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Gold-Silver: भारत में सोने का आयात 82 फीसदी बढ़ा, चांदी भी 157 फीसदी उछली; जानिए क्या कह रहे आंकड़े


अप्रैल में भारत का सोने का आयात 81.69 फीसदी बढ़कर 5.62 अरब डॉलर हो गया। चांदी का आयात भी 157.16 फीसदी बढ़कर 411 करोड़ डॉलर पर पहुंच गया। कीमती धातुओं की ऊंची कीमतों के कारण यह वृद्धि हुई है। सरकार ने 13 मई से सोने और चांदी पर सीमा शुल्क 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया है।

वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 वित्तीय वर्ष में सोने का आयात 24 फीसदी बढ़कर 71.98 अरब डॉलर के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गया। हालांकि, मात्रा के हिसाब से यह 4.76 फीसदी घटकर 721.03 टन रहा। इसी अवधि में चांदी का आयात भी करीब 150 फीसदी बढ़कर 12 अरब डॉलर हो गया। मात्रा की बात करें तो चांदी का आयात 42 फीसदी बढ़कर 7,334.96 टन दर्ज किया गया।

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बताया कि बढ़े हुए आयात शुल्क से इस वर्ष आयात में कमी आने की संभावना है। चांदी के मामले में औद्योगिक उपयोग के कारण शुल्क वृद्धि का प्रभाव अपेक्षाकृत कम हो सकता है। उनका मानना है कि खपत आधारित मांग में निश्चित रूप से कमी आएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यूएई के साथ व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) के तहत टैरिफ दर कोटा (टीआरक्यू) का सोने के आयात पर खास असर नहीं पड़ा है।

आयात में वृद्धि और कारण

अप्रैल में कीमती धातुओं के आयात में भारी उछाल दर्ज किया गया। सोने की ऊंची कीमतें इस वृद्धि का एक प्रमुख कारण रहीं। राष्ट्रीय राजधानी में सोने का भाव करीब 1,56,000 रुपये प्रति 10 ग्राम है। चांदी का भाव करीब 2.53 लाख रुपये प्रति किलोग्राम है। स्विट्जरलैंड सोने का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है, जिसका हिस्सा करीब 40 फीसदी है। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और दक्षिण अफ्रीका भी प्रमुख आपूर्तिकर्ता हैं। कीमती धातुएं देश के कुल आयात का 5 फीसदी से अधिक हिस्सा हैं।

सरकार का कदम और प्रभाव

सरकार ने कीमती धातुओं के आयात को हतोत्साहित करने के लिए सीमा शुल्क बढ़ाया है। यह कदम देश के व्यापार घाटे और चालू खाता घाटे को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। राजेश अग्रवाल ने बताया कि यूएई से सोने का आयात मूल्य और मात्रा दोनों में कम हुआ है। भारत में शोधन के लिए सोने के डोरे का आयात सकारात्मक रहा है। यह अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे कई स्रोतों से आता है।

व्यापार और चालू खाता घाटा

अप्रैल में कीमती धातुओं के आयात में वृद्धि से देश का व्यापार घाटा तीन महीने के उच्चतम स्तर 28.38 अरब डॉलर पर पहुंच गया। भारत का चालू खाता घाटा दिसंबर तिमाही में 13.2 अरब डॉलर रहा, जो सकल घरेलू उत्पाद का 1.3 फीसदी था। यह मुख्य रूप से निर्यात में कमी के कारण बढ़े व्यापार अंतर के कारण हुआ। भारतीय रिजर्व बैंक के दो मार्च को जारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल-दिसंबर 2025 में चालू खाता घाटा कम होकर 30.1 अरब डॉलर हो गया था।





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