बिहार में नई सरकार का फॉर्मूला: CM से गृह मंत्रालय तक BJP, JDU को डिप्टी CM, 15-15 मंत्री, भाजपा अब ‘बड़ा भाई’
Chhattisgarh: वेदांता पावर प्लांट में हुआ भीषण हादसा, बॉयलर फटने से 10 लोगों की मौत, 15 घायल
Chhattisgarh में वेदांता पावर प्लांट हुआ बड़ा हादसा, बॉयलर फटने से 9 लोगों की मौत, 15 घायल
सांसद अमृतपाल को पंजाब लाने से बिगड़ेंगे हालात: राज्य सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को लिखा पत्र, 23 अप्रैल को खत्म हो रही NSA अवधि – Amritsar News
पंजाब सरकार ने खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल सिंह को लेकर बड़ा कदम उठाया है। सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने का हवाला देते हुए राज्य सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर मांग की है कि राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत उनकी हिरासत अवधि खत्म होने के बाद भी उन्हें असम की डिब्रूगढ़ सेंट्रल जेल में ही रखा जाए। पंजाब में अमृतपाल को लाने से हालत बिगड़ सकते हैं। कानून-व्यवस्था बनाए रखने का हवाला दिया सरकार ने अपने पत्र में सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने का हवाला दिया है। सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार ने केंद्रीय गृह सचिव से अनुरोध किया है कि असम सरकार की सहमति लेकर ट्रांसफर ऑफ प्रिजनर्स एक्ट, 1952 तथा पंजाब संशोधन अधिनियम 2025 के प्रावधानों के तहत अमृतपाल को डिब्रूगढ़ जेल में रखने की अनुमति दी जाए। इस मामले में शीघ्र निर्णय लेने की भी अपील की गई है। पंजाब पुलिस और खुफिया एजेंसियों ने रिहाई से कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका जताई सूत्रों के मुताबिक, पंजाब पुलिस और खुफिया एजेंसियों ने आशंका जताई है कि उनकी रिहाई से राज्य में कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। पंजाब के पुलिस महानिदेशक (DGP) और अमृतसर (देहात) के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) की रिपोर्ट पर गृह विभाग ने यह सिफारिश की है। 24 फरवरी 2023 को किया था अमृतपाल को गिरफ्तार गौरतलब है कि अमृतपाल सिंह के खिलाफ 24 फरवरी 2023 को अमृतसर के अजनाला थाने में मामला दर्ज किया गया था, जब उन्होंने अपने समर्थकों के साथ पुलिस स्टेशन पर धावा बोलकर एक सहयोगी को छुड़ा लिया था। इसके बाद वे करीब एक महीने तक फरार रहे और 23 अप्रैल 2023 को गिरफ्तार किए गए। गिरफ्तारी के बाद से ही अमृतपाल को एनएसए के तहत डिब्रूगढ़ सेंट्रल जेल में रखा गया है। उनकी हिरासत अवधि को अप्रैल 2024 और अप्रैल 2025 में बढ़ाया जा चुका है। वर्तमान में यह अवधि 22 अप्रैल 2026 को समाप्त होने वाली है। सुरक्षा के मद्देनजर अमृतपाल बाहर रखना उपयुक्त रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि एनएसए की अवधि समाप्त होने के बाद 23 अप्रैल को अमृतपाल को दोबारा गिरफ्तार किया जा सकता है, हालांकि राज्य की सुरक्षा के मद्देनजर उन्हें पंजाब से बाहर ही रखना अधिक उपयुक्त माना गया है। उल्लेखनीय है कि डिब्रूगढ़ जेल में बंद अमृतपाल के नौ सहयोगियों को एनएसए की अवधि समाप्त होने के बाद पंजाब वापस लाया जा चुका है, लेकिन उनके मामले को अलग मानते हुए सरकार ने विशेष व्यवस्था बनाए रखने की जरूरत जताई है। अब इस मामले में अंतिम निर्णय केंद्र सरकार और असम सरकार की सहमति के बाद लिया जाएगा। 1.97 लाख वोटों से जीता था अमृतपाल अमृतपाल सिंह अजनाला थाने पर हमला करने समेत 12 एफआईआर में भी आरोपी हैं। जेल में रहते हुए अमृतपाल सिंह ने पंजाब के खडूर साहिब संसदीय क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर 2024 का लोकसभा चुनाव जीता है। अमृतपाल सिंह ने कांग्रेस के कुलबीर सिंह जीरा को करीब 1.97 लाख वोटों के अंतर से हराया था। खडूर साहिब से जीत के बाद अमृतपाल को शपथ ग्रहण के लिए पैरोल मिली थी।
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तमिलनाडु की ये खूबसूरत लहरें जीत लेंगी आपका दिल! गोवा को छोड़िए और इन 6 जगहों
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6 Beautiful Beaches : तमिलनाडु का विशाल समुद्र तट न केवल भारत के प्राकृतिक संसाधनों के लिए गर्व का स्रोत है, बल्कि यह उन यात्रियों के लिए एक आदर्श विकल्प भी है जो गोवा की भीड़-भाड़ से दूर शांति की तलाश में हैं. यहां के समुद्र तट अपनी स्वच्छता और सांस्कृतिक महत्व के कारण दुनिया भर में ख्याति प्राप्त कर रहे हैं.
मरीना बीच: दुनिया के सबसे लंबे शहरी बीचों में से एक, मरीना बीच की अपनी एक अनोखी पहचान है. 13 किलोमीटर तक फैला यह बीच वह जगह है जहां सुबह और शाम के समय शहर सचमुच जीवंत हो उठता है. इसकी तेज़ लहरों के कारण, यह तैरने के लिए आदर्श नहीं है. हालांकि, इसका असली आकर्षण इसके जीवंत माहौल में है जहां स्ट्रीट फ़ूड के स्टॉल, स्थानीय विक्रेता और निवासी समुद्र की ताज़ा हवा का आनंद लेते हुए देखे जा सकते हैं. इसकी सुनहरी रेत और आस-पास के ऐतिहासिक स्मारक इसे एक ऐसा गंतव्य बनाते हैं जिसे बिल्कुल भी मिस नहीं किया जा सकता.

एलियट बीच: मरीना बीच की तुलना में, एलियट बीच (जिसे बेसेंट नगर बीच भी कहा जाता है) एक शांत विकल्प प्रदान करता है, जो उन लोगों के लिए आदर्श है जो भीड़-भाड़ से राहत पाना चाहते हैं. अपने साफ़ किनारों और कम भीड़-भाड़ वाले माहौल के साथ, यह शाम की सैर के लिए एक बेहतरीन जगह है. पास का अष्टलक्ष्मी मंदिर और वेलंकन्नी चर्च इस खूबसूरत जगह को एक आध्यात्मिक आभा प्रदान करते हैं.

महाबलीपुरम बीच: UNESCO विश्व धरोहर स्थल महाबलीपुरम के पास स्थित, महाबलीपुरम बीच इतिहास और तटीय सुंदरता का एक अनोखा संगम प्रस्तुत करता है. प्राचीन पत्थर के मंदिर और जटिल पत्थर की नक्काशी लहरों से बस कुछ ही कदम की दूरी पर खड़े हैं, जो सचमुच एक शानदार दृश्य बनाते हैं. यहां सूर्योदय देखना, जिसमें स्मारकों की परछाइयां आसमान पर उभरी हुई दिखती हैं, एक अविस्मरणीय अनुभव है.
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कन्याकुमारी बीच: भारतीय मुख्य भूमि के सबसे दक्षिणी छोर पर स्थित, कन्याकुमारी बीच उस संगम बिंदु को चिह्नित करता है जहां अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर मिलते हैं. पास के पुरातात्विक स्मारक और तिरुवल्लुवर की विशाल प्रतिमा इसकी प्राकृतिक भव्यता और सांस्कृतिक महत्व को और भी बढ़ा देते हैं.

रामेश्वरम बीच: एक शांत वातावरण में स्थित, रामेश्वरम बीच अपने शांत जल और गहरे आध्यात्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है. तीर्थयात्री अक्सर पूजनीय रामनाथस्वामी मंदिर के दर्शन के लिए आगे बढ़ने से पहले यहाँ पवित्र स्नान करते हैं. इसकी उथली गहराई और कोमल लहरें इसे तैरने के लिए सबसे सुरक्षित बीचों में से एक बनाती हैं.

धनुषकोडी बीच: धनुषकोडी बीच की ओर जाने वालों के लिए एक सचमुच अनोखा अनुभव इंतज़ार कर रहा है. भारत के एक पुरातात्विक क्षेत्र के भीतर स्थित, यह सुनसान कस्बा जो अब एक बीचस्केप बन गया है किसी दूसरी दुनिया जैसा लगता है. विशाल और सुंदर रेत के टीलों के बीच, पुराने शहर के खंडहरों का झड़ता हुआ प्लास्टर इस जगह को एक गहरा वीरान माहौल देता है.
वाराणसी में आतंकियों को फंडिंग में डॉक्टर के घर रेड: ATS ने बेटे से की पूछताछ, लैपटॉप-मोबाइल में मिला पाकिस्तान से कनेक्शन – Varanasi News
वाराणसी में आतंकियों को फंडिंग करने वाले डॉक्टर के घर पर यूपी-मुंबई ATS और इंटेलिजेंस ब्यूरो ने छापेमारी की। टीम मंगलवार दोपहर डॉक्टर के घर पहुंची। उसके मोबाइल-लैपटॉप और प्रिंटर को कब्जे में लिया। इसके बाद डॉक्टर के घरवालों और बेटे से पूछताछ की। टीम करीब 7 घंटे तक डॉक्टर के घर में रही। जाते समय टीम मोबाइल, लैपटॉप और प्रिंटर भी साथ ले गई है। वहीं, डॉक्टर के बैंक अकाउंट की डिटेल में लाखों रुपए के टर्नओवर का पता चला है। साथ ही डॉक्टर का पाकिस्तानी लोगों और कश्मीर के संगठनों से कनेक्शन भी मिला है। वह कई संदिग्धों के टच में है। उन लोगों के नंबर डॉक्टर के फोन में सेव मिले हैं। रेड के दौरान डॉक्टर के घर के बाहर पुलिस फोर्स तैनात रही। इस कार्रवाई के पीछे लखनऊ में पकड़े 4 आतंकियों से मिला इनपुट बताया जा रहा है। मामला आदमपुर थाना क्षेत्र का है। 2 तस्वीरें देखिए… अब पढ़िए पूरा मामला वाराणसी के पठानी टोला इलाके के आदमपुर में डॉ. आरिफ अंसारी रहता है। डॉ. आरिफ अंसारी बाल रोग विशेषज्ञ है और हाजरा हॉस्पिटल चलाता है। उसके 3 भाई साड़ी का कारोबार करते हैं। इसके चलते उन लोगों का अक्सर बाहर आना-जाना लगा रहता है। डॉ. आरिफ अंसारी का 20 साल का बेटा अबु बकर NEET की तैयारी कर रहा है। ATS की टीम ने घर में सबसे ज्यादा देर उसी पूछताछ की। अबु बकर के भी मोबाइल और लैपटॉप की भी जांच की। सूत्रों की मानें, तो अबु बकर पर एक कश्मीरी हैंडल से व्हाट्सएप चैट के जरिए बातचीत करने का आरोप है। वह पाकिस्तान के संदिग्ध लोगों के संपर्क में था। डॉक्टर के घर के बाहर पुलिस फोर्स तैनात रही
डॉक्टर के घर पर रेड की खबर मिलते ही बड़ी संख्या में लोग मौके पर जुट गए। इसके बाद डॉक्टर के घर के बाहर और आसपास पुलिस की चौकसी बढ़ा दी गई। जिस गली में टीम पहुंची थी, उसमें स्थानीय लोगों का छोड़कर किसी को नहीं जाने दिया गया। हालांकि, इस मामले में एसीपी कोतवाली विजय प्रताप सिंह और आदमपुर इंस्पेक्टर विमल कुमार मिश्रा ने पुष्टि नहीं की। रेड के बीच में ही ATS इंस्पेक्टर भारत भूषण डॉक्टर के घर से बाहर निकले। मीडिया के सवालों पर उन्होंने कहा कि हम नहीं कुछ भी बता नहीं सकते। पड़ोसी बोले- डॉ. अंसारी बहुत ही सभ्य और नेक इंसान
डॉ. आरिफ अंसारी के घर के पास रहने वाले सरफराज अहमद ने बताया- डॉ. अंसारी बहुत सभ्य और नेक इंसान हैं। समाज में उनका अच्छा नाम है। मैं अभी अपनी दुकान से आया, तब छापेमारी के बारे में पता चला। इतने अच्छे लोगों के साथ ऐसा क्या हो गया? उन्होंने कहा कि डॉ. अंसारी का लड़का बहुत ही नेक और सीधा है। लड़का NEET की तैयारी कर रहा है और बहुत ही प्रतिभाशाली है। वह बाहर जाने के बजाय यहीं रहकर पढ़ाई कर रहा है। पूरे मोहल्ले और समाज में आप कहीं भी पता कर सकते हैं, उनका पूरा परिवार बहुत अच्छा है। लखनऊ से पकड़े गए संदिग्धों से जुड़ रहे तार 10 अप्रैल को लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन के पास से ATS ने 4 संदिग्ध पकड़े थे। जांच में इन चारों के संबंध पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई समेत अन्य आतंकी संगठन से होने के संकेत मिले हैं। एजेंसियों को यह भी इनपुट मिला कि मुंबई, लखनऊ और वाराणसी में टेरर फंडिंग के जरिए नेटवर्क सक्रिय किया जा रहा था। इन्हीं इनपुट के आधार पर एटीएस ने वाराणसी में छापेमारी की है। फिलहाल एजेंसियां इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की जांच, कॉल डिटेल, बैंक ट्रांजैक्शन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को खंगाल रही हैं। —————————– यह खबर भी पढ़ें… आगरा में BJP नेता का डांसर के साथ VIDEO, होटल संचालक को वसूली के लिए धमकाया
आगरा में खुद को भाजपा नेता बताने वाले महिपाल चौधरी का अब होटल में डांसर के साथ वीडियो सामने आया है। इसमें महिपाल कुर्सी पर बैठा दिख रहा। कमरे में दो लड़कियां डांस कर रही हैं। हालांकि, ये वीडियो कब का है। पुलिस इसकी जांच कर रही है। पढ़ें पूरी खबर…
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आइफिल टावर के बारे में कितना जानते हैं आप? हर साल 70 लाख से भी ज्यादा लोग…
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Eiffel Tower Important Facts: आइफिल टावर दुनिया के सबसे मशहूर टूरिस्ट स्पॉट्स में से एक है, जिसे देखने हर साल लाखों लोग Paris पहुंचते हैं. आखिर क्या खास है इस टावर में कि 70 लाख से ज्यादा लोग हर साल यहां खिंचे चले आते हैं. यही इसे और भी दिलचस्प बनाता है.
आइफिल टावर की खासियत.
आइफिल टावर दुनिया के सबसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में से एक है, जिसे देखने का सपना हर साल लाखों लोग लेकर आते हैं. फ्रांस की राजधानी पेरिस में स्थित यह टावर सिर्फ एक लोहे की संरचना नहीं, बल्कि इंजीनियरिंग का बेहतरीन नमूना और रोमांस का प्रतीक माना जाता है. करीब 330 मीटर ऊंचा यह टावर 1889 में बना था और तब से लेकर आज तक यह दुनिया भर के पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता आ रहा है.
हर साल 70 लाख से भी ज्यादा लोग इसे देखने पहुंचते हैं, जो इसे दुनिया के सबसे ज्यादा विजिट किए जाने वाले पेड मॉन्यूमेंट्स में शामिल करता है. दिन हो या रात, हर वक्त इस टावर के आसपास पर्यटकों की भीड़ लगी रहती है. खासकर रात में जब यह हजारों लाइट्स से जगमगाता है, तो इसका नजारा और भी ज्यादा शानदार हो जाता है. यही वजह है कि कपल्स के लिए यह जगह बेहद खास मानी जाती है और इसे “सिटी ऑफ लव” की पहचान से भी जोड़ा जाता है.
क्यों खास है इसकी बनावट और इतिहास
इस टावर को मशहूर इंजीनियर Gustave Eiffel ने डिजाइन किया था, जिनके नाम पर ही इसका नाम रखा गया. इसे Exposition Universelle 1889 के लिए बनाया गया था. शुरुआत में कई लोगों ने इसकी डिजाइन का विरोध किया था और इसे बदसूरत तक कहा था, लेकिन समय के साथ यही टावर फ्रांस की पहचान बन गया. इसमें लगभग 18,000 लोहे के हिस्से लगे हैं और इसे बनाने में करीब 2 साल लगे थे, जो उस समय के हिसाब से एक बड़ी उपलब्धि थी.
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विविधा सिंह न्यूज18 हिंदी (NEWS18) में पत्रकार हैं. इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में बैचलर और मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में ये 3 वर्षों से काम कर रही हैं. फिलहाल न्यूज18…और पढ़ें
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