अब वैश्विक हीरे की मांग के मूल्य का 12 प्रतिशह हिस्सा है। जानकारों का कहना है, पिंक डायमंड लुप्त हो चुके हैं, वहीं गोल्कुडा में मिलने वाले हीरे भी कम उपल्ब्ध हैं। पिछले 20 वर्षों में हीरों का मिलना बहुत कम हो चुका है। यदि भारत में मांग 25 प्रतिशत तक बढ़ती है, तो हीरे समाप्ति को ओर बढ़ सकते हैं।



