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कार्तिक स्वामी मंदिर के कपाट 134 दिन बाद खुले: पंजाब-हरियाणा के श्रद्धालु भी पहुंचे भरमौर, एकांतवास से लौटे भगवान शिव के ज्येष्ठ पुत्र – Chamba News




हिमाचल प्रदेश के भरमौर में मशहूर कार्तिक स्वामी मंदिर कुगती के कपाट 134 दिन बाद मंगलवार को विधि-विधान के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। लगभग चार महीने तेरह दिन तक बंद रहने के बाद मंदिर खुलने से पूरे क्षेत्र में भक्तिमय माहौल बन गया है। मंदिर में पूरी रात जागरण चलता रहा। इसमें हिमाचल के अलावा पंजाब, हरियाणा, जम्मू समेत कई राज्यों के सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए। मंगलवार सुबह विशेष पूजा, हवन और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मंदिर के कपाट खोले गए। अब विभिन्न प्रदेशों से भरमौर पहुंचे श्रद्धालु कार्तिक स्वामी के दर्शन कर रहे हैं। बैसाखी संक्रांति पर कार्तिक स्वामी मंदिर लौट आते हैं
बता दें कि, सर्दियों में कुगती में भारी बर्फबारी होती है। यहां पर 15 नवंबर के आसपास हिमपात शुरू हो जाता है। इसलिए, मान्यता है कि भगवान शिव के ज्येष्ठ पुत्र कार्तिक स्वामी दीपावली के बाद एकांतवास (पाताल लोक) में चले जाते हैं और उनके लौटने तक मंदिर के कपाट बंद रहते हैं। बैसाखी संक्रांति पर कार्तिक स्वामी मंदिर लौट आते हैं। कपाट बंद होने के दौरान मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में जाना पूर्णतः वर्जित माना जाता है। इसलिए, ग्रामीण और श्रद्धालु इस परंपरा का सख्ती से पालन करते हैं। मंदिर की परंपरा से जुड़ी एक विशेष मान्यता भी है। प्रमुख धार्मिक स्थल के रूप में प्रसिद्ध यह स्थान
कार्तिक स्वामी को भगवान शिव के ज्येष्ठ पुत्र के रूप में पूजा जाता है। पौराणिक मान्यता है कि भगवान गणेश से एक प्रसंग के बाद वे इस दुर्गम स्थान पर आकर निवास करने लगे थे। आज यह स्थान एक प्रमुख धार्मिक स्थल के रूप में प्रसिद्ध है। कुगती धार्मिक आस्था का केंद्र
यह मंदिर धार्मिक आस्था का केंद्र होने के साथ-साथ ट्रैकिंग और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए भी जाना जाता है, जो इसे पर्यटन का भी एक महत्वपूर्ण केंद्र बनाता है। मणिमहेश जाने पर रोक
कुगती स्थित कार्तिक मंदिर आने वाले श्रद्धालु मणिमहेश यात्रा पर जरूर जाते हैं। हालांकि इस बार अभी मणिमहेश जाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है, क्योंकि इस बार वहां भारी हिमपात हुआ है। इससे मणिमहेश जाने वाले रास्ते पूरी तरह बंद हैं। इसी तरह बीते साल मानसून की भारी बारिश और बादल फटने से भी मणिमहेश के रास्ते पूरी तरह टूटे हुए हैं। इसे देखते हुए SDM भरमौर ने धंछो से आगे मणिमहेश की तरफ जाने पर पूरी तरह रोक लगाई है।



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Delhi Aaj Kya Khula Kya Bandh: अंबेडकर जयंती पर क्या खुला-क्या बंद? ट्रैफिक और मेट्रो को लेकर ये है अपडेट


Delhi Aaj Kya Khula Kya Bandh: अंबेडकर जयंती पर क्या खुला-क्या बंद? ट्रैफिक और मेट्रो को लेकर ये है अपडेट | Delhi Aaj Kya Khula Kya Bandh Hai Today 14 April Bank School Holidays Bazar Offices Open Closed – Hindi Oneindia



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LPG Price Delhi Today: 14 अप्रैल को क्या हैं गैस सिलेंडर के दाम? जानें घरेलू से कमर्शियल तक पूरी रेट लिस्ट


LPG Price Delhi Today: 14 अप्रैल को क्या हैं गैस सिलेंडर के दाम? जानें घरेलू से कमर्शियल तक पूरी रेट लिस्ट | Delhi LPG Price Today 14 April 2026 Domestic Commercial Cylinder New Rate List – Hindi Oneindia



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Aaj Ka Mausam: UP-राजस्थान में सूरज बरपाएगा कहर, JK समेत 9 राज्यों में Rain Alert, क्या दिल्ली में होगी बारिश?


Aaj Ka Mausam: UP-राजस्थान में सूरज बरपाएगा कहर, JK समेत 9 राज्यों में Rain Alert, क्या दिल्ली में होगी बारिश? | IMD Weather Forecast Today 14 April 2026 Aaj Ka Mausam Heat Wave Alert UP, Rain expected JK-UTT-Himachal in Hindi – Hindi Oneindia



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India Crude Import: ईरान युद्ध के बीच मार्च में रूसी कच्चे तेल का आयात तीन गुना बढ़ा, 5.3 अरब यूरो के पार नंबर


अमेरिका की ओर से ईरान के खिलाफ युद्ध छेड़ने के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। इस संकट के बीच, भारत ने मार्च 2026 में रूस से कच्चे तेल की रिकॉर्ड खरीदारी की है। अमेरिका से मिली एक महीने की विशेष छूट का फायदा उठाते हुए, भारतीय रिफाइनरियों ने फिर से रूसी तेल आयात शुरू कर दिया है, जिससे भारत एक बार फिर वैश्विक बाजार में रूसी जीवाश्म ईंधन का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बन गया है।

रूस से तेल के आयात में भारी उछाल

यूरोप स्थित थिंक टैंक ‘सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर’ (सीआरईए) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, मार्च में भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात मूल्य तीन गुना से अधिक बढ़कर 5.3 अरब यूरो हो गया। मात्रा के लिहाज से भी इस आयात में दोगुना उछाल देखा गया है। कुल मिलाकर, भारत ने इस महीने 5.8 अरब यूरो के रूसी जीवाश्म ईंधन का आयात किया, जिसमें 91 प्रतिशत हिस्सेदारी केवल कच्चे तेल की रही, जबकि शेष हिस्से में 337 मिलियन यूरो का कोयला और 178.5 मिलियन यूरो के पेट्रोलियम उत्पाद शामिल थे। दिलचस्प बात यह है कि मार्च में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में 4 प्रतिशत की कमी आई, इसके बावजूद रूसी कच्चे तेल के आयात में दोगुनी वृद्धि दर्ज की गई। इसके मुकाबले फरवरी में भारत 1.8 अरब यूरो के रूसी आयात के साथ तीसरे स्थान पर था। 

सरकारी और निजी रिफाइनरियों की वापसी

इस जबरदस्त उछाल का मुख्य कारण संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा रूसी तेल पर दी गई एक महीने की प्रतिबंधों से छूट थी। वाशिंगटन द्वारा ईरान के खिलाफ युद्ध छेड़ने के बाद आसमान छूती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए समुद्र में पहले से मौजूद और पूर्व-मंजूर जहाजों पर यह छूट दी गई थी। इस छूट के कारण सरकारी स्वामित्व वाली रिफाइनरियों, जिन्होंने पहले रूसी तेल की खरीदारी रोक दी थी, ने फिर से आयात शुरू कर दिया। सीआरईए के अनुसार, इन सरकारी रिफाइनरियों के आयात में महीने-दर-महीने आधार पर 148 प्रतिशत की भारी वृद्धि हुई, जो कि मार्च 2025 की तुलना में 72 प्रतिशत अधिक है। मैंगलोर और विशाखापत्तनम जैसी राज्य के स्वामित्व वाली रिफाइनरियों ने नवंबर 2025 के अंत में रूसी आयात रोक दिया था, लेकिन मार्च 2026 में उन्होंने इसे फिर से शुरू कर दिया। दूसरी ओर, निजी रिफाइनरियों के आयात में 66 प्रतिशत की मामूली वृद्धि देखी गई, जो अभी भी पिछले साल के इसी समय की तुलना में कम है।

वैश्विक बाजार और रिफाइंड उत्पादों का निर्यात

निर्यात के मोर्चे पर रूस पूरी तरह से एशियाई बाजारों पर निर्भर हो गया है, क्योंकि 2026 की पहली तिमाही में उसके कुल कच्चे तेल निर्यात का 90 प्रतिशत हिस्सा केवल चीन और भारत को दिया गया है। मार्च में रूस के कुल कच्चे तेल निर्यात का 51 प्रतिशत चीन ने और 38 प्रतिशत भारत ने खरीदा। इस परिदृश्य का एक और दिलचस्प पहलू यह है कि भारतीय रिफाइनरियां इस रूसी तेल को रिफाइन करके वापस उन देशों को निर्यात कर रही हैं जिन्होंने रूस पर प्रतिबंध लगाए हैं। मार्च में भारत, तुर्की, ब्रुनेई और जॉर्जिया की रिफाइनरियों ने प्रतिबंध लगाने वाले देशों को 830 मिलियन यूरो के पेट्रोलियम उत्पाद निर्यात किए, जिसमें यूरोपीय संघ को 304 मिलियन यूरो और अमेरिका को 168 मिलियन यूरो का निर्यात शामिल है। अकेले अमेरिका ने रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के स्वामित्व वाली जामनगर रिफाइनरी और तुर्की की स्टार रिफाइनरी से आयात किया, जहां मार्च में जामनगर रिफाइनरी के फीडस्टॉक का 25 प्रतिशत हिस्सा रूस से आया था।

यूरोपीय संघ की चिंता और आगे की राह

भारत और अन्य देशों की इस रिफाइनिंग रणनीति ने यूरोपीय संघ (ईयू) के लिए नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। 21 जनवरी, 2026 को ईयू द्वारा रूसी कच्चे तेल से बने उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लगाने के बावजूद, मार्च में उच्च जोखिम वाले 14 शिपमेंट यूरोपीय बंदरगाहों पर उतारे गए। इनमें से चार शिपमेंट भारत से आए थे, और फ्रांस इनका सबसे बड़ा प्राप्तकर्ता था। सीआरईए ने यूरोपीय संघ के सदस्य देशों की प्रवर्तन एजेंसियों से इस मामले की जांच करने का आग्रह किया है ताकि रूसी तेल को यूरोपीय ब्लॉक में प्रवेश करने से रोका जा सके। आगे चलकर, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिकी छूट समाप्त होने और ईयू की सख्ती के बाद भारत की तेल आयात और रिफाइनिंग रणनीति क्या नया मोड़ लेती है।





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Asha Bhosle Death: मौत से 15 दिन पहले कहां गई थीं आशा भोसले? फैंस से किया ये वादा रह गया अधूरा, वीडियो वायरल


Asha Bhosle Death: मौत से 15 दिन पहले कहां गई थीं आशा भोसले? फैंस से किया ये वादा रह गया अधूरा, वीडियो वायरल | asha bhosle death where she go 15 days before died this promise to her fans remained unfulfilled – Hindi Oneindia



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Global Market: कच्चे तेल में नरमी व अमेरिका-ईरान वार्ता की उम्मीद से एशियाई बाजारों में उछाल, जानिए क्या अपडेट


आंबेडकर जयंती के अवसर पर मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार बंद रहे, लेकिन वैश्विक मोर्चे से निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत मिले हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी तनाव के बावजूद, अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते की उम्मीदों से कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई है, जिसके चलते एशियाई बाजारों ने बढ़त के साथ कारोबार किया है।

वैश्विक बाजार और कच्चे तेल का हाल

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के उस बयान के बाद वैश्विक बाजार की धारणा में सुधार हुआ है, जिसमें उन्होंने तेहरान और वाशिंगटन के बीच कूटनीतिक बातचीत की संभावना जताई है। इसके प्रमुख प्रभाव इस प्रकार रहे:


  • कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता: भू-राजनीतिक जोखिमों के कारण ब्रेंट क्रूड पहले 99.36 डॉलर प्रति बैरल तक उछल गया था, लेकिन अब यह नरमी के साथ लगभग 97.99 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है।

  • अमेरिकी बाजारों में मजबूती: वॉल स्ट्रीट पर अमेरिकी बाजारों ने लचीलापन दिखाया है। S&P 500 ने 0.6 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की, जबकि इसके पिछले सत्र में यह 6,886.24 के उच्च स्तर पर बंद हुआ था। टेक-हैवी नैस्डैक में भी 0.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।

  • एशियाई बाजारों में बढ़त: सकारात्मक वैश्विक संकेतों का अनुसरण करते हुए मंगलवार को जापान का निक्केई 225 इंडेक्स 1.5 प्रतिशत चढ़ा।

भारतीय अर्थव्यवस्था और महंगाई पर असर

सोमवार को होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा नाकेबंदी के आदेश के बाद भारतीय सूचकांक निफ्टी 50 और सेंसेक्स गिरावट के साथ लाल निशान में बंद हुए थे। इसके बावजूद, भारत के व्यापक आर्थिक आंकड़े राहत देने वाले हैं।


 


क्रिसिल की प्रमुख अर्थशास्त्री दीप्ति देशपांडे ने कहा, “पश्चिम एशिया संकट को पूरा एक महीना होने के बावजूद, ऊर्जा संकट का खुदरा महंगाई पर अपेक्षाकृत कम प्रभाव दिखा है”। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा पेट्रोल और डीजल की कीमतें अपरिवर्तित रखने से खुदरा महंगाई दर ऊर्जा मूल्य वृद्धि के झटके से काफी हद तक सुरक्षित रही।



बुधवार को जब भारतीय बाजार फिर से खुलेंगे, तो एक मजबूत शुरुआत की संभावना है। शुरुआती रुझानों में डेरिवेटिव्स बाजार में जीआईएफटी निफ्टी 1 प्रतिशत से अधिक उछलकर 24,126 पर पहुंच गया है। हालांकि, भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) की ओर से मानसून के सामान्य से कम रहने के शुरुआती पूर्वानुमान से खाद्य महंगाई बढ़ने की आशंका बनी हुई है, जो भविष्य में निवेशकों की धारणा पर दबाव डाल सकती है।





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28वीं बार उत्तराखंड आ रहे PM मोदी: एलिवेटेड रोड से सफर कर पहुंचेंगे डाट काली मंदिर, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का करेंगे उद्घाटन – Dehradun News




प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार (14 अप्रैल) को 28वीं बार उत्तराखंड दौरे पर पहुंचेंगे। इस बार वे दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे समेत कई बड़ी परियोजनाओं का लोकार्पण करेंगे, जिससे विकास और कनेक्टिविटी को बड़ा बूस्ट मिलने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सुबह करीब 11:15 बजे सहारनपुर पहुंचेंगे, जहां वे दिल्ली-देहरादून आर्थिक कॉरिडोर के एलिवेटेड सेक्शन पर बने वाइल्डलाइफ कॉरिडोर का निरीक्षण करेंगे। इसके बाद करीब 11:40 बजे उत्तराखंड-यूपी बॉर्डर स्थित देहरादून के मां डाट काली मंदिर में दर्शन-पूजा करेंगे। यहां से वे देहरादून के लिए रवाना होंगे और आशारोड़ी से उनका रोड शो शुरू होगा, जो शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए आगे बढ़ेगा। रोड शो के बाद करीब 12:30 बजे प्रधानमंत्री महिंद्रा ग्राउंड पहुंचेंगे, यहां वे दिल्ली-देहरादून आर्थिक कॉरिडोर का उद्घाटन करेंगे और जनसभा को संबोधित करेंगे। इसी कार्यक्रम के दौरान टिहरी में 1000 मेगावाट क्षमता के पंप स्टोरेज प्लांट का लोकार्पण भी किया जाएगा। 2015 से शुरू हुआ दौरों का सिलसिला प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी पहली बार 11 सितंबर 2015 को उत्तराखंड आए थे। ऋषिकेश में स्वामी दयानंद गिरी से मुलाकात के साथ उनके दौरों की शुरुआत हुई। उत्तराखंड से पीएम मोदी का धार्मिक जुड़ाव भी मजबूत रहा है। वे प्रधानमंत्री बनने के बाद अब तक केदारनाथ, बदरीनाथ, मुखबा और आदि कैलाश जैसे प्रमुख स्थलों के दर्शन कर चुके हैं। अब पढ़िए एक्सप्रेसवे में क्या खास… 14 वे-साइड फैसिलिटी, बिना रुके सफर के लिए पूरी तैयारी दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर यात्रियों की सुविधा के लिए 14 वे-साइड फैसिलिटी (रेस्ट एरिया) विकसित की गई हैं। यहां पार्किंग, फूड कोर्ट, टॉयलेट और बेसिक सर्विस जैसी सुविधाएं मिलेंगी, जिससे लंबी दूरी के सफर में बार-बार रुकने की जरूरत नहीं पड़ेगी। पूरे कॉरिडोर को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यात्रा बिना रुकावट पूरी हो सके। इसके लिए 7 इंटरचेंज बनाए गए हैं, जहां से वाहन आसानी से अलग-अलग शहरों और सड़कों से जुड़ सकेंगे। 18.6 किमी एलिवेटेड रोड समेत मजबूत इंजीनियरिंग ढांचा इस एक्सप्रेसवे में 18.6 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया गया है, जिससे भीड़भाड़ वाले और संवेदनशील इलाकों में ट्रैफिक सीधे ऊपर से गुजर सके। इसके अलावा पूरे रूट में 19 बड़े अंडरपास, 57 छोटे अंडरपास और 4 मेजर ब्रिज बनाए गए हैं। यह स्ट्रक्चर न सिर्फ ट्रैफिक को स्मूद बनाता है, बल्कि स्थानीय कनेक्टिविटी भी बनाए रखता है। लोकल लोगों के लिए सर्विस रोड और सुरक्षित ट्रैफिक सिस्टम स्थानीय लोगों की आवाजाही प्रभावित न हो, इसके लिए एक्सप्रेसवे के साथ सर्विस रोड बनाई गई है। यहां सुरक्षित यू-टर्न, क्रैश बैरियर और अन्य सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। साथ ही एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ATMS) लगाया गया है, जिससे ट्रैफिक की निगरानी, कंट्रोल और इमरजेंसी रिस्पॉन्स बेहतर तरीके से हो सके। दिल्ली-देहरादून सफर 6 घंटे से घटकर 2.5 घंटे रह जाएगा दिल्ली से देहरादून के बीच यात्रा अब पहले से कहीं तेज होने जा रही है। मौजूदा पारंपरिक रूट (दिल्ली-मेरठ-मुजफ्फरनगर-रुड़की-देहरादून / NH-58, NH-334) से यह दूरी करीब 235 किमी है, जिसे तय करने में ट्रैफिक जाम, शहरों के भीतर से गुजरने और मिक्स लेन के कारण आमतौर पर 6 घंटे लग जाते हैं, खासकर वीकेंड और सीजन में समय और बढ़ जाता है। नए एक्सप्रेस-वे के चालू होने के बाद यह दूरी घटकर लगभग 212 किमी रह जाएगी, यानी करीब 23 किमी की सीधी बचत होगी। इन जिलों और राज्यों को मिलेगा सीधा फायदा दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे से एनसीआर, पश्चिमी यूपी और उत्तराखंड की कनेक्टिविटी तेज होगी। पूर्वी दिल्ली (अक्षरधाम, सोनिया विहार) को हाई-स्पीड कनेक्शन मिलेगा, जिससे रोजगार और रियल एस्टेट को बढ़ावा मिलेगा। पश्चिमी यूपी के बागपत, शामली, मुज़फ्फरनगर और सहारनपुर जैसे जिले सीधे एक्सप्रेस-वे से जुड़ेंगे, जिससे यात्रा समय घटेगा और गन्ना, एग्रो इंडस्ट्री व लॉजिस्टिक्स सेक्टर को फायदा होगा। उत्तराखंड में देहरादून को सीधा 6-लेन कनेक्शन मिलेगा, जबकि हरिद्वार, रुड़की और ऋषिकेश स्पर के जरिए जुड़कर पर्यटन और धार्मिक गतिविधियों को बढ़ावा देंगे। हाथियों के लिए 12KM एलिवेटेड रास्ता, शोर-रोशनी भी कंट्रोल दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे पर एशिया का सबसे लंबा वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर तैयार किया गया है, जो राजाजी नेशनल पार्क और शिवालिक वन क्षेत्र से होकर गुजरता है। यहां करीब 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड सेक्शन बनाया गया है, जिसके नीचे से हाथी समेत जंगली जानवर बिना किसी रुकावट के आवाजाही कर सकेंगे। वन्यजीवों पर असर कम करने के लिए खास इंतजाम किए गए हैं। शोर को नियंत्रित करने के लिए नॉइज बैरियर लगाए गए हैं, जबकि रात में तेज रोशनी से बचाने के लिए लाइट कंट्रोल सिस्टम भी लगाया गया है, ताकि जानवरों को प्राकृतिक जंगल जैसा माहौल मिल सके। अब 3 पॉइंट्स में कॉरिडोर के बारे में जानिए 10.97 किमी अंडरपास, 12 किमी एलिवेटेड सेक्शन गणेशपुर से आशारोड़ी के बीच कुल 10.97 किलोमीटर लंबा वाइल्ड लाइफ अंडरपास तैयार किया गया है, जबकि इसके ऊपर करीब 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया गया है। इसका मतलब है कि वाहनों की आवाजाही ऊपर और जानवरों की नीचे बिना रुकावट जारी रहती है। ऊंचाई 6-7 मीटर, हाथियों के लिए भी फ्री मूवमेंट कॉरिडोर की औसत ऊंचाई 6 से 7 मीटर रखी गई है, ताकि बड़े स्तनधारी जीव खासकर हाथी भी आराम से इसके नीचे से गुजर सकें। यह डिजाइन खास तौर पर हाथियों के पारंपरिक माइग्रेशन रूट को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। 2 एलीफैंट अंडरपास + 8 एनिमल अंडरपास गणेशपुर-देहरादून (NH-307) के 18.2 किमी लंबे हिस्से में वन्यजीवों के लिए 2 विशेष एलीफैंट अंडरपास और 8 अन्य एनिमल अंडरपास बनाए गए हैं। इससे अलग-अलग प्रजातियों के लिए सुरक्षित क्रॉसिंग पॉइंट सुनिश्चित किए गए हैं। पर्यटन और कारोबार दोनों को मिलेगा बड़ा बूस्ट दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे के शुरू होने से यात्रा समय 2.5 घंटे रह जाएगा, जिससे दिल्ली-एनसीआर से मसूरी, ऋषिकेश, हरिद्वार, धनोल्टी और चकराता जैसे पर्यटन स्थलों पर वीकेंड ट्रिप्स में बड़ी बढ़ोतरी की उम्मीद है। हरिद्वार-ऋषिकेश स्पर के जरिए धार्मिक पर्यटन कुंभ, चारधाम और गंगा स्नान तक पहुंच भी तेज और आसान होगी, जिससे होटल, ट्रैवल और लोकल ट्रांसपोर्ट का कारोबार बढ़ेगा। वहीं, व्यापार के लिहाज से यह एक्सप्रेस-वे दिल्ली-एनसीआर के इंडस्ट्रियल क्लस्टर को पश्चिमी यूपी और उत्तराखंड के औद्योगिक क्षेत्रों, जैसे- रुड़की, हरिद्वार, सहारनपुर और मुजफ्फरनगर से सीधे जोड़ेगा। इससे माल ढुलाई तेज और सस्ती होगी, लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी और एफएमसीजी, फार्मा, ऑटो पार्ट्स व कृषि उत्पादों में निवेश के नए मौके बनेंगे। कुल मिलाकर, यह एक्सप्रेस-वे सिर्फ सफर छोटा नहीं करेगा, बल्कि पर्यटन, कारोबार और निवेश के नए रास्ते खोलकर उत्तर भारत का बड़ा गेमचेंजर साबित हो सकता है। हर किलोमीटर का 3 रुपए टोल देना होगा दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे पर टोल की दरें भी सामने आ गई हैं। कार के लिए करीब 3 रुपए/किलोमीटर टोल तय है। इसे उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए आप अपनी कार से दिल्ली से देहरादून जा रहे हैं। जाते वक्त आपको 675 रुपए टोल देना होगा। अगर आप 24 घंटे में ही वापसी करते हैं, तो आपको 675 नहीं, 335 रुपए ही देने होंगे। मिनी बस जैसी लाइट कमर्शियल गाड़ियों के लिए एक तरफ का टोल करीब 1100 रुपए है। बड़ी बस और ट्रक के लिए ये 2275 रुपए रखा गया है। इससे ज्यादा भारी वाहनों का टोल करीब 4 हजार रुपए हो जाता है। जिन लोगों को बाकी एक्सप्रेस-वे पर टोल में छूट मिलती है, वही छूट यहां भी लागू होगी।



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चंडीगढ़ में लेडी डॉक्टर ने पहले दिन ही जॉब छोड़ी: बोली- अस्पताल मालकिन तय करती मरीज ICU में कब तक रहेगा, मेरे नाम पर गलत काम होता – Chandigarh News




चंडीगढ़ के प्रा‌इवेट अस्पताल में महिला डॉक्टर डॉ. प्रभलीन कौर ने नौकरी के पहले ही दिन इस्तीफा दे दिया। डॉक्टर ने कहा कि अस्पताल की मालकिन ही तय करती थी कि मरीज को कितने दिन भर्ती रखना है और कितने दिन ICU में रखना है। उन्होंने कहा कि नाम मेरा और गलत काम उनका। इललिए मैंने रिजाइन कर दिया। महिला डॉक्टर ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें वह ये सारी बातें कह रही है। उसी वीडियो को पंजाब ह्यूमन राइट्स कमीशन के मेंबर पद्मश्री जतिंदर सिंह शंटी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से शेयर किया। उन्होंने पोस्ट में लिखा है कि इस बहादुर डॉक्टर बेटी ने बेधड़क होकर चंडीगढ़ में प्राइवेट अस्पताल माफिया का काला चिट्ठा खोलकर रख दिया है। कमीशन इस बहादुर बेटी के साहस की सराहना करता है और डटकर इस बेटी के साथ खड़ा होगा। उन्होंने कहा कि हम ह्यूमन राइट्स की आवाज उठाते हैं। हमारे देश में बड़े-बड़े लोग सोचते हैं कि आवाज को कैसे उठाया जाए, लेकिन इस बेटी ने इसे उठाया है। उन्होंने लोगों से अपील की कि आप भी अस्पतालों पर नजर रखें। महिला डॉक्टर की वीडियो में अहम बातें… डॉक्टर का वीडियो शेयर कर जतिंदर सिंह ने ये 2 बातें कहीं चंडीगढ़ की रहने वाली डॉक्टर, जीरकपुर में क्लिनिक
जानकारी के मुताबिक, डॉ. प्रभलीन कौर चंडीगढ़ में रहती हैं और जीरकपुर के लोहगढ़ एरिया में अपना क्लिनिक भी चलाती हैं। वह एक इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ हैं। उन्होंने 30 मार्च को सोशल मीडिया पर अपना वीडियो अपलोड किया था। हालांकि, उन्होंने उस अस्पताल का नाम उजागर नहीं किया। वहीं, अस्पताल की ओर से भी इस मामले में कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। साथ ही कोई कानूनी कार्रवाई भी नहीं की गई है।



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यूपी में आगजनी के 26 मामलों की आतंकी जांच होगी: NIA ने तीन आतंकियों के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया – Uttar Pradesh News




एंटी टेरेरिस्ट स्क्वॉड (ATS) यूपी में हुई आगजनी की करीब 26 घटनाओं की आतंकी एंगल से जांच करेगी। ऐसा पिछले दिनों लखनऊ में पकड़े गए 4 आतंकियों के इनपुट के आधार पर किया जा रहा है। यूपी के अलग-अलग जिलों में गाड़ियों में आग लगने की इन घटनाओं को हादसा बताकर केस बंद कर दिया गया था। अब इनकी गहराई से तफ्तीश की जाएगी। नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) भी मामले में तफ्तीश करेगी। दरअसल, 3 अप्रैल को पकड़े गए आतंकियों ने पूछताछ में बताया था कि वे आगजनी की छोटी-छोटी घटनाओं को अंजाम देकर वीडियो बनाते थे। उन्हें पाकिस्तान में हैंडलर्स को भेज देते थे। इसके बदले उन्हें QR कोड के जरिए पाकिस्तान से पैसे भेजे जाते थे। इनका मकसद देश में डर और सांप्रदायिक तनाव पैदा करना था। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… पूरी कहानी शुरुआत से समझते हैं… यूपी में बड़ी घटना की तैयारी थी, इससे पहले 4 आतंकी धरे गए
यूपी ATS ने 2 अप्रैल को लखनऊ से 4 आतंकियों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में पता चला कि ये आगजनी की छोटी-छोटी घटनाओं को अंजाम देकर उसका वीडियो बनाते थे। फिर उसे पाकिस्तानी हैंडलर अबू बकर को भेजते थे। वीडियो के जरिए वे अपने काम का सबूत देते थे। बदले में अबू बकर उन्हें पैसे भेजता था। जांच एजेंसियों को शक है कि इन लोगों ने पहले छोटे स्तर की आगजनी की घटनाओं को अंजाम देकर अपने हैंडलर्स को ‘ट्रायल’ दिखाया था। चारों आतंकी यूपी में किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की फिराक में थे, लेकिन इससे पहले ही पकड़े गए। आतंकियों की पहचान साकिब उर्फ डेविल, विकास गहलावत उर्फ रौनक, लोकेश उर्फ बाबू, उर्फ पपला पंडित और अरबाब के रूप में हुई थी। साकिब गैंग का सरगना है। इन आतंकियों के मोबाइल से कई अहम सबूत मिले थे, जिनके आधार पर जांच आगे बढ़ रही है। फोन में आगजनी के VIDEO, लोकेशन और टाइमिंग पता की जा रही
एडीजी कानून व्यवस्था अमिताभ यश बताते हैं- आमतौर पर आग की घटनाओं को हादसा मान कर रिपोर्ट लगा दी जाती है। लेकिन, गाड़ियों में आगजनी के बदले पैसे मिलने की बात सामने आने पर उन मामलों में नए सिरे से जांच की जा रही है। इसके लिए जांच टीम ने 6 महीने में हुए 26 मामलों की पहचान की है। इनमें अलीगढ़, गाजियाबाद, बुलंदशहर, कानपुर, बरेली और प्रयागराज जिले में हुई घटनाएं शामिल हैं। छानबीन में सामने आया कि लखनऊ में पकड़े गए आतंकियों ने 4 मार्च को एक पिकअप में आग लगाकर उसके वीडियो बनाए थे। आगजनी किरतपुर इलाके में हुई थी। इनके पास मिले 7 मोबाइलों में ऐसे और भी वीडियो हैं। ये वीडियो कब और कहां के हैं, इसकी जांच की जा रही है। जली हुई गाड़ियों की जांच नहीं होती, इसका फायदा उठाया
अमिताभ यश कहते हैं- वेस्ट यूपी के बुलंदशहर, बिजनौर, मेरठ, बागपत, हापुड़ जिलों में पिछले 6 महीने में गाड़ियों, दुकानों और छोटे प्रतिष्ठानों में हुई आगजनी की घटनाओं के रिकॉर्ड देखे जा रहे हैं। जिससे पता लग सके कि आतंकियों का इन घटनाओं से क्या कनेक्शन है? हालांकि, सूत्रों का कहना है कि ये तफ्तीश ATS के लिए आसान नहीं होगी, क्योंकि घटनाएं पुरानी हो चुकी हैं। जांच एजेंसी को फोरेंसिक सबूत और CCTV फुटेज निकालने में खासी दिक्कत आएगी। ऐसे में आसपास के लोगों से पूछताछ और उनके बयान ही अहम होंगे। संदिग्ध लेन-देन मिलने के बाद शुरू की जांच
जांच के दौरान पता चला था कि आगजनी के बदले इन आतंकियों को पैसे दिए जाते थे। गिरफ्तार आतंकियों के बैंकखातों की जांच में कुछ संदिग्ध लेन-देन मिले हैं। अब ट्रांजेक्शन की तारीख को आगजनी की तारीख से मैच किया जा रहा है। जिससे पता किया जा सके कि किस घटना के बाद कौन-सा पैसा आया? केंद्रीय एजेंसियों को भेजी गई जानकारी
सूत्रों का कहना है कि तफ्तीश के दौरान यूपी एटीएस को दूसरे राज्यों के कुछ संदिग्ध नंबर मिले हैं। इसके बाद पूरी जानकारी एनआईए से भी साझा की गई है। इसमें महाराष्ट्र के कुछ नंबर अहम बताए जा रहे हैं। इस बारे में एडीजी अमिताभ यश बताते हैं कि इनके पास मिले वीडियो में कुछ अन्य आतंकी हथियार के साथ नजर आ रहे थे। उनकी पहचान आकिब, महजुल, आजाद और उबैद मलिक के रूप में हुई है। इनके खिलाफ सेंट्रल एजेंसी के जरिए बिजनौर में मुकदमा दर्ज हुआ है। ये मामला NIA के साथ भी साझा किया गया। जिसके बाद दक्षिण अफ्रीका में रह रहे महजुल, सऊदी अरब में रह रहे आकिब और आजाद के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया गया है। दो तरह से पाकिस्तानी हैंडलर से करते थे संपर्क
अमिताभ यश ने बताया- जांच के दौरान यह भी सामने आया कि ये लोग पाकिस्तान के अबु बकर को 2 तरह से संपर्क करते थे। 1. कॉलिंग के लिए सिंग्नल ऐप का इस्तेमाल करते थे। 2. डॉक्यूमेंट, वीडियो फाइल भेजने के लिए इंस्टाग्राम का इस्तेमाल करते थे। पकड़े न जाएं, इसलिए वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (VPN) का इस्तेमाल करते थे। यही वजह है कि IP एड्रेस ट्रेस करने पर ज्यादा नंबर अफगानिस्तान की लोकेशन के दिख रहे हैं। लखनऊ रेलवे स्टेशन पर धमाका करने की थी प्लानिंग
एटीएस के मुताबिक, गिरोह ने लखनऊ रेलवे स्टेशन के पास सिग्नल बॉक्स और अन्य संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने की योजना बनाई थी। उनका मकसद 2 अप्रैल को बड़ा विस्फोट और बड़ी जनहानि करना था, जिससे दहशत फैल सके। हालांकि, एटीएस को पहले ही इसकी सूचना मिल गई थी। टीम ने समय रहते आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। यूट्यूब की सर्च हिस्ट्री में लिखा मिला- केमिकल बम कैसे बनाते हैं
शाकिब और अरबाब के मोबाइल के यूट्यूब की सर्च में मिला है- टाइम बम कैसे बनाया जाता है? कैमिकल बम कैसे बनाया जाता है? सटीक निशाना लगाने की टेक्निक क्या हैं? इन्होंने कई वीडियो देखे भी हैं। कुछ लिंक और वीडियो अबु बकर ने उन्हें भेजे हैं। ये लोग कितना कुछ सीख सके थे, अब ये 5 दिन की रिमांड के बाद ही क्लियर हो सकेगा। ———————— ये खबर भी पढ़ें… सबसे ज्यादा वोटर भाजपा की सीटों पर घटे, योगी की सीट पर 33 हजार, नेता विपक्ष की सीट पर 41 हजार नाम कटे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बाद जारी फाइनल वोटर लिस्ट ने ने सीएम योगी की आशंका को सच साबित कर दिया। यूपी में सपा की तुलना में भाजपा और उसके सहयोगी दलों की सीटों पर वोटर ज्यादा कम हुए हैं। यह ट्रेंड शहरी और ग्रामीण दोनों विधानसभा सीटों पर एक जैसा है। पूरी खबर पढ़ें…



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