सोने की ऊंची कीमतें और सीमा शुल्क को छह प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने से सोने के आभूषणों की बिक्री एक दशक के नीचले स्तर पर तक पहुंच सकती है। इससे संगठित ज्वेलर्स कंपनियों की बिक्री में गिरावट आएगी लेकिन इन कंपनियों का क्रेडिट प्रोफाइल स्थितर रहने की संभावना है। जबकि मध्यम और छोटे आकार के ज्वैलर्स को सबसे अधिक असर पड़ेगा, क्योंकि वे पहले से ही अधिक कीमतों से परेशान है और अब बिक्री कम होने की आशंकों में इनका मार्जिन और लाभ दोनो दबाव में हैं।
कोठारी ब्रदर्स के महावीर कोठारी कहते हैं, इसमें सबसे अधिक असर छोटे और मध्यम आकार के क्षेत्रिय ज्वैलर्स को होगा । कई विक्रेताओं ने स्टॉक की खरीदारी को फिलहाल के लिए बंद कर दिया है। क्योंकि उनको फंडिंग की समस्या अभी से सता रही है। कई जगह पर विक्रेताओं ने जल्दबाजी में सोने की खरीदारी कर स्टॉक कर लिया है, जबकि बाजार में मांग कम हो गई है और बिक्री में गिरावट देखी जा रही है। वे कहते हैं, शादी ब्याज का सीजन अभी जून तक है, इसलिए कई बड़े आकार के ज्वैलर्स के पास भी खरीदारी बनी हुई है, लेकिन छोटे ज्वैलर्स के पास पुराने ऑर्डस है जिनकी वजह से खरीदारी है। लेकिन भविष्य में इन्वेंट्री सख्ती की वजह से चिंता सता रही है।
बॉम्बे बुलियन एसोसिएशन के राष्ट्रीय प्रवक्ता कहते हैं, छोटे ज्वेलर्स को सबसे अधिक प्रभावित होंगे क्योंकि उनके पास अधिक फंडिंग नहीं होती है। कई विक्रेता उतना ही स्टॉक करता है, जितना उसके ऑर्डर होते हैं। इससे पहले भी सोने और चांदी की अधिक कीमतें होने की वजह से बाजार में क्रेडिट नहीं था और अब सीमा शुल्क बढ़ने के साथ ही सोना नहीं खरीदने की अपील से छोटे विक्रेताओं का कारोबार बंद हो रहा है। वे कहते है, इसका असर बड़े ब्रांडेड ज्वैर्ल्स पर कम होगा, क्योंकि उनका क्रेडिट बड़ा होता है।
क्रिसिल रेटिंग्स की रिपोर्ट के अनुसार आयात शुल्क में वृद्धि और सोने की ऊंची कीमतों की वजह से मांग में गिरावट आने की संभावना है। जिससे आभूषण रिटेल क्षेत्र में बिक्री एक दशक के निचले स्तर पर पहुंच सकती है। इसमें बड़े ब्रांडेड ज्वेलर्स की बिक्री प्रभावि होगी, लेकिन उनका क्रेडिट प्रोफाइल स्थिर रहने की संभावना है। जबकि छोटे और मध्य आकार के ज्वैर्ल्स पर इसका सबसे अधिक असर होगा और उनकी क्रेडिट प्रोफाइल अधिक अस्थिर हो सकती है।
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार सोने पर आयात शुल्क बढ़ाने भारत में सोने की मांग में 50 से 60 टन की कमी आने की संभावना है। जो पिछले साल की तुलना में लगभग 10 प्रतिशत कम है। रिपोर्ट के अनुसार सोने की कीमत आय स्तर में बदलाव और मुद्रास्फीति तथा मॉनसून के प्रभाव की वह से भी मांग प्रभावित होने का अनुमान है। हमारा अनुमान है कि आयात शुल्क में वृद्धि अल्पावधि और दीर्घावधि दोनों में सोने की मांग को प्रभावित करेंगे। हालांकि आभूषणों और सोने के सिक्कों का मांग अलग अलग प्रकार से प्रभावित हो सकती है।



