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Gold Silver Price: सोना ₹3007 उछला, वायदा कारोबार में 1.53 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर भाव, जानिए चांदी का हाल


बुधवार को वायदा कारोबार में सोने की कीमतों में 3,007 रुपये की तेजी दर्ज की गई। अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के संघर्ष विराम समझौते के बाद राहत की भावना और अमेरिकी डॉलर के कमजोर होने से खरीदारी बढ़ी। इस उछाल के साथ, सोने का भाव 1.53 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम हो गया है।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर जून डिलीवरी के लिए पीली धातु का भाव 3,007 रुपये या दो फीसदी बढ़कर 1.53 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। वैश्विक स्तर पर, जून अनुबंध के लिए सोने का वायदा भाव 129.12 अमेरिकी डॉलर या करीब तीन फीसदी बढ़कर 4,813.82 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस हो गया। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के कमोडिटीज एनालिस्ट मानव मोदी ने कहा कि ट्रंप द्वारा ईरान के साथ दो सप्ताह के संघर्ष विराम की घोषणा के बाद अमेरिकी डॉलर के कमजोर होने से सोने की कीमतों को समर्थन मिला। इससे सैन्य तनाव टल गया। संघर्ष विराम के बावजूद, सोने का वायदा भाव पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से पहले के स्तर से नीचे बना हुआ है। संघर्ष के दौरान, 27 फरवरी, 2026 को दर्ज 1.65 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर से कीमतें 12,363 रुपये या 7.5 फीसदी गिर गई थीं।

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से सोना-चांदी मजबूत हुए

संघर्ष विराम के फैसले से भू-राजनीतिक तनाव कम हुआ और बाजार की धारणा में सुधार आया। इस संघर्ष विराम ने छह सप्ताह से जारी जंग को समाप्त करने का रास्ता खोला है। इस संघर्ष से भारी नुकसान हुआ था और वैश्विक ऊर्जा संकट पैदा हुआ था। एलकेपी सिक्योरिटीज के कमोडिटी और करेंसी रिसर्च एनालिस्ट जतीन त्रिवेदी ने कहा कि सोने में यह तेजी मुख्य रूप से अमेरिका-ईरान संघर्ष विराम के बाद राहत के कारण है। इस संघर्ष विराम से कच्चे तेल की कीमतों में 15 फीसदी की गिरावट आई, जिससे अन्य जोखिम वाली संपत्तियों को भी समर्थन मिला। होर्मुज जलडमरूमध्य का फिर से खुलना भारत, चीन और दक्षिण कोरिया जैसे प्रमुख एशियाई तेल आयातकों के लिए महत्वपूर्ण है।

वैश्विक अनिश्चितता पर विशेषज्ञों की क्या राय?

हालांकि, जतीन त्रिवेदी ने यह भी कहा कि यह कदम राहत रैली और शॉर्ट कवरिंग से अधिक है। संघर्ष विराम की स्थिरता और प्रमुख आपूर्ति मार्गों के फिर से खुलने को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। ऑगमेंट की रिसर्च हेड रेनिशा चैनानी ने कहा कि ट्रंप द्वारा दो सप्ताह के अमेरिका-ईरान संघर्ष विराम की घोषणा के बाद सोना लगभग तीन सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंच गया। बाजार ने इसे एक महत्वपूर्ण तनाव कम करने वाला कदम माना, जिससे जोखिम वाली संपत्तियों में व्यापक राहत रैली शुरू हुई। ट्रंप ने 10 सूत्री ईरानी प्रस्ताव की प्राप्ति की पुष्टि की, जिसे उन्होंने दो सप्ताह की समय सीमा के भीतर एक स्थायी समझौते के लिए एक व्यवहार्य आधार बताया।

भविष्य के बारे में क्या कह रहे सर्राफा बाजार के जानकार?

रेनिशा चैनानी ने कहा कि ट्रंप ने बार-बार बिना किसी समाधान के समय सीमा तय की और बढ़ाई है। दो सप्ताह की अवधि कोई स्थायी समाधान नहीं है। यदि शिपिंग लेन फिर से खुलती हैं और तेल स्थिर होता है, तो यह एक वास्तविक मोड़ हो सकता है। लेकिन बातचीत में किसी भी तरह की विफलता से मौजूदा तेजी में तेज गिरावट का जोखिम है। उन्होंने आगे कहा कि सोने ने वैश्विक बाजारों में 4,800 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस (घरेलू बाजारों में 1.53 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम) से ऊपर का ब्रेकआउट दिया है। यह तेजी का संकेत है। अगला लक्ष्य वैश्विक बाजारों में 5,000 अमेरिकी डॉलर है, जो 1.59 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के बराबर है।





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‘जो भक्त नहीं,वो धार्मिक परंपरा को चुनौती कैसे दे रहा’: सबरीमाला केस में सुप्रीम कोर्ट का केंद्र से सवाल- ऐसी याचिकाओं पर सुनवाई क्यों हो




सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार से पूछा कि जो लोग भगवान अयप्पा के भक्त नहीं हैं, वे केरल के सबरीमाला मंदिर की परंपराओं को कैसे चुनौती दे सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने धार्मिक स्वतंत्रता के दायरे पर 7 सवाल तय किए हैं। इनमें से एक सवाल यह है कि क्या कोई व्यक्ति, जो किसी धार्मिक संप्रदाय या समूह से संबंधित नहीं है, उस ‘धार्मिक संप्रदाय या समूह’ की किसी प्रथा को जनहित याचिका (PIL) के माध्यम से चुनौती दे सकता है। जस्टिस बीवी नागरत्ना ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा कि सबरीमाला मामले में याचिकाकर्ता कौन थे। ‘मूल याचिकाकर्ता भक्त नहीं थे। किसी भी भक्त ने इस प्रथा को चुनौती देने के लिए अदालत का रुख नहीं किया। तो फिर ये रिट याचिकाकर्ता कौन हैं जो इसे चुनौती दे रहे हैं।’ मेहता ने जवाब दिया कि मूल याचिकाकर्ता ‘इंडियन यंग लॉयर्स एसोसिएशन’ नामक वकीलों का एक संगठन है। न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा, “वे भक्त नहीं हैं। लेकिन हमें यह स्पष्ट करना होगा। क्या भगवान अयप्पा का कोई भी भक्त इस परंपरा को चुनौती देते हुए रिट याचिका दायर कर सकता है और यदि कोई गैर-भक्त, जिसका उस मंदिर से कोई संबंध नहीं है, इसे चुनौती देता है, तो क्या यह अदालत ऐसी याचिका पर सुनवाई कर सकती है। दूसरे दिन की सुनवाई के 5 पॉइंट्स सुप्रीम कोर्ट में 50 से ज्यादा रिव्यू पिटीशन धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के साथ भेदभाव का मामला बीते 26 सालों से देश की अदालतों में हैं। 2018 में, 5 जजों की बेंच ने 4:1 के बहुमत से मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर लगी रोक हटा दी थी। इसके बाद कई पुनर्विचार याचिकाएं दायर की गईं। सुप्रीम कोर्ट के 9 जजों की संविधान बेंच 7 अप्रैल से 22 अप्रैल तक 50 से ज्यादा याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। कोर्ट में रिव्यू पिटीशनरों और उन्हें सपोर्ट करने वाले 7 अप्रैल से 9 अप्रैल तक, जबकि विरोध करने वाले 14 अप्रैल से 16 अप्रैल तक दलीलें दे सकेंगे। धार्मिक स्थलों में महिलाओं के साथ भेदभाद मामले की लाइव अपडेट्स के लिए ब्लॉग से गुजर जाएं…



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‘बाबा ने चचेरी बहन पर कैंसर करवाने का पर्चा निकाला’: हांसी का व्यक्ति बोला- पड़ोसी-रिश्तेदारों ने दूरी बनाई, सभी शक की निगाह से देखने लगे – Hisar News




चचेरी बहन को कैंसर था। बालाजी धाम के बाबा ने भरे दरबार में पर्चा निकालकर मुझे पर आरोप लगा दिए कि मैंने उस पर कैंसर करवाया है। इसका वीडियो वायरल होने के बाद पड़ोसी और रिश्तेदारों ने मेरे परिवार से दूरी बना ली। सभी मुझे शक की नजरों से देखने लगे। हांसी के रहने वाले राजेश कुमार ने बालाजी धाम के महंत दिनेश पुरी पर ये आरोप लगाते हुए हिसार सिविल कोर्ट में मानहानि का केस दायर किया है। राजेश का कहना है कि महंत का वीडियो वायरल होने के बाद उसकी जिंदगी बदल गई। दिनेश पुरी को हांसी वाले बाबाजी के नाम से जाना जाता है। वह अपने दरबार में भूत-प्रेत भगाने और बीमारियां दूर करने का दावा करते हैं। वह बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की तरह पर्चा भी लिखते हैं। राजेश के आरोपों के बाद बालाजी धाम की तरफ से कहा गया कि गुरु जी ने सिर्फ राजेश नाम लिया। इस नाम के लाखों व्यक्ति हैं। विशेष तौर पर किसी राजेश का नाम लिया। न ही वीडियो में संबंधित राजेश की कोई पहचान बताई। पहले जानिए राजेश ने दिनेश पुरी पर क्या आरोप लगाए… एडवोकेट बोले- कोर्ट ने दिनेश पुरी को नोटिस जारी किया राजेश के वकील रजत कलसन ने कहा कि कोर्ट ने दिनेश पुरी को नोटिस जारी कर दिया है और 9 अप्रैल को होने वाली सुनवाई पर उनसे जवाब मांगा गया है। राजेश की ओर से सार्वजनिक माफी की मांग की गई है। दिनेश पुरी हांसी के नंद नगर क्षेत्र में “बालाजी धाम” नाम से चल रहे मंदिर में दरबार लगाते हैं। यहां वे लोगों को प्रेत बाधा और अन्य समस्याओं से मुक्ति दिलाने का दावा करते हैं। दरबार में पुरी ने कहा था- राजेश से दूर रहना दिनेश पुरी का जो वीडियो सामने आया है, उसमें कैंसर की बीमारी को लेकर दो महिलाएं उनसे बात कर रही हैं। पुरी कहते हैं कि कैंसर करवाने वाले का माइक पर नाम बोलें या छिपाएं। इस पर महिलाएं कहती हैं कि यहीं बताइए। फिर पुरी कहते हैं कि वह श्मशान में भी जाता है, रात को उल्टे काम करता है, काली माता की भक्ति करता है और पीर पर भी जाता हैं। वह तुम्हें मेरे पास आने से भी मना कर रहा था। आखिर में पुरी उन महिलाओं को कहते हैं कि राजेश नामक व्यक्ति से दूर रहना।



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Iran-US War Ceasefire: Trump ने Pakistan की अपील मानी, 14 दिन तक रुकेगी US बमबारी, Iran खामोश क्यों?


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Iran-US War Ceasefire: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को दिए गए अपने 48 घंटे के अल्टीमेटम के खत्म होने के मात्र 1 घंटे पहले बड़ा ऐलान किया। ट्रंप ने 8 अप्रैल की सुबह 4 बजे के करीब (भारतीय वक्त) पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की अपील मानते हुए दो सप्ताह (14 दिन) के लिए ईरान पर सभी बमबारी और सैन्य हमले निलंबित करने की घोषणा कर दी।

यह दोतरफा युद्धविराम होगा, लेकिन शर्त साफ है कि ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य को पूर्ण, तत्काल और सुरक्षित रूप से खोलना होगा। हालांकि, अभी तक ईरान की ओर से अभी तक कोई तत्काल प्रतिक्रिया नहीं आई है। आइए विस्तार से जानते हैं ट्रंप ने क्या-क्या लिखा?

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ट्रंप ने लिखा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से बातचीत के आधार पर… मैं ईरान पर बमबारी और हमले को दो सप्ताह के लिए निलंबित करने पर सहमत हूं, बशर्ते ईरान होर्मुज को पूरी तरह खोल दे। यह दोतरफा युद्धविराम होगा। ट्रंप का दावा है कि अमेरिका सभी सैन्य उद्देश्य पूरे कर चुका है और उनसे आगे निकल चुका है। उन्होंने ईरान के 10-सूत्रीय प्रस्ताव को ‘व्यावहारिक आधार’ बताया और कहा कि दोनों पक्ष दीर्घकालिक शांति के समझौते की दिशा में काफी आगे बढ़ चुके हैं। दो हफ्ते का समय समझौते को अंतिम रूप देने और लागू करने के लिए है।

पाकिस्तान की मध्यस्थता: आखिरी घंटे का दांव काम आया

ट्रंप का सीजफायर ऐलान पाकिस्तान की 11वें घंटे की अपील के ठीक बाद आया। शहबाज शरीफ ने X पर पोस्ट कर ट्रंप से डेडलाइन दो हफ्ते बढ़ाने और ईरान से होर्मुज खोलने की गुजारिश की थी। पाकिस्तान ने इसे ‘सद्भावना का प्रतीक’ बताया और सभी पक्षों से दो हफ्ते का युद्धविराम मानने की अपील की।

ट्रंप ने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया कि यह फैसला पाकिस्तान की मध्यस्थता पर आधारित है। पाकिस्तान की अपनी मजबूरी भी साफ है। देश का 90% तेल होर्मुज से गुजरता है। अगर जलडमरूमध्य बंद रहा तो ईंधन संकट गहरा जाएगा, कीमतें बढ़ेंगी और अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।

ट्रंप का रणनीतिक गणित: क्यों सहमत हुए?

ट्रंप ने कहा, ‘हम पहले ही सभी सैन्य उद्देश्यों को पूरा कर चुके हैं।’ यानी अमेरिका-इजरायल के हमलों ने ईरान की सैन्य क्षमता को काफी नुकसान पहुंचा दिया है। अब आगे बढ़ने के बजाय फेस-सेविंग और कूटनीतिक जीत हासिल करना बेहतर समझा गया। ट्रंप ने इसे ‘दीर्घकालिक समस्या का समाधान’ बताया और मध्य पूर्व में स्थायी शांति का दावा किया। ईरान का 10-सूत्रीय प्रस्ताव (जिसमें सुरक्षित जहाजरानी, पुनर्निर्माण और प्रतिबंध हटाने जैसे मुद्दे शामिल हैं) को आधार मानकर दो हफ्ते का समय दिया गया है। यह फैसला ट्रंप की पुरानी स्टाइल से मेल खाता है कि कड़ी धमकी, फिर आखिरी वक्त पर समझौता। इससे पहले उन्होंने कई बार डेडलाइन बढ़ाई थी।

यह दो हफ्ते निर्णायक साबित हो सकते हैं। अगर ईरान होर्मुज खोल देता है तो तनाव कम होगा। अगर नहीं, तो ट्रंप की धमकी दोबारा गूंज सकती है। ट्रंप ने कहा, ‘मुझे गर्व है कि हम दीर्घकालिक समाधान के करीब हैं।” लेकिन असली परीक्षा ईरान की चुप्पी टूटने के बाद होगी। दुनिया की नजर अब तेहरान के अगले बयान और होर्मुज में जहाजों की आवाजाही पर है। कूटनीति ने एक और मौका पाया है कि लेकिन यह मौका कितना ठोस है, यह अगले 14 दिनों में तय होगा।



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Iran-US War: 14 दिन के युद्धविराम पाकिस्तानी प्रस्ताव के पीछे Trump की स्क्रिप्ट? शरीफ की बेवकूफी से खुली पोल


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oi-Divyansh Rastogi

Iran-US War Ceasefire: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने 7 अप्रैल 2026 की शाम को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट किया। इसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से ईरान पर लगाई गई समय सीमा को 14 दिन बढ़ाने, ईरान से होर्मुज जलडमरूमध्य दो हफ्ते के लिए खोलने और सभी युद्धरत पक्षों से दो हफ्ते का युद्धविराम मानने की अपील की। पोस्ट में ट्रंप, जेडी वेंस, मार्को रुबियो, स्टिव विटकोफ और ईरानी नेताओं को टैग किया गया था।

पोस्ट पढ़कर लग रहा था कि पाकिस्तान क्षेत्रीय शांति के लिए ईमानदार मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। व्हाइट हाउस ने तुरंत पुष्टि की कि ट्रंप को प्रस्ताव की जानकारी है और जल्द जवाब आएगा। ईरान ने भी ‘सकारात्मक समीक्षा’ का संकेत दिया। लेकिन कुछ घंटों बाद ही पोस्ट की एडिट हिस्ट्री सामने आई और पूरी तस्वीर बदल गई।

Iran US Ceasefire

‘ड्राफ्ट – Pakistan’s PM Message on X’: एक छोटी-सी भूल ने खोली पोल

प्रसिद्ध पत्रकार रयान ग्रिम (@ryangrim) ने तुरंत स्क्रीनशॉट शेयर किया। शरीफ की मूल पोस्ट में सबसे ऊपर यह लाइन थी- Draft – Pakistan’s PM Message on X’ यह लाइन पोस्ट करने के कुछ मिनट बाद डिलीट कर दी गई। ग्रिम ने लिखा कि पाकिस्तान के अपने स्टाफ शरीफ को ‘Pakistan’s PM’ नहीं कहते। वे तो ‘Prime Minister’ कहते। यह भाषा अमेरिका और इजरायल की स्टाइल है। शरीफ को जो कुछ भेजा गया था, उसे कॉपी-पेस्ट कर दिया और ड्राफ्ट हेडर हटाना भूल गए। इसके बाद सोशल मीडिया में शरीफ बुरी तरह ट्रोल हो गए। यूजर्स ने लिखा कि-

  • ‘ट्रंप को TACO (Trump Always Chickens Out) करना था, तो पाकिस्तान को स्क्रिप्ट भेज दी।’
  • ‘मध्यस्थता नहीं, वाशिंगटन से आई स्क्रिप्ट है।’
  • ‘शरीफ का स्टाफ भी उन्हें ‘Pakistan’s PM’ नहीं कहता… ये तो फॉरेन हैंडलिंग लग रही है।’

रयान ग्रिम की पोस्ट लाखों व्यूज और हजारों रीपोस्ट्स के साथ वायरल हो गई।

ट्रंप का हाथ था या पाकिस्तान की स्वतंत्र पहल?

1. सबूत क्या कहते हैं?

एडिट हिस्ट्री से साफ है कि पोस्ट पूर्व-लिखित थी। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री कार्यालय के आंतरिक स्टाइल में ऐसा ‘ड्राफ्ट’ हेडर नहीं होता। ‘Pakistan’s PM’ शब्दावली अमेरिकी कूटनीतिक कम्युनिकेशन का स्टैंडर्ड फॉर्मेट है। ग्रिम का स्क्रीनशॉट इस बात को पक्का करता है कि शरीफ ने बस ‘सेंड’ बटन दबाया। यह एक क्लासिक कॉपी-पेस्ट गलती थी।

Oh, this is unbelievable. The edit history on this tweet shows that Pakistan Prime Minister Shehbaz Sharif originally copied and pasted everything he was sent, including:

“*Draft – Pakistans PM Message on X*”

Now, obviously, Sharifs own staff dont call him “Pakistans PM,”… https://t.co/q0ls8pK0qd pic.twitter.com/lm2vSEElkb

— Ryan Grim (@ryangrim) April 7, 2026 “>

2. ट्रंप को फायदा क्यों?

ट्रंप ने रात 8 बजे (ET) की डेडलाइन दी थी और हमले की धमकी दी थी। लेकिन अब पाकिस्तान के जरिए एक फेस-सेविंग एग्जिट मिल गया। अगर ईरान होर्मुज खोल दे तो ट्रंप कह सकते हैं कि मेरा दबाव काम आया। अगर ईरान मना कर दे तो, दोष पाकिस्तान या ईरान पर डाला जा सकता है। कई यूजर्स इसे ‘TACO by proxy’ बता रहे हैं। यानी ट्रंप बैकडोर से पीछे हटने का रास्ता बना रहे थे।

3. पाकिस्तान की मजबूरी और रणनीति

पाकिस्तान की स्थिति बेहद नाजुक है। क्योंकि, उसका 90 प्रतिशत तेल होर्मुज जलडमरूमध्य से आता है। बंद रहने पर पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। सऊदी अरब के साथ डिफेंस पैक्ट, अफगानिस्तान के साथ तनाव और भारत से पुराना विवाद। आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर ट्रंप के ‘फेवरेट फील्ड मार्शल’ माने जाते हैं। दोनों के बीच बैक-चैनल पहले से सक्रिय थे। पाकिस्तान सच में युद्धविराम चाहता है, क्योंकि उसकी अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर भारी असर पड़ रहा है। लेकिन एडिट हिस्ट्री से लगता है कि स्क्रिप्ट अमेरिका की तरफ से तैयार की गई थी और पाकिस्तान ने उसे आगे बढ़ाया।

4. क्या यह मध्यस्थता सिर्फ दिखावा थी?

सोशल मीडिया पर बहस दो धड़ों में बंट गई:

एक पक्ष कह रहा है कि पाकिस्तान ने ट्रंप को पहले भी दो बड़ी कूटनीतिक जीत दिलाईं (2025 पाक-भारत संकट और अफगानिस्तान से संबंधित मामले)। यह तीसरी जीत हो सकती है।
दूसरा पक्ष इसे ‘प्रॉक्सी डिप्लोमेसी’ बता रहा है। असली मध्यस्थता नहीं, बल्कि ट्रंप के लिए फेस-सेविंग का माध्यम।

कुछ विश्लेषक मानते हैं कि पाकिस्तान की ‘भाईचारे’ वाली भाषा (Iranian brothers) असली है, लेकिन पोस्ट का फॉर्मेट अमेरिकी दबाव या सुझाव को दर्शाता है।

कूटनीति या स्क्रिप्टेड थिएटर?

शरीफ की एक छोटी-सी भूल ‘ड्राफ्ट हेडर न हटाना’ ने पूरी पोल खोल दी। 14 दिन का युद्धविराम प्रस्ताव अब ट्रंप की बैकडोर डिप्लोमेसी का हिस्सा लग रहा है। पाकिस्तान ने अपनी मध्यस्थ इमेज बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन सोशल मीडिया की पारदर्शिता ने सब कुछ उजागर कर दिया।

अब बड़े सवाल ये हैं:

  • ट्रंप 14 दिन बढ़ाएंगे या सिर्फ समय खरीद रहे थे?
  • ईरान होर्मुज खोलेगा या अपनी स्थिति मजबूत रखेगा?
  • पाकिस्तान की ‘भाईचारे’ वाली मध्यस्थता कितनी स्वतंत्र और कितनी निर्देशित थी?





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खबर हटके- ₹25 हजार में बिका मुर्गी का एक अंडा: समुद्र के अंदर तोते ने की सैर; स्कूल में बनाया गया भूत का मंदिर


लद्दाख में मुर्गी के एक अंडे को एक शख्स ने ₹25 हजार में खरीदा। वहीं, नॉर्थ अमेरिका में एक तोते ने समुद्र में पानी के अंदर सैर की। उधर, उत्तराखंड के एक सरकारी स्कूल में भूत का मंदिर बनवाया गया।

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आज खबर हटके में जानेंगे ऐसी ही 5 रोचक खबरें…

khabar hatke 7 april 1775577828
khabar hatke 25 march7 1775572549
khabar hatke 7 april2 1775577882
khabar hatke 25 march8 1775572567
khabar hatke 7 april3 1775577952
khabar hatke 25 march9 1775572580
khabar hatke 7 april5 1775578356
khabar hatke 25 march10 1775572591
khabar hatke 7 april4 1775578415

तो ये थी आज की रोचक खबरें, कल फिर मिलेंगे कुछ और दिलचस्प और हटकर खबरों के साथ…

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The Bonus Market Update: US-ईरान के बीच सीजफायर से बाजार मजबूत, सेंसेक्स 2983 अंक चढ़ा, निफ्टी 24000 के करीब


अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर का एलान दुनिया के साथ-साथ भारतीय शेयर बाजार के लिए भी राहत लेकर आया। बुधवार को घरेलू बेंचमार्क सूचकांक लंबी छलांग लगाकर बंद हुए। सेंसेक्स 2,946.32 (3.94%) की बढ़त के साथ 77,562.90 पर बंद हुआ। वहीं दूसरी, ओर निफ्टी 873.70 (3.78%) अंक मजबूत होकर 23,997.35 के स्तर पर बंद हुआ। 


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बुधवार के कारोबारी सत्र के बाद सेंसेक्स के 30 शेयरों का हाल

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अमेरिका-ईरान के बीच अस्थायी युद्धविराम, तेल की कीमतों में भारी गिरावट और अन्य अनुकूल कारकों के चलते सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में 3.5% से अधिक की तेजी आई और लगातार पांचवें सत्र में बढ़त दर्ज की गई।  इस तेज उछाल से बीएसई में सूचीबद्ध सभी कंपनियों के कुल बाजार पूंजीकरण में लगभग 16.59 लाख करोड़ रुपये की वृद्धि हुई, जिससे यह बढ़कर 446 लाख करोड़ रुपये हो गया। बुधवार के कारोबारी सत्र के बाद बाजार के सभी प्रमुख सेक्टोरल सूचकांक हरे निशान पर बंद होने में सफल रहे।

निफ्टी के टॉप गेनर्स

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निफ्टी के टॉप लूजर्स

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रुपया 47 पैसे बढ़कर 92.59 प्रति डॉलर पर बंद हुआ

रिजर्व बैंक द्वारा प्रमुख बेंचमार्क दर को अपरिवर्तित रखते हुए तटस्थ रुख अपनाने के बाद, रुपया बुधवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 47 पैसे मजबूत होकर 92.59 (अस्थायी) पर बंद हुआ। फॉरेक्स व्यापारियों ने कहा कि गवर्नर संजय मल्होत्रा द्वारा यह आश्वासन दिए जाने के बाद निवेशकों की भावना को बल मिला कि फॉरेक्स पर उठाए गए कदम संरचनात्मक परिवर्तन नहीं हैं।





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Energy Crisis: ‘कोयला व पेट्रोल-डीजल का पर्याप्त भंडार’, जानिए सरकार ने एलपीजी के बारे में क्या बताया


वैश्विक स्तर पर पश्चिम एशियामें चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा आपूर्ति शृंखला में आ रही रुकावटों के बीच भारत सरकार ने देशवासियों को बड़ी राहत दी है। अंतर मंत्रालयी प्रेस वार्ता के दौरान केंद्र ने साफ किया है कि भारत में ऊर्जा संसाधनों की कोई कमी नहीं है। एक ओर जहां कोयला और पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति सुचारू रूप से चल रही है, वहीं दूसरी ओर, विदेश में फंसे भारतीयों की सुरक्षित वापसी के लिए व्यापक कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार का यह आधिकारिक बयान अर्थव्यवस्था और बाजार के लिए एक सकारात्मक संकेत है। आइए जानते हैं सरकार की ओर से क्या-क्या कहा गया।


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कोयला उत्पादन और बिजली आपूर्ति


  • कोयला मंत्रालय के संयुक्त सचिव संजीव कुमार कस्सी ने देश में बिजली उत्पादन को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने आश्वस्त किया कि देश की खदानों और बिजली संयंत्रों में कोयले का पर्याप्त भंडार  मौजूद है, जिससे उपभोक्ताओं को बहुत ही कम समय के नोटिस पर कोयले की आपूर्ति की जा सकती है। देश की कुल ऊर्जा जरूरतों का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा आज भी कोयला आधारित बिजली से पूरा होता है। 

  • कस्सी ने बताया कि बिजली उत्पादन क्षमता में कोई कमी नहीं है क्योंकि कोयले का उत्पादन उसकी खपत के स्तर के साथ पूरी तरह से तालमेल बिठाकर चल रहा है। 

  • भारत ने ऊर्जा की एक किफायती और पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखी है तथा लगातार दूसरे वर्ष 1 अरब टन कोयला उत्पादन का ऐतिहासिक लक्ष्य हासिल किया है। कोयला मंत्रालय के संयुक्त सचिव ने बताया कि भारत के पास बिजली उत्पादन की जरूरतों के लिए 24 दिनों का कोयले का भंडार मौजूद है।

पेट्रोलियम, डीजल और एलपीजी की मजबूत स्थिति 


  • पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस (एलपीजी) के भंडार और आपूर्ति की विस्तृत जानकारी दी। रिफाइनरियां अपनी पूर्ण क्षमता से काम कर रही हैं और कच्चे तेल की पर्याप्त उपलब्धता के कारण पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं है।

  • घरेलू जरूरतों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। इसी के तहत उर्वरक संयंत्रों को लगभग 95 प्रतिशत गैस की आपूर्ति की जा रही है।

  • एलपीजी आपूर्ति को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने पेट्रोकेमिकल्स के सीमित उपयोग की अनुमति देते हुए C3 और C4 धाराओं को एलपीजी पूल में डायवर्ट करने के सख्त निर्देश दिए हैं।

  • जागरूकता बढ़ाने के लिए तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) ने करीब 1,600 कैंप लगाए हैं और लगभग 14,000 सिलेंडर वितरित किए हैं। 23 मार्च से अब तक कुल 8.9 लाख एलपीजी सिलेंडर बेचे जा चुके हैं।

  • बाजार में कालाबाजारी और अन्य कदाचार रोकने के लिए सख्ती तेज कर दी गई है। हाल ही में लगभग 4,000 छापेमारी की गई, जिसमें 56,000 सिलेंडर जब्त हुए। कंपनियों ने 1,770 कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं, 51 वितरकों को निलंबित किया है और 175 के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। सुजाता शर्मा ने नागरिकों से अपील की है कि वे घबराने से बचें और केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें।

वैश्विक तनाव और नागरिकों की सुरक्षा


  • विदेश मंत्रालय (एमईए) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पश्चिम एशिया के संकट पर भारत का आधिकारिक रुख स्पष्ट किया। भारत ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार को बाधित करने वाले इस संघर्ष के बीच हालिया युद्धविराम का स्वागत करते हुए स्थायी शांति की उम्मीद जताई है। 

  • भारत लगातार कूटनीति और संवाद पर जोर दे रहा है और हर्मुज़ जलडमरूमध्य के माध्यम से निर्बाध नेविगेशन को आवश्यक मानता है। 

  • भारतीय समुदाय की सुरक्षा और कल्याण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए 24 घंटे का कंट्रोल रूम संचालित किया जा रहा है जो वीजा और रसद जैसी सहायता दे रहा है। 

  • 28 फरवरी से अब तक खुले हवाई क्षेत्र से उड़ानों के जरिए करीब 7.88 लाख यात्री सुरक्षित भारत लौट चुके हैं। ईरान में मौजूद लगभग 7,500 भारतीयों के लिए जल्द निकास की एडवाइजरी जारी की गई है, जिनमें से 1,864 नागरिकों को पड़ोसी देशों आर्मेनिया और अजरबैजान के रास्ते सुरक्षित निकाला जा चुका है।

पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर की खबरों के बीच केंद्र सरकार के इन बयानों से साफ है कि भारत का बुनियादी आर्थिक ढांचा और ऊर्जा क्षेत्र पूरी तरह से सुरक्षित है।





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Iran-US War में नया ट्विस्ट! Pakistan की अपील पर Trump क्या 14 दिन बढ़ाएंगे डेडलाइन? हां कहने के 4 बड़े कारण


International

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Iran-US War Pakistan PM Request Trump Extend Iran Deadline: ईरान-अमेरिका संघर्ष अब अपने 5वें हफ्ते में है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को आज रात 8 बजे (ET) तक होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने की अल्टीमेटम दी है। अगर नहीं खुला तो अमेरिका-इजरायल ईरान के पावर प्लांट, ब्रिज और तेल इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी हमले की धमकी है।

इसी बीच, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने आखिरी घंटों में बड़ा कूटनीतिक दांव खेला है। आइए विस्तार से समझें क्या है ट्रंप के हां कहने के 4 बड़े कारण?

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Pakistan Shehbaz Sharif का प्रस्ताव: क्या कहा X पोस्ट में?

शहबाज शरीफ ने X (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट कर ट्रंप से दो हफ्ते (14 दिन) की डेडलाइन बढ़ाने की अपील की। साथ ही ईरान से होर्मुज जलडमरूमध्य दो हफ्ते के लिए खोलने की गुजारिश की। इसे ‘सद्भावना का प्रतीक’ बताया।

शहबाज ने लिखा कि मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध का शांतिपूर्ण समाधान निकालने के लिए कूटनीतिक प्रयास लगातार, मजबूती से और शक्तिशाली ढंग से आगे बढ़ रहे हैं… कूटनीति को अपना काम करने दें, मैं राष्ट्रपति ट्रंप से विनम्र अनुरोध करता हूं कि डेडलाइन दो हफ्ते बढ़ा दें। शरीफ ने सभी पक्षों से दो हफ्ते का युद्धविराम मानने की भी अपील की ताकि स्थायी शांति की बात हो सके।

Diplomatic efforts for peaceful settlement of the ongoing war in the Middle East are progressing steadily, strongly and powerfully with the potential to lead to substantive results in near future. To allow diplomacy to run its course, I earnestly request President Trump to extend…

— Shehbaz Sharif (@CMShehbaz) April 7, 2026 “>

व्हाइट हाउस का तुरंत रिएक्शन

  • प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप को इस प्रस्ताव की जानकारी दे दी गई है। जल्द जवाब आएगा।
  • ट्रंप अभी तक चुप हैं, लेकिन उन्होंने पहले भी कई बार डेडलाइन बढ़ाई है।

पाकिस्तान मध्यस्थ क्यों बना?

पाकिस्तान का यह रोल कई लोगों को हैरान कर रहा है, लेकिन इसमें हैरानी की बात नहीं है।

  • ईरान से गहरे संबंध: 900 किमी लंबी साझा सीमा, सांस्कृतिक-धार्मिक भाईचारा।
  • ट्रंप का पसंदीदा: पाक आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को ट्रंप खुद ‘मेरा फेवरेट फील्ड मार्शल’ कह चुके हैं। मुनीर ने रातभर वाइस प्रेसिडेंट JD वेंस और ईरानी अधिकारियों के बीच बैक-चैनल चलाया।
  • अमेरिका से पुराना रिश्ता: 2025 के पाक-भारत संकट में ट्रंप को ‘शांति पुरस्कार’ नामांकित करने समेत कई ‘बड़ी जीत’ दिलाईं।
  • कोई अमेरिकी बेस नहीं: पाकिस्तान न इजरायल समर्थक दिखता है, न अति-अमेरिकी। यही इसे दोनों तरफ बात करने लायक बनाता है।

BREAKING: A deal is “expected to be closed” between the US and Iran tonight, per CNN.

Details include:

1. A “regional source” has informed CNN that “some good news is expected from both sides soon”

2. Discussions are being steered directly by Pakistan’s army chief, Field…

— The Kobeissi Letter (@KobeissiLetter) April 7, 2026 “>

पाकिस्तान के हित, क्यों इतनी मेहनत?

  • तेल का गला: पाकिस्तान 90% तेल होर्मुज से आयात करता है। अगर बंद रहा तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें और बढ़ेंगी (मार्च में ही 20% बढ़ाई जा चुकी हैं)।
  • आर्थिक दबाव: 4-दिन का वर्क वीक, ईंधन बचत के उपाय पहले से लागू हैं।
  • खतरा: सऊदी के साथ डिफेंस पैक्ट, अगर सऊदी युद्ध में कूद गया तो पाकिस्तान फंस सकता है।
  • दो मोर्चे पहले से: अफगानिस्तान से ‘पूर्ण युद्ध’ जैसी स्थिति, भारत से तनाव।

फिर भी पाकिस्तान को फायदा भी दिख रहा है। वैश्विक कूटनीति में नई पहचान।

ट्रंप स्वीकार करेंगे या नहीं?

संभावना 60-40 ट्रंप के पक्ष में (अभी तक कोई आधिकारिक जवाब नहीं):

ट्रंप के हां कहने के 4 बड़े कारण

  • ट्रंप का स्टाइल: उन्होंने पहले भी डेडलाइन बार-बार बढ़ाई। ‘आज रात सभ्यता खत्म’ जैसी धमकी के बावजूद आखिरी वक्त में डील पसंद करते हैं।
  • पाकिस्तान पर भरोसा: मुनीर और शरीफ दोनों को ट्रंप पसंद करते हैं। पाकिस्तान ने बैक-चैनल चलाकर ट्रंप को ‘फेस-सेविंग’ विकल्प दिया।
  • तेल की कीमतें: होर्मुज खुलने से तुरंत राहत। पूरी दुनिया देख रही है।
  • कूटनीतिक जीत: पाकिस्तान के जरिए डील हुई तो ट्रंप कह सकेंगे ‘मेरा दबाव काम आया’।

ट्रंप के ना कहने के कारण

  • मैक्सिमम प्रेशर: ट्रंप मानते हैं कि ईरान को झुकाने के लिए आखिरी झटका जरूरी।
  • ईरान का रुख: तेहरान ने 45 दिन के सीजफायर को भी ‘परमानेंट पीस’ की मांग करते हुए खारिज कर दिया।
  • इजरायल का दबाव: इजरायल पूरे युद्ध में ईरान को कमजोर करना चाहता है।

नतीजा क्या हो सकता है?

अगर ट्रंप 14 दिन बढ़ाते हैं, तो अस्थायी युद्धविराम संभव। होर्मुज दो हफ्ते के लिए खुल सकता है। लेकिन अगर नहीं बढ़ाया तो भारतीय समयानुसार बुधवार सुबह हमले शुरू हो सकते हैं। पाकिस्तान ने अपना दांव खेल दिया। अब ट्रंप का पत्ता खुलने वाला है। कूटनीति जीतेगी या बम? दुनिया की नजर अमेरिकी वक्त रात 8 बजे (भारतीय वक्त 8 अप्रैल की सुबह) पर है।





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RBI: एचडीएफसी बैंक में कामकाज से जुड़ी कोई गड़बड़ी नहीं, गवर्नर बोले- बैंकिंग सिस्टम है पूरी तरह सुरक्षित


भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने देश के सबसे बड़े निजी बैंकों में से एक, एचडीएफसी बैंक के ग्राहकों और निवेशकों को एक बड़ी राहत दी है। बुधवार को मौद्रिक नीति के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने स्पष्ट किया कि रिजर्व बैंक के निरीक्षण के दौरान एचडीएफसी बैंक में प्रशासन या आचरण से जुड़ी कोई भी गड़बड़ी नहीं पाई गई है। उनका यह अहम बयान बैंक के अंतरिम चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के अचानक इस्तीफे और उसके तुरंत बाद बैंक के शेयरों में आई भारी गिरावट से जुड़े एक सवाल का जवाब देते हुए आया।

एचडीएफसी बैंक के कामकाज पर केंद्रीय बैंक को पूरा भरोसा

गवर्नर मल्होत्रा ने बैंक की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों पर विराम लगाते हुए कहा कि रिज़र्व बैंक ने बैंक की बैठकों के विवरण की भी समीक्षा की है, और उसमें भी चिंता की कोई ठोस बात सामने नहीं आई है। उन्होंने याद दिलाया कि 19 मार्च को जारी अपनी एक प्रेस विज्ञप्ति में भी आरबीआई ने साफ किया था कि बैंक के आचरण या प्रशासन के बारे कोई चिंता वाली बात रिकॉर्ड पर नहीं है। बैंक के पूर्व चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने 18 मार्च को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उसके बाद से बैंक की कार्यप्रणाली को लेकर कई तरह के कयास लग रहे थे। 

मजबूत वित्तीय स्थिति वाला वाला बैंक है एचडीएफसी बैंक

केंद्रीय बैंक ने एचडीएफसी बैंक की स्थिति को पूरी तरह से सुरक्षित बताया है। आरबीआई के अनुसार, “बैंक घरेलू प्रणालीगत रूप से महत्वपूर्ण बैंक’ है, इसकी वित्तीय स्थिति बेहद मजबूत है। इसका बोर्ड पेशेवर रूप से चलाया जाता है और इसके पास एक पूरी तरह से सक्षम प्रबंधन टीम है”। समय-समय पर होने वाले मूल्यांकन के दौरान भी इसके कामकाज में कोई खामी नहीं पाई गई है। एचडीएफसी बैंक के अलावा, गवर्नर मल्होत्रा ने पूरे भारतीय बैंकिंग सिस्टम को लेकर भी सकारात्मक बातें कहीं। उन्होंने बताया कि भारत की बैंकिंग प्रणाली बहुत लचीली, सुरक्षित और मजबूत है।



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