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IPL 2026: आईपीएल का हिस्सा रहे 3 खिलाड़ियों का अब हो चुका निधन, कौन हैं ये दिग्गज नाम


Cricket

oi-Naveen Sharma

IPL 2026: आईपीएल दुनिया की दूसरी सबसे महंगी खेल लीग है, जिसमें खेलने का सपना हर क्रिकेटर का होता है। 19 साल से चल रही इस क्रिकेट लीग में देश-विदेश से कई सितारे खेले हैं। खेलने के अलावा कोचिंग स्टाफ में भी अपनी सेवाएं दी हैं और अपना सफर यादगार बनाया है। इस लीग से जुड़े तीन ऐसे सितारे हैं, जो अब दुनिया में नहीं हैं।

तीनों ही दिग्गज विदेशी सरजमीं से आते हैं और अपने क्रिकेटिंग समय में दिग्गज रहे हैं। दो को खेलने का मौका मिला और एक खिलाड़ी कोचिंग का हिस्सा रहा है। ऐसे में फैंस को भी यह जानना चाहिए कि किन तीन नामों की अब मृत्यु हो गई है, क्या कारण रहे।

Andrew Symonds

शेन वॉर्न

आईपीएल इतिहास में शेन वॉर्न का नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखा है। 2008 के पहले ही सीजन में एक युवा टीम के साथ राजस्थान रॉयल्स को चैंपियन बनाकर उन्होंने दुनिया को चौंका दिया था। मार्च 2022 में थाईलैंड में दिल का दौरा पड़ने से उनका आकस्मिक निधन हो गया, उस समय वॉर्न की उम्र महज 52 साल थी। राजस्थान रॉयल्स के बिकने पर शेनव वॉर्न के परिवार को 460 करोड़ रुपये मिलेंगे क्योंकि उनके अनुबंध में शेयर का जिक्र था।

एंड्रू सायमंड्स

ऑस्ट्रेलिया के इस दिग्गज ऑलराउंडर ने आईपीएल में अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से तहलका मचाया था। वे डेक्कन चार्जर्स और मुंबई इंडियंस का अहम हिस्सा रहे। मई 2022 में एक सड़क दुर्घटना में साइमंड्स की जान चली गई। सायमंड्स डेक्कन चार्जर्स की विनिंग टीम की प्लेइंग इलेवन में भी शामिल थे। किसी ने नहीं सोचा होगा कि वह इतनी जल्दी दुनिया को अलविदा कह देंगे, उस समय वह महज 46 वर्ष के थे।

हीथ स्ट्रीक

जिम्बाब्वे के पूर्व कप्तान हीथ स्ट्रीक ने आईपीएल में अपनी गेंदबाजी की रणनीतियों से कई टीमों को मजबूती दी। वे गुजरात लायंस (2016-2017) और कोलकाता नाइट राइडर्स (2018) के गेंदबाजी कोच रहे। साल 2023 में कैंसर से लंबी जंग हारने के बाद 49 साल की उम्र में उनका निधन हुआ।



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‘सिद्धू पा जी कहां हैं?’ पार्टी लॉन्च की तस्वीर से नवजोत सिंह गायब, क्या बीवी के फैसले पर नहीं हैं साथ?


India

oi-Bhavna Pandey

पंजाब के पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष और पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू की पत्‍नी नवजोत कौर सिद्धू ने अपनी नई पार्टी बना ली है। उन्‍होंने ‘भारतीय राष्ट्रवादी पार्टी’ (BRP) नामक अपनी नई राजनीतिक पार्टी के गठन की घोषणा की। कांग्रेस से ‘पार्टी विरोधी गतिविधियों’ के लिए निष्कासित किए जाने के ठीक दो महीने बाद नवजोत कौर ने अपनी पार्टी का गठन किया है।

2027 की शुरूआत में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनावों से पहले, नवजोत कौन सिद्धू ने इस नई पार्टी के लॉन्च को “दैवीय हस्तक्षेप” से जन्मा “बहुप्रतीक्षित” राष्ट्रीय विकल्प बताया। उन्होंने घोषणा की है कि उनकी यह नई पार्टी पंजाब को फिर से उसका पुराना गौरव दिलाने के लिए समर्पित होगी, जो राज्य ने कथित तौर पर खो दिया है।

Navjot singh Sidhu Wife

डॉ. नवजोत कौर सिद्धू ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट ‘एक्स’ पर एक तस्वीर साझा कर इस नई पार्टी के गठन की जानकारी दी। इस तस्वीर के बैकग्राउंड में ‘भारतीय राष्ट्रवादी पार्टी’ का बैनर दिखाई दे रहा है लेकिन खास बात ये रही कि नवजोत कौर के पति और नेताा नवजोत सिंह सिद्धू इस तस्वीर या घोषणा से पूरी तरह नदारत रहे।

The much awaited announcement ;we have been working on a new alternative at a national level after carefully monitoring and reviewing the current standards of performance of political leaders. Just wanting to dedicate our lives for our country giving back to the people what they… pic.twitter.com/5ypRNoX21Q

— Dr Navjot Sidhu (@NavjotSidh42212) April 6, 2026 “>

‘सिद्धू पा जी कहां हैं?’

सोशल मीडिया पर ये तस्‍वीर पोस्‍ट होते ही यूजर्स ने नवजोत सिंह सिद्धू की गैरमौजूदगी पर तुरंत सवाल उठाए। यूजर्स पूछ रहे हैं कि “सिद्धू पा जी कहां हैं?” लोग सवाल कर रहे हैं कि क्‍या नवजोत कौर ने ये निर्णय अपने पति सिद्धू की मर्जी के खिलाफ लिया है। वहीं कुछ यूजर जिससे राजनीतिक हलकों में तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।

यूजर्स सिद्धू को पार्टी का मुख्‍य संरक्षक बनाने की दे रहे सलाह

एक यूजर ने कहा, यह पंजाब की राजनीति में बड़ी सेंध लगाएगा। नवजोत सिद्धू को मुख्य संरक्षक होना चाहिए। यह ऊंचे पदों पर पहुंचेगी और भविष्य में पंजाब में जो भी सरकार आएगी, उसमें यह शामिल होगी। दिल्ली और हरियाणा में इसका काफी असर रहेगा। वहीं कुछ यूसर्ज भविष्‍य में इस नई पार्टी के भाजपा में मर्ज हो जाने की बात कह रहे हैं।

नवजोत सिंह सिद्धू किस पार्टी में हैं?

ध्‍यान देने वाली बात ये है कि नवजोत कौर के पति और पूर्व मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू अभी भी कांग्रेस में हैं, हालांकि वे अधिकतर राजनीतिक रूप से निष्क्रिय बने हुए हैं। कांग्रेस से पहले सिद्धू भजापा में थे। वहीं अब जब पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले अब जब उनकी पत्‍नी ने अपनी अलग पार्टी बना ली है तो लोग जानना चाह रहे हैं कि सिद्धू का अगला कदम क्‍या होगा, क्‍या आधिकारिक रूप से वो अपनी पार्टी में शामिल होंगे?

नवजोत कौर को कांग्रेस ने क्‍यों किया था निष्‍काषित?

सिद्धू की पत्‍नी एमबीबीएस और एमडी (स्त्री रोग एवं प्रसूति विज्ञान) हैं, पूर्व मुख्य संसदीय सचिव (स्वास्थ्य) रह चुकी हैं। कैंसर सर्वाइवर नवजोत कौर ने 2012 में भाजपा के टिकट पर अमृतसर पूर्वी सीट जीती थी। बाद में, 2017 के राज्य चुनावों से पहले वह अपने पति के साथ कांग्रेस में शामिल हुई थीं। 2025 में उन्होंने कांग्रेस पर सीधा हमला करते हुए आरोप लगाया था कि “जो ₹500 करोड़ का सूटकेस देता है” वही कांग्रेस का मुख्यमंत्री चेहरा बनता है, और उनके पति केवल मुख्यमंत्री पद मिलने पर ही सक्रिय राजनीति में लौटेंगे।





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Manipur में BSF जवान के घर रॉकेट हमला, 2 बच्चों की मौत से फिर बढ़ा तनाव, 5 जिलों में इंटरनेट सेवा बंद


India

oi-Puja Yadav

Manipur Violence Rocket Attack: मणिपुर में जारी जातीय हिंसा ने मंगलवार, 7 अप्रैल को एक बार फिर मानवता को शर्मसार कर दिया है। बिष्णुपुर जिले के मोइरांग में एक संदिग्ध रॉकेट हमले ने हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया।

बिष्णुपुर में हुए इस हमले में एक BSF जवान के दो नन्हे बच्चों 5 साल के बेटे और महज 5 महीने की बेटी की सोते समय मौत हो गई। इस कायराना हमले के बाद पूरे राज्य में उबाल है, जिसे देखते हुए प्रशासन ने 5 जिलों में इंटरनेट सेवाओं पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी है। समझिए फिर कैसे शुरु हुआ पूरा मामला…

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सोते हुए मासूमों पर बरसी आसमान से मौत, कैसे हुआ हादसा?

घटना मंगलवार, 7 अप्रैल को तड़के करीब 1:03 बजे की है। अधिकारियों के मुताबिक, संदिग्ध कुकी उग्रवादियों ने मोइरांग त्रोन्गलाओबी अवांग लेकाई स्थित एक रिहायशी इलाके को निशाना बनाकर लंबी दूरी का रॉकेट (Projectile) दागा।

यह रॉकेट सीधे एक बीएसएफ जवान के घर की खिड़की को तोड़ते हुए बेडरूम में जा फटा। धमाका इतना शक्तिशाली था कि गहरी नींद में सो रहे 5 साल के मासूम और 5 महीने की दुधमुंही बच्ची की मौके पर ही मौत हो गई। बच्चों की मां इस हमले में गंभीर रूप से घायल हो गई हैं, जिन्हें इलाज के लिए इम्फाल के अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

बताया जा रहा है कि रॉकेट पहाड़ियों की ढलानों से दागा गया था, जो घटनास्थल से लगभग 3 किलोमीटर से अधिक दूर है। लंबी दूरी के इन प्रोजेक्टाइल्स का इस्तेमाल यह दर्शाता है कि उग्रवादियों के पास अब घातक और आधुनिक हथियार पहुँच चुके हैं। घटनास्थल के पास से एक और रॉकेट-प्रोपेल्ड ग्रेनेड (RPG) बरामद हुआ है, जिसे सुरक्षा बलों ने निष्क्रिय कर दिया।

सड़कों पर उतरा लोगों का गुस्सा: तेल टैंकर फूंके, CRPF कैंप का किया घेराव

रॉकेट हमले की खबर फैलते ही मोइरांग में तनाव चरम पर पहुंच गया और लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। मोइरांग में प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर टायर जलाकर रास्ता जाम कर दिया। उग्र भीड़ ने एक CRPF कैंप में घुसने की कोशिश की, जिसे सुरक्षाबलों ने कड़ी मशक्कत के बाद रोका।

भीड़ ने मोइरांग पुलिस स्टेशन परिसर में घुसने की कोशिश की और जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने सामान ले जा रहे कम से कम तीनतेल ट्रकों को आग के हवाले कर दिया। बिष्णुपुर जिले में जगह-जगह टायर जलाकर रास्तों को ब्लॉक कर दिया गया है। लोगों ने एक CRPF कैंप को भी घेरने का प्रयास किया, जिसके बाद सुरक्षा बलों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।

Internet Shutdown Manipur: बिगड़ती कानून-व्यवस्था को लेकर 5 जिलों में लगा ‘डिजिटल कर्फ्यू’

बिगड़ती कानून-व्यवस्था और सोशल मीडिया पर अफवाहों को फैलने से रोकने के लिए मणिपुर सरकार ने इम्फाल पश्चिम, इम्फाल पूर्व, थौबल, काकचिंग और बिष्णुपुर जिलों में तत्काल प्रभाव से 3 दिनों के लिए इंटरनेट और मोबाइल डेटा सेवाओं को निलंबित कर दिया है। सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस हमले में जिस तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, वह बेहद चिंताजनक है।

2023 से जातीय हिंसा में क्यों सुलग रहा है मणिपुर?

मणिपुर के गृह मंत्री के. गोविंदस ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे ‘बर्बरता’ करार दिया। उन्होंने X पर लिखा, निर्दोष बच्चों की सोते समय हत्या बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मामले की जांच जारी है और दोषियों को पाताल से भी ढूंढ निकाला जाएगा। मणिपुर में मई 2023 से मैतई और कुकी समुदायों के बीच जातीय हिंसा जारी है।

हालांकि 2025 में हिंसा की घटनाओं में कमी आई थी, लेकिन ताजा रॉकेट हमले ने साबित कर दिया है कि राज्य में शांति अभी भी बेहद नाजुक दौर में है। हालिया हमले का संदेह कुकी उग्रवादियों पर जताया जा रहा है, जिन्होंने कथित तौर पर पहाड़ी इलाकों से रिहायशी क्षेत्र को निशाना बनाया।



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TN Election: थलापति विजय ने चुनाव में गठबंधन से क्यों बनाई दूरी, आखिर क्या है TVK का ‘नो अलायंस’ गेम प्लान?


India

oi-Puja Yadav

TN Election 2026: तमिलनाडु की राजनीति में इस बार मुकाबला केवल पारंपरिक प्रतिद्वंद्वियों द्रमुक (DMK) और अन्नाद्रमुक (AIADMK) के बीच नहीं है। सुपरस्टार जोसेफ विजय, जिन्हें उनके फालोवर्स प्यार से ‘थलपति’ कहते हैं, अपनी नई पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के साथ चुनावी मैदान में अकेले उतर चुके हैं।

जहां राज्य की अन्य बड़ी पार्टियां गठबंधन के सहारे चुनावी मैदान में उतर रही हैं, वहीं विजय ने साफ कर दिया है कि उनकी पार्टी अकेले चुनाव लड़ेगी।

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वहीं विजय ने स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी गठबंधन का हिस्सा नहीं बनेंगे और राज्य की सभी 234 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। 23 अप्रैल को होने वाले इस चुनाव में TVK का यह फैसला सियासी गलियारों में कई सवाल खड़े कर रहा है क्या यह रणनीति है या जोखिम है?

दो सीटों से चुनावी मैदान में उतरे विजय, हर सीट पर ठोकी ताल

विजय इस चुनाव में दो सीटों पेरंबूर और त्रिची ईस्ट से चुनाव लड़ रहे हैं। TVK ने तमिलनाडु की सभी 234 सीटों पर उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है। इसके अलावा पार्टी पुडुचेरी में भी चुनाव लड़ रही है। विजय का कहना है कि यह चुनाव सिर्फ सत्ता की लड़ाई नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संघर्ष है। उनका दावा है कि TVK ही भ्रष्ट और पुरानी राजनीति को चुनौती देने की क्षमता रखती है।

विजय ने गठबंधन से क्यों बनाई दूरी? मजबूरी या वैचारिक लड़ाई

TVK के महासचिव आधव अर्जुना ने मीडिया से बातचीत में बताया कि, विजय के पास गठबंधन के कई प्रस्ताव थे। कुछ पार्टियों ने तो उन्हें 2.5 साल के लिए मुख्यमंत्री पद और 50% सीटों का ऑफर भी दिया था, लेकिन विजय ने इसे ठुकरा दिया।

विजय का कहना है कि वे ‘धर्मनिरपेक्ष सामाजिक न्याय’ के सिद्धांतों पर कोई समझौता नहीं करेंगे। गठबंधन करने पर उन्हें अपनी विचारधारा के साथ समझौता करना पड़ता। विजय अक्सर अपनी रैलियों में भाजपा को अपना वैचारिक दुश्मन बताते रहे हैं। उन्होंने साफ कहा कि वे दिल्ली (केंद्र में भाजपा की सरकार) के किसी भी दबाव में नहीं झुकेंगे।

विजय के पास एक बड़े युवा वोटर्स हैं जिनका समर्थन TVK के लिए काफी महत्तवपूर्ण है। वे जानते हैं कि यदि वे किसी बड़े दल के साथ गठबंधन करते, तो उनकी अपनी पार्टी की पहचान नहीं बन पाएगी। वे जनता को दिखाना चाहते हैं कि केवल TVK ही DMK और भ्रष्टाचार से लड़ने का दम रखती है।

अनुभव की कमी विजय के सामने सबसे बड़ी चुनौती

TVK की स्थापना 2024 में हुई थी, यानी पार्टी अभी राजनीतिक तौर पर नई है। ऐसे में अनुभव की कमी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि विजय की लोकप्रियता भले ही फिल्मों से आई हो, लेकिन उसे वोट में बदलना आसान नहीं होगा। कुछ विश्लेषकों का यह भी कहना है कि विजय को अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने के लिए जमीनी स्तर पर ज्यादा सक्रिय होना पड़ेगा।

TVK के लिए रास्ता जोखिम भरा लेकिन लंबी रेस का दांव

राजनीतिक रणनीतिकार निरंजन रमेश बाबू का मानना है कि विजय के पास युवाओं का जबरदस्त समर्थन है, लेकिन उनका फैन बेस मुख्य रूप से फिल्मी है। उन्होंने कहा, विजय राजनीति में एक ‘नवजात शिशु’ की तरह हैं। DMK और AIADMK का संगठन जमीन पर बहुत मजबूत है।

विजय को मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचने के लिए कम से कम 10 साल कड़ी मेहनत करनी होगी। तमिलनाडु की सभी सीटों पर 23 अप्रैल को एक ही चरण में मतदान होगा, जबकि नतीजे 4 मई को आएंगे। क्या विजय अपनी ‘अकेले लड़ने’ की रणनीति से तमिलनाडु की सत्ता का समीकरण बदल पाएंगे? या फिर वे केवल एक ‘वोट कटवा’ पार्टी बनकर रह जाएंगे? यह तो 4 मई को ही साफ होगा, लेकिन एक बात तय है विजय ने तमिलनाडु के चुनावी मुकाबले को त्रिकोणीय और रोमांचक बना दिया है।



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चांद का वो ‘डार्क ज़ोन’ जहां NASA भी हो जाता है अंधा! 40 मिनट के लिए गायब होगा Artemis II


International

oi-Sumit Jha

NASA Artemis II Mission: लगभग 50 साल बाद इंसान एक बार फिर चांद की दहलीज पर खड़ा है। NASA का Artemis II मिशन अंतरिक्ष विज्ञान के इतिहास में एक नया अध्याय लिखने जा रहा है। इस मिशन के दौरान चार अंतरिक्ष यात्री-रीड वाइजमैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टियान कोच और जेरेमी हेनसेन-ओरियन अंतरिक्ष यान में सवार होकर चांद के उस हिस्से तक जाएंगे, जहां अपोलो युग के बाद से कोई नहीं पहुंचा।

इस ऐतिहासिक सफर में एक ऐसा पल भी आएगा जब पूरी दुनिया की सांसें थम जाएंगी। जब ओरियन चांद के ‘दूसरी तरफ’ (Far Side) पहुंचेगा, तो पृथ्वी से उसका संपर्क पूरी तरह टूट जाएगा। यह 40 मिनट का ‘ब्लैकआउट’ तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि अंतरिक्ष की भौतिकी का एक रोमांचक हिस्सा है।

NASA Artemis II Mission

क्या है ‘फ्री-रिटर्न’ रास्ता और यह क्यों जरूरी है?

Artemis II एक ‘फ्री-रिटर्न ट्रैजेक्ट्री’ पर चल रहा है। यह एक ऐसा सुरक्षित रास्ता है जिसमें अंतरिक्ष यान पृथ्वी से निकलकर चांद के चक्कर लगाता है और बिना किसी बड़े इंजन प्रपल्शन के, सिर्फ गुरुत्वाकर्षण की मदद से अपने आप पृथ्वी की ओर लौट आता है। हाल ही में किए गए 17.5 सेकंड के ‘आउटबाउंड करेक्शन बर्न’ ने ओरियन को इसी सटीक रास्ते पर सेट किया है। इसे अंतरिक्ष यात्रा में सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता है क्योंकि अगर यान के इंजन में कोई समस्या आती भी है, तो यात्री सुरक्षित वापस घर लौट सकते हैं।

40 मिनट का मौन: क्यों टूटेगा संपर्क?

जब ओरियन अंतरिक्ष यान चांद के पीछे के हिस्से (Far Side) में प्रवेश करेगा, तो विशालकाय चंद्रमा खुद ओरियन और पृथ्वी के बीच एक दीवार बनकर खड़ा हो जाएगा। चूंकि रेडियो सिग्नल सीधे रास्ते पर चलते हैं, इसलिए चांद के ठोस द्रव्यमान को पार करना उनके लिए असंभव होगा। इस दौरान लगभग 40 मिनट तक न तो NASA मिशन कंट्रोल यात्रियों से बात कर पाएगा और न ही यान का कोई डेटा पृथ्वी तक पहुंचेगा। यह पूरी तरह से एक ‘कम्युनिकेशन ब्लैकआउट’ की स्थिति होगी।

रिस्क नहीं, बल्कि सामान्य प्रक्रिया

NASA के अनुसार, यह 40 मिनट का सन्नाटा कोई चिंता का विषय या जोखिम भरी स्थिति नहीं है। डीप-स्पेस मिशनों में ऐसा होना आम बात है। अपोलो मिशनों के दौरान भी हर बार जब यान चांद के पीछे जाता था, तो संपर्क टूट जाता था। भारत के मंगलयान (MOM) मिशन में भी ऐसा ही हुआ था जब यान मंगल ग्रह की ओट में चला गया था। यह ब्लैकआउट केवल यह दर्शाता है कि हमारा यान अंतरिक्ष की गहराइयों में सफलतापूर्वक आगे बढ़ रहा है।

ये भी पढे़ं: Artemis II Mission: ‘चांद के पार चलो’, क्या है आर्टेमिस-2 मिशन? कौन हैं वो 4 यात्री जो रचेंगे इतिहास?

‘डार्क साइड’ का रहस्य और आंखों देखा हाल

चांद के जिस हिस्से में ब्लैकआउट होगा, उसे अक्सर गलतफहमी में ‘डार्क साइड’ कहा जाता है, लेकिन वहां भी सूरज की रोशनी पहुंचती है। यह हिस्सा पृथ्वी से कभी दिखाई नहीं देता। इस 40 मिनट के दौरान अंतरिक्ष यात्री रोबोटिक कैमरों के भरोसे रहने के बजाय अपनी आंखों से चांद की ऊबड़-खाबड़ सतह, पुराने गड्ढों और रहस्यमयी नजारों का अवलोकन करेंगे। यह एक ऐसा दुर्लभ अवसर है जिसे दुनिया के बहुत ही कम इंसानों ने सीधे अनुभव किया है।

अंतरिक्ष से दिखाई देने वाला अनोखा सूर्य ग्रहण

इस सफर का सबसे जादुई पल तब आएगा जब ये चार यात्री एक खास ‘सूर्य ग्रहण’ के गवाह बनेंगे। जैसे ही ओरियन चांद की दूसरी तरफ से गुजरेगा, चंद्रमा सूर्य को यात्रियों की नजरों से पूरी तरह ढंक लेगा। अंतरिक्ष के गहरे अंधेरे के बीच उन्हें सूर्य का बाहरी वातावरण यानी ‘कोरोना’ चमकता हुआ दिखाई देगा। यह नजारा पृथ्वी से नहीं देखा जा सकेगा, इसे केवल वही चार यात्री देख पाएंगे जो उस समय ब्रह्मांड की उस विशेष स्थिति में मौजूद होंगे।

ये भी पढे़ं: NASA Moon Image: चांद का वो हिस्सा जो दुनिया से 50 साल छुपा रहा, नासा ने पहली बार दिखाई ‘असली’ तस्वीर

अपोलो 13 का रिकॉर्ड टूटने की दहलीज

Artemis II सिर्फ चांद तक पहुंचने का मिशन नहीं है, बल्कि यह दूरी का नया रिकॉर्ड बनाने का मिशन भी है। यह यान पृथ्वी से इतनी दूर जाएगा जितना 1970 में अपोलो 13 मिशन गया था। ओरियन उस पुराने रिकॉर्ड को तोड़ते हुए इंसान को अंतरिक्ष के अब तक के सबसे दूरस्थ बिंदु तक ले जाएगा। जैसे ही यान चांद के पीछे से बाहर निकलेगा और पृथ्वी फिर से दिखाई देने लगेगी, यह दूरी का नया कीर्तिमान स्थापित कर चुका होगा।

भविष्य में क्या संपर्क बनाए रखना संभव होगा?

वर्तमान में हमारे पास चांद के पीछे संपर्क बनाए रखने का कोई साधन नहीं है, लेकिन भविष्य में ऐसा नहीं होगा। NASA की योजना आर्टेमिस मिशन के अगले चरणों में चांद के चारों ओर ‘रिले सैटेलाइट’ तैनात करने की है। ये सैटेलाइट्स सिग्नल को घुमाकर पृथ्वी तक पहुंचाएंगे, जिससे 24 घंटे संपर्क बना रहेगा। चीन पहले ही अपने लूनर मिशन के लिए ऐसा कर चुका है। आने वाले समय में, चांद के पीछे जाने पर भी यात्री अपने घर से बात कर सकेंगे।



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शिमला-मनाली भूल जाइए! हिमाचल और उत्तराखंड के ये 7 हिल स्टेशन देंगे असली सुकून!


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7 Famous Hill Stations : हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के लोकप्रिय पर्यटन स्थलों पर बढ़ती भीड़ अब शांति भंग करने लगी है और प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव डाल रही है. ऐसे में आज हम आपको हिमाचल और उत्तराखंड के 7 हिल स्टेशन के बारे में बताएंगे जो आपको असली सुकून देंगे.

शोजा, हिमाचल प्रदेश: सेराज घाटी में बसा, शोजा हर मायने में एक परी कथा जैसा स्वर्ग लगता है. घने जंगलों और ऊबड़-खाबड़ पहाड़ों से घिरा, यह एक ऐसी जगह है जहाँ समय थमा हुआ सा लगता है. यहां आपको चकाचौंध कैफे या भीड़भाड़ वाले मॉल नहीं मिलेंगे. इसके बजाय, आपको आरामदायक लकड़ी के कॉटेज, धुंध भरी सुबह और सुंदर ट्रेकिंग रास्ते मिलेंगे. पास में स्थित जलोरी दर्रा और सेरोलसर झील दिन भर की सैर के लिए बेहतरीन जगहें हैं.

Beyond The Tourist Trail: Crowd-Free Hill Stations In Himachal Pradesh And Uttarakhand

तीर्थन घाटी, हिमाचल प्रदेश: अगर आपकी आदर्श छुट्टी में साफ-सुथरे नदी के किनारे और प्रकृति की सैर शामिल है, तो तीर्थन घाटी आपके लिए एकदम सही जगह है. ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क के पास स्थित, यह अनोखी जगह अपनी शांत नदी, ट्राउट मछली पकड़ने के मौकों और शांतिपूर्ण होमस्टे के लिए मशहूर है. यह अपने लोकप्रिय पड़ोसी पर्यटन स्थलों की तुलना में काफी कम व्यावसायिक है, जो इसे आराम करने और दुनिया से कटकर रहने के लिए एक आदर्श जगह बनाता है.

Beyond The Tourist Trail: Crowd-Free Hill Stations In Himachal Pradesh And Uttarakhand

चकराता, उत्तराखंड: बड़े शहरों से बस कुछ ही घंटों की दूरी पर स्थित, चकराता उत्तराखंड के छिपे हुए रत्नों में से एक है. अपने घने जंगलों, मनमोहक दृश्यों और शानदार टाइगर फॉल्स के साथ, यह मसूरी का एक शांत विकल्प पेश करता है. यहां व्यावसायीकरण की कमी इसकी सुंदरता को और बढ़ा देती है; शांत रास्ते और पहाड़ों के मंत्रमुग्ध कर देने वाले दृश्य इसके मुख्य आकर्षण हैं.

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Beyond The Tourist Trail: Crowd-Free Hill Stations In Himachal Pradesh And Uttarakhand

कनाताल, उत्तराखंड: 8,500 फीट से ज़्यादा की ऊंचाई पर स्थित, कनाताल अपनी ताज़ी पहाड़ी हवा और लुभावने दृश्यों के लिए मशहूर है. अपने लोकप्रिय पड़ोसी, धनोल्टी के विपरीत, कनाताल कहीं ज़्यादा शांत और एकांत रहता है. यह कैंपिंग, प्रकृति की सैर और भीड़भाड़ से दूर हिमालय की पहाड़ियों की भव्यता का आनंद लेने के लिए एक बेहतरीन जगह है.

Beyond The Tourist Trail: Crowd-Free Hill Stations In Himachal Pradesh And Uttarakhand

जिभी, हिमाचल प्रदेश: किसी पोस्टकार्ड के दृश्य जैसा दिखने वाला जिभी धीरे-धीरे लोकप्रियता हासिल कर रहा है, फिर भी यह अपने स्वाभाविक रूप से शांत स्वभाव को बनाए रखता है. लकड़ी के कॉटेज, कलकल करती नदियां और हरी-भरी हरियाली इस आकर्षक जगह के सार को परिभाषित करते हैं.

Beyond The Tourist Trail: Crowd-Free Hill Stations In Himachal Pradesh And Uttarakhand

कौसानी, उत्तराखंड: अक्सर ‘भारत का स्विट्जरलैंड’ कहे जाने वाले कौसानी से नंदा देवी जैसी हिमालय की चोटियों के मनोरम दृश्य दिखाई देते हैं. अपनी प्राकृतिक भव्यता के बावजूद, यह ज़्यादा मशहूर या व्यावसायिक हिल स्टेशनों की तुलना में कम पर्यटकों को आकर्षित करता है. यहां सूर्योदय का अनुभव अविस्मरणीय होता है, खासकर जब इसके साथ स्थानीय बागानों की एक कप गरमागरम चाय भी हो.

Beyond The Tourist Trail: Crowd-Free Hill Stations In Himachal Pradesh And Uttarakhand

चौकोरी, उत्तराखंड: जो लोग शहरी जीवन की भागदौड़ से दूर शांति की तलाश में हैं, उनके लिए चौकोरी एक आदर्श जगह है. चाय के बागानों और घने जंगलों से घिरा यह स्थान, हरी-भरी हरियाली के बीच ऊंची उठती बर्फ से ढकी चोटियों के मनमोहक दृश्य दिखाता है. यह ‘स्लो ट्रैवल’ के लिए एकदम सही जगह है. जहां आप पढ़ सकते हैं, टहल सकते हैं, और बस प्रकृति की सुंदरता का आनंद ले सकते हैं.



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गर्मियों के लिए ये हैं भारत की 5 सबसे शानदार रोड ट्रिप!


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India Most Refreshing Road Trips : गर्मियों के मौसम में सफर पर निकलने का अपना ही एक जादू होता है. गाड़ी की खिड़कियां खुली हों, पसंदीदा गाने बज रहे हों, और आगे किसी ठंडी जगह पर पहुंचने का वादा हो. जहां मैदानी इलाकों में भीषण गर्मी और उमस हो सकती है, वहीं भारत के हाईवे आपको हिल स्टेशनों, समुद्री तटों और हरे-भरे जंगलों तक ले जाते हैं. जिससे यह सफ़र भी उतना ही यादगार बन जाता है.

मनाली से लेह हाईवे: भारत के सबसे मशहूर रोड रूट्स में से एक, मनाली-लेह हाईवे हिमालय के बीच से गुज़रते हुए एक जादुई सफ़र का अनुभव देता है. 470 km से ज़्यादा लंबा यह रास्ता आपको बर्फ़ से ढकी चोटियों, रोहतांग और तांगलांग ला जैसे विशाल पहाड़ी दर्रों और ऐसे नज़ारों के बीच से ले जाता है जो सचमुच किसी दूसरी दुनिया के लगते हैं. यह सड़क आम तौर पर सिर्फ़ गर्मियों के महीनों में ही खुली रहती है, जो इसे एडवेंचर पसंद करने वालों के लिए एक यादगार सफ़र बना देती है. पहाड़ों की ताज़ी हवा और मनमोहक नज़ारे गर्मियों की तेज़ गर्मी से राहत देते हैं.

Summer Adventures: India’s Most Refreshing Road Journeys

मुंबई से गोवा रोड ट्रिप: जो लोग पहाड़ों के बजाय समुद्र तटों को ज़्यादा पसंद करते हैं, उनके लिए मुंबई-गोवा रोड ट्रिप एक बेहतरीन विकल्प है. जैसे ही आप NH66 पर गाड़ी चलाते हैं, आपको अरब सागर, हरे-भरे तटीय बागानों और समुद्र किनारे के मनमोहक नज़ारों का दीदार होता है. गोवा के खूबसूरत समुद्र तटों तक पहुंचने से पहले, समुद्र के किनारे कुछ समय बिताने के लिए अलीबाग या गणपतिपुले में रुकने के बारे में सोचें. समुद्र की ताज़ी हवा और समुद्र के विशाल विस्तार के साथ, यह सफ़र शहर की गर्मी से बचने का एक शानदार तरीका है.

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चेन्नई से कोल्ली हिल्स: यह कम जाना-पहचाना रोड ट्रिप एडवेंचर पसंद करने वालों के लिए एक छिपा हुआ खज़ाना है. चेन्नई-कोल्ली हिल्स का रास्ता अपनी 70 हेयरपिन मोड़ों के लिए मशहूर है, जो घने जंगलों और कोहरे से ढके चट्टानी इलाकों से गुज़रते हुए एक रोमांचक ड्राइव का अनुभव देता है. कोल्ली हिल्स पहुंचने पर, अगाया गंगई झरने और आस-पास के नज़ारों जैसे आकर्षण आपको प्रकृति से गहराई से जुड़ा हुआ महसूस कराते हैं. यह एडवेंचर और शांति का एक बेहतरीन मेल है.

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अहमदाबाद से कुम्भलगढ़: इतिहास पसंद करने वालों के लिए, अहमदाबाद-कुम्भलगढ़ की रोड ट्रिप एक आकर्षक विकल्प है. कुम्भलगढ़ किला जिसे अक्सर “भारत की महान दीवार” कहा जाता है दुनिया की दूसरी सबसे लंबी लगातार दीवार होने का गौरव रखता है. यह सफ़र अरावली पर्वतमाला से होकर गुज़रता है, जहां वन्यजीव अभयारण्यों और छोटे-छोटे गांवों के सुंदर नज़ारे देखने को मिलते हैं. यहां गर्मियों की शामें सचमुच जादुई होती हैं, और किले की भव्यता इस सफ़र को एक यादगार अनुभव में बदल देती है.

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पुणे से दिवेआगर: अगर आप महाराष्ट्र में रहते हैं, तो पुणे से दिवेआगर तक का तटीय रास्ता समुद्र किनारे घूमने के लिए एक शानदार विकल्प है। पश्चिमी घाट की हरी-भरी हरियाली से गुज़रता हुआ यह रास्ता आपको समुद्र किनारे की एक मनमोहक जगह तक ले जाता है. दिवेआगर अपने सुनहरे रेत, स्वादिष्ट सीफ़ूड और शांत, साफ़-सुथरे माहौल के लिए मशहूर है. समुद्र की ताज़ा हवा और बीच का आकर्षण इसे मैदानी इलाकों की चिलचिलाती गर्मी से बचने के लिए एक बेहतरीन जगह बनाते हैं.



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Pawan Khera:पासपोर्ट विवाद पर एक्शन! पवन खेड़ा के घर पहुंची असम पुलिस, हिमंता सरमा की पत्नी की FIR के बाद हलचल


Business

oi-Pallavi Kumari

Pawan Khera News: असम पुलिस की एक टीम कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के दिल्ली स्थित आवास पर पहुंची है। यह कार्रवाई हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी द्वारा दर्ज कराई गई FIR के ठीक एक दिन बाद की गई है। यह कार्रवाई उस FIR के बाद हुई है, जो हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी की ओर से दर्ज कराई गई थी। पवन खेड़ा के घर रेड पर निकलने के बाद दिल्ली पुलिस ने कहा कि कुछ आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद है।

जानकारी के मुताबिक, असम से आई पुलिस टीम ने दिल्ली पुलिस को पहले ही सूचित कर दिया था, जिसके बाद स्थानीय पुलिस भी इस कार्रवाई में सहयोग कर रही है। नियमों के तहत जब किसी राज्य की पुलिस दूसरे राज्य में जांच के लिए जाती है, तो वहां की स्थानीय पुलिस को जानकारी देना जरूरी होता है।

Pawan Khera assam police Delhi Raid himanta biswa sarma wife

सूत्रों के मुताबिक जब पुलिस टीम पवन खेड़ा के घर पहुंची, उस समय वह वहां मौजूद नहीं थे। बताया जा रहा है कि हाल ही में उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी के पासपोर्ट को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए थे।

इसी मामले को लेकर अब कानूनी कार्रवाई तेज हो गई है और असम पुलिस सीधे दिल्ली पहुंच गई है। इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और बयानबाजी देखने को मिल सकती है।

▶️ पवन खेड़ा और हिमंत बिस्वा सरमा क्या है पूरा विवाद?

  • असम की राजनीति में रविवार को उस वक्त हलचल मच गई, जब कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सीएम सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा को लेकर गंभीर आरोप लगाए। खेड़ा ने दावा किया कि उनके पास एक नहीं, बल्कि तीन अलग-अलग देशों के पासपोर्ट हैं और विदेशों में उनकी बड़ी संपत्ति भी मौजूद है। इन आरोपों के सामने आते ही मामला सियासी बहस का केंद्र बन गया।
  • इन आरोपों पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए हिमंत बिस्वा सरमा ने इन्हें पूरी तरह झूठा और राजनीतिक मकसद से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह के आरोप कांग्रेस की घबराहट और घटते जनाधार को दिखाते हैं। सोशल मीडिया के जरिए उन्होंने साफ किया कि यह सब उनकी छवि खराब करने की कोशिश है।
  • सीएम सरमा और उनकी पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा ने पवन खेड़ा पर एफआईआर दर्ज की है।आपराधिक और दीवानी मानहानि का केस दर्ज किया गया है।

▶️ पवन खेड़ा ने किस आधार पर लगाए आरोप?

  • अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में पवन खेड़ा ने कुछ दस्तावेजों का हवाला दिया, जिनके बारे में उनका कहना था कि ये उन्हें विदेश में मौजूद सूत्रों से मिले हैं। उन्होंने दावा किया कि रिनकी सरमा के पास यूएई, मिस्र और एंटीगुआ एंड बारबुडा के पासपोर्ट हैं।
  • इसके अलावा उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दुबई में उनकी प्रॉपर्टी है और अमेरिका के व्योमिंग में एक कंपनी रजिस्टर्ड है, जिसका बजट 34.67 बिलियन डॉलर बताया गया। खेड़ा के मुताबिक, होटल इंडस्ट्री में निवेश की भी तैयारी है।

▶️ चुनावी हलफनामे और नागरिकता पर क्यों उठे सवाल?

पवन खेड़ा ने यह भी सवाल उठाया कि अगर ये सारी संपत्तियां मौजूद हैं, तो उनका जिक्र सीएम सरमा के चुनावी हलफनामे में क्यों नहीं किया गया। उन्होंने यह मुद्दा भी उठाया कि क्या रिनकी सरमा के पास भारतीय नागरिकता है, क्योंकि भारत में दोहरी नागरिकता की अनुमति नहीं है।

पवन खेड़ा ने इस पूरे मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने मुख्यमंत्री की गिरफ्तारी और आगामी चुनावों से अयोग्यता तक की बात कही है। इसके साथ ही उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित से हस्तक्षेप की अपील की और पूरे मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की मांग उठाई है।



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35 करोड़ का दांव खेल बना लिए 350 करोड़! IPL ने कैसे बदली प्रीति जिंटा की किस्मत? 51 की उम्र में भी हैं सुपरफिट



IPL 2026 Punjab Kings: पंजाब किंग्स की मालकिन प्रीति जिंटा हर साल की तरह इस सीजन भी टीम का हौसला बढ़ाती हुई नजर आ रही हैं।



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Postal Ballot Rule 2026: कैसे भरें Form 12D? जाने घर से वोटिंग की पात्रता, लास्ट डेट व स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस


India

oi-Kumari Sunidhi Raj

Postal Ballot Guide: देश में 4 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में अप्रैल में विधानसभा चुनाव होने हैं। 9 अप्रैल से 29 अप्रैल के बीच असम, तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी में मतदान होने हैं। भारत में हर नागरिक को वोट देने का अधिकार दिया गया है, लेकिन कई बार लोग शारीरिक दूरी, उम्र या ड्यूटी के कारण मतदान केंद्र तक नहीं पहुंच पाते।

ऐसे लोगों के लिए डाक मतदान एक खास सुविधा है, जिससे वे बिना बूथ पर जाए भी अपने मत का उपयोग कर सकते हैं। यह व्यवस्था चुनाव प्रक्रिया को ज्यादा समावेशी और आसान बनाती है। डाक मतदान प्रणाली को Election Commission of India द्वारा नियंत्रित किया जाता है और यह तय नियमों के तहत ही लागू होती है। आइए इस आर्टिकल में समझते हैं पोस्टल वोट्स क्या होते हैं और इसका उपयोग कौन और कैसे कर सकता है-

Postal Ballot Guide Postal Vote

Postal Vote: कौन कर सकता है पोस्टल वोट?

डाक मतदान की सुविधा सभी मतदाताओं के लिए नहीं होती, यह केवल चुनिंदा श्रेणियों को दी जाती है। इसमें शामिल लोग इस प्रकार हैं:

  • भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना के जवान
  • अर्धसैनिक बलों के सदस्य जैसे BSF, CRPF, CISF आदि
  • सरकारी कर्मचारी जो चुनाव के समय अपने निर्वाचन क्षेत्र से बाहर तैनात होते हैं
  • 85 वर्ष या उससे अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिक
  • दिव्यांग मतदाता जिनकी विकलांगता मानक स्तर की हो
  • चुनाव ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी और सुरक्षा बल

डाक मतदान के लिए आवेदन प्रक्रिया

डाक मतदान का उपयोग करने के लिए पहले आवेदन करना जरूरी होता है। यह प्रक्रिया समयबद्ध और नियमों के अनुसार होती है।

  • पात्र मतदाता को निर्धारित फॉर्म भरना होता है
  • वरिष्ठ नागरिक और दिव्यांग मतदाता के लिए Form 12D का उपयोग किया जाता है
  • सेवा मतदाताओं के लिए अलग Form 12 होता है
  • भरा हुआ फॉर्म तय समय सीमा के अंदर चुनाव अधिकारी को जमा करना होता है

पोस्टल वोट डालने की पूरी प्रक्रिया

डाक मतदान मिलने के बाद मतदाता को मतदान करने की प्रक्रिया पूरी करनी होती है। यह पूरी तरह गोपनीय होती है।

  • मतदाता को बैलट पेपर डाक या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से मिलता है
  • वह अपनी पसंद के उम्मीदवार को चुनता है
  • वोट को गोपनीय लिफाफे में बंद किया जाता है
  • कुछ मामलों में घोषणा पत्र भी भरना जरूरी होता है

पोस्टल वोट वापस भेजने का तरीका

वोट डालने के बाद उसे सही समय पर चुनाव अधिकारी तक पहुंचाना जरूरी होता है।

  • भरा हुआ बैलट डाक के माध्यम से भेजा जाता है
  • या निर्धारित केंद्र पर जमा किया जाता है
  • वोट को तय समय सीमा से पहले पहुंचना अनिवार्य होता है
  • देर से पहुंचे बैलट को अमान्य माना जाता है

महत्वपूर्ण नियम और जानकारी

  • डाक मतदान की गिनती ईवीएम वोटों के साथ की जाती है
  • वोट की गोपनीयता बनाए रखना जरूरी होता है
  • यह सुविधा केवल पात्र मतदाताओं को ही दी जाती है
  • गलत या अधूरे फॉर्म पर वोट मान्य नहीं होता

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With AI Inputs



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