सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को कहा कि मतदान करने और चुनाव लड़ने का अधिकार मौलिक अधिकार नहीं, बल्कि वैधानिक अधिकार हैं। जस्टिस बीवी नागरत्ना और आर महादेवन की बेंच ने कहा कि ये अधिकार केवल उतनी ही सीमा तक अस्तित्व में हैं, जितनी कानून में अनुमति दी गई है।
पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वोटिंग का अधिकार व्यक्ति को चुनावी प्रक्रिया में भाग लेने की अनुमति देता है, जबकि चुनाव लड़ने का अधिकार एक अलग और अतिरिक्त अधिकार है, जिसे योग्यता, पात्रता शर्तों और अयोग्यताओं के अधीन रखा जा सकता है।
राजस्थान के दुग्ध संघ से जुड़ा मामला
यह मामला राजस्थान के जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघों के चुनाव नियमों से संबंधित है। ये संघ राजस्थान सहकारी समितियां अधिनियम, 2001 के तहत बनाए गए तीन स्तर में कार्य करते हैं। उम्मीदवारों की पात्रता तय करने के लिए बायलॉज बनाए गए हैं। उनमें शामिल थे
न्यूनतम दिनों तक दूध की आपूर्ति
दूध की न्यूनतम मात्रा
समितियों की कार्यशील स्थिति
ऑडिट मानक
कुछ प्राथमिक सहकारी समितियों ने इन नियमों को राजस्थान हाई कोर्टमें चुनौती दी, यह कहते हुए कि ये नियम अनुचित हैं और कानून से परे हैं। 2015 में सिंगल बेंच ने बाय-लॉज को रद्द कर दिया, लेकिन पिछले चुनावों को वैध माना। 2022 में डिवीजन बेंच ने भी इस फैसले को बरकरार रखा।
इसके बाद रजिस्ट्रार ने बायलॉज में बदलाव की प्रक्रिया शुरू की। इसके बाद कुछ जिला दुग्ध संघों के अध्यक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की।
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर असहमति जताई सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के तर्क से असहमति जताई। उसने कहा कि बायलॉज (उपनियम) केवल पात्रता मानदंड तय करते हैं। वे न तो अयोग्यता निर्धारित करते हैं और न ही संवैधानिक सिद्धांतों का उल्लंघन करते हैं।
अदालत के अनुसार, सहकारी समितियां आम तौर पर संविधान के अनुच्छेद 12 के तहत “राज्य” नहीं मानी जातीं। वे सामान्यतः सार्वजनिक कार्य नहीं करतीं। इसलिए, उनकी आंतरिक व्यवस्था विशेषकर चुनाव से जुड़े विवादों में अनुच्छेद 226 के तहत अदालत का हस्तक्षेप उचित नहीं होता।
Stock Market Holiday 2026: भारतीय शेयर बाजार में इन्वेस्टमेंट करने वालों के लिए यह सप्ताह काफी महत्वपूर्ण रहा है। निवेशकों के बीच इस बात को लेकर काफी चर्चा है कि अगले हफ्ते बाजार में कितने दिन कामकाज होगा। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) कितने दिन बंद रहेंगे?
दरअसल, 14 अप्रैल 2026 को डॉ. बी.आर. आंबेडकर जयंती के अवसर पर एनएसई और बीएसई पूरी तरह से बंद रहेंगे।यह साल 2026 का सातवां ट्रेडिंग हॉलिडे है, जिसके चलते अगले हफ्ते ट्रेडिंग के लिए केवल चार दिन ही उपलब्ध होंगे।
संविधान निर्माता बाबासाहेब आंबेडकर की जयंती के सम्मान में इस दिन इक्विटी मार्केट में किसी भी तरह की खरीद-बिक्री नहीं की जा सकेगी। चूंकि शनिवार और रविवार को साप्ताहिक अवकाश होता है, इसलिए 14 अप्रैल की छुट्टी को मिलाकर बाजार के लिए यह एक छोटा सप्ताह साबित होने वाला है। शेयर बाजार के आधिकारिक कैलेंडर के अनुसार, साल 2026 में कुल 16 ट्रेडिंग छुट्टियां घोषित की गई हैं, जिनमें से अब 9 छुट्टियां और बाकी हैं।
क्या MCX पर होगी ट्रेडिंग?
बाजार बंद रहने के दौरान निवेशक कोई नई पोजीशन नहीं ले पाएंगे। कमोडिटी मार्केट की बात करें तो MCX पर सुबह का सेशन बंद रहेगा, लेकिन शाम के सेशन में ट्रेडिंग संभव होगी, जबकि NCDEX में दोनों सेशन के दौरान कामकाज बंग रहेगा। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा पहले ही कर लें और जरूरी ट्रेड समय रहते पूरे कर लें।
आगामी ट्रेडिंग हॉलिडे लिस्ट 2026
14 अप्रैल 2026 (मंगलवार): डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर जयंती
01 मई 2026 (शुक्रवार): महाराष्ट्र दिवस
28 मई 2026 (गुरुवार): बकरी ईद
26 जून 2026 (शुक्रवार): मुहर्रम
14 सितंबर 2026 (सोमवार): गणेश चतुर्थी
02 अक्टूबर 2026 (शुक्रवार): महात्मा गांधी जयंती
20 अक्टूबर 2026 (मंगलवार): दशहरा
10 नवंबर 2026 (मंगलवार): दिवाली बलिप्रतिपदा
24 नवंबर 2026 (मंगलवार): गुरु नानक जयंती
25 दिसंबर 2026 (शुक्रवार): क्रिसमस
10 अप्रैल को कैसा रहा मार्केट?
हफ्ते के आखिरी कारोबारी सेशन यानी 10 अप्रैल को शेयर बाजार में शानदार रिकवरी और तेजी का माहौल देखने को मिला। बाजार में चौतरफा खरीदारी की वजह से प्रमुख इंडेक्स हरे निशान में बंद हुए:
सेंसेक्स (Sensex): इसमें लगभग 815 अंकों का बड़ा उछाल देखा गया, जिसके बाद यह 77,453 के स्तर पर पहुंच गया।
निफ्टी (Nifty): निफ्टी ने भी 24,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार किया और 1.01% की मजबूती के साथ 24,016 पर कारोबार करते हुए निवेशकों को राहत दी।
कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा कि महिला आरक्षण कानून में होने वाले संशोधन को राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। ताकि संघवाद कमजोर न हो और संसद की गरिमा को ठेस न पहुंचे। संसद में 16 अप्रैल से होने वाले विशेष सत्र से पहले थरूर ने आरोप लगाया कि सरकार 3 दिन के सत्र का इस्तेमाल राज्य चुनावों से पहले राजनीतिक लाभ लेने और 2029 लोकसभा चुनाव से पहले परिसीमन की तैयारी के लिए कर रही है। थरूर ने X पर लिखा कि कांग्रेस हमेशा से महिलाओं के लिए 33% आरक्षण की समर्थक रही है। 2013 में कांग्रेस ने ही यह बिल पेश कर राज्यसभा से पास कराया था, लेकिन मौजूदा सरकार का रवैया चिंताजनक है। इससे पहले शुक्रवार को कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा हुई थी। इसमें सरकार के प्रस्तावित संशोधनों पर आपत्ति जताई गई। थरूर ने दक्षिण के राज्यों का मुद्दा क्यों उठाया 2023 के कानून में साफ लिखा है कि महिला आरक्षण जनगणना और परिसीमन के बाद ही लागू होगा। परिसीमन यानी जनसंख्या के आधार पर लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या और सीमाएं तय करना। जनगणना के आंकड़ों के आधार पर एक आयोग सीटों का बंटवारा तय करता है। आखिरी बार परिसीमन 2002-2008 के बीच हुआ था, जो 1971 की जनगणना के आधार पर था। सरकार लोकसभा सीटें 543 से बढ़ाकर 816 करना चाहती है। इससे ज्यादा आबादी वाले राज्यों (UP, बिहार, मध्य प्रदेश) की सीटें बढ़ेंगी। दक्षिण भारत के राज्यों (जैसे तमिलनाडु, केरल) को डर है कि उनकी सीटों का अनुपात कम हो जाएगा। अगर कुछ राज्यों की सीटें ज्यादा बढ़ती हैं, तो संसद में उनका प्रभाव भी बढ़ेगा। इससे क्षेत्रीय संतुलन बिगड़ सकता है। यही विपक्ष की बड़ी चिंता है। बिल पर चर्चा के लिए कांग्रेस ने वर्किंग कमेटी की बैठक बुलाई कांग्रेस ने शुक्रवार को वर्किंग कमेटी की बैठक बुलाई। इस दौरान पार्टी ने मोदी सरकार पर महिला आरक्षण कानून के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाया। साथ ही यह भी कहा कि इससे जुड़ा प्रस्तावित परिसीमन संवैधानिक नहीं है। इसके नतीजे गंभीर हो सकते हैं। इस पर 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव के बाद विचार-विमर्श किए जाने की जरूरत है। CWC की बैठक के दौरान, पार्टी प्रमुख मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा था कि वे अब सभी विपक्षी दलों के बड़े नेताओं की एक बैठक बुलाएंगे, जो 15 अप्रैल को हो सकती है, ताकि 16 से 18 अप्रैल तक चलने वाले संसद के विशेष सत्र के लिए चर्चा की जा सके और एक संयुक्त रणनीति बनाई जा सके। महिला आरक्षण संशोधन बिल पर विशेष सत्र क्यों केंद्र सरकार लोकसभा की सीटें बढ़ाने की तैयारी कर रही है। अभी लोकसभा में 543 सीटें हैं, जिन्हें बढ़ाकर करीब 816 किया जाना है। इसके साथ ही महिलाओं के लिए सीटें भी तय की जाएंगी, यानी लगभग 273 सीटें (करीब 33%) महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। यह बदलाव नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 में संशोधन करके लागू किया जाएगा। इस कानून का मकसद संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण देना है, जिसमें SC/ST महिलाओं का हिस्सा भी शामिल रहेगा। सरकार चाहती है कि यह व्यवस्था 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू हो जाए, ताकि राजनीति में महिलाओं की भागीदारी और बढ़ सके। —————————- ये खबर भी पढ़ें… खड़गे बोले- महिला आरक्षण संशोधन जल्दबाजी में लाया जा रहा: सरकार आचार संहिता का उल्लंघन कर रही खड़गे ने शुक्रवार को कहा कि सरकार महिला आरक्षण संशोधन और लोकसभा में सीटें बढ़ाने की बिल जल्दबाजी में ला रही है। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान संसद सत्र बुलाना अचार संहिता का उल्लंघन है। सरकार बिल को जल्द से जल्द पास कराना चाहती है, ताकि आने वाले विधानसभा चुनावों में इसका फायदा मिल सके। पढ़ें पूरी खबर…
Satish Kaul: पर्दे पर तालियों की गूंज और स्टारडम की चमक हर किसी को नजर आती है लेकिन कई बार इन रोशनियों के पीछे छिपी सच्चाई बेहद दर्दनाक होती है। पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री के दिग्गज अभिनेता सतीश कौल की जिंदगी भी कुछ ऐसी ही रही, जहां एक समय वह सुपरस्टार थे, वहीं आखिरी दिनों में उन्हें गुमनामी, आर्थिक तंगी और अकेलेपन का सामना करना पड़ा था।
सतीश कौल का कश्मीर से फिल्मों तक का सफर 8 सितंबर 1946 को कश्मीर में जन्मे सतीश कौल एक सांस्कृतिक परिवार से ताल्लुक रखते थे। उनके पिता मोहन लाल कौल एक प्रसिद्ध कश्मीरी कवि थे। बचपन से ही अभिनय की ओर झुकाव रखने वाले सतीश कौल ने अपनी पढ़ाई श्रीनगर में पूरी की थी।
फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया से सीखी एक्टिंग
इसके बाद सतीश ने अभिनय की बारीकियां सीखने के लिए फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया का रुख किया था। यहां सतीश ने डैनी डेन्जोंगपा, जया बच्चन और शत्रुघ्न सिन्हा जैसे कलाकारों के साथ ट्रेनिंग ली थी, जो आगे चलकर बड़े स्टार्स बने।
पंजाबी सिनेमा के सुपरस्टार बने थे सतीश कौल
-1970 के दशक में सतीश कौल ने पंजाबी फिल्मों के जरिए अपने करियर की शुरुआत की थी और देखते ही देखते वह इंडस्ट्री के सबसे बड़े सितारों में शामिल हो गए थे। उनकी रोमांटिक और इमोशनल एक्टिंग ने दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी थी।
-‘सस्सी पुन्नू’, ‘सुहाग चूड़ा’, ‘पटोला’ और ‘मौला जट्ट’ जैसी पंजाबी फिल्मों में उनके अभिनय को खूब सराहा गया था। करीब चार दशकों के लंबे करियर में उन्होंने लगभग 300 फिल्मों में काम किया था और एक समय ऐसा आया जब उन्हें प्यार से ‘पंजाबी सिनेमा का अमिताभ बच्चन’ कहा जाने लगा था।
हिंदी फिल्मों में भी आजमाई किस्मत
पंजाबी फिल्मों में अपार सफलता के बाद सतीश कौल ने हिंदी सिनेमा में भी कदम रखा था। उन्होंने ‘कर्मा’, ‘राम लखन’ और ‘कमांडो’ जैसी फिल्मों में काम किया था लेकिन यहां उन्हें वैसी लोकप्रियता नहीं मिल पाई, जैसी उन्हें पंजाबी इंडस्ट्री में हासिल हुई थी।
‘महाभारत’ के ‘इंद्रदेव’ ने दिलाई घर-घर पहचान
-सतीश कौल के करियर का सबसे यादगार मोड़ रहा ‘महाभारत’, जिसमें उन्होंने ‘इंद्रदेव’ का किरदार निभाया था। इस भूमिका ने उन्हें देशभर में पहचान दिलाई और वह घर-घर में पहचाने जाने लगे थे।
-इसके अलावा सतीश कौल ने ‘विक्रम और बेताल’ और ‘सर्कस’ जैसे लोकप्रिय टीवी शो में भी काम किया था। दिलचस्प बात ये है कि शाहरुख खान ने भी एक बार बताया था कि सतीश कौल को देखकर ही उन्हें अभिनय की प्रेरणा मिली थी।
निजी जिंदगी में टूटते रिश्ते और बढ़ती मुश्किलें
-जहां करियर में सतीश कौल को अपार सफलता मिल रही थी, वहीं निजी जिंदगी में उन्हें कई झटके लगे थे। आपको बता दें कि शादी के कुछ समय बाद ही उनका तलाक हो गया था और उनकी पत्नी बेटे के साथ अलग हो गई थीं।
-साल 2011 में सतीश कौल को उनके योगदान के लिए पीटीसी लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था लेकिन उसी साल उन्होंने मुंबई छोड़कर पंजाब के लुधियाना में बसने का फैसला कर लिया था। लुधियाना में उन्होंने एक एक्टिंग स्कूल शुरू किया था, जो आर्थिक रूप से सफल नहीं हो पाया था।
बीमारी, पैसों की कमी और अकेलेपन ने एक्टर को तोड़ दिया था
समय के साथ सतीश कौल की परेशानियां बढ़ती चली गई थीं। साल 2015 में वह एक बड़े हादसे का शिकार हो गए थे जिसमें उनका कूल्हा टूट गया था। ऐसे में उन्हें लंबे समय तक बिस्तर पर रहना पड़ा था। उनकी आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो गई थी कि उन्हें अपना घर तक बेचना पड़ा था।
बीमारी में हाथ फैलाकर सबसे मांगी थी मदद
-इलाज और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए सतीश कौल को संघर्ष करना पड़ रहा था और वह एक छोटे से किराए के घर में रहने को मजबूर हो गए थे। अपने मुश्किल दौर में सतीश कौल ने फिल्म इंडस्ट्री से मदद की अपील भी की थी। उन्होंने इंटरव्यू और वीडियोज के जरिए अपनी स्थिति लोगों के साथ शेयर की थी लेकिन अपेक्षित मदद उन्हें नहीं मिल सकी।
-सतीश कौल ने एक पुराने इंटरव्यू में कहा था- मुझे एक अभिनेता के रूप में लोगों से खूब प्यार मिला लेकिन अब एक जरूरतमंद इंसान के रूप में थोड़ी मदद और तवज्जो की उम्मीद है, जो नहीं मिल रही है।
बिना पछतावे के कहा अलविदा
-इतनी कठिनाइयों के बावजूद सतीश कौल ने अपने जीवन को लेकर कभी शिकायत नहीं की थी। उन्होंने कहा था कि जब वह अपने करियर के शिखर पर थे, तब उन्हें दर्शकों का अपार प्यार मिला था और इसके लिए वह हमेशा आभारी रहेंगे।
-मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अप्रैल 2021 को 74 साल की उम्र में सतीश कौल का निधन हो गया था। उनकी कहानी एक ऐसी सच्चाई बयां करती है, जो फिल्मी दुनिया की चमक के पीछे छिपे संघर्ष को उजागर करती है।
ED Raids Partha Chatterjee Residence: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की आहट के बीच प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपना अभियान तेज कर दिया है। शनिवार, 11 अप्रैल को सुबह केंद्रीय एजेंसी ने कोलकाता में दो महत्वपूर्ण ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी शुरू की।
इस कार्रवाई की जद में राज्य के पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी और जेल में बंद बिचौलिए प्रसन्न कुमार रॉय का दफ्तर आया है।
पार्थ चटर्जी, जो फिलहाल जमानत पर बाहर हैं, की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। अधिकारियों के मुताबिक, यह कार्रवाई पार्थ चटर्जी द्वारा जांच में सहयोग न करने और बार-बार समन की अनदेखी करने के बाद की गई है।
SSC Scam मामले में तीन बार समन ठुकराया, अब घर पहुंची ED
ED के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि एसएससी (SSC) घोटाले की जांच के सिलसिले में पार्थ चटर्जी को पूछताछ के लिए अब तक तीन बार समन जारी किए गए थे। हालांकि, पूर्व मंत्री एक बार भी जांच अधिकारी (IO) के सामने पेश नहीं हुए। जांच में उनके इस असहयोग को देखते हुए एजेंसी ने सीधे उनके दक्षिण कोलकाता स्थित आवास पर छापेमारी करने का फैसला किया।
कौन हैं प्रसन्न कुमार रॉय?
छापेमारी का दूसरा ठिकाना प्रसन्न कुमार रॉय का कार्यालय है। प्रसन्न को शिक्षक भर्ती घोटाले की सबसे अहम कड़ी और मुख्य बिचौलिया माना जाता है। वह वर्तमान में जेल में बंद है, लेकिन जांच अधिकारियों को संदेह है कि उसके दफ्तर से कुछ ऐसे डिजिटल साक्ष्य या दस्तावेज मिल सकते हैं, जो घोटाले के पैसों के लेन-देन (Money Trail) का नया खुलासा कर सकें।
Partha Chatterjee पर क्या है आरोप, SSC Scam को लेकर ED की चार्जशीट में क्या-क्या है?
पार्थ चटर्जी की मुश्किलें साल 2022 से जारी हैं। जुलाई 2022 में ED ने प्राथमिक शिक्षक भर्ती घोटाले में पहली बार उन्हें गिरफ्तार किया था। तब उनकी करीबी अर्पिता मुखर्जी के ठिकानों से करीब 50 करोड़ रुपये नकद बरामद हुए थे। फरवरी-मार्च 2025 में करीब ढाई साल जेल में बिताने के बाद, माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें उम्र और स्वास्थ्य के आधार पर ‘शर्तिया जमानत’ (Conditional Bail) दी थी।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पार्थ चटर्जी के खिलाफ केवल एक मामला नहीं है, बल्कि वह भर्ती के कई मोर्चों पर जांच के घेरे में हैं।प्राइमरी स्कूलों में प्राथमिक शिक्षक भर्ती के दौरान अवैध नियुक्तियां की गई। माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्कूलों में SSC सहायक शिक्षकों की बहाली में धांधली। स्कूलों में गैर-शिक्षण पदों पर पैसों के बदले नौकरियां बांटने का आरोप।
Bengal Election 2026 में क्या बदलेंगे सियासी समीकरण?
2026 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले हुई इस छापेमारी ने ममता बनर्जी की सरकार और तृणमूल कांग्रेस (TMC) को बैकफुट पर धकेल दिया है। विपक्ष (BJP) इस मुद्दे को ‘बंगाल के युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़’ बताकर भुनाने की कोशिश कर रहा है।
वहीं, पार्थ चटर्जी के घर चल रही इस छापेमारी से यह संकेत मिल रहे हैं कि ED इस बार नई चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी में है, जो चुनावी नतीजों पर बड़ा असर डाल सकती है। TMC फिलहाल इस मामले पर दूरी बनाए हुए है। बता दें कि गिरफ्तारी के तुरंत बाद TMC ने पार्थ चटर्जी को उनके सभी सांगठनिक और मंत्री पदों से निलंबित कर दिया था।
ED Raids Partha Chatterjee Residence: ED conducts a raid at the Kolkata residence of former minister Partha Chatterjee. The agency took action after he declined three summonses. Partha Chatterjee’s troubles have mounted in connection with the SSC scam and the teacher recruitment scandal.
Ranveer Singh and Mohan Bhagwat: बॉलीवुड स्टार रणवीर सिंह इन दिनों अपनी फिल्म ‘धुरंधर 2’ (Dhurandhar 2) की जबरदस्त सफलता का मजा ले रहे हैं। इसी बीच उनका अचानक नागपुर दौरा सुर्खियों में आ गया है। इस यात्रा के दौरान उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुख्यालय पहुंचकर संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार को श्रद्धांजलि दी और संघ प्रमुख मोहन भागवत से मुलाकात की, जिसने चर्चाओं को और तेज कर दिया है।
‘धुरंधर 2’ की सफलता के बीच अचानक नागपुर पहुंचे रणवीर सिंह सूत्रों के अनुसार रणवीर सिंह मुंबई से चार्टर्ड विमान के जरिए नागपुर पहुंचे है। एयरपोर्ट से सीधे वह रेशिमबाग स्थित स्मृति मंदिर परिसर पहुंचे, जहां उन्होंने डॉ. हेडगेवार की समाधि पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों से की मुलाकात
इस दौरान रणवीर सिंह ने संघ के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों से भी मुलाकात की और सीमित समय के लिए बातचीत की। हालांकि इस दौरे के पीछे की आधिकारिक वजह सामने नहीं आई है लेकिन इसे एक औपचारिक और सौहार्दपूर्ण भेंट के तौर पर देखा जा रहा है।
मोहन भागवत से मुलाकात ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल
-नागपुर दौरे का सबसे चर्चित पहलू रणवीर सिंह की मोहन भागवत से मुलाकात रही। बताया जा रहा है कि ये मुलाकात संघ मुख्यालय में हुई लेकिन बातचीत किन मुद्दों पर केंद्रित रही, इसकी कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
-इस मुलाकात के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। इससे पहले भी रणवीर सिंह संघ की स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने पर शुभकामनाएं दे चुके हैं, जिससे इस दौरे की अहमियत और बढ़ गई है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुईं तस्वीरें
नागपुर के स्मृति मंदिर परिसर से सामने आई रणवीर सिंह की तस्वीरें और वीडियोज सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। अपने अलग और रंगीन फैशन सेंस के लिए पहचाने जाने वाले रणवीर सिंह इस बार बेहद सादगी भरे अंदाज में नजर आए, जिसने फैंस को चौंका दिया है। उनके इस शांत और गंभीर रूप ने लोगों के बीच जिज्ञासा और भी बढ़ा दी है।
‘धुरंधर 2’ की रिकॉर्डतोड़ कमाई ने बनाया सुपरस्टार
रणवीर सिंह का ये दौरा ऐसे वक्त में हुआ है जब उनकी फिल्म ‘धुरंधर 2’ बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन कर रही है। फिल्म ने देशभर में 1000 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया है जबकि दुनियाभर में इसकी कमाई 1600 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है। फिल्म समीक्षकों का मानना है कि इस सफलता ने रणवीर सिंह को इंडस्ट्री के टॉप सितारों में और मजबूती से स्थापित कर दिया है।
क्या बदल रही है रणवीर सिंह की सार्वजनिक छवि?
-विश्लेषकों के मुताबिक नागपुर का ये दौरा केवल एक औपचारिक मुलाकात नहीं हो सकता बल्कि ये रणवीर सिंह की बदलती सार्वजनिक छवि की ओर भी इशारा करता है। लगातार बड़ी फिल्मों की सफलता और प्रभावशाली सार्वजनिक उपस्थितियों के बीच उनका ये कदम उनके व्यक्तित्व के नए आयामों को दर्शाता है।
-फिलहाल इस मुलाकात के पीछे की असली वजह भले ही सामने नहीं आई हो लेकिन इतना तय है कि रणवीर सिंह का ये दौरा आने वाले दिनों में चर्चाओं का केंद्र बना रहेगा।
Dr. Dharmshila Gupta Bihar CM Face: बिहार की राजनीति में इन दिनों एक नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है डॉ. धर्मशीला गुप्ता। जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा सदस्य के तौर पर शपथ ली, तो संसद परिसर में हलचल तेज थी।
लेकिन इसी राजनीतिक गहमागहमी के बीच भाजपा की राज्यसभा सांसद और बिहार महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष डॉ. धर्मशीला गुप्ता को लेकर कयासों का बाजार गर्म है। सियासी गलियारों में उन्हें बिहार में भाजपा के ‘महिला मुख्यमंत्री’ या भावी नेतृत्व के बड़े चेहरे के रूप में देखा जा रहा है।
विस्तार से जानिए आखिर कौन हैं डॉ. धर्मशीला गुप्ता और कैसे एक साधारण कार्यकर्ता ने दिल्ली के उच्च सदन तक का सफर तय किया? आइए जानते हैं उनकी पूरी कहानी।
Who is Dr. Dharmshila Gupta: कौन हैं डॉ. धर्मशीला गुप्ता? वार्ड पार्षद से शुरू हुआ राजनीतिक सफर
डॉ. धर्मशीला गुप्ता की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत जमीनी स्तर से की। वह पहली बार दरभंगा नगर निगम के चुनाव में वार्ड पार्षद के तौर पर उतरीं और जीत हासिल की। संगठन के प्रति उनकी निष्ठा को देखते हुए भाजपा ने उन्हें दरभंगा जिला भाजपा महिला मोर्चा का जिलाध्यक्ष बनाया। पार्टी ने डॉ. धर्मशीला गुप्ता के काम को देखते हुए उन्हें ‘कोल इंडिया’ का सदस्य भी बनाया, जिस पद पर वह अब भी सक्रिय हैं।
धर्मशीला को बिहार सीएम फेस का दावेदार क्यों मना जा रहा है?
साल 2022 में डॉ. धर्मशीला ने दरभंगा नगर निगम से मेयर पद का चुनाव लड़ा था। हालांकि, इस चुनाव में उन्हें जदयू समर्थित उम्मीदवार अंजुम आरा से हार का सामना करना पड़ा। लेकिन राजनीति में हार का मतलब अंत नहीं होता। भाजपा ने उन पर भरोसा जताया और उन्हें सीधे राज्यसभा भेज दिया।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा ने उन्हें राज्यसभा भेजकर एक तीर से दो निशाने साधे हैं। वह वैश्य समाज से आती हैं और अतिपिछड़ा वर्ग (EBC) में उनकी अच्छी पकड़ है। चुनाव से पहले भाजपा इस बड़े वोटबैंक को अपने पाले में करना चाहती है। अगर धर्मशीला गुप्ता बिहार की सीएम बनती हैं तो भाजपा अपने लाखों कार्यकर्ताओं को यह संदेश देगी कि एक साधारण कार्यकर्ता भी अपनी मेहनत के दम पर संसद पहुंच सकता है।
डॉ. धर्मशीला गुप्ता केवल एक राजनेता ही नहीं, बल्कि एक उच्च शिक्षित व्यक्तित्व भी हैं। उन्होंने बॉटनी (वनस्पति विज्ञान) में स्नातकोत्तर (PG) की पढ़ाई की है। उनके समर्थकों का कहना है कि उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि और सांगठनिक कौशल उन्हें दूसरों से अलग बनाता है।
क्या बिहार को मिलेगी BJP की पहली महिला मुख्यमंत्री?
बिहार में फिलहाल एनडीए की सरकार है और नीतीश कुमार मुख्यमंत्री हैं। लेकिन भविष्य की राजनीति को देखते हुए भाजपा अपने खुद के नेतृत्व को तैयार कर रही है। महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष होने के नाते धर्मशीला गुप्ता ने पूरे प्रदेश में महिलाओं के बीच भाजपा की पैठ मजबूत की है। यही कारण है कि उन्हें अब बिहार में भाजपा के संभावित सीएम फेस के रूप में देखा जा रहा है।
डॉ. धर्मशीला गुप्ता ने साबित कर दिया है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो वार्ड से लेकर संसद तक की दूरी ज्यादा नहीं होती। अब देखना यह है कि आने वाले विधानसभा चुनावों में भाजपा उन्हें क्या नई भूमिका सौंपती है और क्या वह बिहार की राजनीति में कोई बड़ा इतिहास रच पाएंगी।
Dr. Dharmshila Gupta—Bihar’s CM Face: Dr. Dharmshila Gupta’s journey—from Ward Councilor to Rajya Sabha MP—is truly inspiring. Discover why she is being viewed as the future Chief Ministerial face of the Bihar BJP.
PM Modi Rahul Gandhi video: शनिवार, 11 अप्रैल को संसद परिसर के ‘प्रेरणा स्थल’ से एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने देश का राजनीतिक माहौल अचानक बदल दिया। अक्सर एक-दूसरे पर तीखे हमले करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बीच आज संक्षिप्त लेकिन बेहद संजीदा बातचीत देखने को मिली।
मौका था महान समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती (Jyotiba Phule 200th Anniversary) का, जहां तमाम दिग्गज नेता उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे थे। सोशल मीडिया से लेकर सियासी गलियारों तक, इस मुलाकात के वीडियो और तस्वीरें अब ‘टॉक ऑफ द टाउन’ बनी हुई हैं।
जब आमने-सामने आए मोदी और राहुल
घटना उस वक्त की है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी गाड़ी से ‘प्रेरणा स्थल’ पर उतरे। वहीं पास में विपक्ष के नेता राहुल गांधी भी मौजूद थे। प्रधानमंत्री अपनी कार से उतरते ही कुछ पल के लिए रुके और राहुल गांधी के पास जाकर उनसे बात करने लगे। वीडियो में देखा जा सकता है कि दोनों नेताओं के बीच काफी ‘सौहार्दपूर्ण’ तरीके से बातचीत हुई।
#WATCH | Delhi: Prime Minister Narendra Modi arrives at Prerna Sthal on the Parliament premises to pay a floral tribute to Mahatma Jyotiba Phule on his 200th birth anniversary today.
Lok Sabha Speaker Om Birla, Lok Sabha LoP Rahul Gandhi, Union Minister Arjun Ram Meghwal, former… pic.twitter.com/QexqUVky1Z
हालांकि, यह बातचीत महज कुछ सेकंड्स की थी, लेकिन इसकी गंभीरता और सहजता ने वहां मौजूद हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। राजनीतिक कड़वाहट के बीच देश के दो सबसे बड़े नेताओं को इस तरह सहज भाव से बात करते देखना सोशल मीडिया पर भी काफी पसंद किया जा रहा है। एक यूजर ने लिखा, प्रधानमंत्री और विपक्ष के नेता को इस तरह गंभीर चर्चा करते देखना लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत है।
महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती पर जुटे दिग्गज
संसद परिसर में स्थित प्रेरणा स्थल पर आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सामाजिक न्याय के अग्रदूत महात्मा ज्योतिबा फुले को उनकी 200वीं जन्मशती पर नमन करना था। पीएम मोदी और राहुल गांधी के अलावा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, राज्यसभा के पूर्व उपसभापति हरिवंश और कई अन्य वरिष्ठ नेताओं ने फुले की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। नेताओं ने शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और हाशिए पर खड़े समुदायों के उत्थान के लिए ज्योतिबा फुले के महान योगदान को याद किया।
क्यों खास हैं दोनों नेताओं की यह मुलाकात?
संसद के सत्रों के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच अक्सर तीखी नोंकझोंक, नारेबाजी और वॉकआउट देखने को मिलता है। भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक विचारधारा की जंग काफी पुरानी और गहरी है। ऐसे में पीएम मोदी और राहुल गांधी का एक-दूसरे के करीब खड़े होकर शिष्टाचार के साथ बात करना यह संदेश देता है कि वैचारिक मतभेदों के बावजूद लोकतांत्रिक मर्यादाएं और औपचारिक संवाद जीवित हैं।
महात्मा ज्योतिबा फुले ने हमेशा समाज को जोड़ने और न्याय की बात की थी। आज उनकी 200वीं जयंती के मौके पर संसद के भीतर पक्ष और विपक्ष के बीच का यह छोटा सा ‘संवाद’ शायद उनकी विरासत को सबसे बेहतरीन श्रद्धांजलि थी। अब चर्चा इस बात की है कि क्या यह छोटी सी मुलाकात आने वाले दिनों में संसद के भीतर की कड़वाहट को कम करने में मददगार साबित होगी?
Love Story: मशहूर गायक और राजनेता बाबुल सुप्रियो इस वक्त आम लोगों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं, वजह है उनका इंटरव्यू, जिसमें उन्होंने पीएम मोदी और भाजपा पर आरोप लगाया है कि उनकी वजह से सिंगिंग करियर बर्बाद हुआ था, जिसके बाद वो लोगों के निशाने पर आ गए हैं। चलिए इसी बीच बाबुल सुप्रियो की निजी जिंदगी के बारे में बात करते हैं।
आपको बता दें कि रोमांटिंक गानों के जरिए लोगों के दिलों में खास जगह बनाने वाले बाबुल सुप्रियो को निजी जिंदगी में दो बार प्यार हुआ, उन्होंने दो शादियां की है। उनकी पहली पत्नी का नाम रिया था, जिससे कि वो टोरंटो में शाहरुख खान के एक कॉन्सर्ट में मिले थे।
दोनों में प्यार हुआ और फिर दोनों ने साल 1995 में शादी कर ली, इस शादी से उनको एक बेटी शर्मिली है जिसका का जन्म 1996 में हुआा था लेकिन इस शादी की उम्र लंबी नहीं रही, रिया और बाबुल ने साल 2015 में तलाक ले लिया,उनके अलगाव की वजह आज तक साफ नहीं है।
एयर होस्टेस रचना शर्मा से Babul Supriyo ने की दूसरी शादी
लेकिन इसके बाद अगस्त 2016 को बाबुल ने जेट एयरवेज़ की एयर होस्टेस रचना शर्मा से दूसरी शादी कर ली, उस वक्त लोगों को काफी हैरानी हुई थी और लोगों ने कयास लगाने शुरू कर दिए थे कि क्या रिया से बाबुल के अलग होने की वजह रचना तो नहीं? फिलहाल इस बारे में कभी कोई बयान बाबुल, रिया या रचना की ओर से सामने नहीं आया है।
35000 फीट की ऊंचाई पर Babul Supriyo को हुआ था प्यार
एक बंगाली अख़बार को दिए इंटरव्यू में बाबुल सुप्रियो ने अपनी लव लाइफ के बारे में बात करते हुए कहा था ‘कि ‘वो रचना से पहली बार समुद्र तल से 30-35,000 फ़ीट ऊपर मिले थे, दरअसल दोनों की मुलाकात हवाई यात्रा के दौरान हुई थी। उन्होंने कहा था कि पिछले दो सालों से, ऐसा लगता है कि मेरी क़िस्मत हवा में ही घूम रही है। समुद्र तल से 35000 फ़ीट ऊपर अजीब-अजीब चीज़ें हो रही हैं। ऐसा लगता है जैसे कोई ऊपर बैठा है और मेरी ज़िंदगी की कहानी लिख रहा है। मेरे साथ ऐसा दो बार हो चुका है।’
‘अगर इन्हें टिकट मिलता है, तो ये चुनाव ज़रूर जीतेंगे’
‘मुझे लोकसभा का टिकट तब मिला, जब मैं एक फ़्लाइट में था। उस समय बाबा रामदेव मेरे बगल में बैठे थे। बातचीत के दौरान, उन्होंने मुझे राजनीति में आने का मौका दिया और साथ ही भारतीय जनता पार्टी से टिकट दिलाने का वादा भी किया। अचानक, वहां खड़ी एयर होस्टेस ने कहा कि अगर इन्हें टिकट मिलता है, तो ये चुनाव ज़रूर जीतेंगे।’
‘मेरी उलझी हुई ज़िंदगी में एकमात्र X-factor है मेरी पत्नी’
फिर उन्होंने बताया कि ‘लगभग दस दिन बाद, कोलकाता वापस जाते समय, मैं उस एयर होस्टेस से फिर मिला। लेकिन इस बार, वह मुझे कुछ ख़ास लगी। शायद यह पहली नज़र का प्यार था। उनसे बात करने के कुछ ही मिनटों के अंदर मैंने उनका नाम और फ़ोन नंबर मांग लिया।’ उन्होंने आगे कहा कि ‘ मुझे उसकी सादगी बहुत पसंद आई। मेरी उलझी हुई ज़िंदगी में यही एकमात्र X-factor है।’
साल 2017 में Babul Supriyo दूसरी बार बने पिता
उसके बाद, मैंने उसे कई बार प्रपोज किया, लेकिन वह राज़ी नहीं हुई। फिर मैंने अगले चालीस दिनों तक हर दिन एक गाना लिखकर उसे भेजना शुरू कर दिया। तभी उसने मुझे नोटिस करना शुरू किया। हमने दो साल तक एक-दूसरे को डेट किया और फिर आखिरकार शादी करने का फ़ैसला किया। इस शादी से भी बाबुल को एक बेटी है, जिसका नाम नैना है और इसका जन्म साल 2017 में हुआ था।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस्तीफे से पहले CM हाउस खाली कर रहे हैं। 1 अणे मार्ग से सामान 7 सर्कुलर रोड बंगले में शिफ्ट हो रहा है। मुख्यमंत्री आवास से ट्रैक्टर ट्रॉली में सामान बाहर ले जाया जा रहा है। नीतीश कुमार ने 10 अप्रैल को राज्यसभा सांसद की शपथ ली। सूत्रों की मानें तो नीतीश 14 अप्रैल को CM पद से इस्तीफा दे सकते हैं। 15 अप्रैल को बिहार में नई सरकार बन सकती है। CM पद से हटने के बाद नीतीश कुमार लालू यादव के पड़ोसी बन जाएंगे। वह दिल्ली तो जा रहे हैं, लेकिन बिहार में अपना ठिकाना नहीं छोड़ेंगे। 7 सर्कुलर रोड आवास का इस्तेमाल अभी नीतीश कुमार ही कर रहे हैं। इसे CM ऑफिस के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। नीतीश ने अपनी देखरेख में इस बंगले को बनवाया था। ये भूकंप के झटके झेल सकता है। लॉन में कोलकाता से मंगाकर घास लगाई गई है। नीतीश कुमार का 7 सर्कुलर रोड वाले आवास से क्या नाता है? इस बंगले की क्या खासियत है? पढ़िए रिपोर्ट… नीतीश कुमार को पसंद है 7 सर्कुलर रोड बंगला नीतीश कुमार को 7 सर्कुलर रोड बंगला पसंद है। 2014 लोकसभा चुनाव हारने के बाद उन्होंने CM पद छोड़ दिया था। जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री बनाया था। इसके बाद रहने के लिए 7 सर्कुलर रोड बंगले आ गए थे। इसी बंगले में रहते हुए नीतीश ने जीतन राम से मुख्यमंत्री की कुर्सी वापस ले ली थी। विधानसभा 2015 में जीत दर्ज की और मुख्यमंत्री बने थे। CM बनने के बाद नीतीश एक अणे मार्ग गए, लेकिन 7 सर्कुलर बंगला अपने पास बनाए रखा। विपक्ष ने 2 बंगले रखने का आरोप लगाया तो इसे मुख्य सचिव के नाम अलॉट किया गया। नीतीश ने अपनी देखरेख में इस बंगले का भूकंप रोधी निर्माण कराया था। लालू यादव के पड़ोसी बनेंगे नीतीश कुमार नीतीश कुमार 7 सर्कुलर रोड में शिफ्ट हो रहे हैं। अब वे लालू यादव के पड़ोसी बन जाएंगे। यहां से राबड़ी आवास बस दो घर बाद है। दोनों बंगलों के बीच की दूरी करीब 200 मीटर होगी। दोनों घर सर्कुलर रोड के दक्षिण तरफ है। 7 सर्कुलर रोड वाले बंगले की खास बातें नंबर 7 से है नीतीश को लगाव नीतीश कुमार अपने लिए नंबर 7 को लकी मानते हैं। वह केंद्र सरकार में रेल मंत्री बने थे, तब उनके फोन नंबर का अंतिम अंक 7 था। नीतीश जब पहली बार मुख्यमंत्री बने थे तो उन्हें जो गाड़ी मिली थी उसका नंबर 777 था। नीतीश ने 1977 में राजनीति शुरू की थी। 1987 में युवा लोकदल के अध्यक्ष बने थे। मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने अपनी महत्वाकांक्षी योजनाओं को 7 निश्चय नाम दिया। अभी बिहार सरकार 7 निश्चय पार्ट-3 पर काम कर रही है। 19 साल से बिहार की सत्ता का केंद्र रहा है 1 अणे मार्ग नीतीश अभी सीएम आवास एक अणे मार्ग में रह रहे हैं। यह घर लगभग 19 साल से बिहार की सत्ता का केंद्र रहा है। यहीं से नीतीश कुमार ने राज्य की राजनीति और प्रशासन को दिशा दी। अब राज्यसभा जाने के बाद उनका 7 सर्कुलर रोड में शिफ्ट होना एक तरह से बिहार की राजनीति में नई भूमिका की शुरुआत माना जा रहा है।