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दावा-हुमायूं कबीर ने BJP से 1000 करोड़ की डील की: TMC का आरोप- मुस्लिमों को बेवकूफ बनाने के लिए ‘बी’ और ‘सी’ टीम बनाई


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9 मिनट पहले

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पश्चिम बंगाल के आम जनता उन्नयन पार्टी के चेयरमैन हुमायूं कबीर का वीडियो सामने आया है। इसमें उन्हें बीजेपी नेताओं के साथ ₹1000 करोड़ डील की बात करते सुना जा रहा है।

वीडियो में हुमायूं कबीर कह रहे है कि किसी भी कीमत पर ममता बनर्जी को सत्ता से हटाना चाहते हैं। हालांकि, इस भास्कर इस वीडियो की पुष्टि नहीं करता है।

TMC के कुणाल घोष ने कहा कि बीजेपी ने हुमायूं के जरिए मतुआ, हिंदुओं और मुसलमानों को बेवकूफ बनाने के लिए कुछ ‘B टीम’ और ‘C टीम’ बनाई है।

हुमायूं पार्टी विधानसभा की 294 सीटों में से 118 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी के साथ गठबंधन किया है। राज्य में 23 और 29 अप्रैल को दो फेज में चुनाव हैं। रिजल्ट 4 मई को आएंगे।

वीडियो में हुमायूं ने बताया कि उन्हें 200 करोड़ एडवांस मिले है।

वीडियो में हुमायूं ने बताया कि उन्हें 200 करोड़ एडवांस मिले है।

उन्होंने एमपी के सीएम मोहन यादव और असम सीएम हिमंता बिसब सरमा से बातचीत की बात भी कही।

उन्होंने एमपी के सीएम मोहन यादव और असम सीएम हिमंता बिसब सरमा से बातचीत की बात भी कही।

उन्होंने बीजेपी के साथ ₹1000 की डील की बात कही।

उन्होंने बीजेपी के साथ ₹1000 की डील की बात कही।

वीडियो में सुवेंद्र अधिकारी से बातचीत का दावा

वीडियो में वह (हुमायूं कबीर) दावा करते हैं कि उनकी बातचीत विपक्ष के नेता सुवेंद्र अधिकारी से हुई है। उन्हें दिल्ली ले जाकर केंद्रीय नेतृत्व से मिलाने की बात कही गई थी। इसके साथ ही, वह प्रधानमंत्री कार्यालय और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव से संपर्क का भी जिक्र करते हैं। साथ ही असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिसवा सरमा के साथ बातचीत का संकेत भी देते हैं।

वीडियो में हुमायूं कबीर बीजेपी के साथ 1000 करोड़ रुपए की डील का जिक्र करते दिखाई दे रहे हैं। साथ ही कुछ वरिष्ठ नेताओं के साथ बातचीत के दावे भी सामने आए हैं। वायरल वीडियो में यह भी दावा किया गया है कि अगर वह इस रणनीति में सफल होते हैं तो उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है।

टीएमसी का आरोप-ED चुप क्यों है, यह गंभीर मामला

तृणमूल कांग्रेस के नेता कुणाल घोष ने यह भी कहा कि वीडियो में कबीर ने 200 करोड़ रुपए एडवांस मिलने और पीएमओ का जिक्र किया है। घोष ने सवाल उठाया कि इस मामले में पीएमओ का कौन-सा अधिकारी शामिल है और इसकी जांच क्यों नहीं हो रही।

TMC ने इस पूरे मामले की जांच की मांग की है और कहा है कि यह पैसों और चुनावी प्रक्रिया से जुड़ा गंभीर मामला है। पार्टी ने यह भी सवाल उठाया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) इस मामले में अब तक चुप क्यों है।



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दिल्ली से पहाड़ों की दूरी होगी आधी! इन हिल स्टेशन्स को लाएगा करीब


Last Updated:

Delhi-Dehradun Expressway: जिस दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का लंबे समय से इंतज़ार था, उसके आखिरकार खुल जाने से दिल्ली से वीकेंड पर घूमने-फिरने के विकल्प अब काफ़ी बेहतर होने वाले हैं. जिस सफ़र में पहले छह घंटे से ज़्यादा का समय लगता था, वह अब घटकर सिर्फ़ 2.5 घंटे रह जाएगा. इससे उत्तराखंड के पहाड़ अब बिल्कुल अपने दरवाज़े पर ही महसूस होंगे.

देहरादून: इस एक्सप्रेसवे से देहरादून को सबसे ज़्यादा फ़ायदा हुआ है. अब यहां लंबी दूरी का सफ़र करना कोई मजबूरी नहीं रह गई है. सफ़र का समय घटकर लगभग ढाई घंटे रह गया है, जिससे अचानक वीकेंड पर घूमने का प्लान बनाना बेहद आसान हो गया है. हरे-भरे रास्ते, प्यारे कैफ़े, बेकरी और शांत माहौल शहरी जीवन और पहाड़ों की शांति का एक मनमोहक मेल ये सब यहां मौजूद हैं. इसके अलावा, यह आस-पास के इलाक़े में मौजूद खूबसूरत नज़ारों वाली जगहों को घूमने के लिए एक बेहतरीन बेस का काम करता है.

Delhi-Dehradun Expressway To Bring THESE Hill Stations Closer Than Ever

मसूरी: पहले, भारी ट्रैफ़िक जाम की वजह से मसूरी का सफ़र एक थकाने वाला अनुभव होता था. अब? आप दिल्ली से मसूरी सिर्फ़ चार घंटे में पहुंच सकते हैं. मॉल रोड पर इत्मीनान से टहलने से लेकर लाल टिब्बा जैसे धुंध भरे नज़ारों तक, मसूरी एक बार फिर अचानक घूमने जाने वालों के लिए सबकी पसंदीदा जगह बनने को तैयार है.

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धनोल्टी: मसूरी से थोड़ी ही दूरी पर बसा धनोल्टी, चीड़ के जंगलों, इको-पार्कों और ठहरने के शांत विकल्पों की सुविधा देता है. देहरादून से आसानी से पहुंचा जा सकने वाला यह शांत विकल्प, वीकेंड पर आराम करने के लिए एक बेहतरीन जगह है उन लोगों के लिए एकदम सही जो रोज़मर्रा की ज़िंदगी की भाग-दौड़ से राहत पाना चाहते हैं.

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कनाताल: अगर आपको मसूरी थोड़ा ज़्यादा ही आम लगता है, तो कनाताल आपके लिए एकदम सही जगह है. यहां आपको सेब के बाग़, कैंपिंग साइट और पहाड़ों के शांत नज़ारे देखने को मिलेंगे. बेहतर सड़क इंफ़्रास्ट्रक्चर की वजह से इस छिपे हुए रत्न तक पहुंचना आसान हो गया है, इसलिए आपको ऐसा नहीं लगेगा कि आपने अपना पूरा वीकेंड सिर्फ़ वहां पहुंचने में ही बिता दिया.

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लैंडौर: मसूरी से ठीक ऊपर बसा लैंडौर, एक अलग ही दौर में पहुंचने जैसा अनुभव देता है एक ऐसा दौर जहां औपनिवेशिक शैली के कॉटेज, शांत गलियां और एक अनोखा साहित्यिक माहौल देखने को मिलता है। पहले, यहाँ तक का सफ़र ही अपने आप में एक बड़ी चुनौती जैसा लगता था. लेकिन अब, यह वीकेंड पर घूमने के लिए एक शानदार प्लान जैसा लगता है.

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ऋषिकेश: भले ही तकनीकी रूप से यह कोई हिल स्टेशन न हो, लेकिन पहाड़ों की तलहटी में बसा ऋषिकेश, बेहतर कनेक्टिविटी का सीधा फ़ायदा उठाता है. अपने योग रिट्रीट, रिवर राफ़्टिंग और गंगा नदी के किनारे बने कैफ़े के साथ, आध्यात्मिकता और रोमांच से भरा यह शहर अब, छोटी और जल्दी होने वाली छुट्टियों के लिए पहले से कहीं ज़्यादा बेहतर है.



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UP Board Result: कॉपियों की जांच पूरी, फिर क्यों हो रही रिजल्ट में देरी? लेटेस्ट अपडेट खत्म कर देगा सस्पेंस


Career

oi-Sohit Kumar

UP Board 10th-12th Result 2026 Latest Update: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) के हाईस्कूल (10th) और इंटरमीडिएट (12th) के करीब 52 लाख छात्रों के लिए बड़ी खबर है। 10वीं और 12वीं की कॉपियों का मूल्यांकन कार्य सफलतापूर्वक संपन्न हो चुका है। अब छात्र बेसब्री से अपने नतीजों का इंतजार कर रहे हैं। रिजल्ट कब आएगा, इस पर हम आपको लगातार अपडेट दे रहे हैं, लेकिन इस बार नया क्या है? और मूल्यांकन खत्म होने के बाद अब आगे क्या होने वाला है, आइए जानते हैं।

दरअसल, मूल्यांकन का काम 4 अप्रैल को पूरा हो चुका है। अब बोर्ड रिजल्ट जारी करने से पहले इन महत्वपूर्ण चरणों पर काम कर रहा है। परीक्षकों द्वारा दिए गए अंकों को अब आधिकारिक वेबसाइट के सर्वर पर अपलोड किया जा रहा है।

टॉपर्स वेरिफिकेशन
बोर्ड की पारदर्शिता नीति के तहत, सबसे अधिक अंक पाने वाले छात्रों (Top Ten) की कॉपियां दोबारा चेक की जाती हैं। इसके बाद उन्हें इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि छात्र ने स्वयं ही परीक्षा लिखी है।

UP Board Result 2026

यूपी बोर्ड रिजल्ट की तारीख पर क्या है लेटेस्ट अपडेट?
मीडिया रिपोर्ट्स और बोर्ड की तैयारी को देखते हुए माना जा रहा है कि 20 अप्रैल 2026 के बाद रिजल्ट की तारीख का आधिकारिक ऐलान कभी भी हो सकता है।

पिछले सालों के ट्रेंड
2024 में: रिजल्ट 20 अप्रैल को आया था।
2025 में: परीक्षाएं 12 मार्च को खत्म हुईं और रिजल्ट 25 अप्रैल को घोषित हुआ।

एक या दो विषय में फेल छात्र कैसे हो सकेंगे पास?

यदि कोई छात्र दो विषयों तक फेल होता है, तो उसे कंपार्टमेंट परीक्षा देकर साल बचाने का मौका मिलेगा। अगर कोई छात्र तीन या उससे अधिक विषयों में न्यूनतम अंक नहीं ला पाता, तो उसे असफल (Fail) घोषित कर दिया जाएगा।

रिजल्ट जारी होने पर किस वेबसाइट्स पर चेक करें?

जैसे ही बोर्ड रिजल्ट का लिंक एक्टिव होगा। आप upmsp.edu.in वेबसाइट्स पर जाकर अपना परिणाम देख सकते हैं।

UP बोर्ड ने दी फर्जी कॉल से बचने की सलाह

बोर्ड रिजल्ट की तारीख नजदीक आते ही UPMSP ने छात्रों और अभिभावकों को ‘मार्क्स बढ़ाने’ वाले फर्जी कॉल से बचने की सलाह दी है। सचिव ने कहा कि कुछ असामाजिक तत्व खुद को बोर्ड कर्मचारी बताकर पैसों की मांग कर रहे हैं। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि डेटा पूरी तरह सुरक्षित है और ऐसे ठगों के खिलाफ 1930 साइबर हेल्पलाइन या पुलिस की मदद से सख्त कार्रवाई की जाएगी।

How to Check UP Board Result 2026: यूपी बोर्ड रिजल्ट कैसे चेक करें

  • सबसे पहले upmsp.edu.in पर लॉग-इन करें।
  • होमपेज पर ‘Result 2026’ के लिंक को चुनें।
  • अपनी कक्षा (10वीं या 12वीं) का चुनाव करें।
  • अपना Roll Number और स्क्रीन पर दिख रहा Captcha Code भरें।
  • ‘View Result’ पर क्लिक करते ही आपकी मार्कशीट सामने होगी।

इस साल कितने छात्रों ने दी परीक्षा?

  • कुल रजिस्टर्ड छात्र: 52,30,184
  • हाईस्कूल (10वीं): 27,50,843 छात्र
  • इंटरमीडिएट (12वीं): 24,79,341 छात्र

नोट- रिजल्ट की संभावित डेट मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। रिजल्ट की सटीक तारीख और समय की घोषणा यूपी बोर्ड (UPMSP) द्वारा परिणाम जारी होने से एक दिन पहले की जाएगी। किसी भी अफवाह से बचने के लिए समय-समय पर आधिकारिक हैंडल चेक करते रहें।



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हैलो… आप गणित, हिंदी में फेल हैं! UP बोर्ड रिजल्ट से पहले आ रहे ऐसे कॉल, बच्चे हो जाएं सावधान


Last Updated:

Amethi News: यूपी बोर्ड परीक्षा संपन्न हो गई है और अब परिणाम को लेकर बच्चे बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. लेकिन इसी बीच साइबर फ्रॉड भी एक्टिव हो गए हैं और बच्चों को निशाना बना रहे हैं. आइए जानते हैं कि ये ठग बच्चों को कैसे ठगी का शिकार बना रहे हैं.

अमेठी: माध्यमिक शिक्षा परिषद की तरफ से संचालित होने वाले यूपी बोर्ड की परीक्षा तो पूरी हो गई और अब बारी है परीक्षा परिणाम की, लेकिन इसी परीक्षा परिणाम को लेकर साइबर फ्रॉड भी अलर्ट हो गए हैं और विद्यार्थियों को अपना निशाना बना रहे हैं. अमेठी जिले में कई विद्यार्थियों के पास कॉल आई और अलग-अलग नंबर से उनसे पैसों की डिमांड हुई, जिसके बाद अब विभाग भी इन साइबर फ्रॉड पर अंकुश लगाने की तैयारी में है. इसके बाद विद्यार्थियों को मुस्तैद किया जा रहा है कि वह किसी भी बहकावे में ना आएं और उनका परीक्षा परिणाम पूरी तरीके से पारदर्शी हो.

दरअसल हम बात कर रहे हैं अमेठी जिले की, जहां पर के शाहगंढ ब्लॉक के किटियावा में स्थित एक निजी इंटर कॉलेज के विद्यार्थियों के पास कई नंबर से तरह-तरह के कॉल आ रहे हैं, जहां उन्हें बताया जा रहा है कि वह हिंदी, अंग्रेजी, गणित या फिर अन्य किसी विषय में फेल हैं और उन्हें यदि पास होना है, तो इस नंबर पर पैसे भेज दें अन्यथा वह फेल हो जाएंगे.

प्रबंधन समिति ने दिए निर्देश
इसके बाद विद्यार्थियों ने इसके शिकायत गोपनीय तरीके से अपने विद्यालय प्रबंध समिति से की, जिसके बाद प्रबंधन समिति ने भी पूरे मामले की जानकारी विभाग को दी है. इसके बाद अब विद्यार्थियों से अपील की जा रही है कि किसी प्रकार की कोई भी धनराशि किसी नंबर पर भी ना भेजें. यदि ऐसी कोई कॉल आती है, तो तुरंत पुलिस और तत्काल विभाग या फिर जिम्मेदार स्कूल के प्रबंधक से संपर्क करें और अपनी शिकायत दर्ज कराएं.

परीक्षा प्रणाली से लेकर परिणाम तक पारदर्शी
पूरी समस्या को लेकर जिला विद्यालय निरीक्षक राजेश कुमार द्विवेदी ने परीक्षार्थी से अपील की है कि वह किसी प्रकार की कोई धनराशि किसी नंबर पर ना भेजें. यदि किसी भी नंबर से उनके पास फोन आता है या संदेश आता है या फिर अन्य किसी माध्यम से उनसे कोई भी पैसे की डिमांड की जाती है, तो परीक्षा ही नहीं, बल्कि परिणाम सहित अन्य कार्यों को लेकर भी किसी प्रकार के कोई पैसे ना दें. उन्होंने कहा कि परीक्षा पूरी सुरक्षा के साथ संपन्न हुई और पूरी व्यवस्था और परीक्षा परिणाम पारदर्शी और सुरक्षा पूर्ण तरीके से की जा रही है.

उन्होंने कहा कि किसी प्रकार की कोई असुविधा परीक्षार्थियों को नहीं होगी और उनका परिणाम निर्धारित समय पर आएगा. उनके मेहनत और कार्य कुशलता के आधार पर उन्हें नंबर दिए जाएंगे. उन्होंने कहा कि इसके लिए सभी प्रधानाचार्य को भी निर्देश दिए गए हैं कि अपनी-अपनी तरफ से जानकारी ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचा दें, जिससें किसी प्रकार की कोई अप्रिय घटना और साइबर फ्रॉड विद्यार्थियों के साथ ना हो.

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आर्यन सेठ

आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.



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‘आंखों के सामने जीजा के सिर के चीथड़े उड़े’: माफिया ने फॉरेस्ट गार्ड को ट्रैक्टर से कुचला, सहकर्मी बोले-सरकार ने हथियार छीने, डंडे थमाकर निहत्था किया – Morena News


वन रक्षक हरकेश गुर्जर की हत्या करने वाला ट्रैक्टर ड्राइवर विनोद कोरी अभी भी फरार है।

मुरैना के अंबाह गेम रेंज में रेत से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली को रोकने की कोशिश कर रहे वन रक्षक हरकेश गुर्जर (33) की बुधवार सुबह कुचलकर हत्या कर दी गई। चंबल अभयारण्य में अवैध रेत खनन रोकने गई वन विभाग की टीम पर हुए इस हमले पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान

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मृतक के साले गौरव गुर्जर ने बताया कि मेरी आंखों के सामने जीजा के सिर के चीथड़े उड़ गए। उन्होंने तड़प-तड़पकर दम तोड़ा। मैं कुछ नहीं कर सका। मेरी बहन मेरी आंखों के सामने विधवा हो गई। छोटे भांजे-भांजी के सिर से पिता का साया उठ गया।

वहीं हरकेश गुर्जर के सहकर्मी और वारदात के प्रत्यक्षदर्शी संदीप गुर्जर ने बताया कि हम रोज की तरह पेट्रोलिंग पर थे। रानपुर तिराहे से ट्रैक्टर आता दिखा तो रेंज ऑफिसर ने उसे रुकवाने को कहा। हरकेश टीम में सबसे फुर्तीला था।

वह तेजी से गाड़ी से उतरा और डंडा दिखाते हुए ट्रैक्टर को रोकना चाहा। हम सब गाड़ी से उतर पाते, इसके पहले ही ट्रैक्टर ड्राइवर विनोद कोरी ने हरकेश को टक्कर मार दी। हरकेश के सड़क पर गिरते ही ‘ये ले’ कहते हुए सिर से पहिया निकाल दिया।

वारदात को रेंज ऑफिसर वीर कुमार तिर्की, वन रक्षक शत्रुघ्न सिंह, अवधेश कुशवाह, विनोद माहौर और हरकेश के साले गौरव के सामने अंजाम दिया गया। आंखों के सामने अपने दोस्त, सहकर्मी को तड़पकर दम तोड़ते देखकर सब दहशत में आ गए।

आरोपी विनोद कोरी की तस्वीरें पेट्रोल पंप के सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई हैं। यहां रेत खाली करने के बाद वह भाग निकला।

आरोपी ट्रैक्टर ड्राइवर अभी भी पुलिस की पकड़ से दूर

वन रक्षक की हत्या करने के बाद आरोपी विनोद कोरी वारदात स्थल से एक किमी दूर शिवबैकुंठ पेट्रोल पंप पहुंचा। यहां कपड़े बदले और कर्मचारियों से कहा- पुलिस पीछे लगी है। इसके बाद ट्रॉली से रेत खाली कर 4 किमी दूर दिमनी थाने के सामने से निकल गया। फिर माता बसैया इलाके में ट्रैक्टर छोड़कर फरार हो गया।

डीएसपी विजय भदौरिया ने बताया कि रात में भी कई ठिकानों पर दबिश दी गई, पर आरोपी गिरफ्त में नहीं आया है। वन रक्षक हरकेश गुर्जर को जिस ट्रैक्टर से कुचला गया, उसके मालिकों में दो लोगों के नाम सामने आए हैं। इनमें से एक का नाम पवन तोमर है, जो बीजेपी का दिमनी मंडल उपाध्यक्ष हैं। दूसरे का नाम सोनू चौहान है, जो बीजेपी युवा मोर्चा में मंडल का मंत्री है।

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सहकर्मी बोला- सरकार ने डंडा देकर मौत के सामने भेज दिया

संदीप ने कहा- सरकार ने हमारे हथियार भी छीन लिए हैं। हमको डंडा देकर मौत के सामने भेज दिया है। सिर्फ डंडे से हत्यारे माफिया का सामना क्या कोई कर सकता है? कार्रवाई करो तो मरो, नहीं करो तो सरकार का ऊपर से डंडा पड़ता है।

कल अगर हथियार होता तो मजाल थी कि वह हरकेश पर ट्रैक्टर चढ़ा जाता। वहीं, उसे मार गिराते। अपनी सुरक्षा करने का तो सभी को अधिकार है। हम 5 साल से निहत्थे हैं। डंडा लेकर ड्यूटी कर रहे हैं। हमारी रेंज में 18 घाट हैं, जो दिमनी से भिंड तक हैं। हमारी 12 बोर की 5 राइफल नगरा थाने में जमा हैं।

साले ने कहा- मेरी आंखों के सामने जीजा ने दम तोड़ा

हरकेश के साले गौरव गुर्जर इस गश्त में उनके साथ थे। गौरव ने बताया कि वारदात के एक दिन पहले मंगलवार को जीजा हरकेश से मिलने अंबाह गेम रेंज कार्यालय पहुंचा था। रात में वहीं रुक गया। बुधवार सुबह जीजा ने बताया कि अवैध रेत पर कार्रवाई करने जाना है।

मैंने कहा कि मैं भी मुरैना निकल जाऊंगा। मैं अपनी गाड़ी से जांच दल के पीछे ही चल रहा था। रानपुर तिराहे के पास वीरपुर कुठियाना तरफ से ट्रैक्टर-ट्रॉली आती दिखाई दी। रोकने के निर्देश मिले तो जीजा हरकेश गाड़ी से उतरे और ड्र्र्राइवर को ट्रैक्टर रोकने का इशारा किया।

वह नहीं रुका तो उन्होंने अपने पास का डंडा ड्राइवर को दिखाया। ड्राइवर ने गाड़ी पहले धीमी की, फिर तेजी से जीजा को टक्कर मार दी।

जनकपुर गांव में परिजन और रिश्तेदारों ने वन रक्षक हरकेश गुर्जर का अंतिम संस्कार किया।

जनकपुर गांव में परिजन और रिश्तेदारों ने वन रक्षक हरकेश गुर्जर का अंतिम संस्कार किया।

ऐसी घटनाओं पर हलफनामा दाखिल करने के निर्देश

अवैध रेत परिवहन को रोकने की कोशिश के दौरान वन रक्षक की हत्या के इस मामले का सुप्रीम कोर्ट में तात्कालिक उल्लेख (अर्जेंट मेंशनिंग) किया गया। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने स्वत: संज्ञान लिया। यह मामला उस सुओ मोटू याचिका से जुड़ा है, जो क्षेत्र में अवैध रेत खनन पर लगी है, जिसमें एमिकस क्यूरी (न्यायालय मित्र) द्वारा आवेदन दायर किया गया था।

सुनवाई के दौरान गुरुवार को न्यायमूर्ति मेहता ने कहा कि इस क्षेत्र में कुछ “अत्यंत गंभीर” घटनाएं सामने आई हैं। पीठ ने मामले का उल्लेख करने वाली अधिवक्ता एओआर रूपाली सैमुअल (जो एमिकस में से एक हैं), से कहा कि वे अन्य घटनाओं का विवरण रिकॉर्ड पर लाने के लिए हलफनामा दाखिल करें और मध्य प्रदेश की ओर से पेश होने वाले वकील को अग्रिम सूचना दें।

कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़, एसपी समीर सौरभ और डीएफओ हरिश्चंद्र बघेल हरकेश के गांव पहुंचे। यहां उनके पिता कलेक्टर से लिपटकर रो पड़े।

कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़, एसपी समीर सौरभ और डीएफओ हरिश्चंद्र बघेल हरकेश के गांव पहुंचे। यहां उनके पिता कलेक्टर से लिपटकर रो पड़े।

2016 में लगी थी नौकरी, 2025 में मुरैना ट्रांसफर हुआ

हरकेश के दोस्त प्रताप गुर्जर ने कहा- वह अच्छा एथलीट था। लोकल से लेकर नेशनल तक 800 और 1500 मीटर दौड़ में बढ़िया प्रदर्शन किया था। नेशनल चैंपियन रहा है। कई अवॉर्ड भी जीते। साल 2016 में वन रक्षक के पद पर सिलेक्ट हुआ था।

26 जून 2016 को पन्ना टाइगर रिजर्व में उसे ज्वाइनिंग मिली थी। 7 अगस्त 2025 को उसका ट्रांसफर मुरैना वन विभाग के गेम रेंज सबलगढ़ के घाट वरोठा में हो गया था। बाद में इसमें संशोधन हुआ और उसे गेम रेंज अंबाह के घाट सांकरी भेज दिया गया।

हरकेश के परिवार में पिता रामनिवास गुर्जर, पत्नी लवली, 4 साल की बेटी तन्वी और 2 साल का बेटा तन्मय हैं। बड़ा भाई ऋषिकेश गुर्जर दतिया की इंदरगढ़ तहसील में रीडर है।

हरकेश गुर्जर की कुछ महीने पहले ही मुरैना के अंबाह में पोस्टिंग हुई थी।

हरकेश गुर्जर की कुछ महीने पहले ही मुरैना के अंबाह में पोस्टिंग हुई थी।

2021 में रायफलें जमा कराईं, तब से निहत्थे लड़ रहे

अंबाह गेम रेंज में अवैध रेत खनन रोकने का जिम्मा करीब 12 वनकर्मियों पर है। 2021 में वनकर्मी के फायर से एक ग्रामीण की मौत होने के बाद सभी 12 बोर रायफलें थाने में जमा करा दी गई थीं।

तब से वे डंडा लेकर रेत माफिया से भिड़ रहे हैं। पिछले साल मार्च में माफिया ने धमकी दी थी कि डंडा लगाया तो गोली मार देंगे। इसका वीडियो भी वायरल हुआ था।

इसी साल 4 महीने में रेत माफिया ने किए 3 हमले

  • फरवरी 2026: चिन्नोनी थाना इलाके में आरक्षक बिजेंद्र हर्षाना को टक्कर मारने की कोशिश की। खुद को बचाने दूसरी तरफ कूदे तो गड्ढे में पैर जाने से फ्रैक्चर हो गया।
  • फरवरी 2026: सबलगढ़ के गुलाब सिंह का पुरा गांव में रेत पर कार्यवाही कर ट्रैक्टर-ट्रॉली ला रही वन विभाग की टीम पर फायरिंग की गई। रेत माफिया पथराव कर जब्त ट्रॉली छुड़ा ले गए।
  • मार्च 2026: अवैध खनन पर कार्यवाही करने गई पुलिस टीम की गाड़ी को माफिया के लोगों ने ट्रैक्टर-ट्रॉली से टक्कर मार दी। आरक्षक सुदामा रजक गंभीर घायल हुए थे।

विभाग ने शहीद का दर्जा देने का प्रस्ताव बनाया

डीएफओ हरिश्चंद्र बघेल ने कहा- हरकेश गुर्जर हमारे परिवार का सदस्य था। एक बहादुर को हमने खोया है। उसे शहीद का दर्जा दिए जाने का प्रस्ताव शासन को भेज रहे हैं। पत्नी को नौकरी भी दी जाएगी।

वहीं, कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ ने कहा- वन रक्षक हरकेश के परिजन को ‎अनुकंपा नियुक्ति और ग्रेच्युटी का‎ भुगतान किया जाएगा। ‎सीएम कार्यालय को भी 10 लाख रुपए ‎की सहायता स्वीकृत करने का प्रस्ताव ‎भेजा है।

कलेक्टर जांगिड़ ने टास्क फोर्स की बैठक बुलाकर निर्देश दिए हैं कि वन, पुलिस, राजस्व विभाग के लोग अकेले कार्रवाई करने न जाएं। किसी भी बाजार, गली में रेत की मंडी न लग पाए। रेत परिवहन करने वाले सभी ट्रैक्टरों के रजिस्ट्रेशन चेक किए जाएं। रेत कारोबार से जुड़े अपराधियों को चिह्नित कर जिलाबदर किया जाए।

मामले से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें…

BJP नेताओं के ट्रैक्टर ने वन रक्षक को कुचला, मौत

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मुरैना में रेत का अवैध परिवहन कर रहे ट्रैक्टर-ट्रॉली ड्राइवर ने वन रक्षक को कुचल दिया। उनकी मौके पर ही मौत हो गई। वारदात दिमनी थाना इलाके में रानपुर गांव चौराहे के पास बुधवार सुबह करीब 6 बजे की है। कलेक्टर जांगिड़ ने दैनिक भास्कर से फोन पर चर्चा में बताया कि पुलिस को आरोपी के संभावित ठिकानों पर दबिश देने के निर्देश दिए हैं। उसे जल्द पकड़ लिया जाएगा। पढ़ें पूरी खबर…



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क्या आप में है ‘खोपड़ियों की सुरंग’ में जाने का साहस? तो यहां आइए चिखे ने निकल जाएं फिर…


Last Updated:

पेरिस की रोमांटिक गलियों के नीचे एक ऐसी दुनिया बसी है जो किसी गॉथिक उपन्यास से निकली हुई लगती है. पेरिस कैटाकॉम्ब्स, जो दुनिया के सबसे बड़े भूमिगत कब्रिस्तानों में से एक है, महीनों के जीर्णोद्धार के बाद फिर से खुल गया है और अब जिज्ञासु यात्री यहां की रहस्यमयी कब्रों को देखने आ रहे हैं. अगर आप पेरिस घूमने का प्लान बना रहे हैं और एफिल टावर या कैफे जैसी आम जगहों से हटकर कुछ अलग अनुभव करना चाहते हैं, तो यह एक ऐसा रोमांचक अनुभव होगा जिसे आप कभी नहीं भूलेंगे.

पेरिस कैटाकॉम्ब्स की शुरुआत 18वीं सदी के आखिर में हुई थी, जब पेरिस एक गंभीर संकट का सामना कर रहा था. उसके कब्रिस्तान पूरी तरह भर चुके थे. शहर के बीचों-बीच मौजूद ये बहुत ज़्यादा भरे हुए कब्रिस्तान सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा बन गए थे. इस समस्या को हल करने के लिए, 1786 में अधिकारियों ने इंसानी अवशेषों को शहर के नीचे मौजूद पत्थर की उन खदानों में भेजना शुरू कर दिया जिन्हें छोड़ दिया गया था. जो काम एक व्यावहारिक समाधान के तौर पर शुरू हुआ था, वह धीरे-धीरे दुनिया की सबसे अनोखी जगहों में से एक बन गया.

Paris Catacombs reopens

आज, कैटाकॉम्ब्स में लगभग 60 लाख लोगों के अवशेष रखे हुए हैं, जो ज़मीन के बहुत नीचे गहराई में आराम कर रहे हैं। जो बात सचमुच हैरान करने वाली है, वह सिर्फ़ अवशेषों की भारी संख्या नहीं है, बल्कि जिस कलात्मक तरीके से उन्हें सजाकर रखा गया है, वह है. खोपड़ियों और लंबी हड्डियों को एक के ऊपर एक रखकर दीवारें और आकृतियां बनाई गई हैं ये ऐसी रचनाएं हैं जो एक ही समय में बेहतरीन कारीगरी का नमूना भी लगती हैं और इंसान की नश्वरता की कड़वी याद भी दिलाती हैं.

Would You Walk Through A Tunnel Of Skulls? Paris Catacombs Are Open Again

19वीं सदी की शुरुआत में, क्यूरेटरों ने अवशेषों को जटिल पैटर्न में सजाना शुरू किया; अक्सर उनके साथ कब्रों पर लिखे शिलालेख और दार्शनिक विचार भी लिखे होते थे. जैसे-जैसे आप इन भूलभुलैया जैसी सुरंगों में आगे बढ़ते हैं, आपको खोपड़ियों और हड्डियों से बनी कलात्मक आकृतियां दिखाई देती हैं, जो एक अलौकिक लगभग काव्यात्मक माहौल बनाती हैं.

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Paris Catacombs Are Open Again

पेरिस कैटाकॉम्ब्स एक बहुत ही नाज़ुक धरोहर है. ज़मीन के नीचे बनी इन सुरंगों में मौजूद ढांचे लगभग 90% हड्डियों से बने हैं, जिसकी वजह से समय के साथ उनके धीरे-धीरे खराब होने का खतरा बना रहता है। इसके अलावा, हर साल लगभग 6 लाख पर्यटक यहाँ आते हैं जिनकी वजह से कार्बन डाइऑक्साइड और दूसरी गैसें निकलती हैं इसलिए इस जगह के संरक्षण की ज़रूरत बहुत ज़्यादा है.

Would You Walk Through A Tunnel Of Skulls? Paris Catacombs Are Open Again

लगभग छह महीने तक बंद रहने के बाद, पेरिस कैटाकॉम्ब्स में बड़े पैमाने पर मरम्मत का काम पूरा होने के बाद इसे फिर से खोल दिया गया है. अवशेषों को बेहतर तरीके से सुरक्षित रखने के लिए आधुनिक वायु निगरानी प्रणालियां लगाई गई हैं, जिससे इस ऐतिहासिक जगह के लंबे समय तक संरक्षण में मदद मिलेगी. साथ ही, यहां की रोशनी की व्यवस्था को भी बेहतर बनाया गया है, जिससे अब वे हिस्से भी रोशन हो गए हैं जो पहले अंधेरे में डूबे रहते थे.

Would You Walk Through A Tunnel Of Skulls? Paris Catacombs Are Open Again

पेरिस कैटाकॉम्ब्स दुनिया के सबसे मशहूर “डार्क टूरिज़्म” डेस्टिनेशन्स में से एक हैं ये ऐसी जगहें हैं जो मौत और इतिहास के विषयों से गहराई से जुड़ी हुई हैं. ये उन विज़िटर्स को आकर्षित करते हैं जिनकी दिलचस्पी लंदन में ‘जैक द रिपर’ मर्डर टूर्स या चेर्नोबिल एक्सक्लूज़न ज़ोन टूर्स में होती है.

Would You Walk Through A Tunnel Of Skulls? Paris Catacombs Are Open Again

अगर आपको इतिहास और अनोखे अनुभवों का शौक़ है, या अगर आप पेरिस का एक अलग पहलू देखना चाहते हैं, तो कैटाकॉम्ब्स देखना आपके लिए बेहद ज़रूरी है. यह ज़मीन के नीचे की दुनिया एक अनोखा और असाधारण नज़ारा पेश करती है एक ऐसा नज़ारा जो रहस्यमयी, ऐतिहासिक और अजीब तरह से खूबसूरत है. ( All Image: Instagram/AFP Photo)



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ट्रैफिक, भीड़ और महंगे होटल से तंग? समुद्र किनारे मिल सकता है असली सुकून


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Best Beaches: हर साल गर्मी आते ही एक ही सवाल घूमता है-कहां जाएं? ज्यादातर परिवार बिना ज्यादा सोचे-समझे पहाड़ों की ओर निकल पड़ते हैं, और फिर वही कहानी शुरू होती है-लंबे ट्रैफिक जाम, महंगे होटल, भीड़ से भरे बाजार. छुट्टी कम और थकान ज्यादा. लेकिन 2026 की गर्मियों में ट्रेंड थोड़ा बदलता दिख रहा है. अब समझदार ट्रैवलर पहाड़ों से हटकर समुद्र की तरफ जा रहे हैं-और वजह भी साफ है. सही प्लानिंग के साथ बीच न सिर्फ सुकून देते हैं, बल्कि बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी के लिए ज्यादा आरामदायक साबित होते हैं. भारत की लंबी तटरेखा में ऐसे कई बीच हैं जो गर्मी में भी ठंडक, स्पेस और शांति देते हैं. फर्क बस इतना है कि आपको भीड़ से हटकर सही जगह और सही टाइम चुनना होगा. इस बार अगर आप छुट्टी को सच में एंजॉय करना चाहते हैं, तो समुद्र को एक मौका जरूर दें.

क्यों बदल रहा है ट्रैवल ट्रेंड? पहाड़ अब पहले जैसे नहीं रहे. सोशल मीडिया के जमाने में हर “हिडन प्लेस” कुछ ही समय में भीड़भाड़ वाला स्पॉट बन जाता है. होटल्स के दाम आसमान छूने लगते हैं और सुकून कहीं खो जाता है. इसके उलट, समुद्र तटों पर अभी भी ऐसी जगहें हैं जहां आप बिना भीड़ के समय बिता सकते हैं. खासकर सुबह और शाम के समय, यहां की हवा और माहौल एकदम अलग ही अनुभव देता है.

family friendly beaches India

1. अंडमान: फैमिली के लिए परफेक्ट शांति राधानगर बीच का अलग ही सुकून अंडमान का राधानगर बीच आज भी अपनी साफ रेत और शांत माहौल के लिए जाना जाता है. यहां की खास बात है इसका लंबा और खुला किनारा-भीड़ होने पर भी जगह की कमी महसूस नहीं होती. पानी धीरे-धीरे गहराता है, इसलिए बच्चों के साथ आने वाले परिवारों के लिए यह काफी सुरक्षित है. ऊपर से पेड़ों की घनी छांव दिन की गर्मी को काफी हद तक कम कर देती है.

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2. दक्षिण गोवा: साइलेंट लग्ज़री का अनुभव पालोलेम बीच की धीमी रफ्तार अगर आप गोवा का नाम सुनकर भीड़ और पार्टी सोचते हैं, तो थोड़ा नजरिया बदलना होगा. दक्षिण गोवा गर्मियों में एकदम अलग रूप में सामने आता है. पालोलेम बीच अपनी शांत खाड़ी और साफ पानी के लिए जाना जाता है. यहां का माहौल इतना रिलैक्स होता है कि आप घंटों बैठकर किताब पढ़ सकते हैं या बच्चों के साथ पानी में खेल सकते हैं. यह वो जगह है जहां “कम में ज्यादा” का असली मतलब समझ आता है.

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3. गुजरात का शिवराजपुर: साफ-सुथरा और व्यवस्थित बीच ब्लू फ्लैग बीच का भरोसा अगर आप साफ-सफाई और बेहतर सुविधाओं को प्राथमिकता देते हैं, तो शिवराजपुर बीच एक बेहतरीन विकल्प है.यह ब्लू फ्लैग सर्टिफाइड बीच है, जिसका मतलब है-साफ पानी, अच्छे वॉशरूम, सेफ स्विमिंग ज़ोन और कचरा प्रबंधन जैसी सुविधाएं.परिवार के साथ यात्रा करते समय ये छोटी-छोटी चीजें ही ट्रिप को आसान और तनाव-मुक्त बनाती हैं.

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3. कर्नाटक का करवार: शांत और थोड़ा अलग अनुभव समुद्र के साथ संस्कृति का टच करवार उन लोगों के लिए है जो सिर्फ घूमना नहीं, महसूस करना चाहते हैं. यहां का बीच शांत है, और आसपास का माहौल एक अलग ही कहानी सुनाता है. यहां एक वॉरशिप म्यूजियम भी है, जो बच्चों के लिए काफी दिलचस्प हो सकता है. बिना मोबाइल या स्क्रीन के भी बच्चे यहां एंगेज रहते हैं-जो आज के समय में बड़ी बात है.

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“6 से 10” वाला स्मार्ट ट्रैवल फॉर्मूला गर्मी से बचने का असली तरीका बीच ट्रिप का मजा तभी है जब आप सही टाइमिंग फॉलो करें. सुबह 6 बजे से 10 बजे तक का समय सबसे बढ़िया होता है-हवा ठंडी, भीड़ कम और रोशनी शानदार. दोपहर 11 से 4 के बीच आराम करें-होटल में, कैफे में या किसी इनडोर एक्टिविटी में. शाम 5 बजे के बाद फिर से बीच पर लौटें-यही वक्त सबसे खूबसूरत होता है. यह छोटा सा बदलाव आपकी पूरी ट्रिप का अनुभव बदल सकता है.

family friendly beaches India

समुद्र क्यों है बेहतर ऑप्शन? समुद्र की खासियत है उसकी स्थिरता. यहां का माहौल ज्यादा प्रेडिक्टेबल होता है-हवा चलती रहती है, स्पेस ज्यादा होता है और आपको भागदौड़ कम करनी पड़ती है. जहां पहाड़ों में आप ट्रैफिक और भीड़ में फंस जाते हैं, वहीं समुद्र आपको खुलकर सांस लेने का मौका देता है.



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IOC 2026: IOC 2026: सुषमा स्वराज ने बनाया, अब जयशंकर चला रहे, क्या है इंडियन ओसियन कॉन्फ्रेंस?- Explained


International

oi-Siddharth Purohit

IOC 2026: हिन्दमहासागर के किस क्षेत्र और किस खनिज पर किसका कब से कब तक अधिकारी है और वह वहां क्या-क्या कर सकता है ये हमेशा से एक बड़ा मुद्दा रहा है। जब इसको लेकर एशियाई देशों में कन्फ्यूज होने लगा तो फिर इसके समाधान, व्यापार, हिन्द महासागर में कार्गो शिप और फेसिलिटी की सुरक्षा को लेकर साल 2016 में तत्कालीन विदेश मंत्री और बीजेपी की दिवंगत वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज ने एक संगठन की स्थापना करवाई।

जिसे नाम दिया गया इंडियन ओशियन कॉन्फ्रेंस (Indian Ocean Conference) और तब से लेकर अब तक हर साल IOC की एक सालाना मीटिंग होती है। आइए जानते हैं क्या है IOC, क्या करती है और भारत के लिए क्यों जरूरी है?

IOC 2026

क्या-क्या करती है IOC?

IOC का मेन फोकस चार प्वॉइंट पर टिका है:

• समुद्री सुरक्षा (Maritime Security)
• व्यापार और सप्लाई चेन (Trade and Supply Chain)
• क्षेत्रीय सहयोग (Regional Cooperation)
• ब्लू इकोनॉमी (Blue Economy)

IOC 2026

इसका मूल विजन भारत के “SAGAR” (Security and Growth for All in the Region) सिद्धांत पर आधारित है। ताकि हिंद महासागर क्षेत्र के देश साथ मिलकर काम करें और समुद्री सुरक्षा को भी मजबूत दें। जिससे इस इलाके में व्यापार आसान बने और क्षेत्र में स्थिरता बनी रहे।

कैसे काम करती है ये कॉन्फ्रेंस ?

इस कॉन्फ्रेंस का आयोजन India Foundation की करती है जिसे हर साल किसी अलग देश के साथ साझेदारी में किया जाता है (जैसे ओमान, वियतनाम, मॉरीशस आदि)। इसमें हिस्सा लेने के लिए 40-50 देशों के प्रतिनिधि हर साल पहुंचते हैं। जिनमें विदेश मंत्री, रक्षा विशेषज्ञ, थिंक टैंक, अंतरराष्ट्रीय संगठन स्तर के लोग शामिल होते हैं। इसके अलावा हर साल 300-400 से ज्यादा डेलीगेट्स भी इसमें हिस्सा लेते हैं

कैसे होती है बात?

कॉन्फ्रेंस में अलग-अलग सेशन होते हैं:

• Plenary Sessions (मुख्य सत्र)
• Thematic Sessions (विशेष विषयों पर चर्चा)
• Panel Discussions

इसमें बड़े मुद्दों पर खुलकर बहस होती है

कैसे होता है एजेंडा और आउटपुट तय?

दरअसल कॉन्फ्रेंस में कोई बड़ा फैसला नहीं होता, क्योंकि यह UN जैसी decision-making body नहीं है। बल्कि, यहां से पॉलिसी, आईडिया, पार्टनर्शिप और रणनीतिक समझ को बढ़ाने और उस पर विचार रखने के लिए लंबी बातचीत होती है।

इसमें भारत का क्या रोल?

भारत IOC की शुरुआत और इसे लीड करने वाला देश है और इसको सही से चलाने का जिम्मा भी भारत के ही पास है। इससे भारत को एशियाई क्षेत्र में एक पावर के रूप में गढ़ा जाता है जो सभी संभव पक्षों से बात करता है और दूसरों की भी बात करवाता है।

कैसे बना बड़ा ग्लोबल प्लेटफॉर्म?

पिछले 8 सालों में यह कॉन्फ्रेंस तेजी से आगे बढ़ी है। अब यह सिर्फ एक मीटिंग नहीं बल्कि एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय मंच बन चुका है, जहां देशों के मंत्री, पॉलिसी एक्सपर्ट, डिफेंस और एकेडमिक एक्सपर्ट जैसे दिग्गज शामिल होते हैं। यह मंच समुद्री शासन (maritime governance) और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे अहम मुद्दों पर गहरी चर्चा का मौका देता है।

8 साल में कितनी बढ़ी भागीदारी?

इस कॉन्फ्रेंस की बढ़ती लोकप्रियता इसके आंकड़ों से साफ दिखती है। अब तक इसमें 55 देशों के 100 से ज्यादा मंत्री शामिल हो चुके हैं। हर साल के संस्करण में 40 से ज्यादा देशों के 400 से अधिक प्रतिनिधि भाग लेते हैं। यह बताता है कि IOC अब एक ग्लोबल लेवल का प्रभावशाली प्लेटफॉर्म बन चुका है। आठवां इंडियन ओशियन कॉन्फ्रेंस (IOC 2025) फरवरी 2025 में ओमान की राजधानी मस्कट में आयोजित किया गया। इसकी मेजबानी India Foundation ने ओमान के विदेश मंत्रालय और सिंगापुर के S. Rajaratnam School of International Studies के साथ मिलकर की। पिछले साल भी इसमें 45 देशों के 400 से ज्यादा प्रतिनिधि पहुंचे थे, जो इस कॉन्फ्रेंस की हैसियत बताता है।

इस साल किस बारे में चर्चा और कौन-कौन होगा मेहमान?

इंडिया फाउंडेशन के मुताबिक इस साल की समिट का विषय Collective Management For Indian Ocean Governance है। इस कॉन्फ्रेंस में कई बड़े अंतरराष्ट्रीय नेता शामिल हुए। इसमें भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के अलावा बांग्लादेश, भूटान, कंबोडिया और मिस्र के मंत्री भी मौजूद थे। साथ ही मॉरीशस, ओमान, सऊदी अरब, सेशेल्स, सिंगापुर, श्रीलंका, तंजानिया, थाईलैंड और यूके के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया। इसके अलावा BIMSTEC जैसे क्षेत्रीय संगठनों की भी भागीदारी रही।

आयोजन समिति में कौन-कौन है?

इस कॉन्फ्रेंस की आयोजन समिति काफी मजबूत और अनुभवी है। प्रेसीडियम में एस. जयशंकर, मॉरीशस के धनंजय रामफूल, सिंगापुर के विवियन बालकृष्णन और ओमान के सैयद बदर अल बुसैदी शामिल हैं। इसके अलावा श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे, भारत के सुरेश प्रभु, राम माधव और एम.जे. अकबर जैसे अनुभवी लोग भी समिति का हिस्सा हैं।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।



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मोदी की हत्या की साजिश, बिहार से 3 गिरफ्तार: अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA से किया था संपर्क , हमले के लिए पैसों की डिमांड की थी – Buxar News




प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से जुड़ी संवेदनशील जानकारी लीक करने और इसके बदले विदेशों से पैसे मांगने के मामले में बक्सर पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। डुमरांव अनुमंडल के सिमरी थाना क्षेत्र स्थित आशा पड़री गांव में बुधवार देर रात छापेमारी कर एक युवक समेत 3 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने विदेश में बैठे संदिग्ध लोगों से संपर्क कर न केवल गोपनीय जानकारी साझा करने की बात की, बल्कि 22 दिनों के अंदर प्रधानमंत्री पर हमले और सुरक्षा में सेंध लगाने की साजिश भी रची थी। SP के निर्देश पर बनी टीम, देर रात छापेमारी मामले की सूचना मिलते ही बक्सर SP शुभम आर्य के निर्देश पर विशेष टीम का गठन किया गया। टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आशा पड़री गांव में छापेमारी की और तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। SP ने बताया कि अमन तिवारीने यूएएस की एजेंसी CIA को ईमेल कर संपर्क किया था। ईमेल के जरिए पैसे की डिमांड की। इसके बदले हम प्रधानमंत्री पर जानलेवा हमला कर सकते है। इस काम को पूरा करने के लिए 22 दिनों का वक्त मांगा था। विदेशी संपर्क और पैसों की डिमांड पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने अमेरिका (USA) की एजेंसी CIA से जुड़े लोगों से संपर्क साधा था। आरोप है कि उन्होंने प्रधानमंत्री से जुड़े मामलों में सुरक्षा में सेंध लगाने और हमले की योजना के एवज में पैसे की मांग की थी। हालांकि कितनी रकम मांगी गई थी, इस पर पुलिस ने कुछ भी स्पष्ट करने से इनकार किया है। SP शुभम आर्य ने कहा कि मामला अत्यंत गोपनीय है और जांच पूरी होने के बाद ही इसका पूरा खुलासा किया जाएगा। गुप्त स्थान पर पूछताछ, कई खुलासों की उम्मीद सूत्रों के मुताबिक, मुख्य आरोपी की पहचान अमन कुमार के रूप में हुई है। फिलहाल सभी आरोपियों को गुप्त स्थान पर रखकर गहन पूछताछ की जा रही है। पुलिस का मानना है कि पूछताछ के दौरान इस पूरे नेटवर्क और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन से जुड़े कई अहम खुलासे हो सकते हैं। पहले भी साइबर केस में हो चुकी है गिरफ्तारी प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, अमन कुमार का आपराधिक इतिहास भी रहा है। साल 2022 में कोलकाता एयरपोर्ट को हैक करने की धमकी देने के मामले में उसे गिरफ्तार किया गया था। उस समय कोलकाता और बक्सर पुलिस की संयुक्त टीम ने कार्रवाई की थी। इस बार मामला प्रधानमंत्री कार्यालय से जुड़ा होने के कारण इसकी गंभीरता कई गुना बढ़ गई है। लैपटॉप समेत कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के घर से लैपटॉप सहित कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए हैं। इन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि इन उपकरणों से डिजिटल सबूत मिलेंगे, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपी किस स्तर तक सक्रिय थे और किन-किन लोगों से जुड़े थे। पिता बोले- हमें कुछ नहीं पता अमन के पिता गणेश तिवारी ने बताया कि वे उस समय पूजा में गए हुए थे। घर लौटने पर उन्हें घटना की जानकारी मिली। उन्होंने कहा कि उन्हें अब तक यह नहीं पता कि उनका बेटा किस मामले में पकड़ा गया है और क्या आरोप हैं। कमरा सील, गांव में दहशत का माहौल घटना के बाद प्रशासन ने उस कमरे को सील कर दिया है, जहां अमन कुमार रहता था। बताया जा रहा है कि वह गांव में रहकर साइबर कैफे चलाता था। गिरफ्तारी के बाद पूरे गांव में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि अमन सामान्य जीवन जीता था, ऐसे में उस पर लगे इतने गंभीर आरोपों ने सभी को हैरान कर दिया है। बड़ा सवाल: गांव से PMO तक कैसे पहुंची साजिश? इस घटना ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे अहम सवाल यह है कि एक गांव में साइबर कैफे चलाने वाला युवक देश के सबसे संवेदनशील कार्यालय से जुड़ी साजिश में कैसे शामिल हो गया। फिलहाल बक्सर पुलिस हर एंगल से मामले की जांच कर रही है। आने वाले दिनों में इस हाई-प्रोफाइल केस में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना है।



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कब से शुरु होगी Char Dham Yatra 2026, कब खुलेंगे केदारनाथ-बद्रीनाथ कपाट? ऐसे करें ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन


Uttarakhand

oi-Puja Yadav

Char Dham Yatra 2026: देवभूमि उत्तराखंड एक बार फिर लाखों श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए तैयार है। हर साल गर्मियों की दस्तक के साथ ही हिमालय की गोद में स्थित पवित्र चार धामों की रौनक लौट आती है। हिंदुओं के लिए यह यात्रा केवल पर्यटन नहीं, बल्कि जीवन में एक बार मोक्ष प्राप्ति और भगवान के दर्शन का सबसे बड़ा सपना होती है।

साल 2026 की चार धाम यात्रा को लेकर प्रशासन और श्रद्धालुओं के बीच उत्साह चरम पर है। इस साल अगर आप भी केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री या यमुनोत्री जाने की योजना बना रहे हैं, तो सबसे पहले आपको यह जानकारी लेनी चाहिए जो इस पवित्र यात्रा के लिए सबसे अहम पड़ाव है। यहां जानें यात्रा का पूरा शेड्यूल और ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया।

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Char Dham Yatra 2026 Start Date: कब से शुरू हो रही है चारधाम यात्रा?

इस साल चार धाम यात्रा का शुभारंभ 19 अप्रैल 2026 को होगा। यह दिन बेहद खास है क्योंकि इस दिन अक्षय तृतीया का शुभ मुहूर्त है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार अक्षय तृतीया पर किया गया कोई भी शुभ कार्य अक्षय फल देता है, इसलिए इसी पावन दिन से यात्रा का श्रीगणेश किया जाएगा। चारों धामों के कपाट खुलने की तारीखें तय हो चुकी हैं, जो इस प्रकार हैं:

  • यमुनोत्री धाम: 19 अप्रैल 2026
  • गंगोत्री धाम: 19 अप्रैल 2026
  • केदारनाथ धाम: 22 अप्रैल 2026
  • बद्रीनाथ धाम: 23 अप्रैल 2026

How to Apply Online for Char Dham Yatra: कैसे करें चार धाम यात्रा के लिए ऑनलाइन आवेदन

सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने सभी तीर्थयात्रियों के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया है। बिना वैध यात्रा पास के दर्शन की अनुमति नहीं दी जाएगी। रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया बहुत सरल है:

आधिकारिक पोर्टल पर जाएं: सबसे पहले उत्तराखंड पर्यटन की वेबसाइट uttarakhandtourism.gov.in पर लॉगिन करें।

अकाउंट बनाएं: अपना नाम और मोबाइल नंबर दर्ज कर नया अकाउंट क्रिएट करें।

सत्यापन: आपके मोबाइल पर आए OTP के जरिए वेरिफिकेशन पूरा करें।

टूर मैनेजमेंट: लॉगिन करने के बाद ‘Create/Manage Tour’ विकल्प पर क्लिक करें।

योजना भरें: यात्रा की तारीख और जिन धामों के दर्शन करने हैं, उनका चुनाव करें।

दस्तावेज अपलोड: यात्रियों की व्यक्तिगत जानकारी भरें और अपनी फोटो अपलोड करें।

यात्रा पास: फॉर्म सबमिट करने के बाद आपको एक QR कोड वाला यात्रा पास मिलेगा। इसे डाउनलोड कर लें या इसका प्रिंट आउट निकाल कर अपने पास सुरक्षित रखें।

Char Dham Yatra जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश

पहाड़ों की दुर्गम चढ़ाई और अनिश्चित मौसम को देखते हुए प्रशासन ने कुछ सुझाव जारी किए हैं। यात्रा के दौरान हमेशा अपना आधार कार्ड और QR कोड वाला यात्रा पास अपने साथ रखें। केदारनाथ और यमुनोत्री जैसी कठिन चढ़ाई पर जाने से पहले अपना हेल्थ चेकअप जरूर कराएं, खासकर हृदय और सांस के रोगी विशेष सावधानी बरतें। पहाड़ों में मौसम कभी भी बदल सकता है, इसलिए अपने साथ पर्याप्त मात्रा में गर्म कपड़े, रेनकोट और जरूरी दवाइयां जरूर रखें।

चार धाम यात्रा केवल एक सफर नहीं बल्कि देवभूमि की दिव्यता को महसूस करने का जरिया है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पुख्ता इंतजाम किए हैं। यदि आप 2026 में इस पवित्र यात्रा का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो समय रहते अपना रजिस्ट्रेशन करा लें ताकि आपको अंतिम समय में किसी असुविधा का सामना न करना पड़े।



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