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Shivraj Singh Chouhan: बीजेपी के हाथ में होगी बिहार की कमान! शिवराज सिंह चौहान चुनेंगे नया मुख्यमंत्री?


India

oi-Kumari Sunidhi Raj

Shivraj Singh Chouhan: बिहार की सियासत में एक बार फिर बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। जिसने राज्य की राजनीतिक दिशा को पूरी तरह बदल दिया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) के इस्तीफे के साथ ही प्रदेश में नई सरकार के गठन की कवायद युद्धस्तर पर शुरू हो गई है। राजनीतिक गलियारों में इस बात की प्रबल चर्चा है कि इस बार सत्ता की बागडोर सीधे भारतीय जनता पार्टी (BJP) के हाथों में होगी।

लंबे समय तक गठबंधन की राजनीति में सहायक भूमिका निभाने वाली बीजेपी अब राज्य में अग्रणी भूमिका निभाने को तैयार दिख रही है। इस संभावित बदलाव ने न केवल कार्यकर्ताओं में नया जोश भर दिया है, बल्कि विपक्षी खेमे में भी हलचल पैदा कर दी है। सरकार बनाने की इस जटिल प्रक्रिया के बीच बीजेपी आलाकमान ने अपने सबसे अनुभवी चेहरों को मैदान में उतार दिया है ताकि नेतृत्व का चयन निर्बाध रूप से हो सके।

Shivraj Singh Chouhan

शिवराज सिंह चौहान को मिली बड़ी जिम्मेदारी

भारतीय जनता पार्टी ने बिहार में नए नेतृत्व के चयन के लिए अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है। पार्टी के संसदीय बोर्ड ने केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान को केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। शिवराज सिंह चौहान की भूमिका विधायक दल की बैठक में मुख्यमंत्री के नाम पर सहमति बनाने और पूरी प्रक्रिया की निगरानी करने की होगी। अनुभवी नेता होने के नाते उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है ताकि बिहार में सत्ता हस्तांतरण का कार्य सुचारू रूप से संपन्न हो सके।

Shivraj Singh Chouhan


NDA की बैठक और चयन की प्रक्रिया

बिहार सरकार में मंत्री विजय कुमार चौधरी ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान परिस्थितियों में मुख्यमंत्री पद का नाम तय करने का विशेषाधिकार बीजेपी के पास है। प्रक्रिया के अनुसार:

  • सबसे पहले बीजेपी अपने विधायक दल के नेता का नाम प्रस्तावित करेगी।
  • इसके बाद एनडीए के सभी घटक दलों के विधायकों की एक संयुक्त बैठक बुलाई जाएगी।
  • इसी बैठक में विधिवत रूप से नेता का चुनाव होगा, जो बिहार के अगले मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे।

BJP की केंद्रीय भूमिका और मुलाकातों का दौर

विजय चौधरी ने जोर देकर कहा कि नई सरकार के स्वरूप को लेकर बीजेपी की भूमिका सबसे अहम है। उन्होंने आश्वस्त किया कि गठन की प्रक्रिया में अब अधिक विलंब नहीं होगा और जल्द ही नए नेतृत्व की तस्वीर साफ हो जाएगी।

इसी बीच, उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और नीतीश कुमार की हालिया मुलाकात ने सियासी पारा बढ़ा दिया है। हालांकि, जेडीयू नेताओं ने इसे एक सामान्य शिष्टाचार भेंट करार दिया है। अब पूरे देश की निगाहें दिल्ली और पटना के घटनाक्रमों पर टिकी हैं कि बीजेपी बिहार की कमान किस दिग्गज के हाथों में सौंपती है।

ये भी पढ़ें: Nishant Kumar: पटना की सड़कों पर लगे निशांत कुमार के पोस्टर, क्या नीतीश कुमार सौंपेंगे बेटे को अपनी विरासत?

With AI Inputs



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Asha Bhosle: ‘बेइंतहा खूबसूरत’, कौन हैं जनाई भोसले? क्रिकेटर सिराज से उड़ी थीं अफेयर की खबरें


Entertainment

oi-Ankur Sharma

Asha Bhosle Grand Daughter Zanai Bhosle: भारतीय संगीत जगत की महान गायिका आशा भोसले आज हमारे बीच में नहीं रहीं। उनके बेटे आनंद भोसले ने रविवार दोपहर को इस बात की पुष्टि की। 92 साल की आशा भोसले पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रही थीं। आपको बता दें कि शनिवार को दिल और सांस लेने में तकलीफ़ होने के बाद आशा भोसले को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

शनिवार शाम को उनकी पोती ज़नाई भोसले ने सोशल मीडिया पर इस बात की पुष्टि की थी कि ‘मशहूर गायिका को थकावट और सीने में दर्द की शिकायत हुई थी जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया है, आप सभी उनके लिए दुआ कीजिए।’ लेकिन आज सुबह मनहूस खबर आई कि सुरों की मल्लिका ने दुनिया को अलविदा कह दिया।

Zanai Bhosle

20 भाषाओं में 11,000 से अधिक गाने गाकर ‘लिम्का वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ बनाने वाली आशा अपने पीछे संगीत की एक पूरी विरासत छोड़ गई हैं। पिछले कुछ वक्त से वो अपनी पोती जनाई भोसले के साथ पब्लिल इवेंट में नजर आती थीं, उन्होंने मंच पर अपनी पोती संग कई स्टेज शो भी कर चुकी हैं, दोनों के बीच में बहुत ही खूबसूरत बॉडिंग देखने को मिलती थी। कुछ वक्त पहले दोनों ने मुंबई के बांद्रा में जनाई के जन्मदिन का जश्न मनाया था, इस मौके की कई तस्वीरें सोशल मीडिया पर छाई थीं।

Zanai Bhosle

‘Zanai Bhosle बहुत ज्यादा सुंदर’, सोशल मीडिया पर वायरल हुईं तस्वीरें

लंबे, घने बाल और बड़ी-बड़ी आंखों वाली जनाई बहुत ज्यादा सुंदर और आकर्षक हैं। खास बात यह है कि इतने प्रतिष्ठित परिवार से ताल्लुक रखने के बावजूद उनकी सादगी और विनम्रता लोगों का दिल जीत लेती है।उनके पहनावे में भारतीय परंपरा और आधुनिकता का खूबसूरत मेल देखने को मिलता है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर Zanai की बहुत सारी तस्वीरें मौजूद हैं। जिस वक्त उनकी तस्वीरें वायरल हुई थीं उस वक्त यूजर्स उन्हें देखकर बुरी तरह से क्रेजी हो गए थे।

Zanai Bhosle

Asha Bhosle के बेटे आनंद भोसले की बेटी हैं जनाई भोसले

एक ने लिखा था कि ‘ ये तो परी है’, तो वहीं एक ने लिखा था – ‘बेइंतहा खूबसूरत’। आपको बता दें कि जनाई भोसले मशहूर सिंगर आशो भोसले के बेटे आनंद भोसले की बेटी हैं, इनकी मम्मी का नाम अनुजा भोसले है। इनकी पढ़ाई लिखाई स्वीटजरलैंड से हुई है और इन्होंने भी संगीत की शिक्षा ली है। इनका एक भाई भी है जिनका नाम Ranjai Bhosle है।

Zanai Bhosle

बॉलीवुड में डेब्यू करने वाली हैं Zanai Bhosle

जनाई जल्द ही फिल्म The Pride of Bharat – Chhatrapati Shivaji Maharaj से बॉलीवुड में डेब्यू करने वाली हैं। इस फिल्म में वह ‘महारानी सईबाई भोसले’ का किरदार निभाएंगी। हाल ही में उनका नाम भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद सिराज के साथ जोड़ा गया था।

Zanai Bhosle

लेकिन जनाई ने इन अफवाहों को गलत बताते हुए कहा था ‘सिराज उनके भाई जैसे हैं, जो भी खबरें फैल रही हैं वो पूरी तरह से गलत और बेबुनियाद हैं।’ जनाई ने हमेशा अपनी दादी को अपनी प्रेरणा और शक्ति बताया और कहा था’वो हमेशा अपनी दादी की तरह ऊर्जावान रहना चाहती हैं।’



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नेचर लवर्स के लिए स्वर्ग! तेलंगाना का ये हिडन हिल स्टेशन ऊटी को दे रहा टक्कर


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Hidden Hill Stations Telangana: तेलंगाना में स्थित एक खूबसूरत हिल स्टेशन को ‘तेलंगाना का ऊटी’ कहा जाता है, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. झीलों, हरियाली और पहाड़ों से घिरा यह स्थान पर्यटकों को सुकूनभरा अनुभव देता है. यहां का शांत वातावरण और मनमोहक दृश्य नेचर लवर्स और ट्रैवलर्स को अपनी ओर आकर्षित करते हैं. भीड़-भाड़ से दूर यह जगह ऑफबीट डेस्टिनेशन के रूप में उभर रही है. परिवार और दोस्तों के साथ घूमने के लिए यह एक शानदार विकल्प है, जहां आप प्रकृति के करीब समय बिता सकते हैं.

सूर्यास्त और बैकवाटर का जादुई दृश्य: दिन भर की थकान के बाद चंद्रमपल्ली बांध के बैकवाटर पर सूर्यास्त देखना एक अविस्मरणीय अनुभव होता है. गोल्डन ऑवर के दौरान जब सूरज की रोशनी पानी की सतह पर पड़ती है तो पूरा परिदृश्य तांबे के रंग में नहा जाता है. पानी और पहाड़ियों का यह संगम एक शांत, दर्पण जैसा प्रभाव पैदा करता है, जो फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए सबसे बेहतरीन समय होता है.

यह स्थान केवल एक हिल स्टेशन नहीं बल्कि एक समृद्ध पारिस्थितिक क्षेत्र है। यह प्रसिद्ध चिंचोली वन्यजीव सेनेटरी और चंद्रमपल्ली बांध के बैकवाटर के पास स्थित है। लगभग 3 घंटे की सुखद ड्राइव के बाद आप एक ऐसी दुनिया में पहुँच जाते हैं जहाँ शहरी कंक्रीट के बजाय सागौन के घने जंगल और घुमावदार वन मार्ग आपका स्वागत करते हैं। यहाँ का वातावरण दक्कन के पठार की वास्तविक और बीहड़ सुंदरता को दर्शाता है।

यह स्थान केवल एक हिल स्टेशन नहीं बल्कि एक समृद्ध पारिस्थितिक क्षेत्र है. यह प्रसिद्ध चिंचोली वन्यजीव सेनेटरी और चंद्रमपल्ली बांध के बैकवाटर के पास स्थित है. लगभग 3 घंटे की सुखद ड्राइव के बाद आप एक ऐसी दुनिया में पहुँच जाते हैं, जहाँ शहरी कंक्रीट के बजाय सागौन के घने जंगल और घुमावदार वन मार्ग आपका स्वागत करते हैं. यहाँ का वातावरण दक्कन के पठार की वास्तविक और बीहड़ सुंदरता को दर्शाता है.

दशकों से हैदराबाद के लोग छुट्टियों के लिए भीड़भाड़ वाले रिसॉर्ट्स और मनोरंजन पार्कों तक ही सीमित रहे हैं। लेकिन अब शहर की हलचल से दूर एक नए प्राकृतिक ठिकाने की खोज हो रही है। हैदराबाद से महज 135 किलोमीटर दूर तेलंगाना-कर्नाटक सीमा पर स्थित गोट्टम गुट्टा एक उभरता हुआ पर्यटन स्थल है। इसकी बेमिसाल खूबसूरती के कारण ही इसे स्थानीय स्तर पर तेलंगाना का ऊटी कहा जाने लगा है।

दशकों से हैदराबाद के लोग छुट्टियों के लिए भीड़भाड़ वाले रिसॉर्ट्स और मनोरंजन पार्कों तक ही सीमित रहे हैं, लेकिन अब शहर की हलचल से दूर एक नए प्राकृतिक ठिकाने की खोज हो रही है. हैदराबाद से महज 135 किलोमीटर दूर तेलंगाना-कर्नाटक सीमा पर स्थित गोट्टम गुट्टा एक उभरता हुआ पर्यटन स्थल है. इसकी बेमिसाल खूबसूरती के कारण ही इसे स्थानीय स्तर पर तेलंगाना का ऊटी कहा जाने लगा है.

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आवश्यक दिशा-निर्देश चूंकि गोट्टम गुट्टा एक संरक्षित प्राकृतिक क्षेत्र है इसलिए यहाँ व्यावसायिक विकास कम है। यात्रियों को कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए यहाँ कोई लग्जरी होटल नहीं हैं इसलिए एक दिवसीय  योजना बनाना बेहतर है अपने साथ पर्याप्त भोजन और पानी जरूर ले जाएँ।जंगली रास्तों के लिए मजबूत ट्रेकिंग जूते पहनना अनिवार्य है।

आवश्यक दिशा-निर्देश: चूंकि गोट्टम गुट्टा एक संरक्षित प्राकृतिक क्षेत्र है इसलिए यहां व्यावसायिक विकास कम है. यात्रियों को कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए यहां कोई लग्जरी होटल नहीं हैं इसलिए एक दिवसीय योजना बनाना बेहतर है. अपने साथ पर्याप्त भोजन और पानी जरूर ले जाएं. जंगली रास्तों के लिए मजबूत ट्रेकिंग जूते पहनना अनिवार्य है.

रोमांचक गतिविधियाँ और ट्रेकिंग साहसिक गतिविधियों के शौकीनों के लिए यह जगह स्वर्ग है। यहाँ सागौन के बागानों और शानदार चट्टानी इलाकों से होकर गुजरने वाले कई रास्ते हैं। पर्यटक यहाँ अपनी क्षमता के अनुसार आसान रास्तों या चुनौतीपूर्ण वन ट्रेकिंग का चुनाव कर सकते हैं। इसके अलावा यहाँ जंगलों में छिपे छोटे-छोटे प्राचीन मंदिर भी मिलते हैं जो इस प्राकृतिक यात्रा में एक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक शांति का पुट जोड़ देते हैं।

रोमांचक गतिविधियाँ और ट्रेकिंग: साहसिक गतिविधियों के शौकीनों के लिए यह जगह स्वर्ग है. यहां सागौन के बागानों और शानदार चट्टानी इलाकों से होकर गुजरने वाले कई रास्ते हैं. पर्यटक यहाँ अपनी क्षमता के अनुसार आसान रास्तों या चुनौतीपूर्ण वन ट्रेकिंग का चुनाव कर सकते हैं. इसके अलावा यहाँ जंगलों में छिपे छोटे-छोटे प्राचीन मंदिर भी मिलते हैं, जो इस प्राकृतिक यात्रा में एक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक शांति का पुट जोड़ देते हैं.

गोट्टम गुट्टा का सबसे बड़ा मुकुट रत्न यहाँ का एथिपोटाला झरना है। यह झरना घाटी में चट्टानी सीढ़ियों से नीचे गिरता है जो देखने में अत्यंत मनोरम लगता है। झरने की खास बात यह है कि यहाँ तक पहुँचने का रास्ता भी रोमांच से भरा है पर्यटकों को घने जंगल के बीच से होकर ट्रेकिंग करनी पड़ती है जो प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी उपहार से कम नहीं है।

गोट्टम गुट्टा का सबसे बड़ा मुकुट रत्न यहाँ का एथिपोटाला झरना है. यह झरना घाटी में चट्टानी सीढ़ियों से नीचे गिरता है जो देखने में अत्यंत मनोरम लगता है. झरने की खास बात यह है कि यहाँ तक पहुँचने का रास्ता भी रोमांच से भरा है. पर्यटकों को घने जंगल के बीच से होकर ट्रेकिंग करनी पड़ती है, जो प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी उपहार से कम नहीं है.



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प.बंगाल में SIR- सुप्रीम कोर्ट में कल सुनवाई: वोटर लिस्ट से 91 लाख नाम कटे थे; 23 अप्रैल को पहले चरण की वोटिंग


नई दिल्ली14 मिनट पहले

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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले सुप्रीम कोर्ट सोमवार को SIR पर सुनवाई करेगा। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच मामले की सुनवाई करेगी। 10 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वह मतदाता सूची फ्रीज होने के खिलाफ नई याचिकाओं की एक साथ सुनवाई करेगा।

इस दौरान सुप्रीम कोर्ट मालदा जिले में SIR प्रक्रिया के दौरान सात न्यायिक अधिकारियों के घेराव से जुड़े मामले में भी सुनवाई करेगा। चुनाव आयोग ने 9 अप्रैल को बंगाल के लिए SIR की सूची जारी की थी। इसके बाद 91 लाख नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए थे।

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बंगाल में 11.85% नाम हटे

पश्चिम बंगाल में अक्टूबर 2025 में कुल वोटर 7.66 करोड़ थे। इनमें से अब तक 90.83 लाख नाम हटाए गए। लगभग 11.85% वोटर कम हो गए। यानी अब राज्य में 6.76 करोड़ वोटर हैं।

चुनाव आयोग ने फाइनल आंकड़े जारी नहीं किए हैं। इसके अलावा जांच के तहत आए 60.06 लाख वोटरों में से 27.16 लाख के नाम हटाए गए। बांग्लादेश सीमा से लगे जिलों में भी बड़े स्तर पर नाम हटे। नॉर्थ 24 परगना में 5.91 लाख में से 3.25 लाख नाम हटे। वहीं, 8.28 लाख में से 2.39 लाख नाम हटे।

चुनवा आयोग और TMC के बीच मतभेद

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8 अप्रैल को सांसद डेरेक ओ’ब्रायन के नेतृत्व में TMC का प्रतिनिधि मंडल ने दिल्ली में चुनाव आयोग से मिलने पहुंचा था। लेकिन बैठक के बाद डेरेक ने कहा कि हमने SIR के मुद्दे पर समय मांगा था, लेकिन मीटिंग के दौरान हमारे साथ खराब व्यवहार किया गया। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ने हमें सिर्फ 5 मिनट में भगा दिया

चुनाव आयोग के सूत्रों के मुताबिक, डेरेक ओ’ब्रायन ने CEC को बोलने से रोका और धमकी दी। वह कोई बात सुन ही नहीं रहे थे।

12 राज्यों-UT में SIR, 6.08 करोड़ लोगों के नाम कटे

चुनाव आयोग के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दूसरे फेज के तहत शुक्रवार को उत्तर प्रदेश में फाइनल वोटर लिस्ट जारी की गई। इसके पूरा होने के बाद 9 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों की वोटर लिस्ट में कुल 6.08 करोड़ नाम कम हुए हैं।

पिछले साल 27 अक्टूबर को SIR शुरू होने से पहले 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कुल मतदाता करीब 51 करोड़ थे। फाइनल लिस्ट के बाद यह संख्या 44.92 करोड़ रह गई।

SIR के दूसरे फेज में उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, राजस्थान, छत्तीसगढ़, केरल, गुजरात, मध्य प्रदेश, गोवा समेत पुडुचेरी, अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप की फाइनल वोटर लिस्ट पब्लिश की गई है।

उत्तर प्रदेश में SIR की फाइनल लिस्ट में वोटर्स 13% घटकर 13.39 करोड़ रह गए हैं। यानी 2.04 करोड़ नाम कट गए हैं, वहीं पश्चिम बंगाल में भी करीब 91 लाख नाम बाहर हुए।

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पश्चिम बंगाल में SIR ही सबसे बड़ा मुद्दा:नई वोटर लिस्ट से CM ममता की परेशानी बढ़ी, 50 सीटों पर TMC को ज्यादा चुनौती

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8 अप्रैल की सुबह बूंदाबांदी के बीच करीब सुबह 10:25 बजे तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी समर्थकों के हुजूम के साथ पैदल ही हरीश चटर्जी स्ट्रीट स्थित अपने घर से नामांकन के लिए निकलीं। पूरी खबर पढे़ं…



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आशा भोसले ने अंतिम बार किस क्रिकेटर से की मुलाक़ात, मिलने के एक महीने बाद मौत, खिलाड़ी अब IPL में शामिल


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Aaj Ke Match Ka Toss Kon Jeeta 12 April: LSG vs GT, लखनऊ-गुजरात में धुरंधरों की फौज, किसे मिलेगी जीत?


Cricket

oi-Amit Kumar

Aaj Ke Match Ka Toss Kon Jeeta 12 April: आईपीएल 2026 (IPL 2026) के 19वें मुकाबले में आज मेजबान लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) का सामना गुजरात टाइटंस (GT) से होने जा रहा है। इस मुकाबले में गुजरात ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया है। इकाना स्टेडियम की बैलेंस्ड पिच पर होने वाली यह भिड़ंत रणनीतियों की जंग साबित होने वाली है। दोनों ही टीमें अपने पिछले मैच बेहद रोमांचक अंदाज में जीतकर यहां पहुंची हैं, जिससे खिलाड़ियों का आत्मविश्वास सातवें आसमान पर है।

पिछले मैच में लखनऊ को मिली जीत (Aaj Ke Match Ka Toss Kon Jeeta 12 April)

लखनऊ और गुजरात दोनों ने अपने पिछले मैचों में नेल्ड-बाइटिंग फिनिश देखा है। कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के खिलाफ 181 रनों का पीछा करते हुए लखनऊ ने 104 पर 5 विकेट गंवा दिए थे। यहां इम्पैक्ट प्लेयर आयुष बदोनी (54 रन) ने पारी को संभाला, लेकिन असली हीरो मुकुल चौधरी रहे। मुकुल ने महज 27 गेंदों में 7 छक्कों की मदद से 54 रनों की ऐतिहासिक पारी खेलकर आखिरी गेंद पर लखनऊ को जीत दिलाई।

Aaj Ke Match 1

गुजरात को एक रन से मिली थी जीत

दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ गुजरात ने 210 रन बनाए थे। जवाब में दिल्ली ने 209 रन बना लिए थे, लेकिन गुजरात ने दबाव में खुद को शांत रखते हुए 1 रन से मैच अपने नाम किया। इकाना स्टेडियम की पिच अब पहले जैसी स्लो नहीं रही, लेकिन यहां का मिजाज आज भी गेंदबाजों और बल्लेबाजों के बीच संतुलन बनाए रखता है। यहां पहली पारी का औसत स्कोर 161 रन है। पिच पर 60% मदद स्पिनरों को और 40% तेज गेंदबाजों को मिलती है।

पिच से किसे मिलेगा फायदा

हाल के मैचों में यहां बाउंस और पेस देखा गया है, जिससे स्ट्रोक खेलना आसान हुआ है। हालांकि, दोपहर की गर्मी (35°C) में पिच और धीमी हो सकती है, जो राशिद खान जैसे स्पिनरों के लिए फायदेमंद होगी। गुजरात के कप्तान जबरदस्त फॉर्म में हैं। पिछली 9 पारियों में 454 रन बना चुके गिल ने दिल्ली के खिलाफ भी 70 रनों की ठोस पारी खेली थी।

इन खिलाड़ियों पर रहेगी नजर

लखनऊ के लिए मार्करम मध्यक्रम की रीढ़ हैं। उनका 149 का स्ट्राइक रेट टीम को मजबूती देता है। वहीं लखनऊ के लिए सबसे बड़ी ताकत उनका ‘लोअर मिडिल ऑर्डर’ है, जिसने केकेआर के खिलाफ असंभव को संभव किया। दिल्ली के खिलाफ 4 ओवर में 17 रन देकर 3 विकेट लेने वाले राशिद इकाना की पिच पर सबसे घातक साबित हो सकते हैं।

दोनों टीमों की प्लेइंग-XI (Playing XI)

LSG: मिचेल मार्श, एडन मार्करम, ऋषभ पंत (कप्तान), आयुष बदोनी, निकोलस पूरन (विकेटकीपर), अब्दुल समद, मुकुल चौधरी, आवेश खान, दिगवेश सिंह, प्रिंस यादव, मोहम्मद शमी।

GT: साई सुदर्शन, शुभमन गिल (कप्तान), जोस बटलर (विकेटकीपर), वाशिंगटन सुंदर, ग्लेन फिलिप्स, राहुल तेवतिया, राशिद खान, कागिसो रबाडा, मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा, अशोक शर्मा।



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कौन थे आशा भोसले के दोनों पति? पहली शादी में टॉर्चर, 2 बच्चों की मौत, रुला देगी आशा ताई की दर्दनाक कहानी


Entertainment

oi-Pallavi Kumari

Asha Bhosle Husband: भारतीय संगीत की दिग्गज आवाज आशा भोसले अब हमारे बीच नहीं रहीं, लेकिन उनकी जिंदगी सिर्फ सुरों तक सीमित नहीं थी। यह कहानी है एक ऐसी महिला की, जिसने मंच पर तालियां बटोरीं, लेकिन निजी जिंदगी में दर्द, संघर्ष और टूटन के कई दौर देखे। 12 अप्रैल 2026 को 92 वर्ष की आयु में मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली।

दो शादियां, एक असफल और दर्दनाक रिश्ता, फिर एक सच्चा प्यार… और बच्चों के साथ ऐसी त्रासदी, जो किसी को भी अंदर तक तोड़ दे। आइए जानें उनके दोनों पति के बारे में और निजी जिंदगी के उन पहलुओं को समझते हैं जिन्होंने उन्हें एक मजबूत महिला बनाया।

Asha Bhosle Husband

8 सितंबर 1933 को जन्मीं आशा, महान शास्त्रीय गायक दीनानाथ मंगेशकर की बेटी थीं और लता मंगेशकर की छोटी बहन। लेकिन 9 साल की उम्र में ही पिता का साया उठ गया। परिवार पर आर्थिक संकट आ गया। ऐसे में छोटी उम्र में ही आशा और लता ने गाना गाकर घर चलाना शुरू किया। यहीं से आशा भोसले के संघर्ष की शुरुआत हुई।

कौन थे आशा भोसले के पहले पति गणपतराव भोसले? (Asha Bhosle and Ganpatrao Bhosle)

आशा भोसले की पहली शादी किसी ट्रेजेडी से कम नहीं थी। जब वह मात्र 16 साल की थीं, तब उन्हें अपनी बड़ी बहन लता मंगेशकर के सेक्रेटरी गणपतराव भोसले से प्यार हो गया था। गणपतराव उनसे 15 साल बड़े थे, यानी उनकी उम्र उस वक्त 31 साल थी।

परिवार और विशेषकर लता दीदी इस रिश्ते के सख्त खिलाफ थीं, लेकिन प्यार में डूबी आशा ने किसी की नहीं सुनी और घर से भागकर शादी कर ली। इस फैसले की वजह से उनके परिवार ने उनसे बातचीत तक बंद कर दी थी। लेकिन जिसे वह अपना आशियाना समझ रही थीं, वहीं से उनकी जिंदगी का सबसे काला दौर शुरू हुआ।

Asha Bhosle and Ganpatrao Bhosle

शुरुआत में यह रिश्ता प्यार जैसा लगा, लेकिन जल्द ही यह एक दर्दनाक अनुभव में बदल गया। ससुराल में उन्हें सम्मान नहीं मिला, घरेलू हिंसा और मारपीट का सामना करना पड़ा और मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी। हालात इतने बिगड़ गए कि आशा भोसले को यह रिश्ता छोड़ना पड़ा।

ससुराल में टॉर्चर और घरेलू हिंसा का शिकार (Asha Bhosle Domestic Violence)

शादी के कुछ समय बाद ही गणपतराव और उनके परिवार का असली चेहरा सामने आ गया। 16 साल की उस लड़की को ससुराल में न केवल मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया, बल्कि उनके साथ मारपीट भी की गई। वह घरेलू हिंसा का शिकार रहीं।

11 साल के इस दर्दनाक रिश्ते का अंत तब हुआ जब उन्हें उनके बच्चों के साथ घर से निकाल दिया गया। उस वक्त आशा जी गर्भवती थीं। ससुराल से मिले दुखों और मायके से टूटे रिश्तों ने उन्हें इतना तोड़ दिया था कि उन्होंने अपनी जिंदगी खत्म करने तक का सोच लिया था, लेकिन बच्चों की खातिर वह फिर से खड़ी हुईं और अकेले ही उनकी जिम्मेदारी संभाली।

कौन थे आशा भोसले के दूसरे पति आरडी बर्मन? (Asha Bhosle and R.D. Burman)

पहली शादी के टूटने के करीब 20 साल बाद आशा जी की जिंदगी में मशहूर संगीतकार राहुल देव बर्मन (पंचम दा) आए. 1980 में 47 साल की उम्र में उन्होंने आरडी बर्मन से दूसरी शादी की। दिलचस्प बात यह है कि पंचम दा उम्र में आशा जी से 6 साल छोटे थे और यह उन दोनों की ही दूसरी शादी थी।

हालांकि, यह शादी भी आसान नहीं थी। आरडी बर्मन की मां इस रिश्ते के सख्त खिलाफ थीं और उन्होंने चेतावनी दी थी कि यह शादी उनकी लाश पर से गुजर कर ही होगी। लेकिन आरडी बर्मन अपने पिता के निधन के बाद मां की गिरती मानसिक स्थिति के बीच आशा जी का साथ नहीं छोड़ पाए और उनसे शादी की। दोनों ने 14 साल एक साथ गुजारे, जिसके बाद 1994 में आरडी बर्मन का निधन हो गया।

Asha Bhosle and R D Burman

आरडी बर्मन हिंदी सिनेमा के सबसे सफल म्यूजिक डायरेक्टर्स में से एक थे। 300 से ज्यादा फिल्मों में संगीत दिया था। किशोर कुमार, मोहम्मद रफी और आशा भोसले के साथ कई सुपरहिट गाने दिए थे।

आशा भोसले के बच्चे: दो बच्चों की मौत ने झकझोर दिया (Asha Bhosle Children)

आशा भोसले ने अपनी आंखों के सामने अपने दो बच्चों को खोते देखा, जो किसी भी मां के लिए सबसे बड़ा असहनीय दुख होता है।

वर्षा भोसले (बेटी): वर्षा एक पत्रकार थीं। 2012 में उन्होंने डिप्रेशन के चलते खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। उस वक्त उनकी उम्र 56 साल थी।

हेमंत भोसले (बड़ा बेटा): हेमंत एक म्यूजिक कंपोजर थे, जिनका साल 2015 में कैंसर की वजह से 66 वर्ष की उम्र में निधन हो गया।

आनंद भोसले (छोटा बेटा): वर्तमान में आनंद भोसले ही अपनी मां के साथ थे। वह न केवल उनके करियर को मैनेज करते थे बल्कि उनके अंतरराष्ट्रीय रेस्टोरेंट बिजनेस को भी संभालते हैं।

आशा भोसले करियर

आशा जी का करियर जितना शानदार रहा, उतना ही विविधतापूर्ण भी। उन्होंने 20 से अधिक भाषाओं में 10,000 से ज्यादा गाने गाए। उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर की मौत के बाद जो सफर शुरू हुआ था, उसने उन्हें ‘गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड’ तक पहुंचाया। ‘दम मारो दम’ से लेकर ‘इन आंखों की मस्ती’ तक, उनकी आवाज हर पीढ़ी के लिए एक जादू की तरह रही।

Asha Bhosle

FAQs: आशा भोसले की जिंदगी से जुड़े अहम सवाल
1. आशा भोसले के पहले पति कौन थे?
आशा भोसले के पहले पति गणपतराव भोसले थे, जो लता मंगेशकर के सेक्रेटरी थे।

2. आरडी बर्मन और आशा भोसले की उम्र में क्या अंतर था?
आरडी बर्मन, आशा भोसले से 6 साल छोटे थे।

3. आशा भोसले की बेटी वर्षा ने सुसाइड क्यों किया?
वर्षा भोसले डिप्रेशन की शिकार थीं, जिसके चलते उन्होंने 2012 में खुदकुशी कर ली थी।

4. आशा जी के कितने बच्चे जीवित हैं?
वर्तमान में उनका छोटा बेटा आनंद भोसले ही जीवित है, जो उनका बिजनेस संभालता है।

5. आशा भोसले का अंतिम संस्कार कब और कहां होगा?
उनका अंतिम संस्कार कल शाम 4 बजे मुंबई के शिवाजी पार्क में किया जाएगा।

आशा ताई भले ही अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी सुरीली आवाज और उनके संघर्ष की कहानी युगों-युगों तक संगीत प्रेमियों और उन महिलाओं को प्रेरित करती रहेगी जो मुश्किल हालातों से लड़कर अपनी पहचान बनाना चाहती हैं। विनम्र श्रद्धांजलि!

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Asha Bhosle Passed Away: ‘गर्भवती आशा ने निगल ली थीं नींद की गोलियां’, सालों बाद सामने आया था सच


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oi-Ankur Sharma

Asha Bhosle Passed Away: ‘मेरा कुछ सामान तुम्हारे पास पड़ा है’… गाकर लोगों को ‘रूहानी इश्क’ से रूबरू कराने वाली आशा भोसले जब जवां अंदाज में लोगों से कहती थीं कि ‘मैंने होठों से लगाई तो हंगामा हो गया’ … तो क्या 80 साल के बूढ़े और क्या 16 साल के जवान … सभी लोग कुछ देर के लिए अपना सबकुछ भूलकर थिरकने को तैयार हो जाते थे।

सुरों की मल्लिका आशा भोसले अब हमारे बीच नहीं रहीं। 92 साल में दुनिया को अलविदा कहने वाली आशा भोसले केवल एक सिंगर नहीं थीं बल्कि संगीत का एक पूरा संस्थान थीं, जिसका हर अंश अपनी नई कहानी कहता है।

Asha Bhosle

92 साल की आशा पिछले दिनों अपनी बॉयोग्राफी ‘आशा भोसले: ए लाइफ़ इन म्यूजिक’ को लेकर जबरदस्त सु्र्खियों में थीं, उनकी इस जीवनी को मंजुल पब्लिशिंग हाउस के imprint अमरीलिस ने प्रकाशित किया था, जबकि इसकी लेखिका रम्या शर्मा हैं।

इस जीवनी में आशा की लाइफ की उस अंश को भी उकेरा गया था, जिसे कि ज्यादा लोग जानते ही नहीं थे। उसे पढ़ने के बाद हर कोई हैरान था कि मखमली आवाज की ये मल्लिका जिंदगी के उस दुख को झेलकर आई है, जिसे सिर्फ नरक कहा जा सकता है।

Asha Bhosle की पहली शादी भयानक सपना थी

दरअसल इस किताब में आशा की पहली शादी का जिक्र है, जो कि उनके लिए एक भयानक अनुभव था, आपको बता दें कि आशा को 16 साल की बाली उमर में अपने से उम्र में 20 साल बड़े गणपतराव भोसले से मोहब्बत हो गई थी।

लता समेत पूरा परिवार आशा की शादी के खिलाफ था

गणपतराव भोसले उनकी बड़ी बहन लता मंगेशकर के सेक्रेटरी थे। आशा ने उस कच्ची उम्र में गणपतराव से शादी करने का फैसला कर लिया था, जिसके खिलाफ लता समेत उनका पूरा परिवार था लेकिन आशा ने किसी की नहीं सुनी।

फैमिली के विरूद्ध जाकर आशा भोसले ने की थी गणपतराव से शादी

उन्होंने फैमिली के विरूद्ध जाकर गणपतराव से शादी कर ली लेकिन ये फैसला उनके लिए इतना बुरा साबित हुआ जिसकी कल्पना उन्होंने कभी भी नहीं की थी। इस शादी से उन्हें तीन बच्चे हुए लेकिन वो घरेलू हिंसा की शिकार रहीं, इस किताब में आशा के उन 11 सालों का पूरा वर्णन है, जो कि उन्होंने अपने पहले पति संग व्यतीत किए थे।

डिप्रेशन में आकर नींद की गोलियों की पूरी बोतल निगल ली

अपनी जीवनी में गायिका ने खुलासा किया था कि ‘गणपतराव का परिवार बहुत रूढ़िवादी था, वो उन्हें बहू के रूप में स्वीकार नहीं पाया और उनके पति भी काफी क्रोधी स्वभाव के थे, शायद वो मेंटली अपसेट भी थे और इसी वजह से उनकी जिंदगी निराशा में बदल गई।’

पूरा प्रयास किया इस शादी को निभाने का’

आशा ने कहा था कि ‘उन्होंने पूरा प्रयास किया इस शादी को निभाने का लेकिन एक दिन उनका धैर्य जवाब दे गया और उन्होंने डिप्रेशन में आकर नींद की गोलियों की पूरी बोतल निगल ली।’

चार महीने की गर्भवती थीं Asha Bhosle

उन्हें जब होश आया तो पता चला कि ‘वो चार महीने की गर्भवती हैं, शायद ये उस अजन्मे बच्चे की ताकत थी, जिसकी वजह से वो बच गईं लेकिन अस्पताल के हालात इतने खराब थे कि उन्हें लगता था कि जैसे की वो नरक में आ गई हैं।’

आशा को पहली शादी से 3 बच्चे, 11 साल बाद टूटी शादी

आशा ने आगे कहा है कि ‘मैंने अपने पति का पूरा सम्मान किया, जैसे कि हिंदू धर्म में किया जाता है, मैंने भी किया लेकिन एक दिन मैं पूरी तरह से हार गई। आपको बता दें कि आशा की पहली शादी 11 साल बाद टूट गई थी।’

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मशहूर संगीतकार आरडी बर्मन से की दूसरी शादी (Asha Bhosle)

लेकिन आशा ने हिम्मत नहीं हारी, तीन बच्चों की मां होने के बावजूद आशा भोसले ने अपने करियर को कभी नहीं छोड़ा। उन्होंने अकेले ही अपने बच्चों को पाला और संघर्षों से जूझते हुए खुद को हिंदी फिल्म संगीत की दुनिया में स्थापित किया।

आरडी बर्मन की पहली शादी साल 1966 में रीता पटेल से हुई थी

लेकिन इसी दौरान उनकी जिंदगी में मशहूर संगीतकार आरडी बर्मन की एंट्री हुई, जो कि उम्र में उनसे करीब 6 साल छोटे थे, काम के दौरान दोनों में मित्रता हुई और फिर दोनों को लगा कि शायद वो दोनों एक-दूसरे के लिए बने हैं। आपको बता दें कि आरडी बर्मन की पहली शादी साल 1966 में रीता पटेल से हुई थी लेकिन दोनों ने साल 1971 में तलाक ले लिया था। साल 1980 में आशा और आरडी ने शादी कर ली और दोनों ही परफेक्ट कपल कहलाए।



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Asha Bhosle Death: 2 बार की शादी, बेटी ने की खुदकुशी,10,000+ गाना गाने वाली आशा भोसले का सफरनामा,जो अमर हो गया


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oi-Pallavi Kumari

Asha Bhosle Legacy and Biography: भारतीय सिनेमा की सबसे बहुमुखी और दमदार आवाजों में शामिल आशा भोसले अब हमारे बीच नहीं रहीं। भारतीय पार्श्व गायन की ‘वर्सेटाइल क्वीन’ और करोड़ों दिलों की धड़कन आशा भोसले ने 12 अप्रैल 2026 को 92 वर्ष की आयु में आखिरी सांस ली। मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। सीने में इन्फेक्शन की वजह से उन्हें भर्ती कराया गया था, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद ‘आशा ताई’ की सुरीली आवाज हमेशा के लिए खामोश हो गई।

उनका जाना सिर्फ एक कलाकार का निधन नहीं, बल्कि भारतीय संगीत के एक युग का अंत है। भजन, गजल, पॉप, कैबरे, फिल्मी गीत-ऐसा शायद ही कोई संगीत का रंग हो जिसे उन्होंने अपनी आवाज से न सजाया हो। 10 हजार से भी ज्यादा गाना गाने वाली आशा भोसले की कहानी में संघर्ष, विद्रोह, प्यार, दर्द और रिकॉर्ड तोड़ सफलता सब कुछ शामिल है।

Asha Bhosle Legacy and Biography

आशा भोसले ने 20 भाषाओं में 10 हजार से ज्यादा गाने गाए हैं। आशा भोसले की सबसे बड़ी ताकत उनकी बहुमुखी प्रतिभा थी। जहां एक तरफ उन्होंने “पिया तू अब तो आजा” जैसे कैबरे सॉन्ग गाए, वहीं दूसरी तरफ “दिल चीज क्या है” जैसी गजलों से दिल जीत लिया। मोहम्मद रफी, किशोर कुमार और मुकेश के साथ उनकी जोड़ी सुपरहिट रही। आर. डी. बर्मन के साथ उनका म्यूजिकल रिश्ता तो बॉलीवुड इतिहास का सुनहरा अध्याय बन गया। तीसरी मंजिल के “आजा आजा” जैसे गानों ने उन्हें एक नई पहचान दी।

बचपन और संघर्ष: 9 साल की उम्र में सिर से उठा पिता का साया (Asha Bhosle Early Life)

8 सितंबर 1933 को महाराष्ट्र के सांगली में जन्मी आशा मंगेशकर (अब भोसले) का नाता एक दिग्गज संगीत घराने से था। उनके पिता पंडित दीनानाथ मंगेशकर शास्त्रीय गायक और नाट्य संगीत के कलाकार थे। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। जब आशा महज 9 साल की थीं, उनके पिता का देहांत हो गया।

तंगहाली के उस दौर में परिवार को पालने की जिम्मेदारी बड़ी बहन लता मंगेशकर और आशा के कंधों पर आ गई। महज 10 साल की उम्र में आशा ने कोल्हापुर से मुंबई का रुख किया और 1943 में अपनी पहली मराठी फिल्म ‘माझा बाल’ के लिए गाना गाया। यहीं से शुरू हुआ वह सफर जो आठ दशकों तक अनवरत चलता रहा।

करियर: ‘नया दौर’ से ‘रंगीला’ तक का जादू (Asha Bhosle Career)

आशा भोसले का शुरुआती करियर बड़ी बहन लता मंगेशकर और उस दौर की दिग्गज गायिकाओं जैसे शमशाद बेगम और गीता दत्त की छाया में रहा। शुरुआत में उन्हें कम बजट की फिल्मों के गाने मिले, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।

शुरुआती दौर आसान नहीं था। 40 और 50 के दशक में गीता दत्त, शमशाद बेगम और लता मंगेशकर जैसी दिग्गज गायिकाओं का दबदबा था। ऐसे में आशा को शुरुआत में छोटे बजट की फिल्मों में गाने गाने पड़े। लेकिन 1952 की फिल्म संगदिल ने उन्हें पहचान दिलाई। फिर 1957 में नया दौर ने उनकी किस्मत बदल दी। संगीतकार ओ. पी. नैय्यर के साथ उनकी जोड़ी ने कई सुपरहिट गाने दिए। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

  • सफलता का स्वाद: 1957 में बीआर चोपड़ा की फिल्म ‘नया दौर’ उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुई। ओपी नैय्यर के संगीत में मोहम्मद रफी के साथ उनके गाए गीत जैसे ‘उड़ें जब जब जुल्फें तेरी’ ने उन्हें रातों-रात स्टार बना दिया।
  • कैबरे और डांस नंबर्स: 1966 में आरडी बर्मन (पंचम दा) के साथ फिल्म ‘तीसरी मंजिल’ ने आशा की गायकी को नया आयाम दिया। ‘आजा आजा’ जैसे गानों के लिए उन्होंने 10 दिन रिहर्सल की थी। इसके बाद ‘पिया तू अब तो आजा’ और ‘ये मेरा दिल’ जैसे गानों ने उन्हें बॉलीवुड की ‘कैबरे क्वीन’ बना दिया।
  • गजल और नेशनल अवॉर्ड: 1981 में फिल्म ‘उमराव जान’ की गजलों ने साबित किया कि आशा सिर्फ डांस नंबर ही नहीं, बल्कि शास्त्रीय आधार वाली गजलें भी उतनी ही शिद्दत से गा सकती हैं। इसके लिए उन्हें पहला नेशनल अवॉर्ड मिला।
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निजी जिंदगी के जख्म: 16 साल की उम्र में बगावत और घरेलू हिंसा (Asha Bhosle Husband Marriage)

आशा भोसले की निजी जिंदगी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं रही। उन्होंने दो शादियां कीं, लेकिन दोनों ही बार किस्मत ने उनकी परीक्षा ली।

पहली शादी (गणपतराव भोसले): महज 16 साल की उम्र में आशा ने अपने से 15 साल बड़े सेक्रेटरी गणपतराव भोसले के साथ घर से भागकर शादी कर ली। मंगेशकर परिवार इसके खिलाफ था। ससुराल में उन्हें काफी प्रताड़ना झेलनी पड़ी। घरेलू हिंसा की शिकार आशा को एक दिन बच्चों के साथ घर से निकाल दिया गया, उस वक्त वह गर्भवती थीं।

दूसरी शादी (आरडी बर्मन): पति से अलग होने के करीब 20 साल बाद, 1980 में उन्होंने खुद से 6 साल छोटे आरडी बर्मन से शादी की। पंचम दा की मां इस रिश्ते के खिलाफ थीं, लेकिन दोनों का प्यार जीत गया। हालांकि, यह साथ भी सिर्फ 14 साल रहा और 1994 में पंचम दा का निधन हो गया।

बच्चों का दुख: बेटे की मौत और बेटी की खुदकुशी (Asha Bhosle Family)

आशा ताई ने शोहरत की बुलंदियां तो देखीं, लेकिन एक मां के तौर पर उन्होंने असहनीय दर्द झेला।

  • वर्षा भोसले: उनकी बेटी वर्षा, जो पेशे से पत्रकार थीं, ने 2012 में डिप्रेशन के चलते खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। यह आशा जी के लिए सबसे बड़ा सदमा था।
  • हेमंत भोसले: बड़े बेटे हेमंत का 2015 में कैंसर की वजह से निधन हो गया।
  • आनंद भोसले: उनका छोटा बेटा आनंद ही उनके साथ रहा, जो उनकी देखभाल और उनके बिजनेस को संभालता है।
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संपत्ति और रेस्टोरेंट बिजनेस: कितनी अमीर थीं आशा ताई? (Asha Bhosle Net Worth)

  • गायन के अलावा आशा भोसले एक सफल बिजनेसवुमन भी रहीं। अप्रैल 2026 तक उनकी कुल संपत्ति ₹80 करोड़ से ₹250 करोड़ के बीच आंकी गई है।
  • 2002 में उन्होंने दुबई में अपना पहला रेस्टोरेंट “Asha’s” शुरू किया था। आज कुवैत, बहरीन, अबू धाबी और ब्रिटेन समेत कई देशों में उनकी रेस्टोरेंट चेन है।
  • 10 हजार से ज्यादा गानों की रॉयल्टी और दक्षिण मुंबई के आलीशान ‘प्रभुकुंज’ अपार्टमेंट समेत उनकी कई संपत्तियां हैं।

आखिरी दौर और रिकॉर्ड्स (Asha Bhosle Records)

  • आशा भोसले के नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज है कि उन्होंने संगीत के इतिहास में सबसे ज्यादा गाने रिकॉर्ड किए। 91 साल की उम्र में भी उन्होंने दुबई के कॉन्सर्ट में ‘तौबा तौबा’ गाने पर परफॉर्म कर सबको हैरान कर दिया था। उन्होंने अपनी बायोग्राफी में अपने जीवन के हर दर्द और खुशी को साझा किया।
  • आशा भोसले ने अपने करियर में 10,000 से ज्यादा गाने रिकॉर्ड किए। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक यह आंकड़ा 12,000 से भी ज्यादा है। उन्होंने हिंदी के अलावा मराठी, बंगाली, गुजराती, पंजाबी समेत 20 से अधिक भाषाओं में गाया। इस उपलब्धि के चलते उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज हुआ।
  • 1981 में आई उमराव जान उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुई। “दिल चीज क्या है”, “इन आंखों की मस्ती” जैसी गजलों ने उन्हें पहला नेशनल अवॉर्ड दिलाया।
  • इसके बाद इजाजत के “मेरा कुछ सामान” के लिए दूसरा नेशनल अवॉर्ड मिला। उन्हें पद्म विभूषण और दादा साहेब फाल्के पुरस्कार जैसे सम्मान भी मिले।
  • 2013 में 79 साल की उम्र में उन्होंने माई से एक्टिंग डेब्यू किया। 2020 में उन्होंने अपना यूट्यूब चैनल “Asha Bhosle Official” शुरू किया।
Asha Bhosle Death

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs – Everything About Asha Bhosle)
Q1. आशा भोसले की मृत्यु कब और कैसे हुई?
आशा भोसले का निधन 12 अप्रैल 2026 को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में चेस्ट इन्फेक्शन की वजह से हुआ।

Q2. आशा भोसले के कितने पति थे?
उन्होंने दो शादियां की थीं। पहले पति गणपतराव भोसले और दूसरे पति मशहूर संगीतकार आरडी बर्मन थे।

Q3. आशा भोसले को कितने नेशनल अवॉर्ड मिले?
उन्हें दो बार नेशनल फिल्म अवॉर्ड (उमराव जान और इजाजत के लिए) मिला। इसके अलावा उन्हें पद्म विभूषण और दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से भी नवाजा गया।

Q4. क्या आशा भोसले और लता मंगेशकर के बीच विवाद था?
शुरुआती दिनों में करियर और आशा जी की पहली शादी को लेकर कुछ दूरियां थीं, लेकिन बाद में दोनों बहनों के बीच अटूट प्यार रहा।

Q5. आशा भोसले की कुल संपत्ति कितनी है?
विभिन्न रिपोर्ट्स के अनुसार, उनकी नेट वर्थ ₹80 करोड़ से ₹250 करोड़ के बीच है, जिसमें उनकी रेस्टोरेंट चेन का बड़ा हिस्सा है।

आशा ताई भले ही हमारे बीच नहीं रहीं, लेकिन उनकी आवाज ‘दम मारो दम’ की मस्ती से लेकर ‘मेरा कुछ सामान’ की संजीदगी तक, आने वाली कई पीढ़ियों के कानों में रस घोलती रहेगी। अलविदा, सुरों की रानी!



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Asha Bhosle Top 10 Songs: आशा भोसले के वो 10 हिट गाने जिनको कभी नहीं भूलेगा देश, निधन पर रो रहा पूरा भारत


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oi-Kumari Sunidhi Raj

Asha Bhosle Top 10 Songs: भारतीय संगीत जगत के एक स्वर्णिम और अविस्मरणीय युग का आज अंत हो गया है। अपनी जादुई आवाज से दशकों तक करोड़ों दिलों पर राज करने वाली दिग्गज पार्श्व गायिका आशा भोसले (Asha Bhosle) अब हमारे बीच नहीं रहीं। 92 वर्षीय आशा ताई ने रविवार को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में अंतिम सांस ली।

उनके निधन की खबर फैलते ही न केवल फिल्म इंडस्ट्री, बल्कि देश-विदेश में मौजूद उनके प्रशंसकों में शोक की लहर दौड़ गई है। शनिवार शाम को उन्हें सीने में संक्रमण (Chest Infection) और अत्यधिक थकान की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। संगीत की दुनिया में कभी न भरने वाला यह शून्य हर उस शख्स को भावुक कर गया है जिसने ‘आशा ताई’ के गानों के साथ अपनी यादें बुनी हैं।

Asha Bhosle Top 10 Songs: आशा भोसले के वो 10 हिट गाने जिनको कभी नहीं भूलेगा देश, निधन पर रो रहा पूरा भारत

Asha Bhosle: शास्त्रीय से लेकर पॉप तक का सफर

आशा भोसले ने भारतीय सिनेमा को वह विविधता दी जो शायद ही किसी अन्य कलाकार के पास हो। उन्होंने ‘इन आंखों की मस्ती’ जैसी रूहानी गजलें गाईं, तो ‘दम मारो दम’ जैसे कल्ट क्लासिक गानों से युवाओं को थिरकने पर मजबूर किया। उनकी आवाज में एक ऐसी ऊर्जा थी जो उम्र के नौवें दशक में भी बरकरार रही।

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Asha Bhosle Top 10 Songs

गाना फिल्म सह-गायक (यदि कोई हो) मुख्य कलाकार (जिन पर फिल्माया गया)
इन आंखों की मस्ती उमराव जान (1981) सोलो रेखा
पिया तू अब तो आजा कारवां सोलो हेलन
ओ मेरे सोना रे तीसरी मंज़िल मोहम्मद रफ़ी आशा पारेख, शम्मी कपूर
कह दूं तुम्हें दीवार किशोर कुमार शशि कपूर, नीतू सिंह
आओ ना मेरे जीवन साथी सोलो राजेश खन्ना, हेलन
सजना है मुझे सौदागर सोलो पद्मा खन्ना
मुझे नौलखा मंगा दे रे शराबी किशोर कुमार (भाग) जया प्रदा
ले गई दिल तो पागल है उदित नारायण करिश्मा कपूर
ढल गया दिन हमजोली मोहम्मद रफ़ी जितेन्द्र, लीना चंदावरकर
दम मारो दम हरे रामा हरे कृष्णा सोलो जीनत अमान

आशा भोसले ने अस्पताल में ली अंतिम सांस, परिवार ने की पुष्टि

92 वर्षीय आशा ताई को शनिवार, 11 अप्रैल को अचानक स्वास्थ्य बिगड़ने पर मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल ले जाया गया था। शुरुआती रिपोर्ट्स में कार्डियक अरेस्ट और फेफड़ों संबंधी जटिलताओं की आशंका जताई गई थी, हालांकि बाद में परिवार ने स्पष्ट किया कि वह सीने में संक्रमण और कमजोरी से जूझ रही थीं। डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद, रविवार को उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया।

उनके पुत्र आनंद भोसले ने इस दुखद समाचार की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि सोमवार सुबह 11 बजे उनके आवास पर पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। इसके बाद शाम 4 बजे मुंबई के शिवाजी पार्क में राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

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