भारतीय निर्यात-आयात बैंक ने पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपनी ऋण पुस्तिका में 10 प्रतिशत की वृद्धि का लक्ष्य रखा है। बैंक की प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी हर्षा बंगारी ने साफ किया है कि भारतीय निर्यातकों को समर्थन देने वाला यह बैंक नए वित्त वर्ष में स्थिर-मुद्रा के आधार पर यह क्रेडिट ग्रोथ हासिल करना चाहता है।
मुद्रा में उतार-चढ़ाव और ऋण पुस्तिका का गणित
बैंक ने पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में 12 प्रतिशत की ऋण वृद्धि दर्ज की थी। हालांकि, इस उच्च वृद्धि में विदेशी मुद्रा के उतार-चढ़ाव का बड़ा योगदान था, जिसका बैंक के आंकड़ों पर 5 प्रतिशत तक का सकारात्मक प्रभाव रहा। बंगारी के अनुसार, एक्ज़िम बैंक की कुल ऋण पुस्तिका का 58 प्रतिशत हिस्सा विदेशी मुद्रा में है, जबकि शेष ऋण रुपये में दिया गया है। भविष्य में निर्यातकों की निरंतर वित्तीय मांग को देखते हुए बैंक को उम्मीद है कि रुपये में दिए जाने वाले ऋण की हिस्सेदारी आगे और बढ़ेगी।
पश्चिम एशिया विवाद का सीमित असर
एक्ज़िम बैंक द्वारा दिया जाने वाला अधिकांश ऋण मध्यम से लंबी अवधि के लिए होता है, जिस पर पश्चिम एशिया जैसे क्षेत्रों में जारी भू-राजनीतिक तनाव का फौरी तौर पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ता। पश्चिम एशिया क्षेत्र में बैंक का एक्सपोजर बहुत कम है और फिलहाल वहां से ऋण वापसी पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं देखा गया है। हालांकि, यदि यह संकट लंबा खिंचता है, तो आपूर्ति शृंखला में बाधाओं के कारण निर्यातकों के मार्जिन पर दबाव आ सकता है। ऐसी स्थिति में निर्यातक राजस्व विस्तार के लिए घरेलू बाजार की ओर रुख कर सकते हैं और क्षेत्र में प्रोजेक्ट्स के रुकने से बैंक की इंक्रीमेंटल क्रेडिट ग्रोथ पर आंशिक असर पड़ सकता है।
नए बाजारों की ओर रुख: लैटिन अमेरिका पर फोकस
भारतीय कंपनियों में वैश्विक आर्थिक झटकों को सहने की मजबूत क्षमता है। अमेरिकी टैरिफ के समय भी भारतीय कंपनियों ने अपने बाजारों में सफलतापूर्वक विविधता लाकर खुद को संभाला था। वर्तमान में भारतीय निर्यातकों का ध्यान लैटिन अमेरिकी बाजारों पर तेजी से बढ़ रहा है। इन उभरते अवसरों को भुनाने और निर्यातकों को सुगम सेवाएं देने के लिए एक्ज़िम बैंक ने हाल ही में ब्राजील के साओ पाउलो में अपना एक नया कार्यालय भी खोला है।
वित्त वर्ष 27 के लिए भारी उधारी योजना
निर्यातकों की ऋण मांग को पूरा करने के लिए एक्ज़िम बैंक ने अपनी पूंजी जुटाने की रणनीति में बड़ा इजाफा किया है।
- बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान बाजार से 99,500 करोड़ रुपये उधार लेने की योजना बनाई है।
- यह आंकड़ा पिछले वित्त वर्ष के 86,000 करोड़ रुपये के उधारी लक्ष्य से काफी अधिक है।
- बंगारी के अनुसार, इस उधारी योजना के तहत विदेशी बाजारों से 3.5 अरब डॉलर जुटाना भी शामिल है, जिसके लिए बांड जारी करने की विस्तृत रूपरेखा तय की जानी अभी बाकी है।
पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक संकटों के बावजूद, भारतीय एक्ज़िम बैंक की ‘स्थिर-मुद्रा’ आधारित 10% ऋण वृद्धि रणनीति एक मजबूत आउटलुक पेश करती है। लैटिन अमेरिका जैसे नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों (साओ पाउलो) में विस्तार और 99,500 करोड़ रुपये की उधारी योजना यह दर्शाती है कि बैंक भारतीय निर्यातकों को वैश्विक चुनौतियों के बीच वित्तीय संबल प्रदान करने के लिए पूरी तरह से तैयार है।



