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Flexi Cap Fund: बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच क्यों बढ़ रहा फ्लेक्सी-कैप फंड का क्रेज? जानिए निवेश की सही रणनीति


क्रिकेट में अक्सर देखा होगा कि एक अच्छा कप्तान सिर्फ अपनी टीम पर भरोसा नहीं करता, बल्कि पिच और मैच की परिस्थितियों को देखकर अपनी रणनीति भी बदलता है। अगर पिच बल्लेबाजों के अनुकूल है, तो वह अपने आक्रामक बल्लेबाजों को आगे भेजता है। अगर विकेट मुश्किल हो जाए, तो ऐसे खिलाड़ियों को मौका देता है, जो मैदान में लंबे टिक सकें। मैच वही टीम जीतती है, जिसके पास परिस्थितियों के हिसाब से खुद को बदलने का लचीलापन हो।

फ्लेक्सी-कैप फंड भी कुछ इसी तरह काम करते हैं।

लचीलापन फ्लेक्सी-कैप फंड की सबसे बड़ी ताकत है। इनमें किसी एक मार्केट कैटेगरी में तय प्रतिशत निवेश करने की बाध्यता नहीं होती। इसलिए फंड मैनेजर बदलते बाजार के अनुसार अवसरों का लाभ लेने के साथ-साथ जोखिम को भी बेहतर तरीके से संतुलित कर सकते हैं। यही वजह है कि, पिछले एक साल में फ्लेक्सी-कैप म्यूचुअल फंड ने रिकॉर्ड 95,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का नया निवेश हासिल किया है। आज के अनिश्चित दौर में फ्लेक्सी-कैप म्यूचुअल फंड खुदरा निवेशकों की पहली पसंद बन गए हैं।

कई निवेशक पूछते हैं कि क्या इस उतार-चढ़ाव में निवेश रोक देना चाहिए?

बाजार की गिरावट उतना नुकसान नहीं पहुंचाती, जितना घबराहट में लिए गए जल्दबाजी के फैसले पहुंचाते हैं। फ्लेक्सी-कैप फंड्स की सबसे बड़ी ताकत यही है कि वे आपकी घबराहट को दूर कर आपके निवेश को सुरक्षा और रफ्तार दोनों एक साथ देते हैं।

क्यों चमक रहे हैं फ्लेक्सी-कैप फंड?


  • इस श्रेणी के फंड्स के पास किसी एक निश्चित आकार की कंपनियों में निवेश करने की कोई कानूनी बाध्यता नहीं होती। इनका मैनेजर पूरी तरह स्वतंत्र होता है।

  • अनिश्चितता में सुरक्षा: जब बाजार में जोखिम बढ़ता है, तो फंड मैनेजर चुपके से आपके पैसे को देश की बड़ी और मजबूत कंपनियों में लगा देता है, ताकि पोर्टफोलियो सुरक्षित रहे।

  • तेजी में भरपूर मुनाफा: जैसे ही बाजार में सुधार आता है और छोटी व मझोली कंपनियों में तरक्की की गुंजाइश दिखती है, फंड मैनेजर उधर अपना निवेश बढ़ा देता है।

यही वजह है कि पिछले 12 महीनों में खुदरा निवेशकों ने अन्य सभी श्रेणियों को छोड़कर फ्लेक्सी-कैप पर सबसे बड़ा दांव लगाया है। हालांकि, इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि फ्लेक्सी-कैप फंड्स में जोखिम नहीं होता। इक्विटी से जुड़े होने के कारण इनमें भी बाजार के उतार-चढ़ाव का असर पड़ता है। इसका डायवर्सिफिकेशन गुण जोखिम को किसी एक हिस्से तक सीमित नहीं रहने देता, जिससे निवेश अपेक्षाकृत अधिक संतुलित बना रहता है। 

मौजूदा बाजार में निवेशकों को क्या करना चाहिए?

सच तो यह है कि कोई भी व्यक्ति, चाहे वो कितना भी अनुभवी हो, यह भरोसे के साथ नहीं बता सकता कि बाजार अगले महीने ऊपर जाएगा या अगले हफ्ते नीचे आएगा। लेकिन इसके बावजूद बहुत से निवेशक हर छोटी-बड़ी खबर के आधार पर अपने निवेश के फैसले बदलने लगते हैं और एक निवेशक के रूप में यही सबसे बड़ी गलती होती है।

अगर आपके वित्तीय लक्ष्य नहीं बदले हैं, तो सिर्फ बाजार के उतार-चढ़ाव की वजह से अपनी निवेश रणनीति नहीं बदलनी चाहिए। नियमित रूप से सिप के जरिये निवेश करते रहें, अपने पोर्टफोलियो में विविधता बनाए रखें और साल में एक या दो बार किसी एक्सपर्ट के साथ बैठकर उसकी समीक्षा जरूर करें।


सही रणनीति से उतार चढ़ाव में भी बनेगा पैसा

एस9 फिनटेक के निदेशक प्रसाद शेट्टी बोले, अच्छा निवेश किसी ट्रिक के पीछे भागने में नहीं, बल्कि ऐसी रणनीति अपनाने में है जो लंबे समय तक आपके साथ चल सके। ऐसी रणनीति में बाजार के उतार-चढ़ाव का ध्यान रखना जरूरी है ताकि आप उसका भरपूर फायदा उठा सकें। बाजार का स्वभाव बदलना है। कभी तेजी होगी, कभी गिरावट आएगी। लेकिन अगर आपका अनुशासन और धैर्य बना रहता है, तो लंबे समय में आपके निवेश को उसका लाभ मिलता है।

छोटे कस्बों तक पहुंचा भरोसा

म्यूचुअल फंड का दायरा अब सिर्फ दिल्ली, मुंबई या बड़े महानगरों तक सीमित नहीं रहा। देश के छोटे शहरों और कस्बों (बी-30 शहरों) से आने वाली निवेश पूंजी अब कुल संपत्ति का 18 फीसदी हो चुकी है।


  • इन छोटे शहरों में निवेश बढ़ने की रफ्तार (23% वार्षिक वृद्धि दर) बड़े शहरों (19%) के मुकाबले कहीं अधिक तेज है।

  • यह इस बात का साफ संकेत है कि देश का आम नागरिक अब पारंपरिक बचतों से आगे निकलकर वित्तीय बाजारों को समझ रहा है।



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