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Volkswagen Layoffs: फॉक्सवैगन में 89 साल के सबसे बड़े बदलाव की तैयारी; एक लाख नौकरियों पर खतरा, समझें माजरा


दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी फॉक्सवैगन अपने 89 साल के इतिहास के सबसे बड़े बदलाव से गुजरने की तैयारी कर रही है। ‘मैनेजर मैगजीन’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) ओलिवर ब्लूम एक लाख कर्मचारियों की छंटनी और जर्मनी में चार कारखानों (प्लांट) को बंद करने की योजना बना रहे हैं। चीन की ऑटो कंपनियों से मिल रही कड़ी प्रतिस्पर्धा, बढ़ते आयात शुल्क (टैरिफ) और इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) पर हो रहे भारी खर्च के वित्तीय दबाव के कारण कंपनी की कमाई प्रभावित हुई है, जिससे निपटने के लिए यह सख्त कदम उठाया जा रहा है।

कंपनी की इस बड़ी छंटनी और रीस्ट्रक्चरिंग का मुख्य प्लान क्या है?

सीईओ ओलिवर ब्लूम और मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीईओ) अर्नो एंट्लिट्ज कंपनी के पूरे ढांचे को बुनियादी तौर पर बदलने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। 


  • पुनर्गठन: इस योजना के तहत मुख्य फॉक्सवैगन ब्रांड और इसके पार्ट्स के संचालन को अलग-अलग संस्थाओं (एंटीटी) के रूप में बांटा जाएगा। 

  • निवेश में कटौती: अगले पांच वर्षों में कंपनी अपने नियोजित निवेश में करीब 15% की कटौती करेगी, जो घटकर 130 अरब यूरो (148 अरब डॉलर) रह जाएगा। 

  • नौकरियों पर असर: वित्तीय वर्ष 2025 में कंपनी का कुल वैश्विक वर्कफोर्स 667,164 था, जिसमें से लगभग 43% कर्मचारी जर्मनी में कार्यरत हैं। नई योजना के तहत कुल कार्यबल के करीब 15% यानी लगभग 1 लाख नौकरियों में कटौती की जाएगी।

  • प्लांट बंदी: मध्यम अवधि में हनोवर, ज्विकाऊ, एम्डेन और ऑडी के नेकरसुलम प्लांट में मौजूदा मॉडलों का उत्पादन खत्म होने के बाद उन्हें बंद करने का प्रस्ताव है।

क्या कर्मचारी और लेबर यूनियन इस फैसले का विरोध कर रहे हैं?

हां, कंपनी के इस फैसले का कड़ा विरोध शुरू हो गया है। फॉक्सवैगन वर्क्स काउंसिल और जर्मनी की शक्तिशाली लेबर यूनियन ‘आईजी मेटाल’ ने शुक्रवार को एक संयुक्त बयान में चेतावनी दी कि यदि ऐसी योजनाएं आगे बढ़ती हैं, तो वे उन्हें रोकने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा देंगे। यह विवाद इसलिए भी अहम है क्योंकि 2024 में यूनियनों के साथ हुए एक समझौते में इस दशक में जर्मनी के अंदर प्लांट बंद न करने की बात तय हुई थी और छंटनी के नए प्रस्ताव पहले से चल रहे 50,000 नौकरियों की कटौती के कार्यक्रम से भी बड़े हैं। वहीं, कंपनी के प्रवक्ता ने गोपनीय दस्तावेजों पर टिप्पणी से इनकार करते हुए कहा है कि अपने ब्रांड्स और अनुषंगी कंपनियों समेत पूरे ग्रुप को इस दूरगामी बदलाव से गुजरना होगा।

भारत में फॉक्सवैगन का कारोबार कैसा चल रहा है?

वैश्विक स्तर पर चल रही इस उथल-पुथल के बीच फॉक्सवैगन का भारतीय बाजार में मजबूत दखल बना हुआ है:


  • बिक्री के आंकड़े: फॉक्सवैगन ब्रांड भारत में हर महीने औसतन 2,500 से 3,000 कारें बेचता है। सालाना स्तर पर, फॉक्सवैगन समूह (जिसमें स्कोडा, ऑडी, पोर्शे और लैम्बोर्गिनी भी शामिल हैं) ने भारतीय घरेलू बाजार में रिकॉर्ड 1.17 लाख कारें बेची हैं।

  • लोकप्रिय मॉडल: भारतीय ग्राहकों के बीच फॉक्सवैगन की ताइगुन एसयूवी और वर्टस  सेडान सबसे ज्यादा बिकने वाली गाड़ियां हैं।

  • मेक इन इंडिया का दम: कंपनी के पुणे प्लांट की क्षमता सालाना 2 लाख से अधिक वाहन बनाने की है। यहां से न सिर्फ भारत बल्कि दुनिया भर के 40 से अधिक देशों में ‘मेड-इन-इंडिया’ कारों का निर्यात किया जाता है।

आगे क्या होने वाला है?

रिपोर्ट के मुताबिक, ये योजनाएं सीईओ ओलिवर ब्लूम के 2030 के ‘ग्रुप टारगेट पिक्चर’ कॉन्सेप्ट का हिस्सा हैं। उन्होंने हाल ही में इसे कार्यकारी बोर्ड के सामने पेश किया है और वे 9 जुलाई को इसे सुपरवाइजरी बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत करने वाले हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि प्रबंधन यूनियनों के कड़े विरोध के बीच इस ऐतिहासिक रीस्ट्रक्चरिंग को लागू कर पाता है या नहीं।



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