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Dubai Gold Rate Today: दुबई में सोना हुआ इतना सस्ता! भारत के मुकाबले सीधे ₹6,700 से ज्यादा की बचत


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oi-Sumit Jha

Dubai Gold Rate Today: सोने और चांदी की चमक हर किसी को अपनी ओर खींचती है, चाहे वह निवेश के लिए हो या शादी-ब्याह की खरीदारी के लिए। दुबई को ‘सिटी ऑफ गोल्ड’ कहा जाता है क्योंकि यहां टैक्स की छूट और शुद्धता के कारण सोना भारत के मुकाबले काफी सस्ता मिलता है।

भारतीय बाजार में भी सोने-चांदी की कीमतें अंतरराष्ट्रीय उतार-चढ़ाव और डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति पर निर्भर करती हैं। आज हम जानेंगे कि दुबई और भारत के बीच सोने के रेट में कितना बड़ा अंतर है और आपकी कितनी बचत हो सकती है।

Dubai Gold Rate Today

Gold rate today: दुबई में सोने का क्या है रेट

दुबई में आज 24 कैरेट सोने की कीमत 563.50 AED (यूएई दिरहम) प्रति ग्राम है। अगर हम इसे भारतीय रुपए (₹25.26 प्रति दिरहम के हिसाब से) में बदलें, तो यह लगभग ₹14,234 प्रति ग्राम बैठता है। इसी तरह, 22 कैरेट सोने का रेट 521.75 AED (लगभग ₹13,180 INR) और 18 कैरेट का 428.75 AED (लगभग ₹10,830 INR) है। दुबई में मेकिंग चार्जेस कम होने और वैट रिफंड की सुविधा के कारण यह भारतीयों के लिए काफी आकर्षक सौदा साबित होता है।

भारत में सोने के ताजा भाव और स्थिति

भारत के सर्राफा बाजार में आज सोने की कीमतें दुबई के मुकाबले काफी ऊपर हैं। यहाँ 24 कैरेट सोने का भाव ₹14,913 प्रति ग्राम है, जो दुबई के मुकाबले करीब ₹679 प्रति ग्राम महंगा है। वहीं, 22 कैरेट (ज्वेलरी गोल्ड) ₹13,670 और 18 कैरेट ₹11,185 प्रति ग्राम पर बिक रहा है। भारत में सोने की कीमतों पर 15% इम्पोर्ट ड्यूटी और 3% GST का सीधा असर पड़ता है, जिससे घरेलू बाजार में कीमतें हमेशा अंतरराष्ट्रीय स्तर से अधिक रहती हैं।

Dubai vs India Gold Price: कितनी होगी बचत

अगर आप दुबई से 10 ग्राम (एक तोला) 24 कैरेट सोना खरीदते हैं, तो आपको लगभग ₹1,42,340 खर्च करने होंगे, जबकि भारत में उसी सोने की कीमत ₹1,49,130 है। यानी सीधे तौर पर प्रति 10 ग्राम पर आपकी ₹6,790 की बचत हो सकती है। यदि आप भारी मात्रा में या ज्वेलरी खरीदते हैं, तो मेकिंग चार्जेस और टैक्स रिफंड को मिलाकर यह बचत और भी बढ़ जाती है। हालांकि, कस्टम ड्यूटी के नियमों का ध्यान रखना भी जरूरी है।

चांदी के भाव: सरल भाषा में समझें

भारत में चांदी को ‘गरीबों का सोना’ कहा जाता है और इसकी मांग औद्योगिक कार्यों व निवेश दोनों में रहती है। आज भारतीय बाजार में चांदी की कीमत ₹250 प्रति ग्राम और ₹2,50,000 प्रति किलोग्राम है। चांदी के भाव में उतार-चढ़ाव सोने की तुलना में अधिक तेज होता है। आसान शब्दों में कहें तो अगर आप 100 ग्राम चांदी की छोटी ईंट या सिक्का लेते हैं, तो वह आपको आज ₹25,000 के आसपास पड़ेगी। निवेश के लिए चांदी एक अच्छा और सस्ता विकल्प मानी जाती है।



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BJP Foundation Day: भाजपा के पास अथाह संपत्ति,18 करोड़ सदस्य—फिर भी क्यों अधूरे हैं ये बड़े टारगेट? 10 फैक्ट्स


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oi-Pallavi Kumari

BJP Foundation Day 2026: भारतीय राजनीति की सबसे ताकतवर और सबसे बड़ी पार्टी भारतीय जनता पार्टी (BJP) आज अपना 47वां स्थापना दिवस मना रही है। 6 अप्रैल 1980 को अस्तित्व में आई इस पार्टी ने दो सीटों से शुरू होकर देश की सत्ता तक का सफर तय किया, लेकिन आज भी कुछ ऐसे राज्य और लक्ष्य हैं, जहां BJP की पकड़ पूरी तरह नहीं बन पाई है। यही इस कहानी का सबसे दिलचस्प पहलू है-सत्ता, संसाधन और संगठन के बावजूद कुछ ‘मिशन’ अब भी अधूरे हैं। आइए जानें 10 बड़े फैक्ट्स।

BJP Foundation Day 2026

1. दो सीटों से सत्ता के शिखर तक का सफर

आज भले ही BJP दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी होने का दावा करती हो, लेकिन 1984 के लोकसभा चुनाव में इसे सिर्फ 2 सीटें मिली थीं। उस समय गुजरात से ए.के. पटेल और आंध्र प्रदेश के हनमकोंडा से जंगा रेड्डी पार्टी के सांसद बने थे। इसके बाद पार्टी ने धीरे-धीरे अपने संगठन को मजबूत किया और 2014 में पहली बार अपने दम पर पूर्ण बहुमत हासिल किया।

इस सफर में अटल बिहारी वाजपेयी का योगदान अहम रहा, जिन्होंने 1999 से 2004 तक गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री के तौर पर पूरा कार्यकाल पूरा किया। वहीं नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में BJP ने लगातार तीसरी बार केंद्र की सत्ता संभाली है।

2. दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे अमीर पार्टी

सदस्यता के मामले में BJP ने चीनी कम्युनिस्ट पार्टी को भी पीछे छोड़ दिया है। पार्टी के 18 करोड़ से अधिक सदस्य बताए जाते हैं। आर्थिक रूप से भी BJP सबसे आगे है। चुनाव आयोग को दी गई रिपोर्ट के अनुसार, 31 मार्च 2024 तक पार्टी के पास ₹7,113.80 करोड़ का फंड बैलेंस था, जबकि मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस के पास ₹857.15 करोड़ ही थे। वित्त वर्ष 2024-25 में BJP की आय ₹6769 करोड़ तक पहुंच गई।

3. खर्च और फंडिंग का बड़ा खेल

लोकसभा चुनाव 2024 से पहले BJP ने अपने खर्च में बड़ा इजाफा किया। 2023-24 में पार्टी ने ₹1,754.06 करोड़ खर्च किए, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 60% ज्यादा है। इलेक्टोरल बॉन्ड्स (अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा बंद) के जरिए पार्टी को ₹1,685.69 करोड़ मिले। इसके अलावा अन्य स्रोतों से ₹2,042.75 करोड़ का योगदान भी मिला।

विज्ञापन पर ₹591 करोड़ खर्च किए गए, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर ₹434.84 करोड़ और प्रिंट पर ₹115.62 करोड़ शामिल हैं। वहीं हेलीकॉप्टर और विमान पर ₹174 करोड़ और उम्मीदवारों को वित्तीय मदद के तौर पर ₹191 करोड़ दिए गए।

4. BJP चुनाव चिन्ह का इतिहास

BJP को आज हिंदुत्व और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की राजनीति के लिए जाना जाता है, लेकिन 1980 में पार्टी ने ‘गांधीवादी समाजवाद’ को अपनी विचारधारा के रूप में अपनाया था। बाद में 1985 में ‘एकात्म मानववाद’ को इसका मूल दर्शन माना गया।

पार्टी का चुनाव चिन्ह ‘कमल’ है, जो भारत का राष्ट्रीय फूल भी है। इसका ऐतिहासिक महत्व 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ा है, जहां ‘रोटी और कमल’ प्रतीक के तौर पर इस्तेमाल हुए थे।

5. BJP की जड़ें 1951 में श्यामा प्रसाद मुखर्जी द्वारा स्थापित भारतीय जनसंघ में मिलती हैं। 1977 में आपातकाल के बाद जनसंघ का विलय जनता पार्टी में हुआ, लेकिन वैचारिक मतभेदों के चलते 1980 में BJP का गठन हुआ।

BJP Foundation Day 2026

6. किन राज्यों में अब भी अधूरा मिशन? (Where BJP Still Struggles)

भले ही आज देश के 21 राज्यों में BJP या NDA की सरकार हो, लेकिन कुछ बड़े राज्य अब भी पार्टी के लिए चुनौती बने हुए हैं। पश्चिम बंगाल, केरल और तेलंगाना जैसे राज्यों में BJP अब तक सरकार नहीं बना सकी है। वहीं तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में पार्टी को गठबंधन के सहारे ही सत्ता का हिस्सा बनना पड़ा है। यही वे टारगेट हैं, जिन्हें हासिल करना BJP के लिए अगली बड़ी चुनौती माना जा रहा है।

7. इन राज्यों में BJP का लंबा शासन

गुजरात में BJP पिछले 30 साल से सत्ता में है। 2022 के चुनाव में पार्टी ने रिकॉर्ड 156 सीटें जीतकर इतिहास रच दिया। मध्य प्रदेश में भी 20 साल से ज्यादा समय से पार्टी का दबदबा बना हुआ है (बीच में 15 महीने कांग्रेस सरकार को छोड़कर)। हरियाणा में BJP ने सत्ता विरोधी लहर के ट्रेंड को तोड़ते हुए लगातार तीसरी बार सरकार बनाई।
उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में 2017 से सरकार चल रही है।

8. आगे की चुनावी चुनौतियां (Upcoming Electoral Battles)

आने वाले समय में BJP के सामने कई बड़ी चुनावी चुनौतियां हैं। असम में हैट्रिक का लक्ष्य है, जबकि तमिलनाडु में AIADMK के साथ सत्ता में वापसी की कोशिश जारी है। पश्चिम बंगाल और केरल में पार्टी पहली बार सरकार बनाने की रणनीति पर काम कर रही है। यही वे राज्य हैं, जो BJP के ‘अधूरे टारगेट’ की सूची में सबसे ऊपर हैं।

9. मोदी का रिकॉर्ड और नेतृत्व

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक और बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम किया है। गुजरात के मुख्यमंत्री और भारत के प्रधानमंत्री के रूप में उनका कुल कार्यकाल सिक्किम के पूर्व मुख्यमंत्री पवन चामलिंग के 8930 दिनों के रिकॉर्ड से भी आगे निकल गया है। यह उन्हें देश के सबसे लंबे समय तक शासन करने वाले नेताओं में शामिल करता है।

10. ताकत के बावजूद अधूरी कहानी

47 साल में BJP ने जो मुकाम हासिल किया है, वह भारतीय राजनीति में अभूतपूर्व है। दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे अमीर पार्टी होने के बावजूद कुछ राज्य और राजनीतिक लक्ष्य अब भी इसके लिए चुनौती बने हुए हैं। यही वजह है कि BJP की कहानी सिर्फ सफलता की नहीं, बल्कि उन अधूरे लक्ष्यों की भी है, जिन्हें हासिल करना अब पार्टी की अगली बड़ी परीक्षा होगी।

BHARATIYA JANATA PARTY HISTORY: भारतीय जनता पार्टी का इतिहास?

🔹 आज की भारतीय जनता पार्टी की जड़ें 1951 में बनी भारतीय जनसंघ से जुड़ी हैं। श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने विभाजन, पाकिस्तान नीति और हिंदुओं की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर नेहरू सरकार का विरोध किया। इन्हीं मतभेदों के चलते उन्होंने कैबिनेट से इस्तीफा दिया और जनसंघ के गठन की दिशा में कदम बढ़ाया। 21 अक्टूबर 1951 को दिल्ली में जनसंघ का आधिकारिक गठन हुआ।

🔹 पहले आम चुनाव में जनसंघ को 3.06% वोट और 3 सीटें मिलीं। संसद में ‘नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट’ बनाया गया, जिसमें 38 सांसद शामिल थे। श्यामा प्रसाद मुखर्जी को देश का पहला अनौपचारिक विपक्ष नेता माना गया।

जम्मू-कश्मीर में अलग संविधान, अलग झंडा और अलग पीएम के खिलाफ जनसंघ ने आंदोलन किया। 1953 में बिना परमिट कश्मीर जाने पर डॉ. मुखर्जी को गिरफ्तार किया गया। 23 जून 1953 को हिरासत में उनकी मृत्यु हो गई, जिसे समर्थक ‘बलिदान’ मानते हैं।

🔹 दीनदयाल उपाध्याय ने ‘एकात्म मानववाद’ की विचारधारा दी। जनसंघ ने स्वदेशी, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और विकेंद्रीकरण की बात उठाई। 1950-60 के दशक में पार्टी लगातार अपने संगठन को मजबूत करती रही।

🔹 1959 में चीन के खिलाफ आवाज उठाई और तिब्बत की आजादी की मांग की। 1965 के भारत-पाक युद्ध में जनसंघ ने सरकार का समर्थन किया। ताशकंद समझौते का विरोध किया गया।

🔹 1967 में जनसंघ देश की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन गई। लोकसभा में 35 सीटें और राज्यों में 268 विधायक जीते। कई राज्यों में गैर-कांग्रेसी सरकारों में भागीदारी रही।

🔹 1968 में रहस्यमयी परिस्थितियों में दीनदयाल उपाध्याय की मृत्यु हो गई। इसके बाद अटल बिहारी वाजपेयी पार्टी अध्यक्ष बने। 1975 में आपातकाल लागू हुआ, RSS और विपक्षी नेताओं को जेल में डाला गया। जनसंघ और RSS कार्यकर्ताओं ने आंदोलन में बड़ी भूमिका निभाई।

🔹 1977 में जनसंघ, समाजवादी और अन्य दल मिलकर जनता पार्टी बने।चुनाव जीतकर सरकार बनी, लेकिन ‘डुअल मेंबरशिप’ विवाद के कारण पार्टी टूट गई। 6 अप्रैल 1980 को भारतीय जनता पार्टी का गठन हुआ। ‘पंच निष्ठा’ के आधार पर नई पार्टी की शुरुआत हुई।

🔹 इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए चुनाव में BJP को सिर्फ 2 सीटें मिलीं। यह पार्टी के लिए सबसे कठिन दौर था। बोफोर्स घोटाले और राम मंदिर आंदोलन के बाद BJP मजबूत हुई। 1989 में सीटें बढ़कर 86 हो गईं। लाल कृष्ण आडवाणी की रथ यात्रा को भारी समर्थन मिला।

🔹 अयोध्या आंदोलन BJP की राजनीति का बड़ा टर्निंग पॉइंट बना। 1991 में उत्तर प्रदेश में BJP सरकार बनी। 1996, 1998 और 1999 में BJP सबसे बड़ी पार्टी बनी।
अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने और NDA सरकार चलाई। 2004 में NDA चुनाव हार गया।

🔹 2014 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूर्ण बहुमत की सरकार बनी। ‘सबका साथ, सबका विकास’ नारे के साथ नई राजनीतिक दिशा मिली। पार्टी दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बन गई।



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Iran War: भारतीय ध्वज वाले एलपीजी टैंकर ग्रीन आशा ने होर्मुज किया पार, तनाव के बीच अब तक आठ जहाज आ चुके भारत


एलपीजी आपूर्ति के मोर्चे पर भारत के लिए एक सकारात्मक खबर सामने आई है। भारतीय ध्वज वाला जहाज ग्रीन आशा ईरान के समीप स्थित अहम समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को सफलतापूर्वक पार कर चुका है।

 

खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ने के बाद यह इस मार्ग से गुजरने वाला भारत का नौवां जहाज है। अमेरिका और इस्राइल के साथ बढ़े संघर्ष के बाद ईरान द्वारा इस जलडमरूमध्य को बंद किए जाने की खबरों के बीच यह ट्रांजिट खास महत्व रखता है।

होर्मुज क्यों है इतना अहम?

वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से होर्मुज जलडमरूमध्य बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि दुनिया के कुल पेट्रोलियम व्यापार का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। ऐसे में इस मार्ग पर किसी भी तरह का व्यवधान सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित करता है।

ग्रीन आशा से पहले आठ जहाज इस रास्ते से गुजर चुके हैं

रिपोर्ट्स के अनुसार, ग्रीन आशा एक एलपीजी टैंकर है और मौजूदा जोखिमों के बावजूद इसका सुरक्षित पार होना इस क्षेत्र पर भारत की लगातार निर्भरता को दर्शाता है। तनाव के चलते वैश्विक ईंधन आपूर्ति शृंखला पर दबाव बना हुआ है और ऊर्जा बाजार अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं। समुद्री आंकड़ों के मुताबिक, इस मार्ग से गुजरने वाले करीब 60 प्रतिशत जहाजों का संबंध ईरान से है या तो वे वहां से आते हैं या वहां के लिए जाते हैं। इन परिस्थितियों के बावजूद भारतीय जहाजों की आवाजाही बनी हुई है। ग्रीन आशा से पहले भी आठ भारतीय जहाज इस रास्ते से गुजर चुके हैं। इनमें एलपीजी वाहक बीडब्ल्यू टीवाईआर और बीडब्ल्यू ईएलएम शामिल हैं, जिन्होंने संघर्ष क्षेत्र से लगभग 94,000 टन कार्गो ढोया।



मार्च के अंत में पाइन गैस और जग वसंत समेत चार भारतीय एलपीजी टैंकरों ने तीन दिनों में 92,600 टन से अधिक एलपीजी की आपूर्ति की। वहीं, इससे पहले एमटी शिवालिक और एमटी नंदा देवी ने गुजरात के मुंद्रा और कांडला बंदरगाहों तक करीब 92,700 टन एलपीजी पहुंचाई थी।



अन्य शिपमेंट में कच्चे तेल और ईंधन का परिवहन भी शामिल रहा। तेल टैंकर जग लाडकी ने संयुक्त अरब अमीरात से मुंद्रा तक 80,000 टन से ज्यादा कच्चा तेल पहुंचाया, जबकि जग प्रकाश ओमान से अफ्रीकी बाजारों के लिए गैसोलीन लेकर इसी मार्ग से गुजरा।



इसके अलावा, एलपीजी टैंकर ग्रीन सानवी ने भी हाल ही में लगभग 46,650 मीट्रिक टन कार्गो के साथ अपनी यात्रा पूरी की, जो इस चुनौतीपूर्ण स्थिति में भारत की ऊर्जा आपूर्ति को बनाए रखने की कोशिशों को दर्शाता है।



(इनपुट आईएनएस से)







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Iran India Oil Trade: 7 साल बाद भारत-ईरान में ‘तेल के बदले चावल’ की डील, साल 2000 वाला फॉर्मूला होगा लागू?


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oi-Siddharth Purohit

Iran India Oil Trade: अगर आप साल 2000 की शुरुआत में जाते हैं, तो भारत और ईरान के बीच ट्रेड का एक अलग ही लेवल था। उस समय भारत ईरान से भारी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता था, और बदले में बासमती चावल एक्सपोर्ट करता था। यह सिस्टम खास इसलिए था क्योंकि भारत को सस्ता तेल मिल जाता था और ईरान को भी डॉलर की जरूरत कम पड़ती थी। दोनों देशों का ट्रेड बिना ज्यादा Global Pressure के आराम चलता रहता था।

2010-2018: अमेरिका की एंट्री और पूरा गेम बदल गया

अब यहां कहानी में बड़ा बदलाव आता है। जब अमेरिका ने ईरान पर सख्त sanctions लगाए, खासकर 2010 के बाद, तो भारत को भी अपने ट्रेड में कटौती करनी पड़ी। 2012-13 में भारत, ईरान का दूसरा सबसे बड़ा तेल खरीदार था, लेकिन 2018 में Donald Trump ने JCPOA डील से बाहर निकलकर फिर से sanctions लगा दिए। इसका सीधा इम्पेक्ट ये हुआ कि भारत का ईरान से तेल आयात लगभग शून्य हो गया और Oil-for-Rice सिस्टम धीरे-धीरे खत्म हो गया साथ ही चाबहार पोर्ट पर भी काम धीमा पड़ गया।

Iran India Oil Trade

2019-2023: जुगाड़ चलता रहा, लेकिन आधा-अधूरा

भारत ने पूरी तरह ईरान को छोड़ा नहीं, बल्कि एक बैलेंस डिप्लोमेसी खेली। जिसमें कुछ पेमेंट्स रुपए में UCO Bank के जरिए किए। इसके साथ ही चाबहार पोर्ट को स्ट्रेटजिक एसेट की तरह मेनटेन किया गया लेकिन ऑयल इम्पोर्ट बंद ही रहा। यानी दोस्ती बनी रही, लेकिन दूरी भी बनी रही।

2026: India ने फिर शुरू किया Iran से Oil Import

अब आते हैं मौजूदा वक्त पर- 7 साल बाद, भारत ने फिर से ईरान से तेल और LNG आयात शुरू कर दिया है और यहीं से कहानी एक और करवट लेती है। Oil-for-Rice सिस्टम की वापसी की चर्चा भी तेज होने लगती है। एक्सपोर्टर्स फिर से उत्साहित हो जाते हैं लेकिन सरकार अभी भी सतर्क रहकर काम करती रहती है। यह कदम इसलिए अहम है क्योंकि वैश्विक बाजार में तेल के दाम बुरी तरह अस्थिर हैं क्योंकि मिडिल ईस्ट में इस वक्त तनाव चरम पर है। वहीं हमें इस वक्त सस्ते दाम पर तेल की सख्त जरूरत है।

Iran India Oil Trade

रुपये में ट्रेड Dollar को Side करने की तैयारी?

एक्सपोर्टर्स ने सरकार से साफ कहा है कि डॉलर को छोड़ो, रुपए में डील करो। ये मॉडल कैसे काम करेगा वो भी समझ लेते हैं। जो मॉडल व्यापारियों ने बताया उसके मुताबिक पेमेंट UCO Bank के जरिए होगी। जिसमें भारत से चावल एक्सपोर्ट किया जाएगा और ईरान से तेल इम्पोर्ट किया जाएगा। इससे डॉलर पर भारत और भारतीय व्यापारी दोनों की निर्भरता कम होगी और डॉलर का दबदबा भी कमजोर पड़ेगा।

Iran India Oil Trade

इसका फायदा क्या है?

अगर भारत रुपए में ट्रेड करता है तो हमें Forex में अच्छी खासी बचत होगी जिसका डायरेक्ट फायदा किसानोंको होगा। साथ ही एक्सपोर्टर्स की डिमांड भी स्थिर रहेगी।

पूरी दुनिया चोक प्वॉइंट- Strait of Hormuz

अब दुनिया को किस बात की चिंता है उसको भी समझ लेते हैं। Strait of Hormuz दुनिया का सबसे critical oil route है। दुनिया के लगभग 20% तेल की सप्लाई यहीं से गुजरती है। यहां तनाव होने का मतलब है कि दुनियाभर में गैस और तेल के दाम आसमान छूना। कुछ देश इस महंगाई को कुछ वक्त के लिए टाल सकते हैं लेकिन ज्यादा नहीं। साथ ही इसे शिपिंग कॉस्ट बढ़ती है, इंश्योरेंस प्रीमियम बढ़ता है और एक्सपोर्ट भी डिले होता है।

अब सबसे बड़ा सवाल: अगर अमेरिका ने बंद की राहत?

यहीं से पूरा रिस्क फेक्टर शुरू होता है। अगर अमेरिका छूट नहीं बढ़ाता, तो भारत को दूसरे देशों से या अमेरिका से ही महंगा तेल खरीदना पड़ेगा। इसके अलावा बैंक भी डील करने से पीछे हटेंगे और पेमेंट सिस्टम भी collapse हो सकता है।

चाबहार पोर्ट: सिर्फ पोर्ट नहीं, गेम चेंजर है

चाबहार पोर्ट भारत के लिए सिर्फ एक पोर्ट नहीं है, बल्कि अफगानिस्तान और सेंट्रल एशिया तक सीधा रास्ता है, जिसमें पाकिस्तान को बायपास किया जा सकता है। ऐसे में अगर अमेरिका फिर से सेंक्शन लगा देता है तो भारत का प्रोजेक्ट (चावल-तेल डील) रुक सकता है, जो हमारे लिए बड़ा नुकसान होगा।

ईरान अमेरिका में बैलेंस बना पाएगा भारत?

अब जरा सोचिए, एक तरफ अमेरिका और दूसरी तरफ ईरान और इन दोनों के बीच में भारत बैलेंस बनाने की कोशिश कर रहा है। इसमें चुनौती ये है कि ईरान से तेल भी मिलता रहे और अमेरिका से भी संबंध न बिगड़ें, ताकि भारत की ग्लोबल इमेज सुरक्षित रहे।

आम आदमी पर क्या असर?

अगर अमेरिका फिर सेंक्शन लगाता है तो भारत में आम आदमी की बोझ पर काफी वजन पड़ेगा। अगर ईरान से तेल आता रहेगा तो तेल के दाम कंट्रोल में रहेंगे और अगर सेंक्शन लगे तो दाम बढ़ना भी लगभग तय है। अगर सेंक्शन नहीं लगे तो चावल ईरान को एक्सपोर्ट कर सकते हैं जिससे कमाई में इजाफा होगा और अगर सेंक्शन लगे तो ट्रेड रूट ही खतरे में आ सकता है। फिलहाल भारत सेफ गेम खेल रहा है, लेकिन ये देखना होगा कि अमेरिका सेंक्शन में कितनी छूट देता है।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।



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Assam Election: पाकिस्तान से चला नैरेटिव? असम CM हिमंता बिस्वा ने गौरव गोगोई के प्रेस कॉन्फ्रेंस पर उठाए सवाल


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oi-Puja Yadav

Assam Election 2026: असम विधानसभा चुनाव 2026 के मतदान से महज तीन दिन पहले राज्य की राजनीति में ‘पकिस्तान’ की एंट्री हो गई है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोमवार, 6 अप्रैल को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा और लोकसभा सांसद गौरव गोगोई पर सनसनीखेज आरोप लगाए हैं।

मुख्यमंत्री का दावा है कि कांग्रेस नेताओं द्वारा हाल ही में दी गई प्रेस कॉन्फ्रेंस की सामग्री (मटेरियल) एक पाकिस्तानी सोशल मीडिया ग्रुप द्वारा सप्लाई की गई थी। विस्तार से जानिए क्या है पूरा विवाद…

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11 पाकिस्तानी टॉक शो में कांग्रेस की जीत का नैरेटिव

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने गुवाहाटी में मीडिया से बात करते हुए कहा कि असम के चुनावों में पाकिस्तान की दिलचस्पी अचानक बढ़ गई है। उन्होंने रिसर्च का हवाला देते हुए दावा किया, पिछले 10 दिनों में पाकिस्तानी चैनलों पर असम चुनाव को लेकर कम से कम 11 टॉक शो हुए हैं, जो पहले कभी नहीं हुए।

हर टॉक शो का निष्कर्ष यही होता है कि असम में कांग्रेस को जीतना चाहिए। कल पवन खेड़ा और गौरव गोगोई ने दिल्ली और गुवाहाटी में जो प्रेस कॉन्फ्रेंस की, उसका पूरा कच्चा चिट्ठा एक पाकिस्तानी सोशल मीडिया ग्रुप से जुड़ा हुआ है।

CM बिस्वा ने कांग्रेस को दी जालसाजी और उम्रकैद की चेतावनी

मुख्यमंत्री ने विपक्षी नेताओं को कानूनी परिणामों की चेतावनी देते हुए कहा कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए जनता को गुमराह करना एक गंभीर अपराध है। उन्होंने कहा- फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आरोप लगाना आईपीसी की धारा 420 और 468 (अब नए न्याय संहिता प्रावधान) के तहत आता है। सीएम ने आगे कहा कि यदि चुनाव के परिणामों को प्रभावित करने के लिए मनगढ़ंत दस्तावेजों का उपयोग किया जाता है, तो इसमें उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है। मुझे पूरा भरोसा है कि कानून प्रवर्तन एजेंसियां इसका संज्ञान लेंगी।

रिंकी भुइयां सरमा ने दर्ज कराई FIR

यह पूरा विवाद पवन खेड़ा के उन आरोपों से शुरू हुआ जिसमें उन्होंने मुख्यमंत्री की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा पर कई पासपोर्ट रखने और विदेश (दुबई और अमेरिका) में अघोषित संपत्ति होने का दावा किया था। इन आरोपों के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा, मेरी पत्नी ने कल ही FIR दर्ज करा दी है। पुलिस उचित धाराओं में मामला दर्ज कर आवश्यक कार्रवाई करेगी। सीएम ने पहले ही साफ किया था कि पवन खेड़ा द्वारा दिखाया गया एक पासपोर्ट पूरी तरह फेक है और दुबई प्रशासन से भी इसकी पुष्टि हो चुकी है।

पाकिस्तानी लिंक पर कांग्रेस का पलटवार

दूसरी तरफ, पवन खेड़ा और गौरव गोगोई अपने आरोपों पर कायम हैं। खेड़ा का कहना है कि वे जल्द ही और सबूत पेश करेंगे और उन्होंने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि क्या उन्होंने अपने चुनावी हलफनामे में सभी संपत्तियों का खुलासा किया है?

गौरव गोगोई ने भी इन आरोपों की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है, जिससे राज्य में राजनीतिक टकराव चरम पर पहुंच गया है। बता दें कि असम की सभी 126 विधानसभा सीटों पर 9 अप्रैल को एक ही चरण में मतदान होना है। वोटों की गिनती 4 मई को होगी। चुनाव से ठीक पहले पाकिस्तानी लिंक और ‘फेक पासपोर्ट’ के इन आरोपों ने असम के चुनावी रण को बेहद दिलचस्प और संवेदनशील बना दिया है।



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PMI: देश के सेवा क्षेत्र की रफ्तार मार्च में धीमी; पीएमआई घटकर 57.5 पर पहुंचा, 14 महीनों में सबसे कमजोर वृद्धि


भारत के सेवा क्षेत्र की वृद्धि दर मार्च 2026 में कुछ धीमी पड़ गई है। एचएसबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, HSBC इंडिया सर्विसेज पीएमआई फरवरी के 58.1 से घटकर मार्च में 57.5 पर आ गया, जो पिछले 14 महीनों का सबसे धीमा विस्तार है। हालांकि, सूचकांक अब भी अपने दीर्घकालिक औसत 54.4 से ऊपर बना हुआ है, जो संकेत देता है कि सेवा क्षेत्र में कुल मिलाकर वृद्धि जारी है।

पीएमआई (Purchasing Managers’ Index) एक आर्थिक सूचकांक है, जो बताता है कि किसी देश के उद्योग या सेवा क्षेत्र की गतिविधियां बढ़ रही हैं या घट रही हैं। इसे कंपनियों के खरीद प्रबंधकों (Purchasing Managers) से सर्वे के जरिए तैयार किया जाता है।

कैसे समझें?


  • 50 से ऊपर- आर्थिक गतिविधि बढ़ रही है 

  • 50 से नीचे- गतिविधि घट रही है

  • 50 के आसपास- स्थिर स्थिति

क्या है ये सुस्ती की वजह?

रिपोर्ट के मुताबिक, सेवा क्षेत्र की इस सुस्ती की प्रमुख वजह नए कारोबार की रफ्तार में कमी रही। मार्च में नए ऑर्डर जनवरी 2025 के बाद सबसे धीमी गति से बढ़े, जिसका असर उत्पादन पर भी पड़ा। वित्त, रियल एस्टेट और परिवहन जैसे प्रमुख क्षेत्रों में मांग अपेक्षाकृत कमजोर रही।

हालांकि, निर्यात मांग ने राहत दी। रिपोर्ट में कहा गया कि विदेशी ऑर्डर लगभग रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गए, जिनमें अफ्रीका, एशिया, यूरोप और अमेरिका से मजबूत मांग देखने को मिली।

सर्वे में शामिल कंपनियों ने बताया कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का नकारात्मक असर बाजार स्थितियों, मांग और पर्यटन गतिविधियों पर पड़ा, जिससे कुल कारोबारी माहौल प्रभावित हुआ।

निर्यात आधारित मांग से सेक्टर को सहारा मिला

एचएसबीसी के अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने कहा कि मार्च में सेवा क्षेत्र विस्तार में बना रहा, लेकिन लगातार दूसरे महीने वृद्धि की रफ्तार कमजोर हुई। उन्होंने बताया कि निर्यात आधारित मांग मजबूत रही, जिससे सेक्टर को सहारा मिला।

महंगाई को लेकर चिंता

रिपोर्ट में महंगाई के दबाव को लेकर भी चिंता जताई गई है। इनपुट लागत लगभग चार वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई, जिसका कारण ईंधन, परिवहन और खाद्य कीमतों में बढ़ोतरी है।



इसके बावजूद, कंपनियों का भविष्य को लेकर भरोसा मजबूत बना हुआ है। करीब 12 वर्षों में पहली बार कारोबारियों ने उत्पादन को लेकर इतनी सकारात्मक उम्मीद जताई है, जो आने वाले समय में मांग और बाजार परिस्थितियों में सुधार की उम्मीद पर आधारित है।



कुल मिलाकर, मार्च के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि सेवा क्षेत्र में विस्तार जारी है, लेकिन वृद्धि की रफ्तार धीमी पड़ रही है और महंगाई का दबाव बढ़ रहा है, जो आगे के महीनों में चुनौती बन सकता है।


 



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BJP का 47वां स्थापना दिवस, शाह बोले-नेशन फर्स्ट हमारा मूलमंत्र: CM योगी ने झंडे के साथ सेल्फी ली; MP में 17 नए कार्यालयों का भूमिपूजन


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नई दिल्ली58 मिनट पहले

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भारत की सबसे बड़ी राजनैतिक पार्टी BJP आज 2026 में अपना 47वां स्थापना दिवस मना रही है। स्थापना दिवस को लेकर देशभर में BJP कार्यालयों में कई कार्यक्रम हो रहे हैं। उत्तर प्रदेश में CM योगी आदित्य नाथ ने पार्टी के झंडे के साथ सेल्फी ली। मध्य प्रदेश में आज 17 नए कार्यालयों का भूमिपूजन किया जा रहा है।

पीएम मोदी ने कार्यकर्ताओं को X पर एक पोस्ट में बधाई देते हुए लिखा- BJP एक विकसित भारत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा सामूहिक संकल्प इस विज़न को आगे बढ़ाता रहे और भारत को तरक्की और समृद्धि की नई ऊंचाइयों पर ले जाए।

अमित शाह ने लिखा- भाजपा का मूल मंत्र हमेशा स्पष्ट रहा है, नेशनल फर्स्ट, पार्टी नेक्स्ट, सेल्फ लास्ट। इसी मूल भावना के साथ भाजपा का हर कार्यकर्ता दिन-रात राष्ट्र-सेवा में समर्पित है।

भाजपा की स्थापना 6 अप्रैल 1980 को हुई थी। लेकिन इसकी नींव 1951 में बने भारतीय जनसंघ के दौरान पड़ी। इसकी स्थापना श्यामा प्रसाद मुखर्जी और दीनदयाल उपाध्याय ने की थी।

1975–77 में इमरजेंसी के बाद जनसंघ समेत कई दल मिलकर जनता पार्टी में शामिल हुए, लेकिन मतभेदों के कारण 1980 में अलग हो गए। इसके बाद भाजपा का गठन हुआ।

स्थापना के बाद से BJP के दो प्रधानमंत्री रहे हैं- नरेंद्र मोदी और अटल बिहारी वाजपेयी। 1996, 1998 और 1999 के लोकसभा चुनावों में, पार्टी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी। 2019 के लोकसभा चुनाव में, पार्टी ने 303 सीटें जीतीं, जो पार्टी के इतिहास में सबसे ज्यादा हैं।

अमित शाह ने केरल में चुनाव प्रचार के दौरान तिरुवनंतपुरम पार्टी ऑफिस में स्थापना दिवस कार्यक्रम में हिस्सा लिया।

अमित शाह ने केरल में चुनाव प्रचार के दौरान तिरुवनंतपुरम पार्टी ऑफिस में स्थापना दिवस कार्यक्रम में हिस्सा लिया।

स्थापना दिवस पर पार्टी के नेताओं ने क्या कहा

अमित शाह- भाजपा ने लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करने के साथ देश को तुष्टीकरण से मुक्त, सुशासन, पारदर्शिता को स्थापित करने का कार्य किया है। आज भाजपा केवल एक पार्टी नहीं, बल्कि 140 करोड़ देशवासियों के सपनों और आकांक्षाओं की प्रतिनिधि बन चुकी है।

राज्यों में भारतीय जनता पार्टी स्थापना दिवस की खबरें…

उत्तर प्रदेश: BJP के झंडे के साथ CM योगी ने ली सेल्फी

whatsapp image 2026 04 06 at 103008 am 21775452105 1775453785

CM योगी ने गोरखपुर में गोरखनाथ मंदिर परिसर के हिंदू सेवाश्रम भवन पर भाजपा का झंडा फहराया। इसके बाद भाजपा के झंडे के साथ सेल्फी ली। उन्होंने कहा- भाजपा की विकास यात्रा सत्ता की नहीं, संस्कार की है। विस्तार की नहीं, विचार की है। ‘अंत्योदय से राष्ट्रोदय’ के संकल्प की सिद्धि की है। पढ़ें पूरी खबर…

मध्य प्रदेश: 17 जिलों में भाजपा कार्यालयों का भूमिपूजन होगा

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स्थापना दिवस का मुख्य आयोजन भोपाल में हो रहा है, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल यहां से वर्चुअली सभी जिलों के कार्यक्रम से जुड़ेंगे। प्रदेश के 17 जिलों में BJP जिला कार्यालयों का भूमिपूजन होगा। इन जिलों में जमीन पहले ही खरीदी जा चुकी है। अब यहां जिला कार्यालयों का निर्माण कार्य आज से औपचारिक तौर पर शुरू होगा। पढ़ें पूरी खबर…

राजस्थान: CM भजनलाल बोले-पार्टी को अजेय बनाना है

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सीएम भजनलाल शर्मा ने प्रदेश बीजेपी कार्यालय और अपने निजी आवास पर पार्टी का झंडा फहराया। इस दौरान उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील करते हुए कहा कि हमारा लक्ष्य पार्टी को अजेय बनाने का है। स्थापना दिवस पर CM भजनलाल को पार्टी ऑफिस में नया कमरा मिला। कार्यालय में कमरा नं.-5 अब से मुख्यमंत्री के लिए रिर्जव रहेगा। इसके बाहर सीएम भजनलाल शर्मा की नेम प्लेट भी लगाई गई है। पढ़ें पूरी खबर…

छत्तीसगढ़: CM साय करेंगे प्रदेश कार्यालय में ध्वजारोहण, सप्ताहभर चलेंगे कार्यक्रम

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राजधानी रायपुर में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय भाजपा प्रदेश कार्यालय कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में सुबह 11 बजे ध्वजारोहण किया। शाम 5 बजे एकात्म परिसर में कार्यकर्ता सम्मेलन रखा गया है, जिसमें मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे। पढ़ें पूरी खबर…

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BJP का 47वां स्थापना दिवस, शाह बोले-नेशन फर्स्ट हमारा मूलमंत्र: CM योगी ने झंडे के साथ सेल्फी ली; MP में 17 नए कार्यालयों का भूमिपूजन


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नई दिल्ली4 मिनट पहले

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भारत की सबसे बड़ी राजनैतिक पार्टी BJP आज 2026 में अपना 47वां स्थापना दिवस मना रही है। स्थापना दिवस को लेकर देशभर में BJP कार्यालयों में कई कार्यक्रम हो रहे हैं। उत्तर प्रदेश में CM योगी आदित्य नाथ ने पार्टी के झंडे के साथ सेल्फी ली। मध्य प्रदेश में आज 17 नए कार्यालयों का भूमिपूजन किया जा रहा है।

पीएम मोदी ने कार्यकर्ताओं को X पर एक पोस्ट में बधाई देते हुए लिखा- BJP एक विकसित भारत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा सामूहिक संकल्प इस विज़न को आगे बढ़ाता रहे और भारत को तरक्की और समृद्धि की नई ऊंचाइयों पर ले जाए।

अमित शाह ने लिखा- भाजपा का मूल मंत्र हमेशा स्पष्ट रहा है, नेशनल फर्स्ट, पार्टी नेक्स्ट, सेल्फ लास्ट। इसी मूल भावना के साथ भाजपा का हर कार्यकर्ता दिन-रात राष्ट्र-सेवा में समर्पित है।

भाजपा की स्थापना 6 अप्रैल 1980 को हुई थी। लेकिन इसकी नींव 1951 में बने भारतीय जनसंघ के दौरान पड़ी। इसकी स्थापना श्यामा प्रसाद मुखर्जी और दीनदयाल उपाध्याय ने की थी।

1975–77 में इमरजेंसी के बाद जनसंघ समेत कई दल मिलकर जनता पार्टी में शामिल हुए, लेकिन मतभेदों के कारण 1980 में अलग हो गए। इसके बाद भाजपा का गठन हुआ।

स्थापना के बाद से BJP के दो प्रधानमंत्री रहे हैं- नरेंद्र मोदी और अटल बिहारी वाजपेयी। 1996, 1998 और 1999 के लोकसभा चुनावों में, पार्टी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी। 2019 के लोकसभा चुनाव में, पार्टी ने 303 सीटें जीतीं, जो पार्टी के इतिहास में सबसे ज्यादा हैं।

अमित शाह ने केरल में चुनाव प्रचार के दौरान तिरुवनंतपुरम पार्टी ऑफिस में स्थापना दिवस कार्यक्रम में हिस्सा लिया।

अमित शाह ने केरल में चुनाव प्रचार के दौरान तिरुवनंतपुरम पार्टी ऑफिस में स्थापना दिवस कार्यक्रम में हिस्सा लिया।

स्थापना दिवस पर पार्टी के नेताओं ने क्या कहा

अमित शाह- भाजपा ने लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करने के साथ देश को तुष्टीकरण से मुक्त, सुशासन, पारदर्शिता को स्थापित करने का कार्य किया है। आज भाजपा केवल एक पार्टी नहीं, बल्कि 140 करोड़ देशवासियों के सपनों और आकांक्षाओं की प्रतिनिधि बन चुकी है।

राज्यों में भारतीय जनता पार्टी स्थापना दिवस की खबरें…

उत्तर प्रदेश: BJP के झंडे के साथ CM योगी ने ली सेल्फी

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CM योगी ने गोरखपुर में गोरखनाथ मंदिर परिसर के हिंदू सेवाश्रम भवन पर भाजपा का झंडा फहराया। इसके बाद भाजपा के झंडे के साथ सेल्फी ली। उन्होंने कहा- भाजपा की विकास यात्रा सत्ता की नहीं, संस्कार की है। विस्तार की नहीं, विचार की है। ‘अंत्योदय से राष्ट्रोदय’ के संकल्प की सिद्धि की है। पढ़ें पूरी खबर…

मध्य प्रदेश: 17 जिलों में भाजपा कार्यालयों का भूमिपूजन होगा

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स्थापना दिवस का मुख्य आयोजन भोपाल में हो रहा है, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल यहां से वर्चुअली सभी जिलों के कार्यक्रम से जुड़ेंगे। प्रदेश के 17 जिलों में BJP जिला कार्यालयों का भूमिपूजन होगा। इन जिलों में जमीन पहले ही खरीदी जा चुकी है। अब यहां जिला कार्यालयों का निर्माण कार्य आज से औपचारिक तौर पर शुरू होगा। पढ़ें पूरी खबर…

राजस्थान: CM भजनलाल बोले-पार्टी को अजेय बनाना है

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सीएम भजनलाल शर्मा ने प्रदेश बीजेपी कार्यालय और अपने निजी आवास पर पार्टी का झंडा फहराया। इस दौरान उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील करते हुए कहा कि हमारा लक्ष्य पार्टी को अजेय बनाने का है। स्थापना दिवस पर CM भजनलाल को पार्टी ऑफिस में नया कमरा मिला। कार्यालय में कमरा नं.-5 अब से मुख्यमंत्री के लिए रिर्जव रहेगा। इसके बाहर सीएम भजनलाल शर्मा की नेम प्लेट भी लगाई गई है। पढ़ें पूरी खबर…

छत्तीसगढ़: CM साय करेंगे प्रदेश कार्यालय में ध्वजारोहण, सप्ताहभर चलेंगे कार्यक्रम

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राजधानी रायपुर में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय भाजपा प्रदेश कार्यालय कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में सुबह 11 बजे ध्वजारोहण किया। शाम 5 बजे एकात्म परिसर में कार्यकर्ता सम्मेलन रखा गया है, जिसमें मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे। पढ़ें पूरी खबर…

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Kospi Index Gains Extend: ‘ईरान से युद्ध खत्म करने जा रहे हैं ट्रंप’, क्या है कोस्पी इंडेक्स जिसमें आई तेजी?


Business

oi-Ankur Sharma

Kospi Index Gains Extend: अमेरिका और ईरान द्वारा अपने संघर्ष को खत्म करने की बात करने के बाद एशिया-प्रशांत के इक्विटी बाज़ारों में आज ज़बरदस्त तेज़ी देखने को मिली। बाज़ार खुलने पर ‘सर्किट ब्रेकर’ लगने के बाद भी, KOSPI में बढ़त जारी है जिससे निवेशकों के चेहरे पर मुस्कान देखी जा रही है। Samsung Electronics में 10% की तेज़ी आई, जबकि मेमोरी चिप्स की अग्रणी कंपनी SK Hynix में भी साथ ही 9.5% की उछाल दर्ज की गई।

आपको बता दें कि KOSPI Index (Korea Composite Stock Price Index) दक्षिण कोरिया का प्रमुख शेयर बाजार सूचकांक है। यह देश की सबसे बड़ी और प्रमुख कंपनियों के शेयरों के प्रदर्शन को दर्शाता है।

Kospi Index Gains Extend

यह सूचकांक Korea Exchange (KRX) द्वारा संचालित किया जाता है, जिसमें दक्षिण कोरिया की बड़ी कंपनियां जैसे Samsung Electronics, Hyundai Motor Company और LG Corporation शामिल हैं।

Kospi Index बना रॉकेट, बाजार गुलजार

युद्द का असर इन कंपनियों के निर्यात पर पड़ा है इसलिए ही जैसे ही युद्ध के खत्म होने का जिक्र हुआ, बाजार में तेजी देखी जा रही है। KOSPI 1983 में 4 जनवरी 1980 की तारीख़ के आधार पर 100 के बेस वैल्यू के साथ ओपन किया गया था, इसकी गणना मार्केट कैपिटलाइज़ेशन के आधार पर की जाती है।

क्या कहा डोनाल्ड ट्रंप ने?

अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ युद्ध अगले 2 से 3 सप्ताह के अंदर खत्म हो सकता है। मीडिया से बातचीत में राष्ट्रपति ने कहा किअ मेरिका ईरान में अपने सैनिक लक्ष्य ‘बहुत जल्द, बहुत ही जल्द” हासिल करने की राह पर है। अगले दो से तीन हफ़्तों में, हम उन्हें पाषाण युग में वापस भेज देंगे, जहां वे असल में हैं।’

US पहले ही जंग जीत चुका है: डोनाल्ड ट्रंप

गौरतलब है कि ट्रंप ने 28 फरवरी को अपने ऑपरेशन की शुरुआत की घोषणा में कहा कि यह ‘हमारे मकसद को पाने के लिए जब तक ज़रूरी होगा’ तब तक चलेगा US पहले ही जंग जीत चुका है और मिलिट्री कैंपेन कई हफ़्तों तक चलेगा।



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Silver Rate Today: चांदी फिर हुई सस्ती, एक ही दिन में 2800 गिरे दाम, 10 ग्राम से 100 ग्राम तक अब ये है नया रेट


🔹दिल्ली ₹2,500 (10 ग्राम) | ₹25,000 (100 ग्राम) | ₹2,50,000 (एक किलो) 🔹मुंबई ₹2,500 | ₹25,000 | ₹2,50,000 🔹कोलकाता ₹2,500 | ₹25,000 | ₹2,50,000 🔹चेन्नई ₹2,550 | ₹25,500 | ₹2,55,000 🔹पटना ₹2,500 | ₹25,000 | ₹2,50,000 🔹लखनऊ ₹2,500 | ₹25,000 | ₹2,50,000 🔹मेरठ ₹2,500 | ₹25,000 | ₹2,50,000 🔹कानपुर ₹2,500 | ₹25,000 | ₹2,50,000 🔹अयोध्या ₹2,500 | ₹25,000 | ₹2,50,000 🔹गाजियाबाद ₹2,500 | ₹25,000 | ₹2,50,000 🔹नोएडा ₹2,500 | ₹25,000 | ₹2,50,000 🔹गुरुग्राम ₹2,500 | ₹25,000 | ₹2,50,000 🔹चंडीगढ़ ₹2,500 | ₹25,000 | ₹2,50,000 🔹जयपुर ₹2,500 | ₹25,000 | ₹2,50,000 🔹लुधियाना ₹2,500 | ₹25,000 | ₹2,50,000 🔹गुवाहाटी ₹2,500 | ₹25,000 | ₹2,50,000 🔹इंदौर ₹2,500 | ₹25,000 | ₹2,50,000 🔹अहमदाबाद ₹2,500 | ₹25,000 | ₹2,50,000 🔹वडोदरा ₹2,500 | ₹25,000 | ₹2,50,000 🔹सूरत ₹2,500 | ₹25,000 | ₹2,50,000 🔹नागपुर ₹2,500 | ₹25,000 | ₹2,50,000 🔹पुणे ₹2,500 | ₹25,000 | ₹2,50,000 🔹नासिक ₹2,500 | ₹25,000 | ₹2,50,000 🔹बेंगलुरु ₹2,500 | ₹25,000 | ₹2,50,000 🔹भुवनेश्वर ₹2,550 | ₹25,500 | ₹2,55,000 🔹केरल ₹2,550 | ₹25,500 | ₹2,55,000 🔹रायपुर ₹2,500 | ₹25,000 | ₹2,50,000 🔹हैदराबाद ₹2,550 | ₹25,500 | ₹2,55,000 🔹कटक ₹2,550 | ₹25,500 | ₹2,55,000



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