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Sabarimala: मंदिरों में ‘प्रसाद में शराब’ से पुरुषों की एंट्री बैन तक—सबरीमाला केस सुनवाई में क्या-क्या हुआ?


India

oi-Pallavi Kumari

Sabarimala Hearing: सुप्रीम कोर्ट में चल रही सबरीमाला केस की सुनवाई अब सिर्फ एक मंदिर या एक परंपरा तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह पूरे देश में धार्मिक अधिकारों, परंपराओं और संविधान के बीच संतुलन की बड़ी बहस बन चुकी है। 9 जजों की संविधान पीठ लगातार तीसरे दिन इस मामले पर सुनवाई कर रही है और हर दिन नई-नई दलीलें और सवाल सामने आ रहे हैं। हालांकि सबरीमाला केस पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई अब 4 अप्रैल को होगी।

इस सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार, सॉलिसिटर जनरल, जजों और वकीलों के बीच जो चर्चा हुई, उसने कई अहम मुद्दों को सामने ला दिया है-चाहे वो मंदिरों में प्रसाद के तौर पर शराब देने की परंपरा हो या फिर कुछ मंदिरों में पुरुषों के प्रवेश पर रोक। आइए जानते हैं इस ऐतिहासिक सुनवाई की एक-एक बड़ी बात, किसने क्या कहा और कोर्ट का रुख क्या रहा।

Sabarimala Hearing

🔹शराब का प्रसाद और शाकाहार की जिद: सरकार की दिलचस्प दलीलें

सुनवाई के दौरान एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) केएम नटराज ने एक बहुत ही व्यावहारिक उदाहरण पेश किया। उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत के कई मंदिरों में सदियों से शराब (मदिरा) प्रसाद के रूप में दी जाती है। उन्होंने तर्क दिया कि कल को कोई कोर्ट में आकर यह नहीं कह सकता कि मंदिर में शराब देना बंद करो क्योंकि यह उसकी अंतरात्मा के खिलाफ है।

सरकार की दलील का सार यह था कि धार्मिक रीति-रिवाजों को किसी एक व्यक्ति की पसंद-नापसंद के तराजू पर नहीं तौला जा सकता। एएसजी नटराज ने कहा, “सोचिए अगर किसी शाकाहारी मंदिर में कोई जाकर यह कहे कि मेरी पसंद मांसाहार है और मुझे यहां मांस परोसा जाना चाहिए, तो क्या यह संभव है? बिल्कुल नहीं। उस व्यक्ति को दूसरे श्रद्धालुओं के अधिकारों और मंदिर की परंपरा में दखल देने का कोई हक नहीं है।”

उन्होंने यह भी समझाया कि जैसे किसी मंदिर में सिर्फ शाकाहारी भोजन ही प्रसाद के रूप में दिया जाता है, तो कोई व्यक्ति वहां जाकर मांसाहार की मांग नहीं कर सकता। इसी तरह हर धार्मिक परंपरा का सम्मान होना चाहिए और कोई भी व्यक्ति अपनी पसंद के आधार पर उसे बदलने की मांग नहीं कर सकता।

🔹 ‘कई मंदिरों में पुरुषों की एंट्री पर भी रोक’

सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि सबरीमाला का फैसला इस धारणा पर आधारित लगता है कि पुरुष श्रेष्ठ हैं और महिलाओं को निचले स्तर पर रखा गया है। लेकिन असलियत में कई जगह इसके उलट परंपराएं हैं। उन्होंने कई ऐसे मंदिरों के नाम गिनाए जहाँ पुरुषों का जाना वर्जित है:

पुष्कर का ब्रह्मा मंदिर: यहां विवाहित पुरुषों का प्रवेश वर्जित है।

देवी भगवती मंदिर: यहां कुछ विशेष मान्यताओं के कारण पुरुषों का प्रवेश प्रतिबंधित है।

केरल का एक विशेष मंदिर: यहां पुरुष केवल महिलाओं के कपड़े (साड़ी) पहनकर और सोलह श्रृंगार करके ही प्रवेश कर सकते हैं। वे बकायदा ब्यूटी पार्लर जाते हैं और उनकी परिवार की महिला सदस्य उन्हें तैयार करती हैं।

महिला भक्तों के पैर धोना: मेहता ने बताया कि ऐसे भी मंदिर हैं जहाँ पुरुष पुजारियों के लिए धार्मिक रूप से यह अनिवार्य है कि वे महिला भक्तों के पैर धोएं।

इन उदाहरणों के जरिए सरकार यह साबित करना चाहती है कि धार्मिक परंपराएं किसी एक जेंडर के खिलाफ नहीं, बल्कि उस देवता और विश्वास के स्वरूप पर आधारित होती हैं।

पैसा जनता का और मंदिर केवल अपना? वैद्यनाथन का कड़ा तर्क

वरिष्ठ वकील वैद्यनाथन ने एक बहुत ही पते की बात कही। उन्होंने तर्क दिया कि अगर कोई मंदिर सिर्फ अपने ही समुदाय के लोगों के लिए आरक्षित रहना चाहता है, तो उस मंदिर को सरकार या आम जनता से किसी भी तरह का फंड या दान (Donation) नहीं लेना चाहिए। उनका कहना था कि यदि आप ‘सार्वजनिक’ मदद लेते हैं, तो आप ‘सार्वजनिक प्रवेश’ से इनकार नहीं कर सकते।

हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर कोई प्रथा सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता या स्वास्थ्य के खिलाफ नहीं है, तो उसे माना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर कोई मंदिर किसी खास संप्रदाय का है, तो उस संप्रदाय को यह तय करने का पूरा अधिकार होना चाहिए कि वहां पूजा की अनुमति किसे देनी है।

Sabarimala Hearing

🔹 9 जजों की बेंच किन सवालों पर कर रही है सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की संविधान पीठ सात बड़े संवैधानिक सवालों पर विचार कर रही है।

इसमें सबसे बड़ा सवाल यह है कि धार्मिक स्वतंत्रता की सीमा क्या है और क्या कोर्ट यह तय कर सकता है कि कौन-सी प्रथा ‘जरूरी धार्मिक प्रथा’ (Essential Religious Practice) है।

यह मामला 2018 के उस फैसले से जुड़ा है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं के प्रवेश की अनुमति दी थी। उस फैसले के बाद देशभर में विरोध हुआ और कई पुनर्विचार याचिकाएं दायर की गईं।

2019 में कोर्ट ने इन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए बड़े संवैधानिक सवालों को 9 जजों की बेंच को भेज दिया था, जिस पर अब सुनवाई हो रही है।

🔹 अनुच्छेद 25 और 26 पर गहरी बहस

एएसजी नटराज ने कोर्ट में कहा कि धार्मिक अधिकार संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के तहत सुरक्षित हैं और ये दोनों आपस में जुड़े हुए हैं।

उन्होंने समझाया कि

  • अनुच्छेद 25 व्यक्ति को धर्म मानने और पालन करने का अधिकार देता है
  • अनुच्छेद 26 धार्मिक संस्थाओं को अपने नियम बनाने का अधिकार देता है

उन्होंने कहा कि इन दोनों को साथ में समझना होगा और किसी एक को दूसरे से ऊपर नहीं रखा जा सकता।

साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ‘Essential Religious Practice’ तय करना भारत जैसे विविध देश में आसान नहीं है और कोर्ट को इसमें बहुत सीमित दखल देना चाहिए।

🔹 जस्टिस नागरत्ना की चिंता: समाज बंट जाएगा

सुनवाई के दौरान जस्टिस बीवी नागरत्ना ने साफ कहा कि अगर मंदिरों में प्रवेश को लेकर अलग-अलग समुदायों को रोका जाएगा, तो इससे समाज में विभाजन बढ़ेगा।

उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को मंदिर और मठ में जाने का अधिकार होना चाहिए। अगर हर समुदाय अपने-अपने मंदिर बनाकर दूसरों को रोकेगा, तो इससे सामाजिक एकता कमजोर होगी। उन्होंने यह भी कहा कि जितने ज्यादा लोग अलग-अलग मंदिरों में जाएंगे, उतना ही धर्म मजबूत होगा।

🔹’अगर दूसरों को रोकते हैं, तो फंड भी न लें’

सीनियर वकील वैद्यनाथन ने एक अलग नजरिया रखा। उन्होंने कहा कि अगर कोई मंदिर सिर्फ एक खास समुदाय के लिए है, तो उसे सरकार या आम जनता से फंड नहीं लेना चाहिए।

उनका तर्क था कि अगर आप दूसरों को प्रवेश नहीं दे रहे हैं, तो उनसे आर्थिक मदद भी नहीं ले सकते। हालांकि इस पर जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि ऐसा करना खुद उस समुदाय के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

🔹 आर्टिकल 17: छुआछूत पर CJI की सख्त टिप्पणी

सुनवाई के दौरान जब मौलिक अधिकारों की बात आई, तो चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत ने अनुच्छेद 17 (छुआछूत का अंत) को बहुत ‘ताकतवर’ प्रावधान बताया। सीजेआई ने कहा कि अनुच्छेद 17 सिर्फ एक कानूनी अपराध नहीं है, बल्कि संविधान खुद इसे एक गंभीर संवैधानिक अपराध घोषित करता है।

वैद्यनाथन ने इस पर सहमति जताते हुए कहा कि यह प्रावधान हमारे इतिहास के अन्यायों का ‘प्रायश्चित’ है। बहस इस बात पर भी हुई कि क्या सरकार सामाजिक सुधार के लिए जो कानून बनाती है, वह धार्मिक संस्थाओं के अधिकारों (आर्टिकल 26) पर असर डाल सकता है? सीजेआई ने साफ किया कि थ्योरी में कुछ भी कहना कठिन है, यह हर केस के तथ्यों के हिसाब से तय होगा।

🔹 क्या कोर्ट तय करेगा धार्मिक प्रथा?

इस पूरे मामले का सबसे अहम सवाल यही है कि क्या कोर्ट यह तय कर सकता है कि कौन-सी धार्मिक प्रथा सही है और कौन-सी नहीं। केंद्र सरकार का कहना है कि यह काम कोर्ट का नहीं है, क्योंकि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है और यहां की विविधता को देखते हुए हर परंपरा को समझना जरूरी है। वहीं, कोर्ट इस बात पर विचार कर रहा है कि अगर कोई प्रथा मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती है, तो उसमें दखल देना जरूरी हो सकता है।

क्या है इस पूरी सुनवाई का निचोड़?

सबरीमाला का यह मामला अब केवल महिलाओं के प्रवेश तक सीमित नहीं रह गया है। यह अब एक बड़ी कानूनी लड़ाई बन चुका है जिसमें निम्नलिखित सवाल शामिल हैं:

व्यक्तिगत अधिकार बनाम संस्थागत अधिकार: आपकी अपनी आस्था बड़ी है या मंदिर की परंपरा?

संवैधानिक नैतिकता: क्या धर्म के मामले में कोर्ट अपनी नैतिकता थोप सकता है?

न्यायिक समीक्षा की सीमा: कोर्ट किसी मंदिर के ‘अनिवार्य धार्मिक अभ्यास’ (ERP) में कितना हस्तक्षेप कर सकता है?

9 जजों की यह बेंच, जिसमें जस्टिस नागरत्ना, जस्टिस सुंदरेश, जस्टिस बागची और अन्य शामिल हैं, इस बात पर मंथन कर रही है कि क्या धर्म के आंतरिक मामलों की जांच बाहरी अदालतों द्वारा की जानी चाहिए या नहीं।

अगले कुछ दिनों की सुनवाई और भी अहम होने वाली है, क्योंकि इसमें पारसी महिलाओं के टावर ऑफ साइलेंस में प्रवेश और मुस्लिम महिलाओं के मस्जिद में प्रवेश जैसे मुद्दे भी जुड़ सकते हैं। फिलहाल, सरकार का रुख स्पष्ट है धर्म को उसकी आंतरिक मान्यताओं के हिसाब से ही चलने दिया जाना चाहिए, बशर्ते वह किसी की जान या स्वास्थ्य के लिए खतरा न हो।

सबरीमाला केस की यह सुनवाई भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में ‘मील का पत्थर’ साबित होगी। यह तय करेगा कि भारत में धर्म का स्वरूप क्या होगा और संवैधानिक अधिकार मंदिरों की दहलीज के भीतर किस हद तक प्रभावी होंगे।



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Aaj Ke Match Ka Toss Kon Jeeta 9 April: KKR vs LSG, बारिश के कारण टॉस में होगी देरी? कितने ओवर का होगा मैच!


Cricket

oi-Amit Kumar

Aaj Ke Match Ka Toss Kon Jeeta 9 April: आईपीएल 2026 के 15वें मुकाबले में आज यानी गुरुवार को कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) का सामना ऋषभ पंत की अगुवाई वाली लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) से होना है। हालांकि, क्रिकेट फैंस की नजरें स्कोरबोर्ड से ज्यादा आसमान पर टिकी हैं। ईडन गार्डन्स पर पिछले मैच के धुलने के बाद एक बार फिर बारिश का साया मंडरा रहा है। पश्चिम बंगाल के कई हिस्सों में मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।

मैच पर बारिश का खतरा? (Aaj Ke Match Ka Toss Kon Jeeta 9 April)

मौसम को देखते हुए टॉस में देरी होने की आशंका जताई जा रही है। इसके साथ मैच भी छोटा किया जा सकता है। अजिंक्य रहाणे की कप्तानी वाली कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए यह सीजन अब तक निराशाजनक रहा है। टीम ने अब तक 3 मैच खेले हैं और एक में भी जीत दर्ज नहीं कर पाई है। पंजाब किंग्स के खिलाफ पिछला मैच बारिश में धुलने की वजह से KKR को 1 अंक मिला था। अगर आज का मैच भी धुलता है, तो प्लेऑफ की रेस में KKR काफी पीछे छूट जाएगी।

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लखनऊ का पलड़ा केकेआर पर भारी

बुधवार और गुरुवार को हुई भारी बारिश की वजह से दोनों टीमों के ट्रेनिंग सेशन प्रभावित हुए हैं। आंकड़ों की बात करें तो लखनऊ सुपर जायंट्स का रिकॉर्ड कोलकाता पर भारी रहा है। दोनों टीमों के बीच अब तक कुल छह मैच खेले जा चुके हैं। इनमें से 4 मैचों में लखनऊ ने बाजी मारी है। जबकि दो मैच केकेआर ने अपने नाम किया है। कोई भी मैच टाई या बेनतीजा नहीं रहा है, लेकिन आज यह रिकॉर्ड बदल सकता है।

पिच से किसे मिलेगा फायदा

ईडन गार्डन्स की पिच आमतौर पर बल्लेबाजों की मददगार होती है। लेकिन लगातार बारिश और कवर्स के नीचे रहने के कारण पिच में नमी हो सकती है। जो भी टीम टॉस जीतेगी, वह नमी का फायदा उठाने के लिए पहले गेंदबाजी करना पसंद करेगी। अगर मैच छोटा होता है (जैसे 5-5 ओवर का), तो निकोलस पूरन और रिंकू सिंह जैसे हिटर्स की भूमिका निर्णायक हो जाएगी।

इन दिग्गजों पर रहेगी नजर

KKR: अजिंक्य रहाणे (कप्तान), फिन एलन, कैमरून ग्रीन, रिंकू सिंह, सुनील नरेन, वरुण चक्रवर्ती।

LSG: ऋषभ पंत (कप्तान/कीपर), एडेन मार्करम, मिचेल मार्श, मोहम्मद शमी, आवेश खान, निकोलस पूरन।



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किताबें नहीं, फिर भी पढ़ानी होगी तीसरी भाषा: CBSE ने स्कूलों को निर्देश दिए; छठी क्लास में इसी सेशन से 3 भाषाएं पढ़ाने का नियम लागू


28 मिनट पहले

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CBSE ने क्लास 6 में तीसरी भाषा लागू करने को लेकर बड़ा फैसला लिया है। बोर्ड ने 9 अप्रैल को जारी सर्कुलर में सभी स्कूलों को 7 दिन के अंदर इसे लागू करने का निर्देश दिया है। बोर्ड ने इसे urgent & mandatory बताते हुए तुरंत पढ़ाई शुरू करने को कहा है। नोटिस के अनुसार, यह नियम 2026-27 सेशन यानी इसी साल से लागू होगा, लेकिन स्कूलों को अभी से तैयारी और पढ़ाई शुरू करनी होगी। खास बात ये है कि थर्ड लैंग्‍वेज को बतौर सब्‍जेक्‍ट पढ़ाने के लिए अभी किताबें उपलब्‍ध नहीं हैं।

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बोर्ड ने कहा- किताबें जल्‍द जारी होंगी

CBSE ने नोटिस में कहा कि स्कूल तीसरी भाषा की पढ़ाई के लिए फिलहाल स्थानीय स्तर पर उपलब्ध किताबों और सामग्री का इस्तेमाल करें। बोर्ड ने यह भी बताया कि आधिकारिक टेक्स्ट बुक्स जल्द उपलब्ध कराई जाएंगी। लेकिन तब तक स्कूलों को इंतजार नहीं करना है और तुरंत क्लास में पढ़ाई शुरू करनी होगी।

स्कूलों को देनी होगी जानकारी स्कूल अपनी चुनी गई तीसरी भाषा की जानकारी CBSE को देंगे। इसके साथ ही इसे OASIS पोर्टल पर अपडेट करना भी जरूरी होगा। बोर्ड ने कहा है कि इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी उसके रीजनल ऑफिस करेंगे, ताकि सभी स्कूल समय पर नियम लागू करें।

CBSE का ऑफिशियल नोटिस यहां देख सकते हैं

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महाराष्ट्र थ्री लैंग्वेज पॉलिसी लागू करने वाला पहला राज्य

पिछले साल महाराष्ट्र थ्री लैंग्वेज पॉलिसी लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना था। राज्‍य में 1 से 5वीं क्लास तक के बच्चों के लिए हिंदी पढ़ना जरूरी कर दिया गया है। राज्य के सभी मराठी और अंग्रेजी मीडियम स्कूलों में नियम लागू है।

NEP 2020 के तहत थ्री लैंग्‍वेज पॉलिसी लागू

नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020 की सिफारिश के मुताबिक सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) ने 2 अप्रैल को अपना नया करिकुलम फ्रेमवर्क रिलीज किया। इसके तहत स्कूल्स में थ्री-लैंग्वेज फॉर्मूला लागू किया जाएगा। हर स्टूडेंट को दसवीं क्लास तक तीन भाषाएं सीखनी होगी।

34 साल बाद नई शिक्षा नीति 2020 को लाया गया

नई शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) को भारत सरकार ने 29 जुलाई, 2020 को मंजूरी दी थी। यह 34 साल बाद भारत की शिक्षा नीति में एक बड़ा बदलाव है। इससे पिछली नीति 1986 में बनाई गई थी (जिसे 1992 में अपडेट किया गया था)। इसका उद्देश्य भारत की शिक्षा प्रणाली को 21वीं सदी की जरूरतों के अनुसार ढालना है, ताकि छात्र न केवल परीक्षा पास करें, बल्कि व्यावहारिक ज्ञान और कौशल से लैस हों।

इस बार नई शिक्षा नीति को लागू करने के लिए केन्द्र ने साल 2030 तक का लक्ष्य रखा गया है। चूंकि शिक्षा संविधान में समवर्ती सूची का विषय है, जिसमें राज्य और केंद्र सरकार दोनों का अधिकार होता है। इसलिए राज्य सरकारें इसे पूरी तरह अप्लाई करें, यह जरूरी नहीं है। जब कहीं टकराव वाली स्थिति होती है, दोनों पक्षों को आम सहमति से इसे सुलझाने का सुझाव दिया गया है।

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केंद्र सरकार ने NCERT को डीम्‍ड यूनिवर्सिटी का दर्जा दिया: खुद एंट्रेस लेने, कोर्स और सिलेबस डिजाइन करने, डिग्री देने की छूट मिली

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केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने नेशनल काउंसिल ऑफ़ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) को ‘डीम्ड यूनिवर्सिटी’ का दर्जा दिया। यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) की सलाह पर शिक्षा मंत्रालय ने 30 जनवरी को नोटिफिकेशन जारी कर इसकी घोषणा की। पूरी खबर पढ़ें…

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Gold Rate Alert: भारत में सोना खरीदना अब और होगा महंगा? रूस के फैसले से बढ़ सकते हैं दाम, 1 मई से दिखेगा असर


Business

oi-Pallavi Kumari

Gold Rate Alert: दुनिया के गोल्ड मार्केट में एक बड़ा भूचाल आने वाला है। अगर आप सोना खरीदने की सोच रहे हैं या इसमें निवेश कर चुके हैं, तो रूस से आई यह खबर आपको जरूर जाननी चाहिए। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक ऐसे आदेश पर दस्तखत कर दिए हैं, जिससे पूरी दुनिया के गोल्ड मार्केट में ‘सप्लाई का सूखा’ पड़ने का डर पैदा हो गया है। रूस ने ऐलान किया है कि 1 मई 2026 से रूस 100 ग्राम से ज्यादा वजन वाले सोने के बिस्कुट (Gold Bars) के एक्सपोर्ट पर पाबंदी लगा रहा है।

यह फैसला सिर्फ एक सामान्य नियम नहीं, बल्कि ग्लोबल मार्केट में सप्लाई चेन को हिला देने वाला कदम माना जा रहा है। सवाल यह है कि इसका असर भारत जैसे बड़े गोल्ड कंज्यूमर देश पर कितना पड़ेगा और क्या सच में सोना रिकॉर्ड स्तर तक महंगा हो सकता है? आइए समझते हैं कि रूस का यह फैसला भारत के सराफा बाजार को कैसे प्रभावित करेगा और क्या वाकई सोना 5000 डॉलर प्रति औंस के जादुई आंकड़े को छूने वाला है।

Russia Gold 100g export ban from may 1 impact India Gold rate 2026

क्या है पुतिन का ‘गोल्ड प्लान’? कब और कैसे लागू होगा यह नियम?

रूस दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना पैदा करने वाला देश है। दुनिया की कुल जरूरत का लगभग 10% हिस्सा अकेले रूस से आता है। अब रूस ने अपनी आर्थिक संप्रभुता को बचाने और ‘काले धन’ के खेल को रोकने के लिए नया दांव खेला है। रूस सरकार का यह नया कानून 1 मई 2026 से लागू होगा। इसके तहत कोई भी व्यक्ति, कारोबारी या निजी ट्रेडर 100 ग्राम से ज्यादा सोना देश से बाहर नहीं ले जा सकेगा।

हालांकि, इसमें कुछ छूट भी दी गई है। वनुकोवो, शेरेमेतयेवो, दोमोदेदोवो और क्नेविची जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों से विशेष परमिट के जरिए सोना भेजा जा सकेगा, लेकिन इसके लिए सरकारी कागजी कार्रवाई बहुत सख्त होगी। आसान भाषा में कहें तो पुतिन ने रूस के सोने को देश के भीतर ही ‘कैद’ करने की तैयारी कर ली है। इसका मतलब साफ है कि अब सोने का अधिकांश व्यापार सरकार के कंट्रोल में रहेगा और “फ्री फ्लो” लगभग खत्म हो जाएगा।

रूस ने ऐसा क्यों किया?

रूस दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना उत्पादक देश है। ऐसे में यह फैसला सिर्फ घरेलू नीति नहीं, बल्कि रणनीतिक कदम है। सरकार का मानना है कि सोना तेजी से विदेशी मुद्रा के विकल्प के रूप में इस्तेमाल हो रहा था, जिससे मनी लॉन्ड्रिंग और कैपिटल फ्लाइट बढ़ रही थी। इस बैन के जरिए सरकार अनियमित लेन-देन को रोकना चाहती है और अपने आर्थिक संसाधनों को देश के भीतर सुरक्षित रखना चाहती है।

रूस के फाइनेंस मिनिस्टर एंटोन सिलुआनोव के मुताबिक, सोने का इस्तेमाल अब विदेशी मुद्रा के विकल्प के तौर पर होने लगा था। लोग अवैध लेन-देन और मनी लॉन्ड्रिंग के लिए सोने को देश से बाहर भेज रहे थे। रूस अपनी अर्थव्यवस्था को ‘शैडो इकोनॉमी’ यानी काले बाजार से मुक्त करना चाहता है।

इसके पीछे एक बड़ी वजह डॉलर की दादागिरी को खत्म करना भी माना जा रहा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि रूस और चीन मिलकर एक ऐसा पेमेंट सिस्टम बना रहे हैं जो डॉलर के बजाय सोने पर आधारित होगा। इसे ‘ब्रिक्स यूनिट’ (BRICS Unit) कहा जा रहा है। जब रूस अपना सोना बाहर नहीं भेजेगा, तो वह उसे बतौर ‘कोलेटरल’ (गारंटी) इस्तेमाल कर सकेगा, जिससे डॉलर की जरूरत कम हो जाएगी।

Russia gold export ban 2026 news

ग्लोबल मार्केट में क्यों मच गया हड़कंप?

रूस हर साल दुनिया को बड़ी मात्रा में सोना सप्लाई करता है। अनुमान के मुताबिक वैश्विक उत्पादन का करीब 10% हिस्सा रूस से आता है। अब जब 300 टन से ज्यादा सालाना सप्लाई अचानक इंटरनेशनल मार्केट से कम हो जाएगी, तो सीधा असर कीमतों पर पड़ेगा। मांग वही रहेगी, लेकिन सप्लाई घटेगी और यही स्थिति कीमतों को ऊपर धकेलती है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में सोना $4800 से $5000 प्रति औंस तक जा सकता है।

दिलचस्प बात यह है कि अप्रैल 2026 में कुछ जगहों पर सोने की कीमतें स्थिर या थोड़ी नरम दिख रही हैं। लेकिन एक्सपर्ट इसे “False Signal” बता रहे हैं।

असल में रूस के निजी निवेशक और छोटे कारोबारी 1 मई से पहले अपने गोल्ड स्टॉक को बाहर निकालने की कोशिश कर रहे हैं। इससे बाजार में अस्थायी सप्लाई बढ़ गई है, जिसे “April Glut” कहा जा रहा है। लेकिन जैसे ही मई शुरू होगा, यह सप्लाई अचानक गायब हो जाएगी और कीमतों में तेज उछाल आ सकता है।

भारत पर क्या होगा असर: क्या महंगा होगा सोना?

भारत दुनिया में सोने का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है। हमारे यहां शादी-ब्याह से लेकर निवेश तक, सोने के बिना कुछ नहीं होता। अब सवाल यह है कि रूस की पाबंदी से भारत को क्या फर्क पड़ेगा?

सप्लाई में कमी: जब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक बाजार में माल कम भेजेगा, तो कमी होना लाजमी है। मांग वैसी ही रहेगी लेकिन सप्लाई कम होगी, तो कीमतें आसमान छुएंगी।

महंगाई का डर: अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के दाम बढ़ने का सीधा असर भारत में 24 कैरेट और 22 कैरेट सोने के रेट पर पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सोने की कीमतें जल्द ही 4,800 से 5,000 डॉलर प्रति औंस तक जा सकती हैं।

भारत-रूस गोल्ड डील: भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर सोना स्विट्जरलैंड और यूएई से मंगवाता है, लेकिन हाल के वर्षों में रूस से भी सोने का आयात बढ़ा है। हालांकि, भारत और रूस के बीच सीधे तौर पर कोई ऐसी ‘फिक्स्ड डील’ नहीं है कि रूस हमें सस्ता सोना ही देगा, लेकिन रूस पर लगे प्रतिबंधों के बाद भारत ने कई बार रियायती दरों पर रूसी संसाधनों को हासिल किया है। अब 100 ग्राम की लिमिट लगने से भारतीय व्यापारियों के लिए रूस से सीधे सोना लाना मुश्किल हो जाएगा।

भारत किस देश से कितना सोना खरीदता है?

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एक्सपर्ट की राय: क्या गोल्ड होगा महंगा?

बाजार विश्लेषक गैरी एस. वैगनर (Gary S. Wagner) का कहना है कि वर्तमान में सोने, कच्चे तेल और डॉलर के बीच का पुराना रिश्ता टूट गया है। आमतौर पर डॉलर मजबूत होता है तो सोना गिरता है, लेकिन अभी सब कुछ बढ़ रहा है। यह इस बात का संकेत है कि बाजार में भारी तनाव है।

वहीं, अनुभवी विश्लेषक शनाका अनसेलम परेरा (Shanaka Anslem Perera) के मुताबिक, पुतिन का यह फैसला कोई अचानक लिया गया कदम नहीं है, बल्कि एक गहरी रणनीति का हिस्सा है। परेरा बताते हैं कि सेंट्रल बैंक ऑफ रूस ने हाल के महीनों में काफी सोना बेचा है और अब वह दूसरों को ऐसा करने से रोक रहा है। उनका कहना है कि सोना अब केवल एक धातु नहीं, बल्कि रूस के लिए सबसे बड़ी ‘सॉवरेन एसेट’ (राजकीय संपत्ति) बन गया है, खासकर तब जब उसके 300 अरब डॉलर के विदेशी एसेट पश्चिमी देशों ने फ्रीज कर रखे हैं।

मई से पहले दिखेगी ‘सोने की लूट’?

मार्केट में एक और दिलचस्प बात चर्चा में है-‘फ्रंट-रनिंग द बैन’। इसका मतलब है कि 1 मई की डेडलाइन से पहले रूसी व्यापारी और रईस लोग अपना सोना फटाफट देश से बाहर निकालने की कोशिश करेंगे। इससे अप्रैल के महीने में बाजार में अचानक सोने की बाढ़ आ सकती है और कीमतें थोड़ी गिर सकती हैं। लेकिन सावधान रहें! यह गिरावट एक ‘झूठा संकेत’ हो सकती है। जैसे ही मई शुरू होगा, रूस का यह ‘ग्रे मार्केट’ सप्लाई बंद हो जाएगा और कीमतों में एक बड़ा उछाल (Skyrocket) देखने को मिलेगा।

आम आदमी को क्या करना चाहिए?

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया भर के केंद्रीय बैंक अपनी गोल्ड रिजर्व बढ़ा रहे हैं। भारत में भी सोने को हमेशा से सबसे सुरक्षित निवेश माना गया है। रूस के इस कदम से आने वाले महीनों में वैश्विक बाजार में सोने की ‘कमी’ (Scarcity Premium) की वजह से दाम तेजी से बढ़ सकते हैं।

अगर आप मिड-टर्म या लॉन्ग-टर्म के लिए सोना खरीदना चाहते हैं, तो अप्रैल का महीना आपके लिए सही मौका हो सकता है। 1 मई के बाद बाजार की चाल पुतिन के नियंत्रण में होगी, और जैसा कि इतिहास गवाह है, जब रूस अपनी सीमाओं को कसता है, तो वैश्विक बाजार में हलचल मचनी तय है।



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Raghav Chadha कौन सी पार्टी करेंगे ज्वाइन? क्यों हुई ‘धुरंधर’ के असलम से मुलाकात? Viral तस्वीर पर उठे सवाल


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oi-Ankur Sharma

Raghav Chadha: अगर बॉक्स ऑफिस पर संजय दत्त-रणवीर सिंह की फिल्म ‘धुरंधर’ ने गदर मचाई हुई है तो वहीं इन दिनों सियासी गलियारों में आप सांसद राघव चड्डा का नाम भी सुर्खियां में हैं इसलिए जब अपने-अपने क्षेत्र के दोनों ‘धुरंधरों’ की फोटो एक साथ सामने आई तो सोशल मीडिया पर तहलका मच गया और लोग तरह-तरह के सवाल करने लग गए।

दरअसल राघव चड्डा ने खुद अपनी और फिल्म ‘धुरंधर’ में ‘चौधरी असलम’ का किरदार निभाने वाले संजय दत्त की फोटो शेयर की है और खुलासा किया है कि कुछ दिन पहले संजू बाबा को उन्होंने अपने आवास पर आमंत्रित किया था।

Raghav Chadha met Sanjay Dutt

राघव चड्ढा ने इंस्टाग्राम पर संजय दत्त के साथ हुई अपनी मुलाकात की तस्वीरें साझा कीं। इन तस्वीरों में चड्ढा, संजय दत्त का घर पर गर्मजोशी से स्वागत करते और उनसे सहज होकर बातचीत करते दिखाई दिए।

संजय दत्त को होस्ट करने का सौभाग्य मिला:Raghav Chadha

चड्ढा ने कैप्शन में लिखा, ‘कुछ समय पहले अपने घर पर एक सबसे प्यारे इंसान संजय दत्त को होस्ट करने का सौभाग्य मिला। ‘धुरंधर’ के लिए आपको मिल रहीं तारीफें देखकर बहुत अच्छा लग रहा है, उनका पुराना ओरा बरकरार है और हर दौर में लोगों में आपके लिए वैसा ही प्यार और इज्जत है। इससे ज्यादा डिजर्व्ड कुछ नहीं हो सकता। हमेशा आपके साथ हूं।’

‘Raghav Chadha बीजेपी जॉइन कर रहे हैं क्या?’, लोग ने उठाए सवाल

इस मुलाकात ने प्रशंसकों को चौंका दिया है और लोग तरह-तरह के सवाल कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा है कि – ‘सर बीजेपी जॉइन कर रहे हैं क्या?’ या ‘नई पार्टी बना रहे हैं?’ , अब चूकिं संजय दत्त की बहन कांग्रेस से जुड़ी हैं तो कुछ लोग ये भी पूछ रहे हैं कि क्या राघव चड्डा कांग्रेस ज्वाइन करने जा रहे हैं। तो वहीं एक यूजर ने ये भी लिख दिया क्या फिल्मों में कदम रखने जा रहे हैं राघव आप, हिरोईन तो आपके घर में ही है।’ कुल मिलाकर इस वक्त राघव और संजय दत्त सोशल मीडिया पर आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।

कौन हैं Raghav Chadha?

राघव चड्ढा का जन्म 11 नवंबर 1988 को New Delhi में हुआ। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा दिल्ली से पूरी की और इसके बाद University of Delhi से वाणिज्य (B.Com) की पढ़ाई की। आगे चलकर उन्होंने Institute of Chartered Accountants of India (ICAI) से चार्टर्ड अकाउंटेंसी (CA) की डिग्री हासिल की। राघव चड्ढा ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत Arvind Kejriwal के साथ की। 2012 में AAP के गठन के बाद वह पार्टी से जुड़े और आप पार्टी के चर्चित चेहरों में से एक हो गए।

Raghav Chadha को राज्यसभा में डिप्टी लीडर पद से हटाया गया

राघव चड्ढा ने 2020 के Delhi Legislative Assembly elections 2020 में राजेंद्र नगर सीट से जीत हासिल की और विधायक बने। इसके बाद 2022 में वह Rajya Sabha के सदस्य बने। हाल ही में पार्टी ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में डिप्टी लीडर पद से हटा दिया। AAP के कई नेताओं ने राघव चड्ढा पर आरोप लगाए हैं कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के खिलाफ आक्रामक रुख नहीं अपना रहे थे तो वहीं राघव चड्ढा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया और कहा कि पार्टी के आरोप “झूठे और स्क्रिप्टेड” है।

यह पढ़ें: Raghav Chadha:’परिणीति ने खत्म किया पति का करियर’,अभिनेत्री पर क्यों भड़के लोग? क्या है PM मटेरियल वाली बात?



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15 अप्रैल से शुरू होने वाला है अमरनाथ यात्रा का पंजीकरण, पूरी डिटेल जानें यहां


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15 अप्रैल से शुरू होने वाला है अमरनाथ यात्रा का पंजीकरण, पूरी डिटेल जानें यहां

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Amarnath Yatra 2026 Date: अमरनाथ यात्रा के लिए पंजीकरण 15 अप्रैल से शुरू होगी. पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर पंजीकरण कराया जाएगा. श्री अमरनाथ जी श्राइन बोर्ड ने घोषणा की है कि तीर्थयात्री देश भर में स्थित 554 नामित बैंक शाखाओं के माध्यम से पंजीकरण करा सकते हैं. श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि वे समय पर पंजीकरण प्रक्रिया पूरी कर लें.

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अमरनाथ यात्रा 2026.

Amarnath Yatra Date:  इस साल अमरनाथ यात्रा के लिए पंजीकरण कराने की तिथि की घोषणा कर दी गई है. श्रद्धालु 15 अप्रैल से अमरनाथ यात्रा के दर्शन के लिए पंजीकरण करा सकते हैं. श्री अमरनाथ जी श्राइन बोर्ड के अनुसार, तीर्थयात्री देश भर में स्थित 554 नामित बैंक शाखाओं के माध्यम से पंजीकरण करा सकते हैं. यात्रा परमिट भी इसी आधार पर जारी किए जाएंगे. हर साल लाखों श्रद्धालु अमरनाथ यात्रा के लिए बाबा बर्फानी के दर्शने के लिए जाते हैं. देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग इस पवित्र अमरनाथ गुफा के दर्शन के लिए कूच करते हैं. सरकार अमरनाथ यात्रा के प्रत्येक मार्ग पर कड़ी सुरक्षा का प्रबंध करती है, ताकि किसी भी तीर्थयात्री को कोई समस्या ना हो. कोई हादसा ना हो. श्रद्धालुओं से भी सभी सुरक्षा नियमों का पालन करने के लिए कहा जाता है.

शीघ्र की जाएगी यात्रा की आधिकारिक तिथियों की घोषणा 

इस तीर्थयात्रा की आधिकारिक तिथियों की घोषणा शीघ्र ही की जाएगी. श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि वे समय पर पंजीकरण प्रक्रिया पूरी कर लें. लोगों का पहले आओ और पहले पाओ के आधार पर पंजीकरण किया जाएगा.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

अमरनाथ यात्रा का महत्व क्या है?
अमरनाथ यात्रा हिंदू धर्म की सबसे पवित्र यात्राओं में से एक मानी जाती है. धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व बेहद गहरा और महत्वपूर्ण है. अमरनाथ की यात्रा भगवान शिव को समर्पित है.मान्यता है कि यहां अमरनाथ गुफा में प्रत्येक वर्ष बर्फ से प्राकृतिक तरीके से एक शिवलिंग बनता है, जिसके दर्शन के लिए ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी गुफा में शंकर जी ने मां पार्वती को अमरत्व के रहस्य की कथा सुनाई थी.

यहां पहुंचने की राह आसान नहीं है, लेकिन कठिन पहाड़ी रास्तों से होते हुए हर साल लाखों श्रद्धालु पूरे आत्मविश्वास, श्रद्धा भाव से यहां पहुंचते हैं. यहां पहुंचना किसी परीक्षा से कम नहीं. भक्तों के अनुसार, इस यात्रा से सभी पापों का नाश होता है. मोक्ष की प्राप्ति होती है. इस यात्रा के दौरान बम बम भोले के जयकारे लोगों के अंदर अलग ऊर्जा पैदा करता है.

प्राकृतिक महत्व की बात करें तो अमरनाथ की यात्रा के दौरान लोगों को हिमालय की अद्भुत सुंदरता, बर्फीले पहाड़, बहती नदियां, हरी-भरी वादियों देखने को मिलती हैं. ये यात्रा भक्तों को बेहद ही रोमांचक, अनोखा, अद्भुत और आध्यात्मिक अनुभव कराता है.

अमरनाथ यात्रा का खर्च
अमरनाथ यात्रा का कुल खर्च प्रति व्यक्ति 10 हजार से लेकर 45 हजार के बीच हो सकता है. रेजिस्ट्रेशन कराने का खर्च लगभग 200 रुपये तक होता है. आप हेलीकॉप्टर से जाना चाहते हैं तो आपको 25 हजार से लेकर 45 हजार रुपये बालटाल/पहलगाम से लग सकते हैं. यहां आप पैदल, पालकी, घोड़ा, हेलीकॉप्टर से पहुंच सकते हैं. यहां सिर्फ 13 वर्ष से लेकर 70 वर्ष की उम्र वाले लोग ही जा सकते हैं, साथ में रखना होगा अपना हेल्थ सर्टिफिकेट भी.

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Anshumala

अंशुमाला हिंदी पत्रकारिता में डिप्लोमा होल्डर हैं. इन्होंने YMCA दिल्ली से हिंदी जर्नलिज्म की पढ़ाई की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में पिछले 15 वर्षों से काम कर रही हैं. न्यूज 18 हिंदी में फरवरी 2022 से लाइफस्टाइ…और पढ़ें



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एक ने बॉलीवुड को बनाया निशाना, दूसरा उसकी आड़ में करता रहा कांड, आपस में कितने जुदा राव इंद्रजीत-लॉरेंस बिश्नोई


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दोनों बॉलीवुड की आड़ में किया कांड, कितने जुदा राव इंद्रजीत-लॉरेंस बिश्नोई

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दो गैंगेस्‍टर और दोनों ने अंडरवर्ल्‍ड की दुनिया में अपना नाम बनाने के लिए बॉलीवुड को ढाल बनाया. म्‍यूजिक कंपनी की आड में गैंग चलाने वाला राव इंद्रजीत और तमाम एक्‍टर्स को निशाना बनाने वाल लॉरेंस बिश्‍नोई एक दूसरे से कितने जुदा हैं, जानने के लिए पढ़ें आगे…

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फिल्‍मों की आड़ में अंडरवर्ल्‍ड में पैठ बनाते दोनों गैंगेस्‍टर.

Lawrence Bishnoi Vs Rao Inderjit: सलमान खान सहित कई फिल्‍मी हस्तियों को धमकी देकर गैंगेस्‍टर लॉरेंस बिश्‍नोई ने खूब सुर्खियां बटोरी थीं. जेल में बंद लॉरेंस बिश्‍नोई के इशारे पर एक के बाद एक फिल्‍म और टीवी की हस्तियों को निशाना बनाया गया. जिसके बाद, उसका नाम देश के सबसे चर्चित गैंगस्टर्स में शुमार हो गया. अब एक ऐसे गैंगेस्‍टर का नाम सामने आया है, जो फिल्‍मी दुनिया में रहकर अपने अपराधों का जाल तेजी से बिछा रहा था. राव इंद्रजीत यादव के इस गैंगेस्‍टर को आज दुबई से अरेस्‍ट किया गया है. राव इंद्रजीत ने पर्दे के पीछे रहकर अपना नेटवर्क खड़ा किया और म्यूजिक इंडस्ट्री को ढाल बनाकर कथित रूप से आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देता रहा.

एक दूसरे से कितने जुदा है दोनों गैंगेस्‍टर

  1. काम करने का तरीका: लॉरेंस बिश्नोई का स्टाइल काफी आक्रामक और खुला माना जाता है. वह सोशल मीडिया और अपने गैंग के जरिए सीधे मैसेज देने में विश्वास रखता है. उसके गिरोह ने कई बार खुलेआम धमकियां दीं, जिससे उसका डर और प्रभाव दोनों बढ़ा. इसके उलट, राव इंद्रजीत का तरीका ज्यादा लो-प्रोफाइल बताया जा रहा है. वह सीधे सामने आने के बजाय अपने नेटवर्क के जरिए काम करता था. पुलिस सूत्रों के अनुसार, उसका फोकस आर्थिक अपराध, फंडिंग और इंटरनेशनल कनेक्शन पर ज्यादा था.
  2. नेटवर्क की पहुंच: लॉरेंस बिश्नोई का नेटवर्क मुख्य रूप से भारत के पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली तक फैला हुआ है, हालांकि उसके इंटरनेशनल लिंक भी सामने आए हैं. उसके गिरोह में कई ऐसे अपराधी शामिल हैं, जो उसे एक ब्रांड की तरह देखते हैं. वहीं, राव इंद्रजीत का नेटवर्क कथित तौर पर ज्यादा ग्लोबल बताया जा रहा है. दुबई से उसकी गिरफ्तारी यह बताने के लिए काफी है कि उसके कनेक्शन विदेश में किस तरह तक फैले हुए थे. जांच एजेंसियों का मानना है कि वह हवाला, फर्जी कंपनियों और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के जरिए अपने नेटवर्क को ऑपरेट करता था.
  3. दोनों की इमेज: लॉरेंस बिश्नोई की पहचान एक हार्डकोर गैंगस्टर की है, जिसे उसके लोग खुलकर उसी रूप में देखते हैं. उसका नाम कई हत्या और रंगदारी के मामलों में सामने आ चुका है. वहीं, राव इंद्रजीत ने कथित तौर पर खुद को एक बिजनेसमैन के रूप में पेश किया है. म्यूजिक कंपनी का मालिक होने के कारण उसकी छवि आम लोगों के बीच अलग थी. शायद यही वजह है कि उसकी गिरफ्तारी ने सभी को चौंका दिया.
  4. कानून की गिरफ्त: लॉरेंस बिश्नोई लंबे समय से जेल में बंद है, लेकिन इसके बावजूद उसका नेटवर्क सक्रिय बना हुआ है. लॉरेंस का गैंग फिलहाल देश-विदेश की पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है. दूसरी ओर, राव इंद्रजीत भारत से बाहर रहकर अपने नेटवर्क को संचालित करता था. दुबई में उसकी गिरफ्तारी इस बात का संकेत है कि अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के सहयोग से अब ऐसे अपराधियों पर भी शिकंजा कसना शुरू हो गया है.

युवाओं के बीच दोनों गैंगेस्‍टर को कैसे देखा जाता है?
लॉरेंस बिश्नोई का प्रभाव खासतौर पर डर और गैंगस्टर इमेज की है. कई नौजवान उसके स्टाइल से प्रभावित होकर अपराध की ओर खिंच रहे हैं. इसके विपरीत, राव इंद्रजीत का मॉडल ज्यादा ग्लैमरस बताया जा रहा है. म्यूजिक, पैसा और इंटरनेशनल लाइफस्टाइल का आकर्षण युवाओं को ज्‍यादा भा सकता है. यह ट्रेंड कानून व्यवस्था के लिए बड़ा खतरनाक माना जा रहा है.

दोनों को लेकर जांच एजेंसियां का क्‍या है मानना?
जांच एजेंसियों के मुताबिक, राव इंद्रजीत का मामला इस बात का संकेत है कि अंडरवर्ल्ड अब सिर्फ बंदूक और गैंगवार तक सीमित नहीं रहा. यह अब कॉर्पोरेट स्ट्रक्चर, डिजिटल ट्रांजैक्शन और इंटरनेशनल नेटवर्क के साथ काम कर रहा है. वहीं, लॉरेंस बिश्नोई पारंपरिक गैंगस्टर मॉडल पर काम कर रहा है. राव इंद्रजीत एक नए दौर के अपराध का चेहरा बनकर सामने आया है.

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Anoop Kumar MishraAssistant Editor

Anoop Kumar Mishra is associated with News18 Digital for the last 6 years and is working on the post of Assistant Editor. He writes on Health, aviation and Defence sector. He also covers development related to …और पढ़ें



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David Miller पागल है? 13 साल बाद सच हुई जोफ्रा आर्चर की भविष्यवाणी! एक रन से मिली हार पर गावस्कर ने क्या कहा?


Cricket

oi-Amit Kumar

DC vs GT IPL 2026 David Miller: आईपीएल 2026 के सबसे बड़े रोमांचक मैच में दिल्ली कैपिटल्स (DC) की 1 रन से हार के बाद लगातार बहस हो रही है। मैच की अंतिम 2 गेंदों पर जब 2 रनों की जरूरत थी। तब डेविड मिलर ने सिंगल लेने से मना कर दिया और अंत में टीम मैच हार गई। इस फैसले पर जहां क्रिकेट जगत दो गुटों में बंटा हुआ है। वहीं दिग्गज सुनील गावस्कर और सोशल मीडिया के जोफ्रा आर्चर के बयानों ने चर्चा गर्म कर दी है।

सुनील गावस्कर ने किया मिलर का बचाव (DC vs GT IPL 2026 David Miller)

पूर्व भारतीय कप्तान सुनील गावस्कर ने मिलर के फैसले को गलत मानने से इनकार कर दिया है। गावस्कर के मुताबिक मिलर अच्छी लय में थे और उन्हें खुद पर भरोसा था कि वे आखिरी गेंद पर मैच खत्म कर देंगे। इसे ब्लंडर कहना गलत है क्योंकि एक सेट बल्लेबाज का खुद पर भरोसा करना स्वाभाविक है। गावस्कर ने प्रसिद्ध कृष्णा की भी तारीफ की, जिन्होंने ऐन वक्त पर सटीक स्लोअर बाउंसर फेंककर मिलर को छका दिया।

DC vs GT 1

गावस्कर ने पुराने मैच को किया याद

गावस्कर ने मिलर की चूक को समझाने के लिए 1986 के भारत-ऑस्ट्रेलिया टाइड टेस्ट का उदाहरण दिया। गावस्कर ने बताया कि उस ऐतिहासिक मैच में रवि शास्त्री ने सही समय पर सिंगल लेकर स्कोर बराबर किया था। उन्होंने कहा कि मिलर को भी कुलदीप यादव पर भरोसा करना चाहिए था और सिंगल लेकर कम से कम स्कोर बराबर (टाई) कर लेना चाहिए था।

जोफ्रा आर्चर की भविष्यवाणी ने फिर चौंकाया

मैच खत्म होते ही इंग्लैंड के गेंदबाज जोफ्रा आर्चर का 27 नवंबर 2013 का एक ट्वीट वायरल हो गया। आर्चर ने तब लिखा था कि Miller mad? Cricket at 11:30। ठीक 13 साल पहले आर्चर ने यह ट्वीट तब किया था जब दक्षिण अफ्रीका एक वनडे मैच में पाकिस्तान से 1 रन से हारा था और मिलर आखिरी गेंद पर फिनिश नहीं कर पाए थे। बुधवार रात को दिल्ली के साथ भी हूबहू यही कहानी दोहराई गई।

राशिद खान की फिरकी का जादू

पूर्व इंग्लिश क्रिकेटर केविन पीटरसन ने गुजरात की जीत का श्रेय राशिद खान को दिया। राशिद ने 4 ओवर में मात्र 17 रन देकर 3 विकेट लिए। पीटरसन का मानना है कि गुजरात की बाकी गेंदबाजी साधारण थी, लेकिन राशिद की किफायती गेंदबाजी ने दिल्ली को रन बनाने से रोके रखा।



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हैप्पी होम में चल रहा था हाईटेक धंधा! मुन्नाभाई स्टाइल में दिलाते थे ऑनलाइन एग्जाम, मास्टरमाइंड गिरफ्तार


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हैप्पी होम में चल रहा था हाईटेक धंधा! मुन्नाभाई स्टाइल में दिलाते थे एग्जाम

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दिल्‍ली पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो मुन्‍नाभाई स्‍टाइल में ऑनलाइन एग्‍जाम दिलाता था. पुलिस ने इस गिरोह के मास्‍टरमाइंड को अरेस्‍ट किया है. साथ ही, इस गिरोह से जुड़े दूसरे लोगों की तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है.

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दिल्‍ली पुलिस ने ऑनलाइन परीक्षा दिलाने वाले गिरोह के मास्‍टरमाइंड को अरेस्‍ट किया है.

Delhi News: द्वारका के सेक्टर-23 इलाके में स्थित ‘हैप्पी होम’ नाम की बिल्डिंग में चल रहे ऑनलाइन परीक्षा में नकल के बड़े रैकेट का दिल्ली पुलिस ने भंडाफोड़ किया है. पुलिस ने इस पूरे सिंडिकेट के मास्टरमाइंड हर्षवर्धन (28) को अरेस्‍ट किया है. यह रैकेट परीक्षाओं में असली कैंडिडेट की जगह पेपर सॉल्वर बैठाकर एग्जाम दिलाने का हाईटेक धंधा चला रहा था.

दिल्‍ली पुलिस के अनुसार, उन्‍हें इंटे‍ल मिली थी कि द्वारका के इस मकान में संदिग्ध गतिविधियां चल रही हैं. सूचना के आधार पर जब पुलिस टीम ने छापा मारा तो अंदर का नजारा देखकर हैरान रह गई. मौके पर देश के अलग-अलग कॉलेजों के 32 मेधावी छात्र मौजूद मिले. जांच में पता चला कि हैप्पी होम फ्लैट को करीब 5 दिनों के लिए किराये पर लिया गया था.

  1. इस फ्लैट में ऑनलाइन परीक्षा में नकल कराने का पूरा सेट-अप बनाया गया था. पूछताछ में इन छात्रों ने बताया कि उन्हें ऑनलाइन सवाल हल करने के लिए बुलाया गया था.
  2. लेकिन जब पुलिस ने एडमिट कार्ड की जांच की तो खुलासा हुआ कि ये छात्र खुद परीक्षा देने नहीं आए थे, बल्कि किसी दूसरे कैंडिडेट की जगह परीक्षा देने वाले थे.
  3. पूछताछ में मुख्य आरोपी हर्षवर्धन ने खुलासा किया कि वह मुंबई के एक प्रतिष्ठित मैनेजमेंट संस्थान की प्रवेश परीक्षा में उम्मीदवारों को पास कराने के लिए पूरा नेटवर्क चलाता था.
  4. उसके मुताबिक परीक्षा जयपुर के एक आईटी लैब में आयोजित होनी थी. वह एनी डेस्‍क और एमी एडमिन जैसे रिमोट एक्सेस सॉफ्टवेयर के जरिए वहां के कंप्यूटर सिस्टम को एक्सेस करता था.
  5. इसके बाद, इस रैकेट के इशारे पर मेधावी बच्‍चों को द्वारका बुलाया जाता और उनसे मैनेजमेंट संस्‍थान की प्रवेश परीक्षा के पेपर सॉल्व कराए जाते थे.
  6. छापेमारी के दौरान पुलिस ने मौके से लैपटॉप, मोबाइल फोन और कंप्यूटर सिस्टम भी बरामद किए हैं, जिनका इस्तेमाल ऑनलाइन परीक्षा में चीटिंग कराने के लिए किया जा रहा था.

कहां से अरेंज किए जाते थे असली कैंडिडेट की जगह पेपर देने वाले मेथावी छात्र?
जांच में सामने आया कि इस पूरे रैकेट में प्रांजल नाम का युवक भी शामिल था, जिसका काम अलग-अलग कॉलेजों से पेपर सॉल्वर यानी सवाल हल करने वाले छात्रों को अरेंज करना था. वहीं हर्षवर्धन उम्मीदवारों को पकड़कर परीक्षा दिलाने का काम करता था.

पेपर सॉल्‍व करने के एवज में इन छात्रों को कितने रुपए दिए जाते थे?
पूछताछ के दौरान, आरोपी ने पुलिस को बताया कि इन छात्रों को एक सवाल हल करने के बदले 500 से 1000 रुपये तक दिए जाते थे. जबकि किसी कैंडि‍डेट की पूरी परीक्षा पास कराने के एवज में लाखों रुपये वसूले जाते थे.

क्‍या पेपर देने वाले बच्‍चों को पता था कि वह किसी दूसरे की जगह परीक्षा दे रहे हैं?
पुलिस की जांच में यह भी सामने आया कि 32 में से कुछ छात्र ऐसे थे जिन्हें यह अंदाजा भी नहीं था कि वे किसी और की जगह परीक्षा दे रहे हैं, जबकि कुछ छात्र पहले भी इस तरह की परीक्षा में शामिल हो चुके थे और उन्हें पूरी जानकारी थी.

दिल्‍ली पुलिस ने पकड़े गए छात्रों के खिलाफ क्‍या कार्रवाई की है?
दिल्ली पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है. वहीं मौके पर मिले छात्रों को फिलहाल बाउंड डाउन किया गया है. पुलिस के मुताबिक यह ऑनलाइन परीक्षा में रिमोट एक्सेस के जरिए चीटिंग कराने वाला एक संगठित गिरोह है.

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Anoop Kumar MishraAssistant Editor

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RBSE Topper Bharat Runecha: 10वीं परीक्षा में 98.33% मार्क्स लाने वाले भरत रुणेचा की मौत, कैसे गई टॉपर की जान?


Rajasthan

oi-Kumari Sunidhi Raj

RBSE Topper Bharat Runecha Dies: राजस्थान के जैतारण में एक दर्दनाक हादसा हुआ जिसने लोगों को झकझोर कर रख दिया। बिजली विभाग की लापरवाही ने एक होनहार छात्र की जान ले ली। बारिश के दौरान सड़क किनारे लगे बिजली के पोल में करंट उतर आया। 15 साल के छात्र भरत रुणेचा (Bharat Runecha) का हाथ अनजाने में पोल से छू गया।

बिजली के खंभे के संपर्क में आने से भारत को जोरदार झटका लगा और वो वहीं गिर पड़े। लोगों ने तुरंत बिजली कटवाई और उन्हें अस्पताल ले गए। लेकिन जोधपुर ले जाते समय रास्ते में ही भारत की मौत हो गई। इस घटना से पूरे इलाके में शोक की लहर है। लोग प्रशासन और बिजली विभाग की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं।

RBSE Topper Bharat Runecha: 10वीं परीक्षा में 98.33% मार्क्स लाने वाले भरत रुणेचा की मौत, कैसे गई टॉपर की जान?

राजस्थान बोर्ड 10वीं परीक्षा में भरत ने लाए थे 98.33% अंक

भरत रुणेचा पढ़ाई में बेहद मेधावी थे। उनकी उपलब्धियां क्षेत्र के बच्चों के लिए मिसाल थीं। साल 2025 की 10वीं बोर्ड परीक्षा में भारत ने 98.33% अंक लाकर मरूधर स्कूल में टॉप किया था। भरत को स्कूल ने 10वीं में अच्छे नंबर लाने पर कार गिफ्ट की थी। कार की चाबी मंत्री अविनाश गहलोत ने सौंपी थी। इस साल उन्होंने 11वीं की परीक्षा दी थी। वे इस साल भी अपनी क्लास के सबसे प्रतिभावान छात्र थे। शांत स्वभाव और लगन के कारण स्कूल के सभी टीचर भरत को बहुत पसंद करते थे।

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टूट गया ऑटो चालक पिता का सपना

भरत के पिता पेशे से एक ऑटो चालक हैं। गरीबी के बावजूद उन्होंने बेटे की पढ़ाई में कोई कमी नहीं छोड़ी। परिवार को उम्मीद थी कि भरत अपनी मेहनत से घर के हालात बदलेगा। लेकिन एक हादसे ने पिता के सारे अरमान और बुढ़ापे का सहारा छीन लिया।

Bharat Runecha Death: कैसे हुआ हादसा?

मंगलवार, 7 अप्रैल की शाम जैतारण में तेज बारिश शुरू हुई। चश्मदीदों ने बताया कि बारिश की वजह से बिजली के पोल में तकनीकी फॉल्ट आ गया था। भरत किसी काम से घर से बाहर निकले थे। अनजाने में उनका हाथ बिजली के पोल से टच हो गया। स्थानीय लोगों ने फुर्ती दिखाकर बिजली बंद कराई, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी।

इस हादसे के बाद जैतारण के लोगों में भारी गुस्सा है। निवासियों का आरोप है कि मानसून से पहले पोल और लाइनों का मेंटेनेंस नहीं किया गया। लोगों का कहना है कि अगर विभाग समय रहते जांच कर लेता, तो एक उज्ज्वल भविष्य असमय खत्म नहीं होता। फिलहाल पूरा कस्बा इस होनहार बेटे की मौत पर गमगीन है।

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